मथुरा

नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति (सीसीएस) ने बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना के शिविर पर हुए आतंकी हमले उसके बाद पैदा हुए हालात से निपटने को लेकर चर्चा की। पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई में हुई इस बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, एनएसए अजित डोभाल आदि शामिल हुए। सूत्रों ने बताया कि समिति की आज सुबह हुई बैठक में उरी में आतंकवादी हमले का जवाब देने और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पाकिस्तान को तीन तरफ से घेरने की रणनीति बनी। केंद्र सरकार कूटनीतिक, राजनीतिक और सैन्य, तीनों ही मोर्चों पर पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। कूटनीतिक स्तर पर पाक को घेरने की रणनीति को अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश कर रहे पाक पीएम नवाज शरीफ को उन्हीं के भाषा में जवाब देने की संभावना है। बता दें कि उरी सेक्टर में ब्रिगेड मुख्यालय पर हुए फिदायीन हमले में 18 जवानों के शहीद होने के बाद केंद्र सरकार पर पाकिस्तान के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने का दबाव काफी बढ़ गया है। इस मीटिंग का मकसद इसी दिशा में प्लान ऑफ एक्शन तैयार करना था। सूत्रों का कहना है कि मीटिंग के बाद सरकार जल्द इस आतंकी हमले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दे सकती है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी टॉप मंत्रियों के साथ आतंकी हमले के बारे में चर्चा कर चुके हैं, लेकिन सीसीएस बैठक में औपचारिक तौर से इस बारे में चर्चा की गई। सरकार के सूत्रों ने बताया कि आम तौर पर सुरक्षा से जुड़े विषयों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में चर्चा नहीं होती है, लेकिन बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में भी उरी हमले पर बातचीत हुई। इस बैठक में मोदी सरकार के सभी बड़े मंत्री शामिल हुए। उरी, नौगाम में तलाशी अभियान शुरू जम्मू-कश्मीर के उरी तथा नौगाम में नियंत्रण रेखा के समीप घुसपैठियों की तलाशी में बुधवार सुबह होते ही सुरक्षाबलों ने फिर अभियान शुरू कर दिया। पाकिस्तान के कब्जे वाल कश्मीर (पीओके) से 15 आतंकवादियों के नियंत्रण रेखा के इस ओर आने की आशंका है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने बताया कि दोनों अभियानों के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र की जा रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से कल संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया। भारत की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई। नियंत्रण रेखा के दोनों ओर से करीब 15 मिनट तक गोलीबारी होती रही, जिसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। अमेरिका भी भारत के साथ, ‘पाक आतंकी देश’ घोषणा का बिल आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सरकार के शीर्ष स्तर पर इस बारे में एक तरह की राय है कि भारत को सोच समझकर, बहुस्तरीय और सामरिक प्रतिक्रिया देनी चाहिए और पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब करना चाहिए। इस योजना के तहत डायरेक्टर जनरल मिलिटरी ऑपरेशन उरी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के बारे में अपने पाकिस्तानी समकक्ष को जल्द ही सबूत सौंपेंगे। इस बीच, अमेरिका के दो प्रभावशाली सांसदों ने पाकिस्तान को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश घोषित करने के लिए प्रतिनिधि सभा में एक विधेयक पेश किया है। यह पाकिस्तान को ऐसे समय में झटका है जब उसके प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कश्मीर मसले को लेकर समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों सांसदों ने कहा कि अब समय आ गया है जब अमेरिका, पाकिस्तान को उसके विश्वासघात के लिए धन देना बंद कर दे। रिपब्लिकन पार्टी के टेड पो और डेमोक्रेटिक पार्टी से कांग्रेस सदस्य डाना रोहराबाचर ने पाकिस्तान स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज्म डेजिग्नेशन एक्ट पेश किया। पो ने कहा कि पाकिस्तान विश्वास न करने योग्य ही नहीं, बल्कि वह अमेरिका के शत्रुओं की वर्षों से मदद करता आया है और उन्हें बढावा देता रहा है।                                       साभार-khaskhabar.com  

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हिन्दू संस्कृति और पूजा में भगवान श्रीगणेश जी को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। प्रत्येक शुभ कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाती अनिवार्य बताई गयी है। देवता भी अपने कार्यों की बिना किसी विघ्न से पूरा करने के लिए गणेश जी की अर्चना सबसे पहले करते हैं। किसी भी कार्य का शुभारंभ करते समय सर्वप्रथम श्रीगणेशाय नम: लिखते हैं। यहां तक कि पत्रादि लिखते समय भी ऊँ या श्रीगणेश का नाम अंकित करते हैं। श्रीगणेश को प्रथम पूजन का अधिकारी क्यों मानते हैं। इस संबंध में एक कहानी प्रचलित है। एक बार सभी देवों में यह प्रश्न उठा कि पृथ्वी पर सर्वप्रथम किस देव की पूजा होनी चाहिए। सभी देव अपने को महान बताने लगे। अंत में इस समस्या को सुलझाने के लिए देवर्षि नारद ने शिव को निणार्यक बनाने की सलाह दी। शिव ने सोच-विचारकर एक प्रतियोगिता आयोजित की- जो अपने वाहन पर सवार हो पृथ्वी की परिक्रमा करके प्रथम लौटेंगे, वे ही पृथ्वी पर प्रथम पूजा के अधिकारी होंगे। सभी देव अपने वाहनों पर सवार हो चल पड़े। गणेश जी ने अपने पिता शिव और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा की और शांत भाव से उनके सामने हाथ जोडक़र खड़े रहे। कार्तिकेय अपने मयूर वाहन पर आरूढ़ हो पृथ्वी का चक्कर लगाकर लौटे और दर्प से बोले, मैं इस स्पर्धा में विजयी हुआ, इसलिए पृथ्वी पर प्रथम पूजा पाने का अधिकारी मैं हूं। शिव अपने चरणें के पास भक्ति-भाव से खड़े विनायक की ओर प्रसन्न मुद्रा में देख बोले, पुत्र गणेश तुमसे भी पहले ब्रह्मांड की परिक्रमा कर चुका है, वही प्रथम पूजा का अधिकारी होगा। कार्तिकेय खिन्न होकर बोले, पिताजी, यह कैसे संभव है? गणेश अपने मूषक वाहन पर बैठकर कई वर्षो में ब्रह्मांड की परिक्रमा कर सकते हैं। आप कहीं तो परिहास नहीं कर रहे हैं? नहीं बेटे! गणेश अपने माता-पिता की परिक्रमा करके यह प्रमाणित कर चुका है कि माता-पिता ब्रह्मांड से बढक़र कुछ और हैं। गणेश ने जगत् को इस बात का ज्ञान कराया है। इतने में बाकी सब देव आ पहुंचे और सबने एक स्वर में स्वीकार कर लिया कि गणेश जी ही पृथ्वी पर प्रथम पूजन के अधिकारी हैं। गणेश जी के सम्बंध में भी अनेक कथाएं पुराणों में वर्णित हैं। एक कथा के अनुसार शिव एक बार सृष्टि के सौंदर्य का अवलोकन करने हिमालयों में भूतगणों के साथ विहार करने चले गए। पार्वती जी स्नान करने के लिए तैयार हो गईं। सोचा कि कोई भीतर न आ जाए, इसलिए उन्होंने अपने शरीर के लेपन से एक प्रतिमा बनाई और उसमें प्राणप्रतिष्ठा करके द्वार के सामने पहरे पर बिठाया। उसे आदेश दिया कि किसी को भी अंदर आने से रोक दे। वह बालक द्वार पर पहरा देने लगा।इतने में शिव जी आ पहुंचे। वह अंदर जाने लगे। बालक ने उनको अंदर जाने से रोका। शिव जी ने क्रोध में आकर उस बालका का सिर काट डाला। स्नान से लौटकर पार्वती ने इस दृश्य को देखा। शिव जी को सारा वृत्तांत सुनाकर कहा, आपने यह क्या कर डाला? यह तो हमारा पुत्र है। शिव जी दुखी हुए। भूतगणों को बुलाकर आदेश दिया कि कोई भी प्राणी उत्तर दिशा में सिर रखकर सोता हो, तो उसका सिर काटकर ले आओ। भूतगण उसका सिर काटकर ले आए। शिव जी ने उस बालक के धड़ पर हाथी का सिर चिपकाकर उसमें प्राण फूंक दिए। तवसे वह बालक गजवदन नाम से लोकप्रिय हुआ। दूसरी कथा भी गणेश जी के जन्म के बारे में प्रचलित है। एक बार पार्वती के मन में यह इच्छा पैदा हुई कि उनके एक ऐसा पुत्र हो जो समस्त देवताओं में प्रथम पूजन पाए। इन्होंने अपनी इच्छा शिव जी को बताई। इस पर शिव जी ने उन्हें पुष्पक व्रत मनाने की सलाह दी। पार्वती ने पुष्पक व्रत का अनुष्ठान करने का संकल्प किया और उस यज्ञ में सम्मिलित होने के लिए समस्त देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया। निश्चित तिथि पर यज्ञ का शुभारंभ हुआ। यज्ञमंडल सभी देवी-देवताओं के आलोक से जगमगा उठा। शिव जी आगत देवताओं के आदर-सत्कार में संलग्न थे, लेकिन विष्णु भगवान की अनुपस्थिति के कारण उनका मन विकल था। थोड़ी देर बाद विष्णु भगवान अपने वाहन गरुड़ पर आरूढ़ हो आ पहुंचे। सबने उनकी जयकार करके सादर उनका स्वागत किया। उचित आसन पर उनको बिठाया गया। ब्रह्माजी के पुत्र सनतकुमार यज्ञ का पौरोहित्य कर रहे थे। वेद मंत्रों के साथ यज्ञ प्रारंभ हुआ। यथा समय यज्ञ निर्विघ्न समाप्त हुआ। विष्णु भगवान ने पार्वती को आशीर्वाद दिया, पार्वती! आपकी मनोकामना पूर्ण होगी। आपके संकल्प के अनुरूप एक पुत्र का उदय होगा। भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाकर पार्वती प्रसन्न हो गई। उसी समय सनतकुमार बोल उठे, मैं इस यज्ञ का ऋत्विक हूं। यज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है, परंतु शास्त्र-विधि के अनुसार जब तक पुरोहित को उचित दक्षिणा देकर संतुष्ट नहीं किया जाता, तब तक यज्ञकर्ता को यज्ञ का फल प्राप्त नहीं होगा। कहिए पुरोहित जी, आप कैसी दक्षिणा चाहते हैं? पार्वती जी ने पूछा. भगवती, मैं आपके पतिदेव शिव जी को दक्षिणा स्वरूप चाहता हूं। पार्वती तड़पकर बोली, पुरोहित जी, आप मेरा सौभाग्य मांग रहे हैं। आप जानते ही हैं कि कोई भी नारी अपना सर्वस्व दान कर सकती है, परंतु अपना सौभाग्य कभी नहीं दे सकती। आप कृपया कोई और वस्तु मांगिए। परंतु सनतकुमार अपने हठ पर अड़े रहे। उन्होंने साफ कह दिया कि वे शिव जी को ही दक्षिणा में लेंगे, दक्षिणा न देने पर यज्ञ का फल पार्वती जी को प्राप्त न होगा। देवताओं ने सनतकुमार को अनेक प्रकार से समझाया, पर वे अपनी बात पर डटे रहे। इस पर भगवान विष्णु ने पार्वती जी को समझाया, पार्वती जी! यदि आप पुरोहित को दक्षिणा न देंगी तो यज्ञ का फल आपको नहीं मिलेगा और आपकी मनोकामना भी पूरी न होगी। पार्वती ने दृढ़ स्वर में उत्तर दिया, भगवान! मैं अपने पति से वंचित होकर पुत्र को पाना नहीं चाहती। मुझे केवल मेरे पति ही अभीष्ट हैं। शिव जी ने मंदहास करके कहा, पार्वती, तुम मुझे दक्षिणा में दे दो। तुम्हारा अहित न होगा। पार्वती दक्षिणा में अपने पति को देने को तैयार हो गई, तभी अंतरिक्ष से एक दिव्य प्रकाश उदित होकर पृथ्वी पर आ उतरा। उसके भीतर से श्रीकृष्ण अपने दिव्य रूप को लेकर प्रकट हुए। उस विश्व स्वरूप के दर्शन करके सनतकुमार आह्रादित हो बोले, भगवती! अब मैं दक्षिणा नहीं चाहता। मेरा वांछित फल मुझे मिल गया। श्रीकृष्ण के जयनादों से सारा यज्ञमंडप प्रतिध्वनित हो उठा। इसके बाद सभी देवता वहां से चले गए। थोड़ी ही देर बाद एक विप्र वेशधारी ने आकर पार्वती जी से कहा, मां, मैं भूखा हं, अन्न दो। पार्वती जी ने मिष्टान्न लाकर आगंतुक के समाने रख दिया। चंद मिनटों में ही थाल समाप्त कर द्विज ने फिर पूछा, मां, मेरी भूख नहीं मिटी, थोड़ा और खाने को दो। वह ब्राह्मण बराबर मांगता रहा, पार्वती जी कुछ-न-कुछ लाकर खिलाती रहीं, फिर भी वह संतुष्ट न हुआ। कुछ और मांगता रहा। पार्वती जी की सहनशीलता जाती रही। वह खीझ उठीं, शिव जी के पास जाकर शिकायती स्वर में बोलीं, देव, न मालूम यह कैसा याचक है। ओह, कितना खिलाया, और मांगता है। कहता है कि उसका पेट नहीं भरा। मैं और कहां से लाकर खिला सकती हूं। शिव जी को उस याचक पर आश्चर्य हुआ। उस देखने के लिए पहुंचे, पर वहां कोई याचक न था। पार्वती चकित होकर बोली, अभी तो यहीं था, न मालूम कैसे अदृश्य हो गया। शिव जी ने मंदहास करते हुए कहा, देवी, वह कहीं नहीं गया। वह यहीं है, तुम्हारे उदर में। वह कोई पराया नहीं, साक्षात् तुम्हारा ही पुत्र गणेश है। तुम्हारे मनोकामना पूरी हो गई है। तुम्हें पुष्पक यज्ञ का फल प्राप्त हो गया है। इस प्रकार भगवान शिव के अनुग्रह से गणेश जन्म धारण करके गणाधिपति बन गए। समस्त विश्व के संकट दूर करते हुए विघ्नेश्वर कहलाए।                                        साभार-khaskhabar.com  

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मथुरा। जम्मू कश्मीर के उरी क्षेत्र में सैनिक कैंप में हुए सैनिकों के नरसंहार के विरोध में एक युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विक्रम बाल्मीकि के नेतृत्व में होलीगेट में पाकिस्तान का झंडा एवं प्रतीकात्मक रुप से पाकिस्तान का पुतला दहन किया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष विक्रम बाल्मीकि ने नवाज शरीफ सरकार की आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय रहते हुए छद्म युद्ध करने की नीति को कायरों की नीति दिया तथा चेतावनी दी, अगर दम हो तो भारत से चीन युद्ध लड़े ले, तीन दिन में पाकिस्तान का नाम दुनिया के नक्शे से हटा दिया जाएगा। कांग्रेसीजनों ने साथ ही चेतावनी दी कि पाकिस्तान में चल रहे आतंकवादी कैंपों को खत्म किया जाए तथा जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन एवं उनके सरगनाओ को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। संयुक्त राष्ट्र संघ से अपील की है कि पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित कर इसकी सदस्यता निरस्त की जाए प्रधानमंत्री मोदी को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अब कहां गया उनका 56 इंच का सीना प्रत्येक दो तीन महीनों में सैनिकों का नरसंहार हो रहा है और मोदी सरकार कूटनीतिक प्रयासों में रखने की सूचना आम जन को दे रही है जरा उन माताओं से पूछो जिन्होंने अपने बालों को खोया है तथा उन विधवाओं के आंसू किस प्रकार पोछेगें शायद शायद इसका मोदी सरकार के पास कोई जवाब नहीं है झंडा एवं पुतला दहन करने वालों में मुख्य रूप से शहर कांग्रेस अध्यक्ष आबिद हुसैन, ब्रजकिशोर गोस्वामी, राहुल अरोरा, मनोज गौड़ हाजी शाहबुउद्दीन हाजी सलीम शाह अरुण भारती एडवोकेट अजय शर्मा एडवोकेट अनीता चावला एडवोकेट सुनील उपाध्याय मोनू चैधरी अनुपम सिंह अशोक डॉन इकरार कुरैशी राजू फारुकी दीपक करोतिया अभिषेक गर्ग बंटी सिद्धिकी संदेश पाठक अजय कुमार सागर माहौर अमित चतुर्वेदी पप्पू गोला सिम्मी बेगम कृष्णा माहौर निशांत शर्मा अशोक यादव राजेंद्र शर्मा गुड्डू शर्मा अर्जुन पंडित शमीम कुरैशी शौकीन कुरैशी फरमान कुरैशी अमित पंडित प्रदीप सागर आदिल खान अशोक वाल्मीकि विकास चैधरी आदि उपस्थित थे  

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बॉलीवुड के बजरंगी भाईजान टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली के साथ एक म्यूजिक विडियो में एक साथ नजर आएंगे। प्राप्त समाचारों के अनुसार बेल्जियम के डी जे स्टार लाइक माइक और दिमित्री वेगस, इन दोनों से बात कर रहे हैं और इन्हें अपने एक म्यूजिक विडियो में साथ लेना चाहते हैं। सलमान और विराट अक्टूबर में हो रहे सनबर्न फेस्टिवल के 10वें सत्र में भी मौजूद रहेंगे। गौरतलब है कि पिछले साल बेल्जियम की इस जोड़ी ने गोवा सनबर्न फेस्टिवल की शुरुआत की थी।                      साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । न्यूजीलैंड और भारत के बीच 22 सितंबर से तीन मैच की टेस्ट सीरीज शुरू होने जा रही है। पहले टेस्ट का आयोजन कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में होगा। टीम इंडिया के स्टार ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह के मुताबिक टेस्ट कप्तान विराट कोहली और कोच अनिल कुंबले के पास ये एक सुनहरा मौका है। उनका मानना है कि भारतीय टीम को जीत के लिए पूरी तरह से स्पिन की अनुकूल पिच की जरूरत नहीं है क्योंकि लंबे समय से चली आ रही इस रणनीति का टीम को नुकसान होना शुरू हो गया है। हरभजन ने कहा कि पिछले चार से पांच साल में पिछले टीम प्रबंधन ने ऐसी पिचों को प्राथमिकता दी जहां टेस्ट मैच तीन दिन के भीतर खत्म हो जाए. लेकिन मेरा मानना है कि अनिल भाई और विराट दोनों सकारात्मक लोग हैं जो अच्छी टेस्ट पिचों पर खेलना पसंद करेंगे जहां नतीजे चौथे दिन शाम या पांचवें दिन लंच के बाद आए। हमें इसकी बड़ी तस्वीर की ओर देखना चाहिएस क्या ढाई या तीन दिन के भीतर जीतने से हमें कुछ हासिल हो रहा है। क्या हम अपने बल्लेबाजों के प्रति ठीक थे जिन्हें पिछली घरेलू सीरीज के दौरान दक्षिण अफ्रीकी स्पिनरों के खिलाफ जूझना पड़ा था। हम इसे टेस्ट क्रिकेट क्यों कहते हैं क्योंकि यह पहले दिन से लेकर पांचवें दिन तक प्रत्येक स्तर पर आपके कौशल की परीक्षा लेता है। इससे हर खिलाड़ी को इस स्तर पर सफल होने का उचित मौका मिलना चाहिए। कोटला में अंतिम टेस्ट को छोड़ दिया जाए, जहां अजिंक्य रहाणे ने शानदार बल्लेबाजी की और विराट ने भी रन बनाए, तो हमारे बल्लेबाजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मैं आपको बता सकता हूं कि अगर हम पूरी तरह से स्पिन की अनुकूल पिचों के साथ जुड़े रहे तो इसका खमियाजा हमें भी उठाना पड़ सकता है जैसा नागपुर में टी20 विश्व कप मुकाबले के दौरान हुआ। सेंटनेर और ईश सोढ़ी प्रभावी साबित हो सकते हैं। हरभजन ने कहा कि ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी जैसे गेंदबाजों को पारी में पर्याप्त ओवर फेंकने को मिलने चाहिए। लोग ईशांत की आलोचना करते हैं कि उन्होंने 69 टेस्ट खेले हैं और बमुश्किल 200 से अधिक विकेट हासिल कर पाए हैं, लेकिन किसी ने देखा कि ईशांत ने भारत में कितने ओवर फेंके। ईशांत ने अधिक गेंदबाजी इसलिए नहीं की क्योंकि इस तरह के विकेट थे जहां आपको पहले घंटे में ही स्पिनर की जरूरत थी।                           साभार-khaskhabar.com  

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गाज़ीपुर, मरदह । कश्मीर के उरी सेक्टर में आतंकी हमले में शहीद जवान हरेंद्र यादव का पार्थिव शरीर थोड़ी देर पहले ही उनके गांव देवपुरवा(गाईं) पहुंचा। जिसके बाद तो गांव में हाहाकार मच गया। मौके पर मौजूद जनसमूह की आंखें नम हो गईं। पाकिस्तान मुर्दाबाद, हरेंद्र भैया अमर रहें और जब तक सूरज चांद रहेगा-हरेंद्र तेरा नाम रहेगा का नारा गूंजने लगा। जिला पंचायत चेयरमैन डॉ.वीरेंद्र यादव, डीएम संजय कुमार खत्री, एसपी रामकिशोर ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ाया। जिला पंचायत चेयरमैन ने शहीद के परिवार को बताया कि मुख्यमंत्री ने 20 लाख रुपये की मदद की घोषणा की है। पार्थिव शरीर के साथ आए गोरखा बटालियन के जवानों ने शहीद को सलामी दी। पार्थिव शरीर के इंतजार में शहीद के दरवाजे पर शाम से ही भीड़ जुटने लगी थी। पार्थिव शरीर पहुंचने पर शहीद के दरवाजे पर आलम यह था कि पांव रखने तक की जगह नहीं थी। अपने लाल हरेंद्र के शोक में गांव में चूल्हा नहीं जला। आपको बता दें कि रविवार को तड़के आतंकियों ने कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास आर्मी हेडक्वार्टर पर हमला बोला। उसमें हरेंद्र समेत 17 जवान शहीद हुए। देवपुरवा में पार्थिव शरीर आने से पहले रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के प्रतिनिधि सुनील सिंह पहुंचे। उन्होंने शहीद के परिवारीजनों से मिल कर संवेदना जताई। शहीद का पार्थिव शरीर कश्मीर से विमान से वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट लाया गया। उसके बाद सड़क मार्ग से देवपुरवा आया।                            साभार-khaskhabar.com  

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