आज दिनांक 7 मार्च को हरिद्वार पतंजली योगपीठ में यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास, यमुना रक्षक दल के संरक्षक स्वामी स्वतन्त्रतानन्द सरस्वती एवं स्वामी नारायण बाबा ने योगगुरु स्वामी रामदेव बाबा से मिलकर उन्हे वर्तमान यमुना की दुर्दशा के बारे में अवगत कराया। साथ ही उनसे 11 मार्च से होने वाले विशाल आन्दोलन के लिये चर्चा की। योग गुरू ने कहा कि मैं यमुना की वर्तमान स्थिति से व्यथित हूँ। आज दूषित जल के कारण लाखों लोग बीमारियों की चपेट में आ रहें। लाखों-करोड़ों लोग की आस्था पर प्रभाव पड़ा है। आज जरूरत है सम्पूर्ण भारतवासी को नदियों के लिये एकजुट हों। उन्होने कहा कि मैं माँ भगवती के परम उपासक आचार्य प्रवर स्वामी ए.एस. विज्ञानाचार्य जी के सकुशल नेतृत्व में यमुना रक्षक दल द्वारा चलाये जा रहे ‘‘यमुना लाओ-जीवन बचाओ‘‘ की पदयात्रा में मैं और मेरे समस्त कार्यकर्ता भाग अवश्य लेंगे और सरकार से निवेदन करेंगे कि वह यमुना के स्वरूप को स्वच्छ करने के लिये शीघ्र ही उचित निर्णय ले। आज पर्यावरण शुद्धि के लिये सरकारों द्वारा अनेक प्रकल्प किये जा रहे हैं किन्तु जब तक हमारी मिथक धरोहरों पर ध्यख नहीं दिया जायेगा उनके रखरखाव की उचित व्यवस्था नहीं की जायेगी तब तक ये कार्यक्रम कागजों तक ही सीमित रह जायेंगे। प्राकृतिक शुद्ध जल के अभाव में प्राणी मात्र का जीवन अस्वस्थ एवं अव्यवस्थित हो जायेगा। यमुना रक्षक दल के इस आन्दोलन की सराहना करते हुये उन्होने कहा कि मैं इस आन्दोलन से काफी प्रभावित हूँ, इस आन्दोलन के लिये मेरा पूर्ण रूप से समर्थन है और आगे भी मेरा और यमुना रक्षक दल का साथ रहेगा। संत जयकृष्ण दास ने कहा कि हम सरकार से अपील करते हैं कि सरकार ने जो गंगा मन्त्रालय बना रखा है, उसके साथ यमुना का भी नाम जोड़ा जाये। गंगा-यमुना का नाम सदा एक साथ लिया जाता है। सरकार को ‘‘गंगा-यमुना सफाई मन्त्रालय‘‘ बनाना चाहिये। सरकार इसकी घोषणा करें और गंगा के साथ यमुना की भी सफाई एंव अविरलता शीघ्र होनी चाहिये। पुर्तगाल ( यूरोप ) के अन्तराष्ट्रीय संत मूजी महाराज से मिला यमुना रक्षक दल का शिष्टमण्डल यमुना की पुकार देश से लेकर विदेशों में भी पहुँच चुकी है। यमुना की पीड़ा सबकी पीड़ा है। ऋषीकेश में यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास एवं यमुना रक्षक दल के संरक्षक स्वामी स्वतन्त्रतानन्द सरस्वती से पुर्तगाली ( यूरोप ) निवासी अन्तराष्ट्रीय संत एवं गीता एंव वेदान्त प्रचारक मूजी महाराज ने भेंट की। यह दक्षिण भारत के रमण महिर्षि के शिष्य हैं। ऋषीकेश में स्वतन्त्रतानन्द आश्रम में इनके साथ काफी देर तक बैठक चली जिसमें यमुना के विषय पर गंभीर रूप से चर्चा की गई। प्रदूषित यमुना की व्यथा सुनकर मूजी महाराज के आंखों में आँसू आ गये। उन्होने कहा कि यमुना जैसी नदी का प्रदूषित होना चिंता का विषय है। भारत सरकार को यमुना पर विशेष ध्यान देना चाहिये। मूजी महाराज ने गोविन्द मठ वृन्दावन के परमाध्यक्ष आचार्य प्रवर स्वामी ए.एस. विज्ञानाचार्य जी के नेतृत्व में यमुना रक्षक दल का तन-मन-धन से समर्थन देते हुये कहा कि हम पूरी तरह से इस आन्दोलन के साथ हैं हम और हमारे हजारों विदेशी भक्त आपके 12 मार्च के पदयात्रा में अवश्य भाग लेंगे। उन्होने कहा कि हम सोशल मीडिया, इण्टरनेट के माध्यम से भी यमुना का प्रचार-प्रसार करेंगे। उन्होने कहा कि यमुना- गंगा प्रदूषण मुक्त हों, नालों को यमुना में गिरने से रोका जाये और पर्यावरण की रक्षा हो।
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