कृषि / व्यापार / बचत

सोने-चांदी की कीमतों में लगी आग से निवेशकों की झोलियां तो भर गई हैं, लेकिन अभी भी कुछ निवेशक ऐसे हैं, जो इस रैली से 'चूक' गए हैं। यदि वे अब इतना बड़ा जोखिम न लेना चाह रहे हों  तो कुछ दूसरी धातुओं में निवेश करके भी वे अच्छी कमाई कर सकते हैं...

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सुबह की धूप अभी हल्की थी। मेरठ जिले के एक गांव में किसान रमेश अपने खेत पर खड़े थे। मोबाइल हाथ में थामे, वह स्क्रीन पर चमकते मौसम अलर्ट पर नजर गड़ाए हुए थे, “आज सिंचाई नहीं।”, उन्होंने तुरंत मोटर बंद कर दी। मुस्कराते हुए बोले, “अब खेत आसमान देखकर नहीं, ऐप्प देखकर चलते हैं।

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स्वच्छ, सुरक्षित और खूबसूरत पर्यटन स्थलों की तलाश में पर्यटक तटीय शहरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और नारियल पानी समुद्र तट पर सबसे पसंदीदा पेय बना हुआ है। यह स्वास्थ्यवर्धक, ताजगीभरा और बेहद लोकप्रिय है। इस लोकप्रियता के कारण कभी नारियल के कचरे का ढेर लैंडफिल में जमा हो जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है।

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साल 2026 की दहलीज़ पर खड़ा राष्ट्र, सिर्फ़ आंकड़ों और योजनाओं का देश नहीं, बल्कि बदलती सोच और उभरती उम्मीदों की कहानी गढ़ रहा है। गलियों, कस्बों और छोटे शहरों में एक नया आत्मविश्वास महसूस किया जा सकता है, जहां सरकार अब दूर बैठी ताक़त नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल साझेदार लगती है। बीते एक दशक में राष्ट्रीय परिदृश्य नई टेक्नोलॉजी की दखल से बदला है। सफ़ाई आदत बन रही है, बैंक खाते पहचान बन गए हैं, डिजिटल लेन-देन भरोसे की भाषा बोलने लगे हैं, और बेटियां भविष्य का केंद्र बन रही हैं।

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‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’, एक देशव्यापी जागरूकता और सुगमीकरण पहल है जो नागरिकों को बिना दावे वाली वित्‍तीय परिसंपत्तियों की पहचान करने और वापस पाने में मदद करती है। यह पहल विनियमित वित्‍तीय प्रणालियों में बैंकों, बीमा, म्यूचुअल फंड, डिविडेंड, शेयरों और सेवानिवृत्ति लाभों में बिना दावे वाली बचत पर ध्यान देती है।

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बेंगलुरु एयरपोर्ट की चमकती रोशनियों के बीच, दो ज़िंदगियां एक ही सवाल से टकरा रहीं थीं—आख़िर उड़ानें रुकी क्यों...

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भारत एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिकी निर्माता के रूप में उभर रहा है। सेमीकंडक्टर सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

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वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का स्वदेशी रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1,27,434 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये की तुलना में 174 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है।

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भारत मंडपम में आयोजित भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला, भारत की सबसे बड़ी और सांस्कृतिक रूप से सबसे स्थिर प्रदर्शनियों में से एक है...

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जब बिहार जैसे राज्यों में हाल के विधानसभा चुनावों में रोज़गार, पलायन और गांवों की जिंदगी बड़े मुद्दे बनकर उभरे, तो यह साफ़ दिखा कि मनरेगा जैसी योजनाएं सिर्फ विकास-रिपोर्ट का हिस्सा नहीं रहीं, बल्कि राजनीतिक बहस की धुरी भी बन गई हैं। राज्य की दो-तिहाई से अधिक घरों पर बाहरी मज़दूरी का निर्भरता होने के बावजूद, पलायन को रोकने वाली नीतियां मतदाताओं की प्राथमिकता बनीं। जो दल गांव की ज़मीन से कटे दिखते हैं, उन्हें नतीजों में उसकी कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि रोज़गार और सामाजिक सुरक्षा की ठोस बात करने वाली राजनीति को नया सहारा मिलता है।

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