ग्यारह वर्ष पहले उषा चौमर अलवर में मैला ढोया करती थी आज वह कई राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय मंचों पर छूआछूत के खिलाफ़ और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को उठा रही हैं।
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ग्यारह वर्ष पहले उषा चौमर अलवर में मैला ढोया करती थी आज वह कई राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय मंचों पर छूआछूत के खिलाफ़ और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को उठा रही हैं।
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प्राचीन काल से ही सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए कई अनेक रोचक एवं अनोखे तरीके अपनाए जाते रहे हैं। आज वह एक कहानी की तरह लगती है। बीते दशकों में संचार टेक्नोलॉजी में आए चमत्कारिक परिवर्तन का सर्वाधिक फायदा सूचना जगत को हुआ है और मीडिया की इसपर निर्भरता बढ़ गई है।
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14 अप्रैल 2015 को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती मनाई जाएगी। वैसे तो डॉ. अंबेडकर का कद और छवि समय के साथ और बढ़ी है लेकिन दलित सशक्तिकरण के लिए देश के सर्वोत्तम अधिवक्ता के रूप में उनकी प्रसिद्धि के पीछे कई बार उनके बहु-आयामी व्यक्तित्व के कई विशिष्ट पहलू छिप जाते हैं। (Read in English: Dr. BR Ambedkar: Man Behind The Idea Of Modern India)
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जल ही जीवन है। जी हां, अगर जल नहीं है तो जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। जल या पानी एक आम रासायनिक पदार्थ है जिसका अणु दो हाइड्रोजन परमाणु और एक ऑक्सीजन परमाणु से बना है - H2O यह सारे प्राणियों के जीवन का आधार है। आमतौर पर जल शब्द का प्रयोग द्रव अवस्था के लिए उपयोग में लाया जाता है पर यह ठोस अवस्था (बर्फ) और गैसीय अवस्था (भाप या जल वाष्प) में भी पाया जाता है। पानी जल-आत्मीय सतहों पर तरल-क्रिस्टल के रूप में भी पाया जाता है।
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घिरती सांझ का अंधियारा, महिलाओं के कुछ झुंड घूंघट से मुँह ढके कुछ किशोरियों के साथ गांव की दहलीज से निकलकर तेजी से गांव से दूर खेतों की तरफ जा रही हैं, पास की सड़क किनारे कुछ महिलाएं बैठी हैं, जो सड़क पर वाहन की रोशनी पड़ते ही तेजी से उठकर पीछे की तरफ चल देती हैं। ये तमाम लड़कियां और महिलाएं, वो हैं जो शौच जाने के लिए पीले पड़ते जर्द चेहरों के साथ सांझ गहराने का इंतजार करती हैं ताकि शौच के लिए जा सकें, या सुबह होने से पहले अंधेरे में घर से बाहर खेतों में या जंगलों मे शौच के लिए चली जाती हैं।
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हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है –‘ यत्र नार्यस्ते पुजंते रमंते तत्र देवता’ यानी जहां नारी की पूजा होती है वहां ईश्वर का वास होता है। उपनिषदों में कहा गया है- ‘एकम सत विपरह बहुदा वदंथी’- इस दुनिया में केवल एक सच्चाई है जिसे अनेक तरह से बताया गया है। पुरुष और महिला उस परम शक्ति की दो महत्वपूर्ण रचनाएं हैं जो बल, ताकत और स्वभाव के लिहाज़ से एक बराबर हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथों और समाज में महिलाओं को इतना उच्च दर्जा प्राप्त था लेकिन सदियों से महिलाओं को समाज में उनके अधिकारों से वंचित रखा गया और उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से कई यातनाएं दी गईं। (Read in English: International Women’s Day: Declining Sex Ratio Is A Cause For Concern)
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