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तारीख नौ जून, वर्ष 1964, देश अपने दूसरे प्रधानमंत्री ”लाल बहादुर शास्त्री” से रूबरू हो रहा था। प्रधानमंत्री के रूप में शास्त्री जी का कार्यकाल ऐसा नहीं है कि एक बहुत लंबा सफर रहा हो, किंतु अपने अल्प कार्यकाल में वह जो कुछ भी कर गए वह इतिहास के पन्नों में दर्ज है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें" महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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यह सत्य है कि कोई भी राष्ट्र संरचनाओं से महान नहीं बनता है बल्कि त्याग, समर्पण और निष्ठा के साथ किए गए प्रयासों और कार्यों से ही एक राष्ट्र के सुदृढ़ भविष्य की निर्मिति होती है। हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भी अपने बलिदान से स्वतंत्र भारत के महान लक्ष्य को प्राप्त किया और विश्व के सबसे प्राचीन राष्ट्र को गौरवशाली सिंहासन पर आरूढ़ कर दिया। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए... 

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विनायक दामोदर सावरकर के बारे में हम सब समय-समय पर काफी कुछ सुनते और पढ़ते रहते हैं, लेकिन उनके बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर के बारे में लोगों को उतनी जानकारी नहीं है। गणेश दामोदर सावरकर का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान किसी से भी कम नहीं है। उन्हें ‘बाबाराव सावरकर’ के नाम से भी जाना जाता है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए... 

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प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ, वकील, कवि एवं पत्रकार चितरंजन दास समूचे भारत में ‘देशबंधु’ के नाम से भी जाने जाते हैं। उन्होंने बंगाल में स्वराज पार्टी की स्थापना की। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी उनकी महती भूमिका थी। उन्होंने कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के पक्ष में मुकदमा लड़ा। इसी कारण, समस्त भारतवर्ष में ‘राष्ट्रीय वकील’ नाम से भी इनकी ख्याति फैल गई। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी 'सब्सक्राइब करें', महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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देश की अखंडता के लिए सर्वस्व समर्पित करने वाले नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कुशल राजनीतिज्ञ, संगठनकर्ता, विद्वान और स्पष्टवादी व्यक्ति के रूप में याद किए जाते हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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राष्ट्रीयता की भावना से ओत-प्रोत स्वयंसेवकों को हम सभी ने देखा है। किसी भी परिस्थिति में समाज की सेवा के लिए डटे रहने वाले स्वयंसेवियों का यह संगठन है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। विश्व के इस सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में की थी। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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