
अपनी लाड़ली नन्ही सी बच्ची को गोद में उठाए सुनीता सांदरा अत्यन्त प्रसन्न नजर आ रही थी। केवल दो दिन पहले ही बीजापुर जिला अस्पताल में इस बालिका का जन्म हुआ था। इससे पहले दो बार सुनीता का गर्भ गिर चुका था। क्योंकि, गर्भावस्था में जटिलता के कारण उसे बीजापुर से 170 किलोमीटर दूर जगदलपुर अस्पताल में भेजा गया था लेकिन तब चिकित्सीय कुशलता और उपकरणों की कमी के कारण ऐसे मामलों में इलाज की सुविधाएं नहीं थी। इसके परिणामस्वरूप कई बार अजन्मे शिशु या माता की मृत्यु हो जाती थी। 2015 तक जिला अस्पताल में बहुत ही कम कर्मचारी कार्य करते थे जिनमें तीन से चार डॉक्टर, 12 नर्सें और प्रमुख सर्जरी करने के लिए ऑपरेशन थिएटर में भी पर्याप्त उपकरण नहीं थे। (Read in English)






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