संपादकीय

भारत की जनसंख्‍या में पिछले 65 वर्ष में जबर्दस्‍त बदलाव आया और जनसंख्‍या बढ़कर 121 करोड़ पर पहुंच गई। विकास, साक्षरता और संचार का स्‍तर बढ़ने के कारण लोगों की आकांक्षाएं बढ़ गई जिससे शासन प्रणाली में परिवर्तन और नए-नए प्रयोग करना अनिवार्य हो गया। यहां तक कि अर्थव्‍यवस्‍था में भी बदलाव आया और कृषि हिस्‍सेदारी जबर्दस्‍त तरीके से गिरकर सकल घरेलू उत्‍पाद का 15 प्रतिशत से भी कम पर आ गई और निजी क्षेत्र उभरने लगे। 

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देश की सत्ता के केन्द्र दिल्ली में भाजपा की करारी हार और आप को मिले जनमत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में जनता के फैसले से बड़ा कुछ नहीं होता। इस जनमत ने भाजपा में ‘चाणक्य’ की भूमिका निभा रहे अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजय रथ को न केवल रोका बल्कि यह चेतावनी भी दी कि यदि समय रहते न चेते तो उनके उत्कर्ष की क्या परिणिति हो सकती है।

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रक्षा क्षेत्र में विदेशों पर निर्भरता कम करना और आत्‍मनिर्भरता प्राप्‍त करना सामरिक और आर्थिक दोनों कारणों से आज यह एक विकल्‍प के बजाय एक आवश्‍यकता है। 

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भारत विश्व में सबसे ज्यादा युवाओं का देश है जिसकी लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या की आयु 35 वर्ष से कम है। उम्मीद की जाती है कि वर्ष 2020 तक भारत की आबादी की औसत आयु 28 वर्ष होगी जबकि अमेरिका की 35, चीन की 42 और जापान की औसत आयु 48 वर्ष होगी। वास्तव में युवा किसी भी देश की जनसंख्या में सबसे गतिशील और जीवंत हिस्सा होते हैं।

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दुनियाभर में ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 2.5 बिलियन से ज्यादा लोग स्वच्छता की उचित सुविधाओं से वंचित हैं और एक बिलियन से ज्यादा लोग शौचालय न होने के कारण खुले में शौच करने के लिए विवश हैं। हमारे देश के हालात भी बेहतर नहीं हैं जहां आधी से ज्यादा आबादी खुले में शौच करती है।

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अटल जी के बारे लिखना उतना ही कठिन है जैसे गंगा की बहती धारा का वर्णन प्राय: शब्‍दातीत हो जाता है। कठोर होते हुए भी मृदुल, प्रतिपक्षी की आक्रामकता सहेजते हुए भी संबंधों में मैत्री की शालीनता, कठोर प्रहार करते हुए शब्‍द संयम और वाणी में सौम्‍यता, ऊँचाई होते हुए भी हरी दूब सी विनम्रता अटल जी को बस अटल जी बनाने वाले गुण हैं। 

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