संपादकीय

घरेलू काम काज मे हाथ बंटाकर रोजी-रोटी कमाने वाली 28 साल की पार्वती किताब, अखबार को हसरत से देखती है, पढ़ना उसके लिए सपना है। पार्वती निरक्षर है, अलबत्ता उसके दो भाई कॉलेज मे स्नातकोत्तर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उसकी लगभग 50 साल की मां सावित्री भी निरक्षर है, सावित्री बताती है कि उसकी मां ने भी कभी पढ़ाई नहीं की। मां बताती है कि उसका पति और पार्वती का पति कुछ पढ़े-लिखे जरूर हैं। पिता की पहली वाली पुरुषो की पीढ़ी अनपढ़ ही थी लेकिन अब पार्वती के बेटे के साथ उसकी नौ साल की बेटी एक अच्छे स्कूल मे पढ़ती है। अब पार्वती का सपना है कि बड़ी होकर उसकी बेटी 'बड़े घरों की मेडमों' जैसी नौकरी करे, अपनी गाड़ी खुद चलाए और जब उसका मन हो शादी करे ताकि उस के बच्चे अनपढ मां की संतानें नहीं हों। जब उसे सुझाव दिया जाता है कि 'बच्ची के साथ तुम भी पढ़ो' तो उसके चेहरे पर उदासी तैरने लगती है। मद्धिम सी आवाज मे बुदबुदाती है... "अब कहां पढ़ पाऊंगी?"

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ब्रिटिश हुकूमत का मतलब क्या था यह उस समय के आंदोलन के इतिहास के एक अंश से समझा जा सकता है। महात्मा गांधी ने ‘यंग इंडिया’ में लिखा“ हमें अनुभव होता हो या न होता हो, कुछ दिन से हम पर एक प्रकार का फौजी शासन हो रहा है। फौजों का शासन आखिर है क्या? यही कि सैनिक अफसर की मर्जी ही कानून बन जाती है और वह चाहे साधारण कानून को ताक पर रखकर विशेष आज्ञाएं लाद देता है और जनता बेचारी में उनके विरोध करने का दम नहीं होता, पर मैं आशा करता हूं, वे दिन जाते रहे कि अंग्रेज शासकों के फरमानों के आगे हम चुपचाप सिर झुका दें...”

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हमारे देश की 16 फीसदी से ज्यादा आबादी अनुसूचित जातियों के लोगों की है। एक लंबे समय तक सामाजिक बहिष्कार होने के कारण समाज का एक वर्ग व्यक्तिगत वृद्धि एवं विकास के लिए आवश्यक अवसरों से वंचित रहा है। बाबासाहेब अंबेडकर ने इस वर्ग को 'वंचित वर्ग' कहा। इसी पृष्ठभूमि से आने वाले बाबासाहेब इस वर्ग की जरूरतों और चुनौतियों से परिचित थे। अपने सार्वजनिक जीवन में बाबासाहेब ने कई उपलब्धियों की ऊंचाइयों को छुआ। विश्व के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर वह समुदाय के हित में कार्य करने के लिए स्वदेश लौटे।

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वित्त मंत्री ने साफ कर दिया है कि उनके पास किसानों के कर्ज माफ करने लायक पैसे नहीं हैं। राज्य सरकारें अपना हिसाब लगाएं और चाहें तो कर्ज माफ कर दें और न चाहें तो माफ न करें।

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पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की तरक्की ने देश को दुनिया के ऊर्जा नक्शे पर विशेष पहचान दिलाई है। हाल ही में भारत की ऊर्जा क्षमता में परमाणु ऊर्जा के रूप में सात गीगा वॉट (7000 मेगा वॉट) ऊर्जा क्षमता को शामिल किए जाने का निर्णय भारत की गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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यूनान के एक प्रसिद्ध दार्शनिक ने कहा था कि ‘अच्छी शुरुआत आधी सफलता होती है’। सरकारी गाड़ियों पर लाल बत्ती लगाने की संस्कृति को खत्म करने के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया निर्णय इस दिशा में लड़े जा रहे युद्ध के खिलाफ एक अच्छी शुरुआत साबित हो सकता है। (Read in English)

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