क्यों ताज महल देखकर तुरंत आगरा से भागता है पर्यटक? कितने पर्यटक राम बाग, एत्माद्दौला, चीनी का रोजा, महताब बाग जाते हैं? क्या पर्यटन विभाग को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए?
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क्यों ताज महल देखकर तुरंत आगरा से भागता है पर्यटक? कितने पर्यटक राम बाग, एत्माद्दौला, चीनी का रोजा, महताब बाग जाते हैं? क्या पर्यटन विभाग को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए?
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आगरा की सड़कों और फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण ने शहर के बुनियादी ढांचे को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सदर बजार से लेकर बेलनगंज, हॉस्पिटल रोड और पालीवाल पार्क तक, सड़क विक्रेताओं और फेरीवालों ने फुटपाथों पर कब्जा कर लिया है। इससे पैदल चलने वालों को व्यस्त सड़कों पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है...
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आगरा के नियोजित विकास के लिए दीर्घकालीन सोच, नीतियां और कार्य योजनाएं बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की ही नहीं है। इस कार्य को अंजाम देने के लिए स्थानीय स्तर पर निर्वाचित सांसदों, विधायकों और पार्षदों के बीच नियमित संवाद अनिवार्य है...
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बीस लाख से अधिक लोगों का शहर आगरा सरकारी लापरवाही और गलत प्राथमिकताओं का जीता-जागता सबूत और असफलता की बेहतरीन मिसाल है...
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पृथ्वी से अंतरिक्ष पहुंचना आसान है परन्तु दयालबाग से फतेहाबाद रोड तक का सफर अनिश्चितताओं और विलंब से प्रभावित हो सकता है। आगरा शहर में कहीं भी सही टाइम पर पहुंचना बाधा दौड़ में भाग लेना जैसा हो गया है। क्या वाकई यातायात प्रबंधन एक ‘रॉकेट साइंस’ है, या ट्रैफिक पुलिस और यातायात विभाग के कर्ता-धर्ता इतने अक्षम या हकीकत से दूर चल रहे हैं?
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आगरा, अपने ऐतिहासिक गौरव और मनमोहक वास्तुकला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन आज यह शहर एक गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहा है। पॉलीथीन, छोटी प्लास्टिक की बोतलें और 100-200 ग्राम के पाउच जैसे एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक के अंधाधुंध इस्तेमाल ने शहर की जल निकासी और सीवर प्रणाली को अवरुद्ध कर दिया है। यह समस्या न केवल शहर की सुंदरता को धूमिल कर रही है, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन गई है।
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