
यह महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह का शताब्दी वर्ष है। सूदूर चम्पारण में निल्हे कोठी के किसानों को अंग्रेजों ने व्यापार की सफलता के लिए दास बना रखा था। अप्रैल 1917 में गांधी ने मोतिहारी पहुंचकर किसानों की दासता से मुक्ति का बिगुल फूंका। उसकी धमक से अपराजेय अंग्रेजों की सल्तनत हिल गई। आखिरकार चम्पारण सत्याग्रह के 30 वर्ष बाद अग्रेजों को बोरिया बिस्तर बांधकर जाने को विवश होना पड़ा।






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