बात 2011 गर्मियों की है। बेंगलुरु के एक दैनिक अखबार में पढ़ा कि मैसूर से प्रकाशित विश्व का एकमात्र संस्कृत दैनिक समाचारपत्र, आर्थिक हालत खस्ता होने से बंदी के कगार पर था। जिज्ञासा हुई कि इस मृतप्राय: भाषा में कोई अखबार निकालने की कैसे जुर्रत कर सकता है।
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