एक चतुर व्यक्ति को यमराज से बहुत डर लगता था। एक दिन उसे एक चतुराई सूझी और उसने यमराज को अपना मित्र बना लिया। उसने अपने मित्र यमराज से कहा, “मित्र! तुम किसी को भी नहीं छोड़ते हो, किसी दिन मुझे भी धर लोगे!”
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एक चतुर व्यक्ति को यमराज से बहुत डर लगता था। एक दिन उसे एक चतुराई सूझी और उसने यमराज को अपना मित्र बना लिया। उसने अपने मित्र यमराज से कहा, “मित्र! तुम किसी को भी नहीं छोड़ते हो, किसी दिन मुझे भी धर लोगे!”
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एक घर मे पांच दीये जल रहे थे। एक दिन पहले दीये ने सोचा, 'इतना जलकर भी मेरी रोशनी की लोगों को कोई कद्र नहीं है तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं' और वह दीया खुद को व्यर्थ समझकर बुझ गया। जानते हैं वह दीया कौन था? वह दीया था..., ‘उत्साह’ का प्रतीक...!
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सत्य और अहिंसा के पुजारी एवं देश में आजादी की अलख जगाने वाले महात्मा गांधी ऐसे दूरदर्शी महापुरुष थे जो पहले ही यह भांप लेते थे कि कौन-कौन सी समस्याएं आगे चलकर विकराल रूप धारण करने वाली हैं। इसकी बानगी आपके सामने है। महात्मा गांधी ने जिन समस्याओं का सटीक समाधान खोजने पर अपना ध्यान केंद्रित किया था वे आज के हमारे युग में भारी बोझ बन गई हैं। विश्व स्तर पर फैली गरीबी, अमीर एवं गरीब के बीच बढ़ती खाई, आतंकवाद, जातीय युद्ध, उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, पूर्व और पश्चिम के बीच बढ़ता फासला, उत्तर और दक्षिण के बीच बढ़ती विषमता, धार्मिक असहिष्णुता तथा हिंसा जैसी समस्याओं पर अपनी नजरें दौड़ाने पर आप भी इस तथ्य से सहमत हुए बिना नहीं रहेंगे। यही नहीं, महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता एवं समानता, मित्रता एवं गरिमा, व्यक्तिगत कल्याण और सामाजिक प्रगति जैसे जिन महान आदर्शों के लिए संघर्ष किया था, उनके लिए हम आज भी लड़ रहे हैं।
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एक ब्रिटिश भारतीय लोक सेवक सर जॉन स्ट्रैचे अपने प्रशिक्षु लोक सेवकों को संबोधित करते हुए कहा करते थे कि “भारत के बारे में प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण बात यह जानने की है कि वहां कोई भारतीय नहीं है और कभी कोई भारतीय नहीं था।” इतिहासकार डेविड लड्डन ने अपनी पुस्तक ‘कंटेस्टिंग द नेशन: रिलीजन, कॉम्युनिटी एंड पॉलिटिक्स ऑफ डेमोक्रेसी इन इंडिया’ ने लिखा है कि जिस क्षेत्र को हम भारतीय सभ्यता के भू-परिदृश्य के रूप में वर्णित करते हैं, उसे यह परिभाषा ब्रिटिश साम्राज्य ने प्रदान की। भारत जो आज दिखाई देता है, वह 1947 से पहले भौगोलिक, जन-सांख्यिकीय या सांस्कृतिक अर्थ में वैसा नहीं था। विंस्टन चर्चिल जैसे अनेक आलोचकों ने भविष्यवाणी की थी कि स्वतंत्रता के बाद भारत बिखर जाएगा और फिर से मध्य काल में चला जाएगा।
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बाबा : भक्त, एक बात का जवाब दे क़ि जब पिछले दो साल से पेट्रोल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इतनी कम है, तब भी अपने देश में पेट्रोल इतना महंगा क्यों है?
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‘अरे…! यह प्यार-व्यार सब खुमार है, दो दिन में उतर जाएगा।‘ 'कुछ नहीं भावुक है, अभी ज़िन्दगी को करीब से नहीं देखा न, बस इसीलिए पागल हो रहा है।' 'चार किताबें पढ़ लेने से इन बच्चों का दिमाग खराब हो गया है।' 'एक बार शादी कर लो, उस लड़की को आसानी से भूल जाओगे।' 'अच्छा तुम्हें बाहर भेजा पढ़ने, यहां रहते तो कम से कम हमारी सुनते तो सही।' 'देख बेटा, हम उस लड़की को स्वीकार नहीं कर पा रहे, तू हमारी सुन ले, वरना हमारा बचना मुश्किल है।'
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