मथुरा

राजनैतिक सरगर्मी हुई तेज, कांग्रेस सहित अन्य दलों ने किया आन्दोलन का समर्थन   मथुरा। गोकुल बैराज निर्माण में अधिग्रहण की गई भूमि को लेकर किसानों को मुआवजा नहीं मिलनें के विरोध में पिछलें दिनों किसानों व प्रशासन के बीच हुई घटना को लेकर अभी भी राजनैतिक सरगर्मी निरन्तर बनी हुई हैं। भारतीय जनता पार्टी सहित विभिन्न किसान संगठन जहाॅ किसानों आन्दोलन के समर्थन में आ गये है वहीं प्रशासन ने शान्ति व्यवस्था बनाये रखनें के साथ किसानों को मुआवजा दिलाये जाने हेतु गतिशील प्रयास शुरू कर दिये हैं। आज भी किसानों द्वारा चलाये जा रहें आन्दोलन को लेकर विभिन्न संगठनों ने किसानों की माॅगों का समर्थन किया वहीं काग्रेंस विधान मंडल दल के नेता प्रदीप माथुर ने भी सहयोगियों के साथ धरना स्थल पर पहुंच कर किसानों से वार्ता कर भारतीय जनता पार्टी के बहकावें में ना आने का आव्हान किया। इसी क्रम में भारतीय किसान यूनियन की एक बैठक किसान भवन में हुई। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव राजपाल शर्मा ने कहा कि 16 वर्ष पूर्व प्रशासन ने गोकुल वैराज के बनने हेतु कृषि योग्य भूमि अधिग्रहण डूब क्षेत्र में करते हुए मुआवजें का प्रस्ताव किया था और किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलनें के लिए प्रशासन ही मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। मुआवजा नहीं मिलनें के चलते किसानों के परिवारों की दशा खराब है घरों बच्चों के शादी विवाह तक नहीं हो पा रहे है और न वह अपने बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पूरी नहीं कर पा रही हैं। किसानों में इसे लेकर आक्रोश पैदा हो रहा हैं। किसानों द्वारा शासन प्रशासन से वार वार मुआवजें की माॅग करने पर आश्वासन तो मिलें लेकिन मुआवजा आज तक नहीं मिल सका। इसी के चलते किसानों का आक्रोश आज सडक पर आ गया। उन्होंने कहा कि अगर शासन प्रशासन ने पूर्व में ही किसानों की आवाज को समझा होता तो उक्त घटना को रोका जा सकता था। प्रदेश सचिव चन्द्रपाल सिंह ने प्रशासन द्वारा किसानों के साथ किए गये व्यवहार की बर्बर निन्दा की तथा शासन से घटना की न्यायिक जाॅच की माॅग की। जिलाध्यक्ष बुद्धा सिंह, गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय सचिव बालस्वरूप एड0, भाकियू के मंडलीय उपाध्यक्ष चैं0 दलवीर सिंह, इन्द्र कुमार पालीवाल, पूरन सिंह, किसान शिव नरेश, हरेकृष्ण सैनी, मोहन सिंह राजपूत, रूपसिंह सैनी, सीपी ठाकुर व दलवीर सिंह ने किसानों के साथ प्रशासन द्वरारा एक पक्षीय कार्यवाही की निन्दा करते हुए निर्दोश किसानों की रिहाई की माॅग करते हुए शीघ्र मुआवजा वितरण कराये जाने की माॅग की। बैठक के पश्चात किसानों की माॅगों को लेकर प्रदेश के राज्यपाल के नाम ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता गिर्राज प्रसाद विशिष्ठ ने की। वहीं भारतीय किसान यूनियन हरपालगुट के वैनर तलें दामोदर पुरा के होली मैदान में दिया जा रहा धरना आज भी जारी रहा। धरने को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष चैं0 हरपाल सिंह ने कहा कि दामोदर पुरा आदि आठ ग्रामों की भूमि का गोकुल वैराज में गये रकवें का बड़ी ही दरों का भूमि मुआवजा 1998 से आज तक नहीं देने तथा इसके हकदार परिजनों को रोजगार नहीं देने की माॅग को लेकर धरना प्रदर्शन करने पर प्रशासन द्वारा किसानों पर लाठिया व गोलिया वर्षा कर मथुरा में कसं के शासन की याद दिलाता हैं। उन्होंने कहा कि बिल्डर्स अगर किसानों की जमीन का अधिग्रहण केवल पैसे के बल पर करता है लेकिन सरकार डन्डें व गोली के बल पर किसानों को उसका वास्तविक मुआवजा देने से कतरा रही हैं। इससे जनता में आक्रोश हैं। उन्होंने कहा कि पिछलें दिनों हुई घटना को लेकर वोटों की राजनीति करने वाले सौदागर किसानों के ऊपर अपनी रोटी सेकना चाहते है उन्होंने पूछा इससे पहलें पहलें यह वोट माॅगनें वालें लोगों को किसानों की यह माॅग क्यों नजार नहीं आई। धरने को किसान नेता राध चैबे, नारायण सिंह, सुरेन्द्र सिंह, डम्बर सिंह, ठाकुर जुगल किशोर निषाद, सुन्दर सिंह, प्रेमचन्द्र चैहान, पीएस निषाद, हेमन्त कुमार, जगन्नाथ छौंकर, प्रीतम वघेल, मानसिंह यादव आदि ने सम्बोधित कर प्रदेश सरकार से मुआवजें दिलाये जाने की माॅग की। अखिल भारतीय समता फाउंडेशन ने गोकुल बैराज मुआवजा प्रकरण पर कथित नेताओं द्वारा किसान और प्रशासन के बीच हुए घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाये जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर नेताओं ने उक्त आन्दोलन को लेकर अपनी रोटिया नहीं सेंकी होती तो किसान और पुलिस के बीच उक्त सघर्ष नहीं होता। आज ऐसे नेताओं के चलते किसानों को मुआवजें के बदले पुलिस की बर्बर कार्यवाही का शिकार होना पड़ा हैं। वहीं सरकारी स्मपत्ति का भारी नुकसान हुआ हें। जनपद की कानून व्यवस्था को उक्त नेताओं ने ध्वस्त करने का प्रयास किया है जिसकी जितनी निन्दा की जाये वह कम हैं। कामरेड ब्रजलाल, लुकेश राही, जितेन्द्र सिंह, दिनेश पिन्टू, अमरजीत, किसन सिंह, त्रिलोकी नाथ चैखे लाल प्रधान आदि ने शीघ्र मुआवजें की माॅग करने के साथ साथ प्रशासन से निर्दोषों को नहीं फसानें तथा दोषियों को दंडित करने की माॅग की। काग्रेंस का प्रतिमंडल कांग्रेंस विधान मंडल नेता प्रदीप माथुर के नेतृत्व में गाॅव औरंगाबाद व दामोदर पुरा पहुंचा तथा स्थानीय नागरिकों व किसानों से घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त कर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रजन से भी उसी समय वार्ता कर किसानों के साथ हुई घटना से अवगत कराया। विद्यायक ने बताया कि 92 करोड़ रूपया प्रशासन के पास किसानों के लिए आ चुका हैं। उसें शीघ्र दिलवाया जाये और नये सर्किल रेट के आधार पर जल्दी शेष राशि उपलब्ध कराई जाये तथा जिन किसानों के नाम प्रशासन द्वारा गलत एफआईआर दर्ज की गई उसें रदद किया जाये। विद्यायक ने किसानों को बताया कि उनके द्वारा नियम 51में इस मुद्दे को विधान सभा में उठाया जा चुका है जिस पर नगर विकास मंत्री ने परिवेश में आने वाले आइ राजस्व ग्रामों में से सात राजस्व ग्रामों में गजट की सूचना पर अधिसूचना 3 जुलाई को जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी है शेष बचें गाॅवों की भी अगलें कुछ दिनों में प्रकाशित होते ही जिलाधिकारी को भेज दी जायेगा। तदोपरान्त किसानों को मुआवजा मिल जायेगा। विद्यायक श्री माथुर ने किसानों से मौका परस्त ताकतों के नुमाइन्दों से भोले भाले किसानों बहकाने में न आने की अपील की। प्रतिनिधि मंडल में जिला महासचिव संजय शर्मा, विक्रम वाल्मीकि, देवी सिंह पवार, राकेश दिवाकर, सुमित श्रीवास्तव, मुकेश धनगर, काग्रेंस नगर अध्यक्ष मलिक अरोड़ा उपस्थित थे।  

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मथुरा। जनपद के महिला थाने में दहेज लोभी ससुरालीजनों क वियद्व विवाहिता ने पति सहित अन्य ससुरालीजनों के विरूद्व दहेज उत्पीड़न कर घर से निकाल देने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई हैं।  मिली जानकारी के अनुसार राजवीर सिंह पुत्र फत्ते सिंह निवासी नगला विस्सा माट मथुरा ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि उसकी पुत्री के पति शिव कुमार पुत्र रामवीर सिंह निवासी परसोली थाना नौहझील हाल निवासी बालाजी पूरम मथुरा ने अतिरिक्त दहेज के रूप में एक बुलेरों गाड़ी की माॅग करने तथा माॅग पुरी नहीं कर पाने के कारण पति शिव कुमार ने उसकी पुत्री का शारिरिक व मानसिक उत्पीड़न किया तथा मारपीट कर जान से मारने की धमकी देते हुए घर से निकाल दिया। पुलिस ने मामलें दर्ज कर आरोपी पति की तलाश शुरू कर दी हैं।

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  मथुरा। नाॅर्थ रेलवे के जनरल मैनेजर प्रदीप कुमार ने जंक्शन रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने रेलवे स्टेशन पर गंदगी देख नाराजगी व्यक्त की। वहीं स्टेशन पर घूमते आवारा पशुआंे को देख स्टेशन अधीक्षक को गंदगी के लिए कड़ी चेतावनी दी तथा नगर पालिका परिषद पर भी गंदगी कराने का आरोप लगाया। उन्होंने स्टेशन अधीक्षक से स्टेशन पर साफ सफाई बराबर बनाये रखने की चेतावनी के साथ स्टेशन व पटरियों पर आवारा पशुओं को रोकने हेतु कड़ी चेतावनी भी दी। निरीक्षण के दौरान जीएम ने रेलवे लाइन के दोनों ओर 12 किलोमीटर तक दीवार बनवाने के निर्देश भी दिये जिससे कि आवारा पशु रेलवे लाइन पर न आ पायें।

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नई दिल्ली : सरकार ने डीजल की कीमतों पर से नियंत्रण हटाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यहक्षता में हुई कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में डीजल की बिक्री पर कम वसूली और इसकी वर्तमान स्थिति संबंधी मुद्दों का अनुमोदन किया गया। डीजल की कीमत बाज़ार के अनुसार तय किए जाने संबधी आदेश जारी कर दिए गए हैं। डीजल के मूल्‍य खुदरा और रिफाइनरी गेट, दोनों ही स्‍तरों पर बाज़ार के अनुसार तय होंगे। कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति द्वारा 17 जनवरी 2013 को किए गए पूर्ववर्ती निर्णय के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसीज) के लिए आदेश जारी किए गए हैं जिनमें उन्‍हें अगले आदेशों तक डीजल के खुदरा बिक्री मूल्‍यों में प्रतिमाह 40 पैसे से 50 पैसे प्रति लीटर तक (विभिन्‍न राज्‍यों/संघशासित प्रदेशों में लागू वैट की दरों को छोड़कर) बढ़ोतरी करने की अनुमति दी गई है। डीजल के मूल्‍य बाजार द्वारा निर्धारित होने से ऑटो ईंधन खुदरा क्षेत्र में प्रतिस्‍पर्धा बढ़गी और तेल कंपनियों की सेवा वितरण सक्षमता में सुधार आयेगा। तेल कंपनियों में प्रतिस्‍पर्धा बढ़ने से उपभोक्‍ताओं को लाभ पहुंचेगा और उन्‍हें अधिक विकल्‍प उपलब्‍ध होंगे।

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महात्‍मा गांधी का नाम चाहे हमने सुना हो या बोला हो, इससे जुड़ा पहला शब्‍द जो हमारे दिमाग़ में आता है वह है ‘अहिंसा’। उसी तरह जब हम सरदार वल्‍लभभाई पटेल का नाम लेते हैं, तो हमारे दिमाग़ में जो शब्‍द उभरता है, वह है ‘लौह पुरुष’।  इसी लौह पुरुष की गुजरात में विश्‍व की सबसे ऊंची प्रतिमा के निर्माण की योजना को 2014-15 के केंद्रीय बजट में ‘राष्‍ट्रीय योजना’ घोषित किया गया और इसके लिए केंद्र ने 200 करोड़ रुपये आवंटित किए। गुजरात सरकार ने इस प्रतिष्ठित संरचना के निर्माण के लिए पहले ही 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हुए हैं। नर्मदा नदी के जल में खड़ी होने वाली यह प्रतिमा भारत में प्राचीनकाल से मौजूद सामाजिक-सांस्‍कृतिक विविधता के बावजूद भारतीयता एकता और राष्‍ट्र की इस एकता व एकजुटता के वाहक पुरुष के पुण्‍यस्‍मरण की प्रतीक है। इसीलिए भारत सरकार ने वल्‍लभभाई पटेल के जन्‍मदिवस 31 अक्‍टूबर को ‘राष्‍ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाने का निश्‍चय किया है। भारत के लौह पुरुष को श्रद्धांजलिस्‍वरूप 182 मीटर ऊंची यह प्रतिष्ठित प्रतिमा, साधु-बेट द्वीप पर बनाई जा रही है, जो गुजरात के नर्मदा जि़ले में केवड़ि‍या में बने सरदार सरोवर बांध से लगभग 3.5 किलोमीटर दक्षिण में है। यह प्रेरक स्‍मारक स्‍थल, जो अपने में कई शिक्षण-मनोरंजन संघटकों को समेटे हुए है, नर्मदा नदी की ओर सतपुड़ा और विंध्‍याचल पर्वतश्रेणी, गुरुदेश्‍वर से घिरी, सरदार सरोवर बांध और केवड़ि‍या शहर के बीच स्थित है। इस भव्‍य स्‍मारक की महिमा इसकी सुरम्य पृष्‍ठभूमि से और बढ़ जाएगी। इसकी अद्भुत अवस्थिति पारिस्थितिक-पर्यटन और क्षेत्रिय विकास के लिए लाभकारी है। ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्‍ट है। यह स्‍वतंत्रता के बाद लगभग 565 रियासतों के विखंडित समूहों की और भारतीय राज्‍य के निर्माण के पटेल के निष्‍कलंक कार्य का प्रतीक है। यह रक्‍तरंजित और दर्दनाक विभाजन के बाद अखंड भारत में तत्‍कालीन गृहमंत्री सरदार वल्‍लभभाई पटेल की अद्वितीय प्रशासनिक क्षमता और वीरता को श्रद्धांजलि के रूप में स्‍थापित  होगा। दुनियाभर के सैलानियों को भारत की खूबसूरती को सराहने के लिए पर्यटन को प्रोत्‍साहन देने और भारतीय एकता के प्रतीक पुरुष के अभिवादन में बिला शक सरदार जी की यह 182 मीटर ऊंची प्रतिमा एक अद्वितीय पहल है। भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्‍ल्‍भभाई पटेल की विश्‍व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रिय परियोजना है, जिसके निर्माण का कार्यभार गुजरात सरकार ने अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को सौंपा है। सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा के निर्माण की कुल लागत 2,979 करोड़ रुपये है, जो अभी तक इस परियोजना के लिए आवंटित कुल 700 करोड़ रुपये की धनराशि से बहुत अधिक है। लेकिन इसके एक राष्‍ट्रीय परियोजना घोषित होने के बाद सरकार द्वारा इसके त्‍वरित निर्माण और पर्याप्‍त वित्‍तपोषण को सुनिश्चित किया गया है। गुजरात की मुख्‍यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ‘यह विशाल निर्माण कार्य 2,979 करोड़ रुपये की लागत से चार वर्षों में पूरा होगा। इसका निर्माण अनुबंध देश की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को दिया गया है।’ 1,347 करोड़ रुपये मुख्‍य प्रतिमा पर खर्च होंगे, 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सम्‍मेलन केंद्र पर खर्च होंगे, वहीं 83 करोड़ रुपये मुख्‍य जगह से स्‍मारक को जोड़ने वाले पुल के निर्माण पर खर्च होंगे और 657 करोड़ रुपये इसके पूरा होने के बाद 15 वर्ष तक इसकी संरचना के अनुरक्षण के लिए होंगे। 182 मीटर ऊंची ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’, जो न्‍यूयॉर्क की ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ लिबर्टी’ (93 मीटर) से आकार में दोगुनी है, भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। इस परियोजना में सरदार वल्‍लभभाई पटेल की जीवनी पर आधारित दृश्‍य-श्रव्‍य प्रस्‍तुति और एक प्रदर्शनी हॉल दुनियाभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। 75,000 घन मीटर बजरी, 5,700 मेट्रिक टन इस्‍पात संरचना, 18,500 इस्‍पात छड़ें और 22,500 मेट्रिक टन पीतल इस परियोजना में इस्‍तेमाल होगा। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ परियोजना नर्मदा जिले के आदिवासी क्षेत्र और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करेगी।  इस परियोजना का शुभारंभ गुजरात के पूर्व मुख्‍यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्‍टूबर, 2013 को सरदार पटेल की जयन्‍ती पर किया था। मोदी ने ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ के निर्माण हेतु लौह एकत्र करने के लिए देशस्‍तर पर अभियान की शुरुआत भी की थी और गुजरात सरकार का यह दावा है कि उसने राष्‍ट्र के लगभग सात लाख गांवों से लौह इकट्ठा कर लिया है। वास्‍तव में यह गुजरात के लिए गौरव का क्षण है, कि उसकी धरती के एक नेता ने इस अभूतपूर्व ऊंचाई पर स्‍थापना का सम्‍मान प्राप्‍त किया है। इसमें आश्‍चर्य नहीं कि पूरे गुजरात ने इसके आगे अपना शीश नवाया है। लेकिन सरदार पटेल को गुजरात तक सीमित करना उनके कार्य का अनादर है। उनका कार्य, हालांकि एक राज्‍य से शुरू है, सारी सीमाओं को तेजी से पार करता हुआ पूरी दुनिया और पूरी मानवता पर अपना असर छोड़ता है। सरदार पटेल के शब्‍द पूरी दुनिया में गूंज रहे हैं, इसलिए इसे एक राष्‍ट्रीय योजना घोषित करना कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है। हमें आशा है कि पूरी दुनिया वास्‍तव में इसे एक राष्‍ट्रीय परियोजना के रूप में देखेगी न कि राजनीतिक रूप में और प्रत्‍येक भारतीय इस पर नाज़ करेगा। विश्‍व की सबसे बड़ी प्रतिमा की प्रस्‍तावित ऊंचाई न्‍यूयॉर्क की विश्‍व प्रसिद्ध ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ लिबर्टी’ से लगभग दोगुनी है और रियो डी जेनेरो की क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा से पांच गुना ऊंची है। यह सरदार सरोवर बांध से भी ऊंची है। यह प्रतिमा न तो अपने विहंगम आकार में गर्व का मान लिए हुए है, न ही यह शांत स्‍मारक के रूप में स्‍थापित होगी। बल्कि एक विशेष कार्य योजना द्वारा इसे एक जीवंत कार्य केंद्र बनाया जाएगा। ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ न सिर्फ भारत के स्‍वतंत्रता आंदोलन को याद करने के लिए बनाया जा रहा है, बल्कि सरदार पटेल की एकता, देश-भक्ति, समावेशी विकास और सुशासन की दूरदर्शी विचारधारा को विकसित करना है। यह स्‍मारक जल्‍दी ही एक पूरी तरह कार्यात्‍मक आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा जो लोगों को जोड़ेगा, स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा सुविधाएं उपलब्‍ध कराएगा, क्षेत्र की आदिवासी आबादी के लिए विभिन्‍न विकासात्‍मक गतिविधियां चलाएगा। इस योजना के चलते, नर्मदा जिला में आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण होगा जो इस जिले के साथ-साथ राज्‍य के लिए भी लाभकारी होगा। आधुनिक बुनियादी ढांचा जिले में औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाएगा। विभिन्‍न पर्यावरण अनुकूल उद्योग इस क्षेत्र में स्‍थापित किए जा सकते हैं, जो न सिर्फ आम आबादी को रोजगार उपलब्‍ध कराएंगे बल्कि उनके जीवन-स्‍तर को ऊंचा उठाने में मदद करेंगे। जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र क्षेत्र में स्थापित कर रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में किसान भी लाभांवित होंगे। यह अंतिम नहीं है कि इस अद्भुत स्‍मारक की स्‍थापना से पर्यटन उद्योग को पुनर्जीवन मिलेगा। सरकार इस स्‍मारक की विकास का जीवंत केंद्र के रूप में परिकल्‍पना कर रही है। हालांकि कुछ भागों में इस परियोजना की संसाधनों और धन का अपव्‍यय बताकर आलोचना की गई है, लेकिन इस योजना के पीछे छिपे उद्देश्‍यों को देखा जाए तो यह हमारे देश के विकास के लिए एक आधुनिक केंद्र के रूप में उभर कर आएगा। पूरा होने के बाद, यह प्रतिष्ठित स्‍मारक अवश्‍य ही दुनियाभर के पर्यटकों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों, बुद्धिजीवियों और शोधार्थियों को अपनी ओर आकर्षित करेगा और यह योजना विश्‍व में भारत की एक नई पहचान है। सरदार जी की जीजिविषा और इच्‍छाशक्ति की तरह, यह स्‍मारक दुनिया में बाकी मूक स्‍मारकों के पार एक जीवंत आर्थिक केंद्र होगा।

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मथुरा। सिंड आर सेटी चैमुहाॅ द्वारा आयोजित 30 दिवसीय निःशुल्क मोबाईल रिपेयरिंग प्रशिक्षण शिविर के उद्द्याटन पर संस्था के पूर्व निदेशक वेदप्रकाश गर्ग ने युवाओ को संबोधित करते हुए कहा कि समय सबसे महत्वपूर्ण और जीवन की दिशा बदलने वाला होता है। आज समय की माॅग के अनुरूप बेरोजगार युवाओ को स्वरोजगार परक प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनना चाहिये। सिंड आर सेटी के प्रशिक्षण करने के उपरांत युवा आत्म विश्वास के साथ अपना स्वरोजगार प्रांरभ करें। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक सुरेन्द्र कुमार ने युवाओ से कहा कि यह प्रशिक्षण आपके सुनहरा भविष्य की ओर अग्रसर करने वाला है। उन्होने सिंड आर सेटी के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विशेषता बताते हुए कहा कि यहाॅ से पूर्व मे प्रशिक्षित युवा अपना मोबाईल रिपेयरिंग का स्वव्यवसाय प्रांरभ कर अच्छी आय अर्जित कर रहे है। उन्हांेने आगामी प्रांरभ होने वाले 10 दिवसीय डेयरी एवं वर्मी कम्पोस्ट प्रशिक्षण, 45 दिवसीय कम्प्यूटर हार्डवेयर प्रशिक्षण कार्यक्रम, 30 दिवसीय महिला ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण, 21 दिवसीय ठाकुर जी की पोशाक की जानकारी देते हुए बताया कि उपरोक्त प्रशिक्षण के इच्छुक बेरोजगार युवा अपना पंजीकरण संस्थान पर करवा सकते है। जनपद के 18 से 45 वर्ष के मध्य के बेरोजगार युवा जिनकी शैक्षिक योग्तया 8 पास हो अपना आवेदन संस्थान मे कर सकते है।

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