कहावत है 'बच्चे मन के सच्चे', यही वजह है कि वे अपनी भावनाओं को बहुत लम्बे समय तक दबाकर नहीं रख पाते हैं। वे जैसा अनुभव करते हैं, वही बोल भी देते हैं। यह भी सत्य है कि बच्चों के मुस्कुराते हुए चेहरे बेहद प्यारे लगते हैं। मगर गंभीर बात यह है कि कोरोना महामारी का सबसे अधिक प्रभाव इन्हीं बच्चों को झेलना पड़ा है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...
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