विविधा

भारत में महात्‍मा गांधी के प्रथम सत्‍याग्रह की शताब्‍दी को इस माह अप्रैल में मनाया जा रहा है। इसका शुभांरभ उत्‍तरी बिहार के पूर्व में अविभाजित चंपारण जिले से किया गया था। गांधीजी ब्रिटिश स्‍टेट मालिकों के द्वारा जिले के किसानों के खिलाफ बढ़ते हुए दुर्व्‍यवहार की जानकारी मिलने पर अप्रैल 1917 को वहां गए थे। चंपारण के किसानों ने गांधीजी को जानकारी दी कि वे अपनी भूमि के प्रत्‍येक 20 हिस्‍सों में से तीन पर अपने भूमि मालिकों के लिए खेती करने के कानून से बंधे हैं। इस व्‍यवस्‍था को तिनकथिया कहा जाता था। (Read in English)

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10 अप्रैल 2017 को चंपारण सत्याग्रह 100 साल का हो गया है।

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यदि हमें किसी ऐसे व्‍यक्तित्‍व का चयन करना हो जिनके जीवन और संगठनात्‍मक क्षमता ने किसी औसत भारतीय के जीवन को सर्वाधिक प्रभावित किया हो तो वह व्‍यक्तित्‍व निर्विवाद रूप से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार होंगे। (Read in English)

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डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जैसे कुछ ही व्‍यक्ति हैं जो देश के इतिहास और उसके राजनीतिक भाग्‍य पर गहरी छाप छोड़ते हैं। उन्‍होंने एक ऐसे संगठन की स्‍थापना की जो यकीनन दुनिया में सबसे बड़ा और सबसे स्‍थायी तथा वैचारिक रूप से काफी उन्‍नत है, जिसे समाज के बड़े वर्ग ने अपनाया है। (Read in English)

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यद्यपि कार्यस्थल की दुनिया एवं माहौल महिलाओं के लिए तेज़ी से बदल रहा है, इसके बावजूद, महिलाओं के लिए ‘कार्यस्थल पर समानता’ हासिल करने के लक्ष्य को पाने के लिए अभी हमें लंबी दूरी तय करनी है। हमें महिलाओं के वेतन, अवकाश, विशेषरूप से भुगतान सहित मातृत्व एवं शिशु देखभाल अवकाश, परिवार एवं बुज़ुर्गों की देखभाल के लिए विशेष अवकाश, गर्भावस्था के दौरान संरक्षण, स्तनपान कराने वाली महिलाओं की स्थिति के प्रति संवेदनशीलता और कार्यस्थल पर होने वाले यौन शोषण के क्षेत्र में महिलाओं के लिए पूर्ण समानता की ओर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है। (Read in English)

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प्राचीन काल से ही भारतीय इतिहास में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। हमें पता है कि वैदिक या उपनिषद् युग में मैत्रेयी, गार्गी और अन्य महिलाओं ने ब्रह्म के ऊपर विचार करने की योग्यता के आधार पर ऋषियों का स्थान प्राप्त किया था। हजारों ब्राह्मणों की उपस्थिति में विदुषी गार्गी ने ब्रह्म के ऊपर शास्त्रार्थ करने की चुनौती याज्ञवल्क्य को दी थी।

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