नई दिल्ली । दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सात साल बाद आईटी कर्मचारी जिगिषा घोष मर्डर केस में दो दोषियों रवि कपूर और अमित शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। इस केस में तीसरे दोषी बलजीत मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने इस जघन्य मर्डर केस को रेयर ऑफ रेयरेस्ट क्राइम माना है। कोर्ट ने रवि पर 20 हजार, अमित पर 1 लाख और बलजीत पर तीन लाख का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने पिछले महीने ही तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया था।
बता दें कि सूचना प्रौद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाली जिगिषा घोष की साल 2009 में अगवा करने के बाद हत्या कर दी गई थी। अतिरिक्त सेशन जज संदीप यादव ने दोषी करार दिए रवि कपूर, अमित शुक्ला और बलजीत सिंह मलिक की सजा तय करने के लिए 22 अगस्त की तिथि तय की थी। अतिरिक्त सेशन जज संदीप यादव ने कहा था कि तीनों अभियुक्त रवि कपूर, अमित शुक्ला और बलजीत सिंह मलिक के खिलाफ मामला साबित पाया गया है। परिस्थितिजन्य सबूतों से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि तीनों दोषियों ने ही हत्या के लिए जिगिषा का अपहरण किया था। न्यायिक हिरासत के दौरान तीनों आरोपियों के व्यवहार के संदर्भ में रिपोर्ट मांगी गई थी। अभियोजन पक्ष के वकील ने कोर्ट को अगवत कराया था कि ये अपराधी इंडिया टुडे समूह की पत्रकार सौम्या विश्वनाथन और एक टैक्सी चालक की हत्या के मुकदमे का भी सामना कर रहे हैं। वहीं बचाव के वकील ने इनकेसाथ यह कहकर नरमी बरतने का आग्रह किया कि दोषी अभी कम उम्र के हैं और उन्हें सुधार अवसर मिलना चाहिए। कोर्ट ने 14 जुलाई को तीनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), धारा 201 (सबूत मिटाने), धारा 394 (डाका डालने के दौरान जानबूझ कर चोट पहुंचाने के कारण बनना), धारा 468 (धोखा देने के लिए जालसाजी), धारा 471 (फर्जी दस्तावेज को असली रूप में या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के रूप में इस्तेमाल करना), धारा 482 (संपत्ति के नकली मुहर का इस्तेमाल करना) और धारा 34 (समान इरादा) के तहत दोषी माना था।
बता दें कि हेविट एसोसिएट प्राइवेट लि. में ऑपरेशन मैनेजर के रूप में कार्यरत 28 वर्षीय जिगिषा की 18 मार्च, 2009 को अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। ऑफिस कैब ने जिगिषा को सुबह लगभग चार बजे दिल्ली के वसंत विहार में उसके घर के पास छोड़ा और वहीं से उसका अपहरण कर लिया गया।
हत्याकांड का घटनाक्रम
- 18 मार्च, 2009: दिल्ली के वसंत विहार स्थित अपने घर के निकट सुबह चार बजे कैब से उतरने के बाद जिगिशा को अगवा किया गया।
- 20 मार्च, 2009: जिगिषा का शव हरियाणा के सूरजकुंड के पास एक जगह से बरामद किया गया।
- 23 मार्च, 2009: हत्याकांड में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
- जून 2009: दिल्ली पुलिस ने मामले में तीन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।
- 15 अप्रैल, 2010: दिल्ली की अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई।
- 5 जुलाई, 2016: सुनवाई पूर्ण कर दिल्ली की अदालत ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा।
- 14 जुलाई, 2016: दिल्ली की अदालत ने तीन लोगों को दोषी करार दिया।
साभार-khaskhabar.com
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