मथुरा

मथुरा। श्री अग्रवाल तिलकद्वार अग्रवाल धर्मशाला समिति की एक बैठक अग्रवाटिका सरस्वती कुन्ड पर राजेश बजाज की अध्यक्षता में हुई। बैठक का प्रारंभ मुरलीधर चैधरी, महावीर मित्तल, सतीश ब्रजवासी, डा0 अशोक अग्रवाल, दीनानाथ चैधरी, गौरसरन सर्राफ, बांकेलाल अग्रवाल, मूलचन्द्र गर्ग, पंकज अग्रवाल, धनेश मित्तल, मोहनलाल सर्राफ नवीन मित्तल, वृन्दावन बिहारी अग्रवाल, गोपाल प्रसाद भरतपुर वालों ने कुलदेवी महालक्ष्मी जी के चित्रपट पर माल्यार्पण व दीप जलाकर किया। इस अवसर पर श्री तिलकद्वार अग्रवाल धर्मशाला पर लगी नवनिर्मित लिफ्ट का लोकार्पण सपा नेता डा0 अशोक अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि उक्त लिफ्ट से धर्मशाला में आने वाले वृद्धजनों, विकलांगों व गर्भवती महिलाओं को ऊपरी मंंिजल तक पहुंचने में होने वाली परेशानी से निजात मिलेगी। उन्होंने बताया कि लिफ्ट के अभाव से तीसरी मंिजल पूर्णतया अनुपयोगी हो गई थी। लिफ्ट के निर्माण में सहयोग के लिए उन्होंने महेशचन्द्र बंसल, सुनील अग्रवाल, नीतिन टंच वालें, सुरेश चन्द्र, नीरज बाॅबी हाथी वालों के संयोजन के लिए प्रशंसा की। श्री अग्रवाल ने कहा कि 20 अगस्त को उक्त लिफ्ट का औपचारिक परीक्षण होगा। उन्होंने इन्जी, ओमप्रकाश अग्रवाल व आर्केटैक्ट विपिन गोयल तथा सभी दानदाताओं का आभार व्यक्त किया। बैठक में कोषाध्यक्ष रवि अग्रवाल सर्राफ ने वर्ष 2013-14 के आय व्यय का विवरण प्रस्तुत किया। बैठक में रामप्रकाश प्रेंस वालें, योगेन्द्र गोयल, मुकेश मित्तल, गोकुलचन्द्र सर्राफ, बनवारीलाल अग्रवाल, प्रेम सर्राफ, उमेश चन्द्र प्रेसवालें, चैधरी धर्मेन्द्र सर्राफ, सुनील कुमार, प्रदीप चैधरी, अनिल चैधरी, सुरेश चैधरी, सुूमित प्रेंसवालें, मुकेश सर्राफ, अशोक बंसल, विजय कागजी, मुकेश ग्राफिक्स, जितेन्द्र सूतिया, राकेश कुमार सुल्ले, जितेन्द्र मैदा वालें आदि उपस्थित थे।

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मथुरा। रिफाइनरी द्वारा देश का 68वाॅ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक एस गांगुली ने सहस्त्राब्दि स्टेडियम रिफाइनरी नगर में ध्वजारोहण किया। वहीं दिल्ली पब्लिक स्कूल के बैण्ड ने राष्ट्रीय धून बजाकर देश की आजादी के प्रतीक तिरगें झडें को नमन किया। वहीं केन्द्रीय विद्यालय ने मार्च के हुए मुख्य अतिथि सलामी दी। इस अवसर पर श्री गागुली ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हम सभी भारतवासियों के लिए असाधारण उपलब्धि का दिन हैं। हमें आज आजादी की शान तिरंगें झंडें को नमन करने और देश की आजादी में सहभागिता करने वाले सभी सेनानियों को नमन करते हुए उनकी देशभक्ति से प्रेरणा लेनी चाहिए। कार्यक्रम में दिल्ली पब्लिक स्कूल व केन्द्रीय विद्यालय के छात्र छात्राओं ने असम संस्कृति, बिहू नृत्य, पंजावी भांगड़ा सहित अनेकों रंगारंग सास्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतिया दी। मुख्य अतिथ श्री गागंुली ने साहसी व कर्तव्य पूर्ण कार्य के लिए सीआईएसएफ के हैड कांस्टेबिल ब्रहमपाल को प्रशस्ति पत्र व पुरस्कार देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में रिफाइनरी के निकट विभिन्न ग्राम सभाओं के प्रधानों को भी सम्मानित किया गया। वहीं वृन्दा क्लब श्रीमती सुजाता सिन्हा ने रिफाइनरी अस्पताल के रोगियों को फल वितरण किय। वहीं आयोजित फुटवाल मैत्री मैच एम्पलाइज क्लब व सीआईएसएफ के मध्य खेला गया जिसमें सीआईएसएफ की टीम विजयी रहीं।  

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एक स्कूल में भगवान के स्वरूप में सजे स्कूली छात्र मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व वेला में स्थानीय लोग ब्रजवासियों ने लाला कन्हैया का जन्म-गीत, नृत्य, कृष्ण-झांकी और आरती के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया। घर घर  में वंदनवार बांधी गई थीं, हल्दी के मंगलसूचक थापे लगाए गये थे और कृष्णजन्म के लोकगीत गूंजते रहे। यहां स्कूल काॅलेजों में भी बाल-कलाकारों ने सामूहिक रूप से गायन किया-मथुरा में जमंन भयौ कन्हैया जू कौ हरे-हरे, कन्हैया जू कौ जनंम भयौ। ‘‘दुस्ट कंस के कारागृह में कटे देवकी फंद, कारे कजरारे मेघों में उदित भयौ एक चंद’’, अमृत रस बरस उठा। जगह जगह श्रीकृष्ण जन्म की कथाओं का वर्णन किया जा रहा था जगह जगह लोग नाच गा रहे थे। विभिन्न लीलाओं को रास के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया जा रहा था।

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शहर के बाजारों में प्रसाद वितरित करते श्रद्धालु मथुरा। गीता के नायक, लीला पुरूषोŸाम, योगीराज श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्णा अष्टमी को हुआ था। देश के प्रायः सभी प्रान्तों में श्रीकृष्णजन्माष्टमी का पर्व असीम श्रद्धा,भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी का यह पर्व विदेशों में भी धूम धाम से मनाया जाता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर ब्रज के कण कण में अपूर्व हर्षोल्लास छा जाता है। आज भी घर आगंन को गोवर से लीपा जाता है चैक पूरे जाते हैं द्वार पर बंदरवार बांधी जाती है, मंगल सूचक थापे लगाये जाते हैं और फूलों से पालने को सजाकर ब्रजकी बालाएं गाती हैं। ‘‘डोरी फूलन को पालनों, आजु नन्द लाला भए’’। ब्रज के घर घर में भगवान को नये वस्त्र पहना कर उनका श्रंगार करके झांकियां सजाई जाती है। महिलाएं अपने यहां रखे सालिगराम की वटिया को एक खीरे में रख कर डोरे से बांध कर श्री कृष्ण के जन्म समय मध्य रात्रि को 12 बजे उसे खीरे में से निकाल कर पंचामृत स्नान कराती हैं। इस प्रकार से भगवान श्री कृष्ण का प्रतीक रूप में जन्म की भावनाएं संजोई जाती हैं। स्त्री पुरूष बच्चे भी श्री कृष्ण के जन्म के दर्शन के उपरान्त ही अपना व्रत खोलते हैं। मथुरा स्थित कंस का कारागार स्थल भगवान केशवदेव और नगर के मध्य विराजमान ठाकुर द्वारकानाथ द्वारकाधीश मंदिर में इस दिन विशेष दर्शन होते हैं। इस अवसर पर अपार जनसमूह उमड़ पड़ता है। ब्रज के प्रत्येक घर आंगन में शंख घन्टा घडि़याल की ध्वनि ऐसे गंज उठती है मानों वहां किसी बालक का जन्म हुआ हो इस प्रकार ब्रज के हर घर घर में कृष्ण जन्म लेते हैं लोग आपस में बधाईयां देते हैं भक्ति भावनाओं में विभोर होकर ब्रजवासी नांचने गाने लगते हैं ‘‘नन्द के आनन्द भए जय कन्हैया लाल की’’ गाते हुए हर तरफ टौलियां नजर आने लगती है। भगवान श्री कृष्ण का जन्म अर्धरात्रि के समय कंस के कारागार में होने के वाद उनके पिता वसुदेव जी कंस के भय से बालक को रात्रि में ही यमुना नदी को पार कर नन्द बाबा के यहां गोकुल छोड़ आये थे। इसी लिए कृष्ण जन्म के दूसरे दिन गोकुल में नन्दोत्सव मनाया जाता है। भाद्र पद नवमी के दिन समस्त ब्रजमंड़ल में नन्दोत्सव की धूम रहती है। यह उत्सव दधिकांदों के रूप मनाया जाता है दधिकांदो का अर्थ है दही की कीच। हल्दी मिश्रत दही फेंकने की परम्परा आज भी निभाई जाती है। मंदिर के पुजारी नन्दबाबा और जशोदा के वेष में भगवान कृष्ण के पालने को झुलाते हैं। मिठाई, फल व मेवा मिश्री लुटायी जाती है। श्रद्धालु इस प्रसाद को पाकर अपने आपको धन्य मानते हैं। वृंदावन में उत्तर भारत के विशाल श्री रंगनाथ मंदिर में ब्रज नायक भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के दूसरे दिन नन्दोत्सव की धूम रहती है। नन्दोत्सव के दौरान सुप्रसिद्ध लठ्ठे के मेले का आयोजन किया जाता है। धर्मनगरी वृंदावन में श्री कृष्ण जन्माष्टमी जगह-जगह मनाई जाती है किन्तु उत्तर भारत के सबसे विशाल मंदिर में नन्दोत्सव की निराली छटा देखने को मिलती है। दक्षिण भारतीय शैली के प्रसिद्ध श्री रंगनाथ मंदिर में नन्दोत्सव के दिन श्रद्धालु लठ्ठा के मेला की एक झलक पाने को टकटकी लगाकर खड़े होकर देखते रहते हैं। जब भगवान रंगनाथ रथ पर विराजमान होकर मंदिर के पश्चिमी द्वार पर आते हैं तो लठ्ठे पर चढ़ने वाले पहलवान भगवान रंगनाथ को दण्डवत कर विजयश्री का आर्शीवाद लेकर लठ्ठे पर चढ़ना प्रारम्भ करते हैं। 35 फुट ऊंचे लठ्ठे पर जब पहलवान चढ़ना शुरू करते हैं उसी समय मचान के ऊपर से कई मन तेल और पानी की धार अन्य ग्वाल-वालों द्वारा लठ्ठे के सहारे गिराई जाती है। जिससे पहलवान फिसलकर नीचे जमीन पर आ गिरते हैं। जिसे देखकर श्रद्धालुओं में रोमांच की अनुभूति होती है। पुनः भगवान का आर्शीवाद लेकर ग्वाल-वाल पहलवान एक दूसरे को सहारा देकर लठ्ठे पर चढ़ने का प्रयास करते है। तो तेज पानी की धार और तेल की धार के बीच पूरे जतन के साथ ऊपर की ओर चढ़ने लगते हैं। कई घंटे की मशक्कत के बाद आखिर ग्वाल-वालों को भगवान के आर्शीवाद से लठ्ठे पर चढ़कर जीत हासिल करने का मौका मिलता है। इस रोमांचक मेले को देखकर देश-विदेश के श्रद्धालु अभिभूत हो जाते हैं। ग्वाल-वाल खम्भे पर चढ़कर नारियल, लोटा, अमरूद, केला, फल मेवा व पैसे लूटने लगते हैं। इसी प्रकार वृंदावन में ही क्या जगह-जगह भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर नन्दोत्सव मनाया जाता है। ब्रहमकुण्ड स्थित हनुमान गढ़ी में नन्दोत्सव के दौरान मटकी फोड़ लीला का आयोजन किया जाता है। 15 फुट ऊंची मटकी को ग्वाल-वाल पिरामिड बनाकर मशक्कत के साथ मटकी को फोड़ते हैं एवं दधिकांधा उत्सव का आयोजन भी होता है।  

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  चैतरफा रही भण्डारों की धूम, तीर्थयात्रियों की भीड़ श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर प्रवेश हेतु लगी भक्तों की भीड़ श्रीकृष्ण जन्मस्थान रात्रि को रोशनी की अलौकिक छटा में नहाया हुआ भगवान के जन्म पर जन्मस्थान स्थित भागवत भवन मन्दिर में भगवान का अभिषेक करते हुए मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर सुबह से ही लोग बंदरवार, फूल माला, केला के पत्ते आदि सामान खरीदते नजर आये। वहीं बाहर से आए श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर की ओर बढ़ते नजर आए टोल के टोल राधे-राधे का कीर्तन करते बोल कृष्ण कन्हैया लाल की जयकारा लगा कर मंदिरों की ओर जा रहे थे। नगर के चारों तरफ के रास्तों को जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से वाहनों को बेरीकेटिंग करके बंद करा दिया था। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को मीलों पैदल चलकर मंदिरों तक पहुंचना पड़ा। जगह-जगह भण्डारा पूड़ी, हलवा, खीचड़ी तथा व्रत का प्रसाद वितरण किया जा रहा था। श्रीकृष्ण जन्म स्थान पर मनोहारी विद्युत लाइटों से सजावट किया गया। नगर में हर तरफ सजावट मंदिरों में जन्माष्टमी की धूम दिखाई दे रही थी। विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर जन्माष्टमी देखने पहुंचे। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर आज समूचे बृजमण्डल में आपार श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना हुआ है। शहर के बाजार और घर-घर पर लगे वंदनवार और सजाबट देखते ही बनती है। समूचे बृज में कान्हा के जन्मोत्सव की धूम मची हुई है। मंदिर श्रीकृष्ण जन्मस्थान को जाने वाले सभी मार्ग सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से भरे पड़े थे। सुदूर प्रांतों से कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल होने आये भक्तों के स्वागत सत्कार में बृजवासियों ने भी कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। मुख्य बाजारों में स्थान-स्थान पर पूड़ी सब्जी और व्रत से जुड़े आहार के वितरण में समाजसेवी और व्यवसायिक संस्थान अग्रणी भूमिका निभा रहे थे। तीर्थ यात्रियों की सुख सुविधा के लिए स्थान-स्थान पर लगाये गये भण्डारे और ठण्डे पानी के प्याऊ के अलावा चाय का वितरण भी जगह जगह किया जा रहा था। जन्माष्टमी एवं नन्दोत्सव के मौके पर फलाहारी प्रसाद तीर्थयात्रियों एवं भक्तों में वितरित किया गया। शहर के कैन्ट रेलवे स्टेशन के निकट टैम्पू स्टैण्ड, क्वालिटी तिराहे, पुराने बस स्टैण्ड, जवाहर हाट, पुराने डाक खाने के निकट आगरा रोड व्यवसायी समिति द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के छप्पन भोगों के दर्शनों के साथ भण्डारे का आयोजन किया गया। कृष्णा नगर स्थित गोवर्धन चैराहे के निकट समाजसेवी अशोक बेरीवाल द्वारा विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। इसके अलावा अप्सरा सिनेमा के सामने जीएमसी सर्राफा मार्केट गुरूद्वारे के निकट मुकुंद कॉम्पलेक्स, होलीगेट चैराहे, कोतवाली रोड, भरतपुर गेट, दरेसीरोड, डीगगेट, आर्य समाज रोड, छत्ताबाजार, विश्राम बाजार, स्वामी घाट, डोरीबाजार, चैकबाजार, वृंदावन दरबाजा, घीयामण्डी क्षेत्रों में भण्डारों के आयोजन किये गये। भण्डारों के आयोजनों के कारण आज बृजभूमि में अधिकांश खान-पान की दुकाने या तो बंद रही अथवा उन पर सन्नाटा छाया रहा। 

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श्री वृंदावन का यह भव्य विशाल मंदिर के सामने वाली मुख्य सड़क पर बना हुआ है। दक्षिण भारतीय शैली का अद्भुत मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण सेठ श्री राधाकृष्ण, उनके बड़े भाई सेठ लक्ष्मीचंद तथा छोटे भाई सेठ गोविंद दास जी ने कराया। श्री रामानुज सम्प्रदाय का अति विशाल मंदिर स्थापत्थ कला की दृष्टि से भारत में एक अलग स्थान रखता है। यह मंदिर आकार में बहुत बड़े भूभाग को संजोये हुए है। इसमें पांच परिक्रमाएं हैं। जो ऊँचे-ऊँचे पत्थरों के परकोटों से विभक्त है। भीतरी परिक्रमा में श्री हनुमान जी, श्री गोपाल जी, श्रीनृसिंह जी के श्री विग्रह हैं। यहां एक पुष्करणी भी है जहां वर्ष में एक बार भाद्र पद मास में गजग्राह लीला का प्रदर्शन होता है। चैथे व प्रधानद्वार बैकुण्ठद्वार और नैवेद्य द्वार से तीन विशाल द्वार बने हुए है। इसी में 60 फुट ऊँचा स्वर्णमय विशाल गरूड़ स्तम्भ (सोने का खम्भा जिसे सोने के खम्भे का मंदिर भी कहा जाता है।) चैत्र मास में विशाल रथ यात्रा भी निकाली जाती है।

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