नई दिल्ली। विवादास्पद भाषणों से सुर्खियों में आए इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक को गिरफ्तारी का डर सता रहा है। शायद यही कारण कि सोमवार को भारत आने वाला जाकिर अब करीब तीन महीने बाद भारत लौटेगा। आपको बता दें कि शुरुआती जांच के बाद मुंबई पुलिस ने जाकिर को क्लीन चिट दे दी है, लेकिन केंद्र सरकार जाकिर का बख्शने के मूंड में नहीं है। केंद्र की 10 टीमें लगातार जाकिर के भाषणों की जांच में जुटी हुई है। जाकिर से जुड़े हर बयान, भाषण को खंगाला जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी समस्या है जाकिर के स्पीच का हजारों में होना। उसने कुछ सालों में ही अस्सी हजार से ज्यादा टेप अलग-अलग मीडियम पर टेलिकास्ट किए हैं। हर टेप कम से कम एक घंटे का है। कानून मंत्रालय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को कहा है कि वह इस मामले में तुरंत कदम उठाए। जो भी कदम उठाएं वो ठोस हों। सभी सबूत, दस्तावेज ऐसे हों कि उनके आधार पर फूलप्रूफ कार्रवाई की जा सके। सरकार के बैक फुट पर आने जैसा कदम न उठाएं। इसलिए जांच टीमें पहले सभी संदिग्ध टेप की जांच करेंगी, उसके बाद इस पर कानूनी राय-मशविरा करके अगला कदम तय करेंगी।
सूत्रों के मुताबिक सरकार और पार्टी दोनों ही जेएनयू मामले को दोहराना नहीं चाहते। जेएनयू मामले में सरकार को हाथ जलाने पड़े थे। वहां देशविरोधी नारेबाजी के आरोपों में कुछ स्टूडेंट्स को अरेस्ट किया गया था। लेकिन इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। नारेबाजी के टेप की असलियत पर भी सवाल उठे थे। अगर जाकिर के खिलाफ कार्रवाई होती है और पुख्ता सबूतों के अभाव में कोर्ट से उसे राहत मिलती है, तो सरकार पार्टी के लिए यह नया राजनीतिक सिरदर्द होगा। महाराष्ट्र इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट ने जाकिर नाइक मामले की जांच के बाद कहा है कि उसके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के अलावा कोई और केस नहीं बनता। एसआईडी ने उसके वीडियो और भारत से बाहर दिए भाषणों की शुरुआती जांच की है। राज्यों की खुफिया टीमों से फैक्ट्स इकट्ठा किए हैं, जिसमें हैदराबाद से जुड़े तथ्य भी हैं। वहां से आईएस मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ, जिसके सदस्य जाकिर के भाषणों से प्रभावित थे।
इससे पहले सोमवार को शिव सेना ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह माफिया डॉन दाउद इब्राहिम कासकर और टाइगर मेमन को पकडऩे की योजना त्याग दे और उसके स्थान पर मुंबई निवासी विवादास्पद इस्लामिक उपदेशक डॉ.जाकिर नाईक पर मुकदमा दर्ज करे। शिव सेना ने कहा है, पाकिस्तान से दाऊद या मेमन को घसीट कर लाने की घोषणा बंद करो..अब नाईक पर ध्यान केंद्रित करो, यह घर में छिपा दुश्मन है..उसे गिरफ्तार करो और उसी कोठरी में रखो, जिसमें अजमल कसाब को रखा गया था। शिव सेना ने कहा, नाईक के प्रचार और साहित्य के बारे में क्या कहना है? ये देश में अलगाववादी तत्वों को हवा दे रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वह नरक में धकेल कर मुसलमानों का मसीहा बनने की कोशिश कर रहा है। यह एक नई तरह की अशांति है और भारत में पाकिस्तान की रचना हो रही है। नई दिल्ली और महाराष्ट्र में भाजपा सरकार हिम्मत दिखाए और नाईक के पीस टीवी पर प्रतिबंध लगाए तथा उसके प्रचार तंत्र को ध्वस्त करे।
नाईक के पीस टीवी का प्रसारण बांग्लादेश में बंद कर दिया गया है। सरकार ने इसका प्रसारण अधिकार रद्द कर दिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उक्त टीवी का प्रसारण बंद करने के संबंध में कानून-व्यवस्था पर मंत्रिमंडलीय समिति के फैसले के एक दिन बाद सोमवार को इस आशय का आदेश जारी किया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आदेश में कहा गया है, मंत्रिमंडलीय समिति के निर्णय के आधार पर डाउनलिंक शर्तों का उल्लंघन करने के लिए फ्री-टू-एयर टीवी चैनल पीस टीवी के प्रसारण अधिकार रद्द कर दिए गए हैं। मंत्रालय ने पूरे देश में इस चैनल का प्रसारण बंद करने के लिए प्राधिकारियों से भी कहा है। आदेश की प्रति गृह मंत्रालय, प्रेस सूचना विभाग और बांग्लादेश के केबल ऑपरेटर संघ को भेज दी गई है।
यह निर्णय इन आरोपों के बाद लिया गया कि 50 वर्षीय भारतीय उपदेशक के भाषणों और उनकी इस्लामिक मुद्दों की व्याख्या से आतंकवादी गतिविधियों को प्रेरणा मिल रही है और युवा चरमपंथ की ओर बढ़ रहे हैं। नाईक मुंबई स्थित धर्मार्थ संगठन इस्लामिक शोध संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष है। यह संस्था पीस टीवी का मालिक और संचालक भी है। इसकी विषय वस्तु अंग्रेजी, उर्दू और बांग्ला भाषा में दुबई से प्रसारित की जाती है। ब्रिटेन और कनाडा में नाईक के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। मुस्लिम बहुल देश मलेशिया में पीस टीवी के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा हुआ है। यह प्रतिबंध इस माह बांग्लादेश में हुए खूनी आतंकी हमले के बाद लगाया गया है।
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