मथुरा

मथुरा में असकुण्डा बाजार में स्थित यह मन्दिर सांस्कृतिक वैभवकला और सौंदर्य के लिये अनुपम है। इस मन्दिर का निर्माण सन् 1814-15 में ग्वालियर राज्य के कोषाध्यक्ष सेठ गोकुल दास पारीख ने कराया था। इनकी मृत्यु के उपरांत इनकी सम्पत्ति के उत्तराधिकारी सेठ लक्ष्मीचंद ने मंदिर के निर्माण को पूर्ण कराया था। 1930 में इस मंदिर की सेवा पूजा पुष्टिमार्गीय वैष्णव आचार्य गोस्वामी गिरधर लाल जी कांकरौली को भेंट स्वरूप दे दिया था। यहाँ सेवा पूजा अर्चना पुष्टिमार्गीय वैष्णव सम्प्रदाय के अनुसार ही होती है। श्रावण मास में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहां सोने व चाँदी से निर्मित हिंडोले को देखने आते है। यहां जन्माष्टमी के दिन 108 सालिगराम का पंचामृत अभिषेक होता है तथा यहां अष्टभुजा द्वारकानाथ के श्रीविग्रह का भी पंचामृत अभिषेक किया जाता है।

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इसका निर्माण श्री ए0सी0 भक्तिवेदान्त स्वामी द्वारा स्थापित श्रीकृष्ण भावनात्मक संघ के तत्वाधान में सन् 1975 में हुआ था। प्रभुपाद के अनेक विदेशी कृष्ण भक्तों की देख रेख में सेवा पूजा आदि समस्त व्यवस्थाएं सम्पन्न होती हैं यह मन्दिर अंग्रेज मन्दिर के नाम से भी प्रसिद्ध है। तीन सुंदर कक्षों में बायी ओर निताई गौरांग महाप्रभु मध्य में श्रीकृष्ण बलराम के अति मनोहारी छवि विराजमान है तो दायीं ओर श्री राधा श्याम सुंदर युगल किशोर सुशोभित हैं। सभी श्री विग्रह अद्भुद वस्त्र आभूषण पुष्प मालाओं तथा मणिमय अलंकारों से श्रृंगारित होकर दर्शकों के मन को आकर्षित करते है। यहांँ श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भजन कीर्तन तथा प्रसाद वितरण होता है। रात्रि में अभिषेक का कार्यक्रम होता है, लाखों तीर्थ यात्री मंदिर में आते हैं।

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श्रीगोविंद देव जी का मंदिर वृंदावन में प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिर है। उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली का लाल पत्थर का बना प्राचीनतम मंदिर है वर्तमान स्वरूप में जो मंदिर दिखाई देता है यह भवन औरंगजेब के अत्याचारों एवं क्रूरता का साक्षी है। इसके ऊपर के हिस्से को तोड़ दिया गया था। आकाशचुम्बी इस मंदिर का निर्माण गौड़ीय गोस्वामी श्री रूप सनातन गोस्वामी के शिष्य जयपुर नरेश श्री मानसिंह ने सवंत् 1647 में कराया था। आताताइयों के आक्रमण करने से पूर्व ही राजा मानसिंह के जयपुर स्थित महल में यहां के श्री विग्रह को स्थानांतरित कर दिया गया था। आज भी जयपुर में गोविंददेव जी राजा के महल में विराजमान है तत्पश्चात संवत 1877 में पुनः बंगाल के भक्त श्री नंदकुमार वसु ने श्री गोविंददेव के नये मंदिर का निर्माण कराया यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन विधि विधान से पूजा अर्चना अभिषेक का कार्यक्रम होता है।

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पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक उपक्रम विभाग (डीपीई) द्वारा भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) की अवधारणा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निरंतर प्रयासों के चलते इसे देश भर में तेजी से अपनाया गया है। डीपीई ने समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी कर और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रबंधन के साथ नियमित बातचीत कर इसे लागू करने में सफलता प्राप्त की है। डीपीई ने अप्रैल, 2010 में सीएसआर पर पहले दिशा-निर्देश जारी कर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा अपने लाभ में से एक निर्धारित प्रतिशत को सीएसआर गतिविधियों के लिए रखने संबंधी दिशा-निर्देश बनाया था। इसके बाद डीपीई ने कंपनियों द्वारा स्वैच्छिक रूप से सीएसआर को जिम्मेदारी भरे व्यवसाय के रूप में अपनाने का प्रयास किया। सभी अंशधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद डीपीई ने सीएसआर और निरंतरता पर एक अप्रैल, 2013 से प्रभावी संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए। इसमें विश्व स्तर पर चल रहे सर्वोत्तम प्रयासों को जहां सम्मिलित किया गया, वहीं घरेलू सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं पर ध्यान केन्द्रित रखा गया। परिणामस्वरूप डीपीई दिशा-निर्देशों का प्रयोगकर्ताओं, अंशधारकों और सीएसआर विशेषज्ञों ने स्वागत किया, वहीं अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी प्रशंसा हुई और सार्वजनिक उपक्रम विभाग को अंतर्राष्ट्रीय श्रोताओं के सामने अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित भी किया गया। (Read in English: Guidelines On CSR And Sustainability In Public Sector Enterprises)   कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्वों और निरंतरता पर सार्वजनिक उपक्रम विभाग के दिशा-निर्देशों में समावेशी विकास, पिछड़े क्षेत्रों का विकास, समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों की उन्नति, महिलाओं के सशक्तीकरण, पर्यावरणीय निरंतरता और पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा बचाने वाली तकनीक और निरंतरता विकास के सभी विस्तृत पहलू सम्मिलित हैं। डीपीई दिशा-निर्देशों के द्वारा सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हालांकि इसका प्रभाव जानने के लिए कोई विस्तृत अध्ययन नहीं किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रबंधन द्वारा सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के तहत व्यवसाय करने, जिससे कि निरंतर विकास को बल मिले, संबंधी सुधार देखे गए हैं। कंपनी विधेयक, 2013 में सीएसआर के विशेष प्रावधानों को सम्मिलित करने से डीपीई द्वारा इस संबंध में सभी अंशधारकों के साथ मिलकर इसका प्रचार करने और भारत जैसे विकासशील देश में इसका उचित क्रियान्वयन करने के प्रयासों का समर्थन हुआ है। कंपनी विधेयक-2013 में सभी कंपनियां जो लाभ के आधार पर आधारित मापदंडों को पूरा करती हो को सीएसआर गतिविधियों पर पिछले तीन साल के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत खर्च करना अनिवार्य किया गया है। भारत संभवतः ऐसा पहला देश है, जिसने कंपनियों द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व को अनिवार्य रूप से पूरा करने के लिए कानून बनाया है। सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम विभाग इस संबंध में अध्ययन कर सीएसआर के क्रियान्वयन को लागू करने और निरंतर विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कार्य कर रहा है।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोलापुर में आयोजित एक कार्यक्रम में 765 केवी सोलापुर–रायचूर ट्रांसमिशन लाइन और राष्ट्रीय राजमार्ग-9 (एनएच-9) के पुणे-शोलापुर खंड की चार लेन वाली परियोजना राष्ट्र को समर्पित किया।   प्रधानमंत्री ने देश में बुनियादी ढांचे के विकास के नये तरीकों के लिए व्यापक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए सड़कों, विद्युत ट्रांसमिशन लाइनों, गैस ग्रिडों और जल ग्रिडों का राष्ट्रव्यापी जुड़ाव नेटवर्क बनाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-9 के सोलापुर-महाराष्ट्र/कर्नाटक सीमा खंड को चार लेन में बदलने के कार्य का भी शिलान्यास किया। दक्षिण कोरिया का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनियाभर में जिन देशों ने बुनियादी ढांचे के निर्माण में निवेश किया था वहां उन्होंने काफी विकास और समृद्धि अर्जित की है।                                 उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई स्वर्णिम चतुर्भुज और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से प्रोत्साहित होकर नई सरकार सड़कों और राजमार्गों के विकास को उच्च प्राथमिकता देगी। प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा कोयले और गैस की कमी के कारण सुस्त पड़े बिजली संयत्रों के बारे में व्यक्त की गई चिंता से सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने कहा कि वे गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर इस मुद्दे को उठाते रहे थे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार बिजली संयंत्रों को पर्याप्त ईंधन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचाए बिना कोयला निकाला जाएगा। प्रधानमंत्री ने छात्रों का आह्वान किया कि वे अपने परिवार का बिजली बिल घटाने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन का नेतृत्व करें। यह भी एक किस्म से राष्ट्र की सेवा होगी। छात्रों को अपने परिवार के सदस्यों को इस आंदोलन में शामिल होने के लिए समझाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने केन्द्र सरकार के नर्मदा बांध की ऊंचाई बढ़ाने की मंजूरी देने के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह निर्णय पिछले कई वर्षों से लंबित पड़ा था और ऩई सरकार ने पदभार ग्रहण करने के बाद बहुत जल्दी इस बारे में निर्णय लिया। एक बार यह परियोजना पूरी हो जाए तो महाराष्ट्र को प्रत्येक वर्ष 400 करोड़ रुपए मूल्य की बिजली मुफ्त मिलेगी। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल हुए सोलापुर के लोगों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे उनके प्यार के तोहफे को विकास के रूप में लौटाएंगे। उन्होंने कहा कि सोलापुर वस्त्र उद्योग का स्थापित केन्द्र था और इस उद्योग का पुनरुद्धार केन्द्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

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मथुरा। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने अवगत कराया है कि शासन के पत्र, संख्या 1300/26 मार्च 2014-4 (358)/07 टी0सी0 3 दिनांक 14 अगस्त 2014 के द्वारा अवगत कराया गया है कि मास्टर डाटाबेस में शिक्षण संस्थानों एंव पाठ्यक्रमों को शामिल करने के संबंध में विभिन्न प्रक्रियात्मक कार्यवाहियों के लिए निर्धारित की गयी सीमा को बढ़ाकर दिनांक 25 अगस्त 2014 तक कर दी गयी है। उपरोक्त के क्रम में जनपद में संचालित समस्त हाई स्कूल, इण्टरमीडिएट, महाविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थान, मेडीकल कालेज, पौलिटैक्निक, आई0टी0आई0, मैनेजमैन्ट आदि शिक्षण संस्थाओं के समस्त प्रधानाचार्य, प्राचार्य, निदेशक, रजिस्ट्रार को सूचित किया जाता है कि छात्रवृत्ति मास्टर डाटावेस में शिक्षण संस्था एवं पाठ्यक्रमों या शुल्क प्रतिपूर्ति शामिल करने के सम्बन्ध में विभिन्न प्रक्रियात्मक कार्यवाहिया के लिये पूर्व निर्धारित समय सीमा को बढ़ाकर दिनांक 25 अगस्त 2014 तक करदी गयी है। परीक्षण करने पर संज्ञान में आया है कि 51 शिक्ष्ण संस्थाओं द्वारा विभागीय बेवसाइट पर पाठ्यक्रमों की शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि अपडेट नही की गयी है। अतः अपनी अपनी शिक्षण संस्था का विभागीय बेवसाइट पर अपलोड किये गय विवरण, पाठ्यक्रम, शुल्क प्रतिपूर्ति की निर्धारित धनराशि का परीक्षण करना सुनिश्चित करें कि पाठ्यक्रम, आप द्वारा भरी गयी फीस आदि बेवसाइट पर अपडेट है अथवा नहीं। यदि आपकी संस्था का विवरण, पाठ्यक्रम एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की भरी गयी धनराशि बेवसाइट पर अपडेट नहीं है, तो तत्काल निर्धारित तिथि 25 अगस्त 2014 से पूर्व संस्था द्वारा विवरण, पाठ्यक्रम, शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि अपडेट करना सुनिश्चित करें। इसके उपरान्त भी कोई शिक्षण संस्था मास्टर, डाटाबेस में सम्मिलित होने के एवं पाठ्यक्रम या शुल्क प्रतिपूर्ति आदि अपडेट नहीं की जाती है, तो इसके लिये स्वयं शिक्षण संस्था उत्तदायी होगी।

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