देश में महिलाओं को उपभोग की वस्तु मानकर उनकी अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों सुधर जाओ, अब ऐसे अपराधियों को देश में फांसी लगने की शुरुआत बहुत जल्द होने वाली है...
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देश में महिलाओं को उपभोग की वस्तु मानकर उनकी अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों सुधर जाओ, अब ऐसे अपराधियों को देश में फांसी लगने की शुरुआत बहुत जल्द होने वाली है...
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सीएए महज एक टूल है, जो पड़ोसी इस्लामिक देशों से आए पीड़ित हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई व पारसियों को सुगमता से नागरिकता प्रदान करता है।
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निर्भया मामले में निर्भया के चारों हत्यारों को 22 जनवरी को फांसी के फंदे पर लटका दिया जाएगा। इसके साथ ही निर्भया केस में दी गई यह फांसी की सजा कानून की किताब में एक नजीर के तौर पर दर्ज हो जाएगी।
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... कुल जमा 300 लोग एनडीटीवी से निकाले गए, मल्लिकार्जुन खड़गे नहीं 'खड़के'...; 300 लोग दैनिक जागरण से निकाले गए, खड़गे नहीं खड़के; 250 लोग टाइम्स ऑफ इंडिया से निकाले गए, खड़गे नहीं खड़के...; करीब इतने ही लोग हिंदुस्तान टाइम्स से निकाले गए, खड़गे नहीं खड़के; 700 लोग सहारा इंडिया और अन्य मीडिया संस्थानों से निकाले गए, खड़गे नहीं खड़के...; नरेंद्र मोदी शासन में 5000 से ज्यादा छोटे और मझोले अखबार बंद हो गए और हजारों मीडियाकर्मी बेरोजगार हुए, खड़गे तब भी नहीं खड़के...। अब ऐसा क्या हुआ कि तीन 'खास' मीडियाकर्मियों को जब 'उनके' संस्थानों ने निकाला तो खड़गे न सिर्फ 'खड़के' बल्कि खूब जोर से 'भड़के' भी...???!!!
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देश में नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली ‘वस्तु एवं सेवा कर' (जीएसटी) को लागू किए जाने के बाद एक साल की अवधि पूरी हो चुकी है। इस एकल टैक्स ने उन 17 करों और अनगिनत उपकरों (सेस) का स्थान लिया है जिन्हें केन्द्र एवं राज्य सरकारों ने लागू किया था। इससे पहले देश में अत्यंत जटिल कर प्रणाली लागू थी क्योंकि प्रत्येक करदाता को तरह-तरह के रिटर्न भरने पड़ते थे, उन्हें कई इंस्पेक्टरों एवं कर निर्धारण अधिकारियों का सामना करना पड़ता था, अपने किसी भी उत्पाद की आवाजाही होने पर प्रत्येक राज्य में अलग से टैक्स अदा करना पड़ता था और तरह-तरह की बाधाओं का सामना करने पर करदाता टैक्स अदायगी से बचने के उपाय ढूंढ़ने लगता था। जीएसटी का आधारभूत विचार मौलिक नहीं था। दुनिया के कई देशों में प्रयोग के तौर पर इसे लागू किया जा चुका है। अनेक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ही भारतीय मॉडल को विकसित करना जरूरी था। भारत राज्यों का एक ऐसा संघ है, जिसमें केन्द्र और राज्यों दोनों को ही राजकोषीय अथवा वित्तीय दृष्टि से सुदृढ़ होना अत्यंत जरूरी है। भारत राज्यों का परिसंघ नहीं है, इसलिए केन्द्र सरकार के राजस्व की कीमत पर राज्यों की राजस्व स्थिति को सुदृढ़ नहीं किया जा सकता है। यदि केन्द्र का ही अस्तित्व बरकरार नहीं रह पाएगा, तो ‘भारत’ यानी राज्यों के संघ का क्या होगा?
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एक फाउंडेशन द्वारा किया गया जनमत सर्वेक्षण-महिलाओं के लिए विश्व के सबसे खतरनाक देश 2018-आंकड़ों पर नहीं बल्कि अज्ञात व्यक्तियों की अवधारणाओं पर आधारित है।
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