
डॉ0 वैदिक अपने मौलिक चिंतन, प्रखर लेखन और विलक्षण वक्तव्य के लिए विख्यात हैं। अंग्रेजी पत्रकारिता के मुकाबले हिन्दी में बेहतर पत्रकारिता का युगारंभ करने वालों में डॉ0 वैदिक का नाम अग्रणी है। वे लगभग दस वर्षों तक पी0टी0आई0 भाषा (हिन्दी समाचार समिति) के संस्थापक-संपादक और उसके पहले नवभारत टाइम्स के संपादक (विचार) रहे हैं। फिलहाल दिल्ली के राष्ट्रीय समाचार पत्रों तथा प्रदेशों के लगभग 200 समाचार पत्रों में भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर डॉ. वैदिक के लेख हर सप्ताह प्रकाशित होते हैं।
जन्म 30 दिसम्बर, 1944, इंदौर सदा प्रथम श्रेणी के छात्र दर्शन और राजनीतिशास्त् मुख्य विषय। अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में 1971 में ‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय’ से पीएच0डी0। विषय ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमेरिकी प्रतिस्पर्धा।’ संस्कृत, फारसी और रूसी भाषा का विशेष प्रशिक्षण। अपने अफगानिस्तान सबंधी शोध-कार्य के दौरान न्यूयॉर्क की कोलम्बिया यूनीवर्सिटी, लंदन के स्कूल ऑफ ओरिएन्टल स्टडीज, मास्को की विज्ञान अकादमी और काबुल विश्वविद्यालय में अध्ययन का अवसर। लगभग अस्सी देशों की यात्राएँ अनेक देशों के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और विदेशमंत्रियों से व्यक्तिगत परिचय। 1999 में संयुक्तराष्ट्र संघ में भारतीय प्रतिनिधि के तौर पर तीन व्याख्यान।
भारतीय भाषाओं के संघर्ष के प्रतीक 1966 में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का शोधग्रंथ हिन्दी में लिखने का आग्रह ‘स्कूल ऑफ इंटरनेशलन स्टडीज’ से इसी कारण निष्कासन संसद में दो वर्ष तक अपूर्व हंगामा राष्ट्रीय विवाद अंततः विजय पहली बार उच्च शोध के लिए भारतीय भाषाओं के द्वार खुले भारतीय भाषाओं के समर्थन में अनेक बृहत सम्मेलनों और आंदोलनों के सूत्रधार 12 वर्ष की अल्पायु में भाषा के प्रश्न पर पहली जेल-यात्रा। उसके बाद भाषा तथा छात्र-आंदोलनों में अनेक जेल-यात्राएँ।
दिल्ली के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में राजनीतिशास्त्र का अध्यापन, 1970-74। इसके पूर्व राष्ट्रीय प्रतिभा छात्रवृत्ति तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की छात्रवृत्ति। ‘इंडियन कौंसिल ऑफ सोशल सांइस रिसर्च’ द्वारा अफगानिस्तान पर शोध-कार्य के लिए वरिष्ठ शोधवृत्ति। 1981 से 1983 के बीच ‘इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एण्ड एनालिसिस’ तथा ‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय’ के अंतरराष्ट्रीय राजनय विभाग में ‘सीनियर फेलो’ के तौर पर शोध एवं अध्यापन। 1999 में विस्कॉन्सिन युनिवर्सिटी द्वारा आयोजित दक्षिण एशियाई विश्व सम्मेलन में उदघाटन-भाषण !
छात्र-काल में वक्तृत्व के अनेक अखिल भारतीय पुरस्कार। भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों में अनेक व्याख्यान। अनेक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व। दूरदर्शन और आकाशवाणी पर 1962 से अब तक अगणित कार्यक्रम। पिछले 45 वर्षों में राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय मामलों पर सैकड़ों लेख, हजारों संपादकीय टिप्पणियाँ और दर्जनों शोध-पत्र प्रकाशित। पुस्तकें: ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमेरिकी प्रतिस्पर्धा’ ; ‘हिन्दी पत्रर्कारिता: विविध आयाम’ः ‘भारतीय विदेश नीति ; नए दिशा संकेत’ः ‘एथनिक क्राइसिस इन श्रीलंका: इंडियाज ऑप्शन्स’; ‘हिन्दी का सम्पूर्ण समाचार-पत्र् कैसा हो ?’; ‘भारतीय भाषाएँ लाओ, अंग्रेजी हटाओ’; ‘वर्तमान भारत’; अफगानिस्तानः कल, आज और कल’ ‘महाशक्ति भारत’ तथा ‘भाजपा, हिंदुत्व और मुसलमान’।
विश्व हिन्दी सम्मान (2003), महात्मा गांधी सम्मान (2008) दिनकर शिखर सम्मान, पुरूषोत्तमदास टंडन स्वर्ण-पदक, गोविंदवल्लभ पंत पुरस्कार, हिन्दी अकादमी सम्मान, लोहिया सम्मान, काबुल विश्वविद्यालय पुरस्कार, मीडिया इंडिया सम्मान, लाला लाजपतराय सम्मान आदिद्य अनेक न्यासों, संस्थाओं और संगठनों में सक्रिय। अध्यक्ष, भारतीय भाषा सम्मेलन एवं भारतीय विदेश नीति परिषद !





