मथुरा

मथुरा । देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आज भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कई कार्यक्रम आयोजित किये। पूर्व मंत्री और भाजपा नेता चैधरी लक्ष्मीनारायण ने आज उनके जन्मदिन पर जिला अस्पताल पहंुचकर रोगियों को फल वितरण किये और प्रधानमंत्री की लम्बी आयु की कामना की। पूर्व कबीना मंत्री लक्ष्मीनारायण चैधरी ने कहा कि आज भारत ने विश्वपटल पर अपनी साख बनाई है। जो सपना भारतवासी देखा करते थे, वह भारत बहुत जल्द पीएम के नेतृत्व मे विश्वगुरु कहलेगा। जिला मंहामत्री सिद्धार्थ लोधी ने कहा कि पीएम द्वारा जो योजनाऐ चलाई जा रही है वह जनता के लिये सराहनीय है। फल वितरण के दौरान जिला पंचायत सदस्य नरदेव चैधरी, होलीगेट मंडल महामत्री विजय शर्मा, मंत्री मनीष चतुर्वेदी, होतीलाल चैधरी, डानरेश चैधरी, मनीष, राजवीर सिंह, बाॅबी चैधरी, प्रकाश आर्य, पप्पू मास्टर, राजेन्द्र, विजय चैधरी, डा समय आदि मौजूद थे।

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मथुरा : डॉ. वागीश दत्त गौतम को वर्ष 2015 –16 के दौरान मथुरा नगर स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों एवं उपक्रमों में हिंदी कार्यान्वयन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य सुनिश्च‍ित करने के कारण  हिंदी दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।

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मथुरा । सन् 2015-2016 में जिले में स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों एवं उपक्रमों में हिन्दी कार्यान्वन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों को सुनिश्चित कराने पर काॅर्पोरेट कम्युनिकेशन व सीएसआर वरिष्ठ प्रबंधक डा. वागीश दत्त गौतम को हिन्दी दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। ज्ञात रहे कि भारत सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा प्रतिवर्ष हिंदी कार्यान्वयन संबंधी एक वार्षिक कार्यक्रम तैयार किया जाता है जिसके अंतर्गत हिंदी पत्राचार, टिप्पणी, पुस्तकों की खरीद, कम्प्यूटरों का द्विभाषीकरण, कवि सम्मेलन, हिंदी सम्मेलन, गोष्ठियॉं, कार्यशालाएं, बैठकों एवं प्रतियोगिताओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। राजभाषा विभाग इन बिंदुओं पर अच्छा कार्य करने वाले राजभाषा अधिकारियों को प्रशंसा पत्र प्रदान करके सम्मानित करता है। ज्ञात रहे कि मथुरा ने हिंदी भाषी प्रदेशों (‘क’  क्षेत्र की उपक्रम श्रेणी)  में इन प्रमुख बिन्दुओं पर उत्कृष्ट कार्य किया था जिसके उपलक्ष्य में मथुरा रिफाइनरी को अखिल भारतीय स्तर पर राजभाषा कीर्ति पुरस्कार के रूप में राजभाषा शील्ड (प्रथम पुरस्कार) प्राप्त हुई है। राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित राजभाषा समारोह में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, गृह राज्यमंत्री किरन रीजिजू एवं  पुरस्कार प्राप्तकर्ता कार्यालयों के प्रमुख उपस्थित थे।  डॉ. वी. डी. गौतम को इससे पहले भी पंजाब,उत्तर प्रदेश,हरियाणा राज्यपाल एवं राजभाषा विभाग के सचिव से प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुए हैं । इस समय नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, मथुरा में केन्द्र सरकार , बैंक, व बीमा कंपनियों के 53 कार्यालय हैं तथा डॉ. वागीश दत्त गौतम इस समिति के सचिव हैं। डॉ. वागीश दत्त गौतम ताजपुर निवासी संस्कृत प्रवक्ता स्व. देवीराम शास्त्री के सपुत्र हैं ।

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भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक सोलह दिनों तक का समय सोलह श्राद्ध या श्राद्ध पक्ष कहलाता है। शास्त्रों में देवकार्यों से पूर्व पितृ कार्य करने का निर्देश दिया गया है। श्राद्ध से केवल पितृ ही तृप्त नहीं होते अपितु समस्त देवों से लेकर वनस्पतियां तक तृप्त होती हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार श्राद्ध के सोलह दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर श्राद्ध करते हैं। 16 दिनी पितृ पक्ष इस बार तिथियों की घट-बढ़ के कारण 15 दिन तक रहेगा। ऐसी मान्यता है कि पितरों का ऋण श्राद्ध द्वारा चुकाया जाता है। वर्ष के किसी भी मास तथा तिथि में स्वर्गवासी हुए पितरों के लिए पितृपक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध में पितरों को आशा रहती है कि हमारे पुत्र-पौत्रादि हमें पिण्ड दान तथा तिलांजलि प्रदान कर संतुष्ट करेंगे। इसी आशा के साथ वे पितृलोक से पृथ्वीलोक पर आते हैं। यही कारण है कि हिंदू धर्म शास्त्रों में प्रत्येक हिंदू गृहस्थ को पितृपक्ष में श्राद्ध अवश्य रूप से करने के लिए कहा गया है। श्राद्ध से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं। मगर ये बातें श्राद्ध करने से पूर्व जान लेना बहुत जरूरी है क्योंकि कई बार विधिपूर्वक श्राद्ध न करने से पितृ श्राप भी दे देते हैं। आज हम आपको श्राद्ध से जुड़ी कुछ विशेष बातें बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं- 1- श्राद्धकर्म में गाय का घी, दूध या दही काम में लेना चाहिए। यह ध्यान रखें कि गाय को बच्चा हुए दस दिन से अधिक हो चुके हैं। दस दिन के अंदर बछड़े को जन्म देने वाली गाय के दूध का उपयोग श्राद्ध कर्म में नहीं करना चाहिए।  2- श्राद्ध में चांदी के बर्तनों का उपयोग व दान पुण्यदायक तो है ही राक्षसों का नाश करने वाला भी माना गया है। पितरों के लिए चांदी के बर्तन में सिर्फ पानी ही दिए जाए तो वह अक्षय तृप्तिकारक होता है। पितरों के लिए अर्घ्य, पिण्ड और भोजन के बर्तन भी चांदी के हों तो और भी श्रेष्ठ माना जाता है।  3- श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन करवाते समय परोसने के बर्तन दोनों हाथों से पकड़ कर लाने चाहिए, एक हाथ से लाए अन्न पात्र से परोसा हुआ भोजन राक्षस छीन लेते हैं।  4- ब्राह्मण को भोजन मौन रहकर एवं व्यंजनों की प्रशंसा किए बगैर करना चाहिए क्योंकि पितर तब तक ही भोजन ग्रहण करते हैं जब तक ब्राह्मण मौन रहकर भोजन करें। 5- जो पितृ शस्त्र आदि से मारे गए हों उनका श्राद्ध मुख्य तिथि के अतिरिक्त चतुर्दशी को भी करना चाहिए। इससे वे प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध गुप्त रूप से करना चाहिए। पिंडदान पर साधारण या नीच मनुष्यों की दृष्टि पहने से वह पितरों को नहीं पहुंचता।  6- श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन करवाना आवश्यक है, जो व्यक्ति बिना ब्राह्मण के श्राद्ध कर्म करता है, उसके घर में पितर भोजन नहीं करते, श्राप देकर लौट जाते हैं। ब्राह्मण हीन श्राद्ध से मनुष्य महापापी होता है।  7- श्राद्ध में जौ, कांगनी, मटर और सरसों का उपयोग श्रेष्ठ रहता है। तिल की मात्रा अधिक होने पर श्राद्ध अक्षय हो जाता है। वास्तव में तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं। कुशा (एक प्रकार की घास) राक्षसों से बचाते हैं।  8- दूसरे की भूमि पर श्राद्ध नहीं करना चाहिए। वन, पर्वत, पुण्यतीर्थ एवं मंदिर दूसरे की भूमि नहीं माने जाते क्योंकि इन पर किसी का स्वामित्व नहीं माना गया है। अत: इन स्थानों पर श्राद्ध किया जा सकता है। 9- चाहे मनुष्य देवकार्य में ब्राह्मण का चयन करते समय न सोचे, लेकिन पितृ कार्य में योग्य ब्राह्मण का ही चयन करना चाहिए क्योंकि श्राद्ध में पितरों की तृप्ति ब्राह्मणों द्वारा ही होती है।  10- जो व्यक्ति किसी कारणवश एक ही नगर में रहनी वाली अपनी बहिन, जमाई और भानजे को श्राद्ध में भोजन नहीं कराता, उसके यहां पितर के साथ ही देवता भी अन्न ग्रहण नहीं करते। 11- श्राद्ध करते समय यदि कोई भिखारी आ जाए तो उसे आदरपूर्वक भोजन करवाना चाहिए। जो व्यक्ति ऐसे समय में घर आए याचक को भगा देता है उसका श्राद्ध कर्म पूर्ण नहीं माना जाता और उसका फल भी नष्ट हो जाता है।  12- शुक्लपक्ष में, रात्रि में, युग्म दिनों (एक ही दिन दो तिथियों का योग) में तथा अपने जन्मदिन पर कभी श्राद्ध नहीं करना चाहिए। धर्म ग्रंथों के अनुसार सायंकाल का समय राक्षसों के लिए होता है, यह समय सभी कार्यों के लिए निंदित है। अत: शाम के समय भी श्राद्धकर्म नहीं करना चाहिए।  13- श्राद्ध में प्रसन्न पितृगण मनुष्यों को पुत्र, धन, विद्या, आयु, आरोग्य, लौकिक सुख, मोक्ष और स्वर्ग प्रदान करते हैं। श्राद्ध के लिए शुक्लपक्ष की अपेक्षा कृष्णपक्ष श्रेष्ठ माना गया है। 14- रात्रि को राक्षसी समय माना गया है। अत: रात में श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए। दोनों संध्याओं के समय भी श्राद्धकर्म नहीं करना चाहिए। दिन के आठवें मुहूर्त (कुतपकाल) में पितरों के लिए दिया गया दान अक्षय होता है। 15- श्राद्ध में ये चीजें होना महत्वपूर्ण हैं- गंगाजल, दूध, शहद, दौहित्र, कुश और तिल। केले के पत्ते पर श्राद्ध भोजन निषेध है। सोने, चांदी, कांसे, तांबे के पात्र उत्तम हैं। इनके अभाव में पत्तल उपयोग की जा सकती है।              साभार-khaskhabar.com  

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फिल्म जिस्म-2 से बॉलीवुड में कदम रखने वाली सनी लियोन इन दिनों अपनी अपकमिंग मूवी बेईमान लव को लेकर काफी चर्चा में है। इस फिल्म का निर्देशन कर रहे राजीव चौधरी का मानना है कि सनी लियोन में मुख्यधारा की अभिनेत्री बनने का पर्याप्त हुनर है। राजीव ने फिल्म के संगीत लॉन्च के मौके पर सनी को फिल्म के लिए चुनने के सवाल पर कहा, ‘‘सनी लियोन क्यों नहीं? मुझे लगता है कि उनमें मुख्य धारा की अभिनेत्री बनने का पूरा हुनर है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सनी के लिए पटकथा तैयार की थी। सनी को पटकथा पसंद आई थी और हमने फिल्म को एक अलग रूप में पेश करने की कोशिश की है। सनी इस फिल्म में काफी अलग नजर आएंगी।’’  उन्होंने कहा, ‘‘अब तक आप जिस सनी को देखते रहे हैं, वह वैसी नहीं हैं। उन्होंने अपनी सभी फिल्मों में और इस फिल्म में भी बेहद अच्छा काम किया है। लेकिन इस फिल्म में उन्होंने बेहद अलग काम किया है। उन्होंने शानदार काम किया है जो उन्हें नई ऊंचाइयां देगा, मुझे ऐसा लगता है। उन्होंने प्रियंका चोपड़ा या दीपिका पादुकोण की तरह ही शानदार काम किया है।’’ यह फिल्म 30 सितंबर को रिलीज होगी।                      साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । भारत की विश्व कप-2011 विजेता टीम का हिस्सा रहे सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर का कहना है कि किसी भी मैच में जीत कप्तान नहीं, टीम दिलाती है।   मौजूदा सत्र में शानदार फॉर्म में चल रहे गंभीर की कप्तानी में बुधवार को इंडिया ब्लू ने दलीप ट्रॉफी खिताब अपने नाम किया।   इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान गंभीर लंबे समय से राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे हैं। राष्ट्रीय टीम के साथ गंभीर का आखिरी मैच 15 अगस्त, 2014 को द ओवल में इंग्लैंड के खिलाफ हुआ टेस्ट मैच था। दिलीप ट्रॉफी में अच्छे प्रदर्शन के बाद भी भारतीय टीम में जगह न मिल पाने पर गंभीर ने कहा, ‘‘मेरा काम रन बनाते रहना है। आप जीत हासिल करने के लिए खेलते हैं, न कि अपने चयन के लिए।’’   उल्लेखनीय है कि भारतीय टीम को 22 सितंबर से न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला खेलनी है, जिसमें भारतीय टीम की कमान युवा विराट कोहली संभाल रहे हैं।   यहां एक समारोह में शिरकत करने आए गंभीर से भारतीय कप्तान विराट कोहली और कीवी टीम के कप्तान केन विलयमसन में बेहतर कप्तान के बारे मेंं पूछा गया, तो उनका कहना था कि मैच में कप्तान नहीं बल्कि टीम जीत दिलाती है।   साक्षात्कार में गंभीर ने कहा ‘‘किसी भी मैच में कप्तान आपको जीत नहीं दिलाता, बल्कि टीम दिलाती है। भारत और न्यूजीलैंड टीम के कप्तानों में से कौन बेहतर है, इसका पता तो श्रृंखला के बाद ही चल पाएगा।’’   दिन-रात के टेस्ट मैच को लेकर भारतीय टीम के रुख के बारे में पूछे जाने पर गंभीर ने कहा, ‘‘यह सब बीसीसीआई पर निर्भर करता है, लेकिन मेरा यह विचार है कि टेस्ट क्रिकेट लाल गेंद से ही खेला जाना चाहिए।’’   गंभीर ने कहा, ‘‘टेस्ट क्रिकेट में गुलाबी गेंद का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अगर आप दर्शकों की संख्या बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो यह सही नहीं है। हमें कम से क्रिकेट के एक प्रारूप को वैसा ही रखना चाहिए, जैसा वह है।’’             साभार-khaskhabar.com  

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