विविधा

स्वतंत्र भारत की राजनीति और चिंतन धारा पर डॉ. राम मनोहर लोहिया के व्यक्तित्व का गहरा असर है। वह भारतीय राजनीति के हर खेमे में सम्मानित थे। वह समाजवादी थे। समाजवादी भी इस अर्थ में कि समाज ही उनका कार्यक्षेत्र था और वह अपने कार्यक्षेत्र को जनमंगल की अनुभूतियों से महकाना चाहते थे। वह चाहते थे कि व्यक्ति-व्यक्ति के बीच कोई भेद, कोई दुराव और कोई दीवार न रहे। सब जन समान हों। सब जन सबका मंगल चाहते हों...

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भारत जब पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, जब विदेशी आक्रांताओं ने न केवल भारत के विशाल भू-भाग को बल्कि भारतीय जनमानस के चित्त को भी गुलाम बना लिया था, तब महाराष्ट्र में स्वराज्य की अलख जगी। वहां से गुलामी के प्रतिकार के सबल स्वर सुनाई दिए। वे स्वर देखते-ही-देखते संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में प्रसारित हो गए। छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की यह गर्जना की थी...

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आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले देश के दिग्गज इंजीनियर और भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया अपने समय से कहीं आगे के इंजीनियर माने जाते थे।

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"देखो मगर प्यार से…, कोरोना डरता है वैक्सीन की मार से"..., जी हां…! ऐसी शायरी आपको भी कभी यूं हीं राह चलते किसी आती-जाती गाड़ी, ट्रक, टेम्पो या ऑटो के पीछे लिखी मिल सकती है।

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हर महान व्यक्ति के पीछे कई व्यक्तियों का समर्पण होता है। दूसरे शब्दों में, ऐसे विरले ही होते हैं, जो किसी को महान बनाने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन झोंक देते हैं। ऐसा ही एक नाम है जेजे गुडविन का…। स्वामी विवेकानंद के विचारों को पूरी दुनिया में फैलाने का श्रेय गुडविन को जाता है...

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भारत पुण्यभूमि कहलाती है। हजारों सालों से विभिन्न संतों, ऋषियों, दार्शनिकों, वैज्ञानिकों और मनीषियों ने इस भूमि पर जन्म लिया है। मानवहित के लिए पुरुषार्थ किया है। ऐसे ही एक महापुरुष हैं, पंडित श्री राम शर्मा आचार्य।

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