चुनावी जीत हासिल कर लेने के बाद नेता इस तथ्य को पूरी तरह विस्मृत कर देते हैं कि अब उनको अगले पांच साल के बाद एक बार फिर से उसी जनता-जनार्दन के समक्ष जाना होगा जिनके सहयोग से वर्तमान में उनकी नैया पार हो पाई है...
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चुनावी जीत हासिल कर लेने के बाद नेता इस तथ्य को पूरी तरह विस्मृत कर देते हैं कि अब उनको अगले पांच साल के बाद एक बार फिर से उसी जनता-जनार्दन के समक्ष जाना होगा जिनके सहयोग से वर्तमान में उनकी नैया पार हो पाई है...
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साल 1925 में हिन्दुत्व की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित एक दल जनसंघ का अवतरण हुआ। श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बलराज मधोक, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी व मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं ने जनसंघ को सुदृढ़ करने के लिए अथक प्रयास किए और आज वही जनसंघ भाजपा के रूप में भारतीय राजनीति के मैदान में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में मौजूद है...
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साल 1984 में 14 अप्रैल को दलितों के हितों के रक्षार्थ कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी का गठन किया। उनसे पहले, संभवत: दलित समाज के हितों के लिए विशेष समर्पित कोई भी पार्टी अस्तित्व में नहीं थी। इस पार्टी के गठन के पश्चात दलितों को कांशीराम के रूप में एक ‘मसीहा’ प्राप्त हुआ। अति वयोवृद्ध हो जाने के बाद कांशीराम ने एक शिक्षित, परिश्रमी एवं युवा मायावती को पार्टी के दायित्व स्थानान्तरित कर दिए...
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आज कर्नाटक सम्पूर्ण विश्व में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पौत्र प्रज्ज्वल रेवन्ना की अनैतिकता के कारण कुख्यात हो रहा है। यदि हम इतिहास पर नजर डालें तो प्रज्ज्वल रेवन्ना का चरित्र हमें मुगल शासकों का स्मरण दिलाता है।
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स्वतंत्रता के 75 सालों बाद अब भारत का लोकतंत्र परिपक्वता की ओर अग्रसर हो चुका है। अब से पहले जनता जाने-माने राजनीतिक चेहरों तथा आकर्षक नारों से प्रेरित होकर वोट देती रही है, लेकिन, मौजूदा चुनावी रुझानों का यदि आंकलन करें तो एक बड़ी संख्या में लोग राजनीतिक दलों द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा करके ही अपने मताधिकार का प्रयोग करते दिख रहे हैं...
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भारतीय जनता पार्टी विश्व का एक वृहद राजनैतिक दल है। इस दल की प्रगति का यदि हम आकलन करें तो इसके कार्यकर्ताओं का पार्टी के प्रति समर्पण, निष्ठा व त्याग का भाव देखते ही बनता है...
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वर्ष 2024 के सत्ता संग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत पक्की मानी जा रही है। लेकिन, क्या अगले, यानी, साल 2029 के चुनावों में मोदी ही सत्ता के केंद्र में बने रहेंगे…? मोदी के बाद सत्ता का ताज किस मस्तिष्क पर सुशोभित होगा, यह यक्ष प्रश्न अब भारतीय जनमानस को गुदगुदाने लगा है।
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भारत का तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनना अब उतना मुश्किल नहीं लग रहा है। अगले पांच वर्षों में यह पूरी तरह सम्भव लगता है। भारतीय अर्थव्यवस्था से ऊपर के दो पायदानों पर फिलहाल जापान व जर्मनी विराजमान हैं। इन दोनों देशों की अर्थव्यवस्था की वार्षिक वृद्धि दर एक से दो फीसदी के बीच है जबकि भारत में यह अनुमान 7.6 फीसदी का है। स्पष्ट है कि यह दर हासिल करना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है।
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भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जनजातीय आबादी है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में जनजातीय जनसंख्या कुल जनसंख्या की लगभग 8.9 फीसदी है। पूरे देश में जनजातीय लोगों के पास अद्वितीय जीवनशैली और रीति-रिवाजों के साथ समृद्ध परंपराएं, संस्कृतियां और विरासत हैं...
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भारत एक समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण देश है। देश में अनेक महत्वपूर्ण प्राचीन स्थलों और हमारी विरासत को दर्शाते हुए स्मारकों की मौजूदगी से यह बात पूरी तरह सिद्ध भी होती है। लेकिन, कई दशकों की लगातार उपेक्षा के बाद, भारत के लंबे सभ्यतागत इतिहास वाले विभिन्न स्थलों को संरक्षण, पुनरुद्धार और विकास परियोजनाओं के माध्यम से अब पुनर्जीवित किया जा रहा है...
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