यूपीआई के रूप में डिजिटल भुगतान क्रांति का पूरा हुआ एक दशक

फोटो : 31 जुलाई 2026 तक यूपीआई का वार्षिक लेनदेन मात्रा (करोड़ में)।

भारतीय रिज़र्व बैंक की नियामक निगरानी में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा 25 अगस्त, 2016 को आरंभ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस, यानी यूपीआई, के दस साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान, यूपीआई भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र की रीढ़ और वित्तीय समावेशन का अहम चालक बनकर उभरा है।

यूपीआई के एक दशक से अधिक के संचालन में, असाधारण विस्तार और गति रही है। इससे वार्षिक लेनदेन वित्त वर्ष 2016-17 में 1.78 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से अधिक हो गई है, जो वित्‍तीय विनिमय में लगभग 13,000 गुना वृद्धि है। इसी के तुल्‍य, लेनदेन वित्त वर्ष 2016-17 में 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 314 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो वित्‍तीय लेनदेन में 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि है।

आज यूपीआई भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के सबसे सफल स्तंभों में से एक बन गया है। यह एक ऐसा अंतर्संचालनीय उपाय है, जिससे लेन-देन के लाभार्थी को तुरंत धनराशि उपलब्ध हो जाती है। यह एक ही एप्लिकेशन के माध्यम से निर्बाध दो व्यक्तियों के बीच सीधे पैसे भेजना और किसी व्यक्ति द्वारा किसी दुकानदार या व्यापारी को भुगतान करना सक्षम बनाता है। आज यह भारत में लेनदेन के तरीके बदल कर लाखों उपयोगकर्ताओं के भुगतान का पसंदीदा माध्यम बन गया है। यूपीआई ने डिजिटल विभाजन में कमी वित्तीय समावेशन को बढ़ावा और डिजिटल वित्तीय सेवाओं की पहुंच का विस्तार कर, पूरे देश में लोगों और समुदायों को सशक्त बनाने के साथ ही व्यापक आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा दिया है।

मात्रा और मूल्य दोनों में यह वृद्धि, आम जनता और व्यापारियों के बीच रोजमर्रा की वस्‍तुएं खरीदने के लिए छोटे और बार-बार होने वाले दैनिक लेनदेन में यूपीआई की बढ़ती भूमिका दर्शाता है। यूपीआई के अभूतपूर्व विस्‍तार, विश्वसनीयता और अंतर्संचालनीयता को वैश्विक मान्यता मिल गई है, और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इसे लेनदेन के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली माना है, जो मापनीय, समावेशी और नवोन्मेषी डिजिटल सार्वजनिक अधोसंरचना स्‍थापित करने में भारत की अग्रणी भूमिका रेखांकित करता है।

यूपीआई से भुगतान के मामले में वर्ष 2026 काफी महत्वपूर्ण रहा है। मई माह में इसके जरिए मासिक लेनदेन की संख्या पहली बार 2,300 करोड़ के पार 2,320 करोड़ पहुंच गई, जो यूपीआई के व्यापक प्रसार को दर्शाता है। पूरे वर्ष यह गति जारी रही और जुलाई माह में यूपीआई के मासिक लेनदेन की संख्या 2,366 करोड़ दर्ज की गई जो एक दशक में सबसे अधिक है।

यूपीआई के शुभांरभ से ही संस्थागत भागीदारी में लगातार और व्यापक विस्तार रहा है। यूपीआई पर सक्रिय बैंकों की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 44 बैंकों से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 703 पहुंच गई है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक और सहकारी बैंक शामिल हैं, जिससे यूपीआई की व्यापक पहुंच हो गई है। प्रत्येक बैंक प्रेषक और लाभार्थी भुगतान सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करता है, और एनपीसीआई सभी प्रतिभागियों के प्रदर्शन मानकों की निगरानी रखता है।

यूपीआई लेनदेन के विश्लेषण से भुगतान के विभिन्न प्रकारों में मात्रा और मूल्य के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। व्यक्ति-से-व्यापारी लेनदेन कुल लेनदेन की मात्रा का 63 प्रतिशत  है, जो बार-बार होने वाले, कम मूल्य के खुदरा भुगतानों में यूपीआई का व्यापक उपयोग दर्शाता है। इसके विपरीत, व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन मूल्य में सबसे अधिक हैं, जिनका योगदान 71 प्रतिशत है। जो लोगों के बीच उच्च-मूल्य हस्तांतरण में इनका उपयोग दिखाता है। यह अंतर व्यापक खुदरा भुगतान मंच और बड़े मूल्य के धन हस्तांतरण के विश्वसनीय माध्‍यम के रूप में यूपीआई की दोहरी भूमिका रेखांकित करती है।

वित्त वर्ष 2026 में, कुल 24,162 करोड़ रुपये के यूपीआई लेनदेन में देशभर में रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान में विशेष रूप से व्यापार संवर्ग में मजबूत गति के साथ इस प्लेटफॉर्म का गहन एकीकरण दिखा। ग्राहक द्वारा किसी दुकानदार, व्यापारी या बिजनेस को डिजिटल माध्यम से पैसे का लेनदेन मुख्य रूप से छोटी राशि के भुगतानों से प्रेरित थे, जिनमें से 86 प्रतिशत 500 रुपये से कम थे। यह नियमित खुदरा और दैनिक वाणिज्य में यूपीआई का गहन इस्‍तेमाल दर्शाता है। जबकि उच्च मूल्य के लेनदेन में भी वृद्धि जारी रही। आपस में सीधे लेनदेन में भी कम मूल्य के हस्तांतरण का व्यापक उपयोग देखा गया, जबकि 500 रुपये से अधिक के लेनदेन का 41 प्रतिशत यूपीआई की नियमित व्यक्तिगत भुगतानों और एक बार में बहुत बड़ी राशि के धन हस्तांतरण दोनों को सुविधाजनक बनाने में बढ़ती बहुपयोगी क्षमता दर्शाता है।

घरेलू भुगतान के क्षेत्र में नवाचार के तौर पर आरंभ यह उपाय आज डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक मानक बन गया है। साल 2025 तक, यूपीआई की विश्व के वास्तविक समय लेनदेन भुगतान में लगभग 49 प्रतिशत मात्रा रही। इसी कारण अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष ने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना है। यूपीआई ने हर दिन 66 करोड़ से अधिक लेनदेन संसाधित कर, वैश्विक भुगतान नेटवर्क को पीछे छोड़ दिया है। इससे भारत त्वरित, सुरक्षित और समावेशी डिजिटल भुगतान में विश्व में अग्रणी बन गया है।

यूपीआई सीमा पार डिजिटल भुगतान के वैश्विक मंच के रूप में भी उभर कर सामने आया है और अभी यह संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव सहित 11 देशों में संचालित है।

यूपीआई का अगला दशक भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य में और अधिक परिवर्तनकारी रहेगा। यूपीआई पारितंत्र में नए उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों को शामिल कर, केन्‍द्र सरकार यूपीआई-आधारित नवोन्‍मेष के अगले चरण को सक्षम बनाने और निरंतर नीतिगत समर्थन, तकनीकी प्रगति और अधिक वित्तीय समावेशन द्वारा भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली सुदृढ बनाने को  प्रतिबद्ध है।



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