नई दिल्ली । उरी हमले के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब सेना और सरकार आतंकवाद से निपटने को लेकर काफी गंभीर है। इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान काफी बौखलाया हुआ है और लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर गोलीबारी कर रहा है। ऐसे भारत सरकार और सेना इसके लिए लंबी और कारगर योजना बनाने पर विचार कर रही है। सरकार और सेना अब आतंकवाद के स्लीपर सेल की कमर तोडऩे की तैयारी में लगी हुई है। सशस्त्र बलों ने सरकार से कहा है कि उन्हें 6 महीने तक अभियान चलाने का मौका दिया जाए, तो वह ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को ठीक-ठाक तरीके से तबाह कर सकती है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि लाइन ऑफ कंट्रोल के उस पार सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारियों ने सरकार से कहा है कि कभी-कभार के हमलों से आतंकवादियों की कमर नहीं टूटेगी और अगर कुछ ठोस करना है, तो मीडियम टर्म के लिए एक योजना तैयार करनी होगी। सुरक्षा बलों के वरिष्ठ रणनीतिकारों ने सरकार से यह भी कहा है कि कश्मीर में मुश्किल हालातों और देश के दूसरे हिस्सों में आतंकवादी हमलों की आशंका के लिए तैयार रहना होगा। आर्मी के एक उच्च अधिकारी ने कहा, ‘हमें लगातार अभियान चलाने पर गौर करना होगा। आतंकी नेटवर्क बैकफुट पर तो है, लेकिन उसे गंभीर चोट पहुंचाने के लिए हमें मीडियम टर्म योजना तैयार करनी होगी, यानी कम से कम 6 महीने तक अभियान चलाने की जरूरत होगी। इक्का-दुक्का वार करने से आतंकवादियों पर असर नहीं होगा।’ वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों के सरगना भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने के लिए आने वाले हफ्तों में और आतंकवादियों को भेजने की कोशिश करेंगे। ऐसे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीरी हिस्से में इनके और ठिकाने बन सकते हैं। सेना का मानना है कि इन ठिकानों को नष्ट करना होगा। सैन्य अधिकारियों ने सरकार के आगे साफ किया है कि नियंत्रण रेखा के पार इस तरह के हमले करने के लिए कश्मीर में सुरक्षा बढ़ाने की भी जरूरत होगी। उनका कहना है कि सीमा पर चौकसी बढ़ाने के साथ ही घाटी में लोगों का भरोसा जीतना होगा। इन अधिकारियों का कहना है कि घाटी में आतंकवादियों का साथ देने वाले गुटों का हौसला कमजोर पड़ा है और उन पर कार्रवाई करने का यह अच्छा मौका है। एक टॉप सैन्य अधिकारी ने कहा, ‘हमारे पास अभी मौका है। नियंत्रण रेखा पर हमारी पकड़ उस पार के लोगों के मुकाबले अच्छी है। हमारे पास यही मौका है कि हम ऐसा अंतर पैदा कर दें, जिससे सीमापार आतंकवाद का साथ देने वाले डर जाएं।’ भारतीय सेना और खुफिया विभाग से जुड़े लोगों का मानना है कि पीओके में 40 से ज्यादा आंतकी शिविर हैं। ये शिविर भीतरी इलाकों में बने हुए हैं। इनके अलावा एलओसी के पास करीब 50 लॉन्च पैड्स हैं, जिनमें 200 से ज्यादा आतंकवादी छिपे हुए हैं। इनको पाकिस्तानी सेना सुरक्षा देती है। दूसरी ओर, एलओसी आतंकियों पर हमले के बाद अब सीमा में घुसे आतंकियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने का जिम्मा सरकार ने राष्ट्रीय राइल्स की विक्टर फोर्स और किलो फोर्स को दे दिया है। विक्टर फोर्स के जिम्मे अनंतनाग, पुलवामा और बडग़ाम आते हैं, जबकि किलो फोर्स के जिम्मे कुपवाड़ा, बारामुला और श्रीनगर में आतंक विरोधी कार्रवाई की कमान है। किलो फोर्स के मुख्यालय पर ही रविवार रात आतंकी हमला हुआ था। तीनों सेनाओं े प्रमुखों और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ सोमवार को एनएसए अजित डोभाल की हुई बैठक में इसी मुद्दे पर बात हुई। बाद में एनएसए अजितक डोभाल की पीएम मोदी से मुलाकात को भी इसी मुहिम से जोडक़र देखा जा रहा है। कौन होते हैं स्लीपर सेल ? आतंकियों का वह दस्ता जो आम लोगों के बीच रहता है और आतंकियों के हैंडलर्स से आदेश मिलने के बाद हरकत में आते हैं। लंबे समय तक आम जिंदगी जीने वाले इन लोगों को सरकार के लिए पकडऩा मुश्किल होता है। किसी मॉल-दुकान में काम करने वाले, छोटे-मोटी नौकरी-बिजनेस करने वाले ये स्लीपर सेल सूचनाएं जुटाने में माहिर होते हैं। स्लीपर सेल जज्बाती होते हैं जो जान देने से भी नहीं चूकते। देश के बिगड़े माहौल में आतंकी इन्हीं स्लीपर सेल को एक्टिव करके नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। साभार-khaskhabar.com
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