नल खुलता है। पानी गिरता है। हम चैन की सांस लेते हैं। लेकिन ज़मीन के नीचे? सन्नाटा है। सूखी दरारें हैं। और एक डर है, जो धीरे-धीरे हमारे भविष्य को खा रहा है...
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नल खुलता है। पानी गिरता है। हम चैन की सांस लेते हैं। लेकिन ज़मीन के नीचे? सन्नाटा है। सूखी दरारें हैं। और एक डर है, जो धीरे-धीरे हमारे भविष्य को खा रहा है...
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बीते 9 अप्रैल को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने ‘आरोग्य वन’ पहल शुरू की। राजमार्गों के किनारे अब औषधीय पेड़ों के जंगल उगेंगे। सफ़र होगा, और साथ में सेहत का पैग़ाम भी मिलेगा। सड़कें दौड़ती थीं। अब पेड़ भी साथ दौड़ेंगे। हवा में सिर्फ़ धूल नहीं, शिफ़ा की ख़ुशबू भी होगी। अब ज़रा पीछे चलते हैं।
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दुनिया में जलवायु सम्मेलनों की धूम मची हुई है। विद्यार्थी निबंध लिख रहे हैं। मंच सजे हैं। संकल्प पढ़े जा रहे हैं। तालियां बज रही हैं। लेकिन, धरती तप रही है। हवा में जहर घुल रहा है। मौसम का मिज़ाज बिगड़ चुका है...
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पिछले दिनों, नई दिल्ली में एआई शिखर सम्मेलन की चकाचौंध रही। दुनियाभर के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और टेक कंपनियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर मंथन किया। मंच पर ‘डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ की बातें हुईं। ऐप्प, क्लाउड और स्मार्ट प्लेटफॉर्म की चर्चा हुई। लेकिन, इसी डिजिटल उछाल के साथ एक नया संकट भी लगातार गहरा रहा है। हर नई तकनीक, हर अपग्रेड, हर नया डिवाइस… पीछे छोड़ जाता है, ई-कचरे का एक और ढेर।
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कभी जिसके तट पर बंसी बजी थी, आज वहीं सन्नाटा है। कभी जिसके जल में आस्था डुबकी लगाती थी, आज वही जल ज़हर बन चुका है। ब्रज मंडल की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। नदी नहीं, नाला दिखती है। पानी नहीं, काला, बदबूदार, झाग से भरा तरल बहता है। तस्वीरें चीख रही हैं। सच सामने है। सवाल सिर्फ एक है कि क्या हम सचमुच यमुना को बचाना चाहते हैं?
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टाइम मशीन में बैठकर लौटते हैं पौराणिक काल में और देखते हैं, गोकुल में यमुना किनारे फैला एक हरा-भरा वन। ऊंचे-ऊंचे वृक्षों की छांव में मोर पंख फैलाए नाच रहे हैं, रंग-बिरंगी तितलियां हवा में रेशमी नक़्श बनाती उड़ रही हैं, गायें शांति से चर रही हैं, हिरण चौकड़ी भरते दौड़ रहे हैं। कदंब के पेड़ तले श्रीकृष्ण अपनी बांसुरी की मधुर तान छेड़ते हैं और गोपियां मानो किसी रूहानी जादू में डूबी झूम उठती हैं। पूरा ब्रज जैसे संगीत, प्रकृति और भक्ति का एक जीवंत स्वर्ग हो...
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