मथुरा। काष्र्णि गुरू शरणानन्द के आशीर्वाद से आनन्द कुँज ए-2 पुराने ए0आर0टी0ओ0 के पास एन0एच0-2 पर आयोजित हुई श्रीमद्भागवत कथा में मध्ुर स्वर लहरियों के साथ अपनी अमृतवाणीयों की आभा बिखेरते हुए व्यास संत श्यामशरण ;बालकृष्णदास वृन्दावन धम ने श्रीमद्भागवत के महात्म की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘‘भाग्योदयेन बहुजन सर्मजतेन-सतसंगम्म च लवते पुरषोयदावयी’’ अर्थात मनुष्य एक जन्म के पुण्य से कथा श्रवण का अध्किारी नहीं बनता। यह तो बहुजन्मों के पुण्य एकत्रा होने के पश्चात ही सम्भव हो पाता है। उन्होंने कथा श्रवण करने की विध् िएवं नियमों पर भी विस्तृत दृष्टिपात् कराया। मुख्य यजमान श्रीमती विनीता-जी0पी0निगम एड0 ने श्रीमद्भागवत ग्रन्थ का पूजन व आरती कर प्रसाद वितरित करते हुए बताया कि ऊहापोहों में सराबोर होकर मानव घोर कष्टों का सामना कर रहा है। इससे प्रभु स्मरण व उनके गुणगान से ही मुक्ति पायी जा सकती है। अध्किाध्कि भक्तजन इस ज्ञान-यज्ञ से लाभान्वित होकर सुखी हों इसी अभिलाषा के साथ भागवत कथा आयोजित की गयी है। परब्रह्म परमेश्वर सभी का कल्याण करे तब ही पुण्य लाभ की सार्थकता परलक्षित हो सकेगी। श्रीमती दीपांशी-गौरव निगम ने कथा-स्थल पर उपस्थितों का चंदन का टीका लगाकर व पटुका पहिना पुष्प वर्षा कर सभी का स्वागत किया। भागवत कथा को सरस व कर्णप्रिय बनाने में गायक गोपाल भईया जी, की-बोर्ड पर दिनेश कुमार, आॅक्टोपैड पर नीरज कुमार, नाल पर श्यामसुन्दर का योगदान सराहनीय रहा। यज्ञाचार्य विनय कृष्ण शास्त्राी ने समस्त धर्मिक औपचारिकताऐं विध्-िविधन से सम्पन्न करायीं। इस अवसर पर सुरेन्द्र सक्सैना, घनश्याम हरियाना, वी0के0 मिलिंद, श्याम बाबू सक्सैना, विजय सक्सैना, ठा0 बिजेन्द्र सिंह, ज्योति सक्सैना, अनुरोध शर्मा, अंजू निगम, सीमा माथुर, चित्रा सक्सैना, ममता कुलश्रेष्ठ, विभा निगम, कल्पना सारस्वत, सीमा सिंह, मीरा अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
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