नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्वनवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। ऎसे श्रद्धालुओं की कमी नहीं है, जो पूरे नौ दिनों तक कन्या पूजन करते हैं। वहीं ज्यादातर लोग अष्टमी के दिन विधि-विधान से कन्या पूजन कर उन्हे भोजन कराते हैं। शक्ति साधना के पर्व में कुंवारी पूजन का महत्वपूर्ण स्थान है। स्त्रेह, सरलता और पवित्रता की दृष्टि से कुंवारी कन्याएं साक्षात शक्ति स्वरूपा हैं। अन्य पूजन और अनुष्ठानों में ब्रहभोज की प्रधानता बताई गई है, लेकिन नवरात्रि में शक्ति की उपासना के दौरान अनुष्ठानों की पूर्णता के लिए कन्या पूजन की प्राथमिता बताई गई है। शक्ति का प्रादुर्भाव कुंवारी रूप में हुआ है जिसे देवताओं ने अंशभूत शक्तियां प्रदान की है। वृहन्नली तंत्र के अनुसार पूजित कुंवारियां विघ्न, भय और उत्कृष्ठ शत्रु को नष्ट करने में सक्षम हैं। कुंवारी का पूजन में जाति भेद का विचार करना भी अनुचित है। दुर्गाष्टमी और महानवमीं के दिन जो साधक कुंवारी कन्याओं का पूजन कर कन्याओं को अन्न-वस्त्र और जल अर्पण करते हैं, उसका फल अन्न मेरू के समान और जल समुद्र के समान अक्षुण्य और अनंत होता है। नवरात्र अनुष्ठान में साधक को दो से दस वर्ष की दस कन्याओं के साथ भैरव पूजन करना चाहिए। दो वर्ष की कन्या कुमारी, तीन वर्ष की त्रिमुति, चार वर्ष की कन्या कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छ: वर्ष की रोहिणी, सात वर्ष की चंद्रिका, आठ वर्ष की शांभवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा मानी है। अत: दस वर्ष तक की कन्याओं को ही पूजन में शामिल किया जाना चाहिए। शास्त्र में 11 वर्ष से अधिक आयु वाली कन्याओं के पूजन को शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है ।           

साभार-khaskhabar.com

 


Subscribe now

Login and subscribe to continue reading this story....

Already a user? Login



Related Items

  1. सामरिक महत्व, सतत विकास का अद्भुत उदाहरण है ग्रेट निकोबार परियोजना

  1. 'मर्दानी ३' ने नहीं समझा, ‘मौन’ का भी होता है महत्व...

  1. नवरात्रि के नौ दिनों में नौ शक्तियों की महिमा




Mediabharti