मथुरा

न्यूयॉर्क । भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक और ‘हॉट योगा गुरु’ के रूप में पूरी दुनिया में मशहूर हुए बिक्रम चौधरी को कोर्ट ने उनकी 500 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति से बेदखल कर दिया है। कोर्ट ने बिक्रम चौधरी को उसकी पूर्व वकील मीनाक्षी जाफा बोडेन को करीब 6 करोड़ 27 लाख रुपए का मुआवजा देने के लिए कहा था लेकिन वह अमेरिका छोडक़र फरार हो गया। बिक्रम के इस कदम से कोर्ट इतना नाराज हुआ कि उसने मीनाक्षी को ही ‘बिक्रम योग स्टूडियोज’ की 700 फ्रेंचाइजी की मालकिन बना दिया है। क्या है मामला मीनाक्षी ने बिक्रम पर आरोप लगाया था कि काम के दौरान उन्हें लिंगभेद का भी शिकार होना पड़ा। बिक्रम ने उनका रेप किया और बाद में उन्हें गलत तरीके से टर्मिनेट कर दिया। कोर्ट में केस हार जाने पर जब कोर्ट ने बिक्रम को 6 करोड़ 27 लाख रुपए का मुआवजा देने का ऑर्डर दिया तो वह कथित तौर पर भारत भाग गया। मीनाक्षी ने आरोप लगाया है कि कोलकाता की गली से उठकर योग के जरिए यहां तक पहुंचा बिक्रम अपने छात्र को प्रशिक्षण देने के लिए 13,500 पाउंड (करीब साढ़े 11 लाख रुपए) चार्ज करता था। मीनाक्षी के मुताबिक जैसे-जैसे बिक्रम का बिजनेस बढ़ता चला गया, उसका व्यवहार और नीयत भी बदलती गई। शराब और सेक्स बिक्रम की जिंदगी का हिस्सा बन गए थे और पिछले कुछ सालों के दौरान उसने करीब 5000 महिलाओं के साथ अवैध संबंध बनाए। युवा छात्राओं पर बिक्रम की नजर हमेशा टिकी रहती थी और उसने कई लड़कियों को बहकाकर उनके साथ संबंध बनाए हैं। फिलहाल मीनाक्षी ने खुद को बिक्रम का बॉस घोषित कर दिया है। 69 वर्षीय भारतीय अमेरिकी बिक्रम चौधरी ‘बिक्रम योगा’ के संस्थापक हैं और पूरी दुनिया में हॉट योग गुरु के नाम से मशहूर हैं। 220 देशों में उनके 720 योग स्कूल हैं, जहां बिक्रम योग सिखाने जाता है। बिक्रम के फॉलोअर्स में मैडोना, डेमी मूर, बिल क्लिंटन की बेटी चेल्सी क्लिंटन और जॉर्ज क्लूनी जैसे कई हॉलीवुड, खेल और पॉलिटिक्स की दुनिया के हाई प्रोफाइल सेलिब्रिटीज शामिल हैं। बिक्रम चौधरी अपने फॉलोअर्स को 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में योग सिखाते हैं और इसे ही वह ‘हॉट योगा’ का नाम देते हैं। फोब्र्स के मुताबिक, बिक्रम एक ट्रेनिंग सेशन का 10 हजार डॉलर लेते हैं। 20 हजार डॉलर में पर्सनल ट्रेनिंग देते हैं। बिक्रम बीते साल अक्टूबर में कॉपीराइट केस हार गए थे। इसमें 26 पोज और तीन ब्रीथ एक्सरसाइज थे। बिक्रम की प्रॉपर्टी में जिन 43 लग्जरी कारों का जिक्र है, कोर्ट ने उनके बारे में भी जानकारी मांगी है। मीनाक्षी ने कोर्ट को बताया है कि बिक्रम की प्रॉपर्टी में उसकी 43 लग्जरी कारें भी हैं, जो गुम हैं। बिक्रम की प्रॉपर्टी में शामिल कारें, जिनमें 13 रॉल्स रॉयस, 8 वेंटले और तीन फेरारी शमिल हैं। अमेरिकी कोर्ट ने बिक्रम के गैरेज मैनेजर को समन जारी कर जवाब मांगा था लेकिन उसने कहा है कि इस बारे में वह कुछ नहीं जानता। मीनाक्षी का आरोप है कि कोर्ट के ऑर्डर के बावजूद बिक्रम ने अपनी प्रॉपर्टी छिपा ली और अब वह अमेरिका छोडक़र भाग चुका है लेकिन उन्हें विश्वास है कि न्याय होकर रहेगा।     साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी में मचा घमासान फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। सोमवार को मुलायम अपना दुखड़ा लेकर दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे तो आज बेटे अखिलेश की तरफ से साइकिल पर दावा ठोकने के लिए चाचा प्रोफेसर रामगोपाल यादव पहुंचे। इस बीच मंगलवार को दोनों धड़े में सुलह की एक और कोशिश नाकाम हो गई जब मुलायम और आजम खान के बीच होने वाली मीटिंग भी रद्द हो गई। आजम से मिले बिना ही मुलायम लखनऊ के लिए रवाना हो गए। बाद में यूपी के कैबिनेट मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने कहा, ‘मेरी भी अपनी सीमाएं हैं। मेरा मकसद था कि अखिलेश का निलंबन वापस हो जाए, इसमें कामयाबी मिली। माइनोरिटी वोट यह नहीं चाहेगा कि सपा सत्ता से जाए। मायूसी तो है, फिकरमंदी भी है, लेकिन अभी समय है। मैं आगे भी कोशिश करूंगा। अभी सब कुछ संभव है।’ उन्होंने कहा कि सुलह की कोशिश जारी रहेगी, सभी दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि सपा में सबकुछ हो सकता है, लेकिन जुदाई नहीं। उन्होंने कहा कि मुसलमान सपा के साथ हैं। चिट्ठी पर मुलायम सिंह के हस्ताक्षरों को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर उन्होंने कहा, ‘दो दस्तखत हैं, एक शॉर्ट फॉर्म में, एक फुल फॉर्म में। कहने वाले तो कुछ भी कहते हैं।’ चुनाव में किसको फायदा होगा, मुलायम को या अखिलेश को? इस सवाल पर आजम ने कहा कि चुनाव अभी बहुत दूर हैं, इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। बता दें कि इससे पहले जब मुलायम ने अखिलेश और रामगोपाल यादव को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर निकाल दिया, तो अगले ही दिन आजम नेताजी से मिलने के लिए उनके आवास पर पहुंचे। उसके बाद सुलह की कोशिश तेज हुई, जिसके तहत वह अखिलेश को लेकर मुलायम के पास आए और शिवपाल सिंह को भी वहां बुलाया गया। करीब एक घंटे चली बैठक के बाद शिवपाल ने अखिलेश और रामगोपाल के निष्कासन को रद्द करने का ऐलान किया। लेकिन बात तब और बिगड़ गई जब रामगोपाल के लखनऊ में बुलाए गए राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुलायम को मार्गदर्शक बना दिया गया। शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया दिया गया और अमर सिंह को पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद उसी दिन, एक जनवरी को मुलायम ने फिर रामगोपाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया।     साभार-khaskhabar.com  

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मथुरा । प्रदेश सरकार द्वारा गरीबों के हित में कई योजनाओं का शिलान्यास किया गया जिसमें खाद्यान्न के जरिए गरीबों को अब काफी मात्रा में सुविधाएं मुहैय्या हो रही है। गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए बीपीएल राशन कार्ड आज सोमवार को सभासद द्वारा बांटे गए। जिसे पाकर गरीब तबके लोगों में हर्ष की लहर थी। यह राशन कार्ड पूरी तरह से सही प्रकार से बने हुए है।  गरीबों के पास राशन कार्ड न होने की वजह से हो रही परेशानियों को देखते हुए वार्ड नं. 11 की सभासद राजरानी निमेष इसे गंभीरता से लेते हुए गरीबों के फार्म भरवाकर आज सोमवार को संग्रहालय के पास स्थित राशन डीलर राम सिंह के सहयोग से गरीबों को कार्ड वितरित किए। राशन डीलर राम सिंह के अनुसार आज 100 के लगभग राशन कार्ड वितरित किए गए है तथा जो भी और बचे है उनको कल दिए जाएंगे उसी के बाद सभी को राशन वितरित किया जाएगा। वहीं सभासद राजरानी निमेष के अनुसार अपने वार्ड की समस्याओं का समाधान करना सर्वप्रथम सभासद का काम होता है। आज वे स्वयं उपस्थित होकर गरीबों को राशन कार्ड प्रदान किए। उन्होंने कहा कि उनके अंडर में दो राशन डीलर आते है, उनका सही तरीके से कार्य चल रहा है। 

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मथुरा । नोटबंदी भारत के गरीब, किसानों, मजदूरों, दुकानदारों, मध्यम वर्ग तथा छोटे कारोबारियों पर एक सर्जिकल स्ट्राइक है। विगत 8 नवम्बर को देश की 86 फीसदी करेंसी को बंद करके प्रधानमंत्री ने एक प्रतिशत काला धन रखने वालों को पकड़ा है जिसमें 99 प्रतिशत ईमानदार, मेहनतकश भारतियों पर मुसीबतों का पहाड़ तोड़ दिया है। भारत में तरक्की का पहिया जाम हो गया है और पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक अराजकता  फैला दी है।  यह बात आज जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तरप्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष उपेदर सिंह उपाध्याय ने कही। उन्होंने मीडिया से कहा कि नोटबंदी के नाम पर भारत में सबसे बड़ा घोटाला साबित हुआ है जिसमें प्रमुख रूप से कोलकाता बैंक में भाजपा के खाते सं. 554510034 में पांच सौ, एक हजार के तीन करोड़ रूपया जमा हुआ, नोटबंदी से पहले भाजपा ने सैकड़ों करोड़ की सम्पत्ति खरीदी, 8 सितम्बर 2016 को इंदिरापुरम गाजियाबाद में हरियाणा के नम्बर की मारूति से 3 करेाड़ रूपया जब्त हुआ उसका क्या हुआ, इसी प्रकार से कई प्रदेश उपाध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाए और कहा कि इन सारे सवालों के जवाब न तो प्रधानमंत्री मोदी के पास है और न ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के पास है।  प्रेसवार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष सोहन सिंह सिसोदिया, कांग्रेस कमेटी शहराध्यक्ष आबिद हुसैन, मलिक अरोड़ा, विनेश सनवाल जिला महासचिव, नूतन बिहारी पारीख, महैदर प्रताप गौतम, डा आशुतोष भारद्वाज, राजकुमार तिवारी, प्रकाश शर्मा,आशीष चतुर्वेदी, जितेदर मणी,कीरती कौशिक, मनोज गौड, अनिल चतुर्वेदी, विकरम वालमीक,  पुरषोतम सैनी,  घनश्याम चैधरी, बिहारी लाल, तैयब कुरैशी, नीरज वाल्मीकि, अभिषेक  आदि प्रमुख रुप से मौजूद रहे। 

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मथुरा । साल के पहले दिन शहर के डैम्पियर नगर स्थित महारानी अहिल्याबाई होल्कर पार्क में धनगर समाज की एक विशाल बैठक आयोजित की गई थी जिसमें उपस्थित लोगों ने एक स्वर से निरंजन  धनगर के खिलाफ आवाज उठाते हुए उन्हें सर्व सम्मति से  समाज से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया । बैठक में धनगर समाज के वक्ताओं का कहना था कि निरंजन बघेल स्वयं धनगर बने हुए हैं और उन्होंने  गलत तरीके से धनगर  प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है जबकि धनगर समाज के लोगों के प्रमाण पत्र बनने में व अवरोध पैदा कर रहे हैं जिसको लेकर धनगर समाज में गहरा रोष व्याप्त है इस बीच सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने एक स्वर से हाथ उठाकर निरंजन बघेल का सामाजिक बहिष्कार कर दिया वहीं दूसरी ओर जिला अधिकारी को हरीश धनगर के द्वारा भेजी गई एक शिकायत के आधार पर सोमवार को एक जाँच करनी थी जिसको लेकर  जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में दोनों पक्षों की एक बैठक बुलाई थी जिसमें अपरजिलाधिकारी प्रशासन जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा तहसीलदार महावन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे थे इस मौके पर जहां हरीश धनगर ने अपने तमाम साक्ष्य प्रस्तुत किए और निरंजन धनगर पर फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र हासिल करने का आरोप लगाया था वहीं दूसरी ओर निरंजन धनगर ने अपने अधिवक्ता के साथ पहुंचकर जिला अधिकारी को एक प्रार्थना पत्र दिया जिसमें साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था जिस पर जिलाधिकारी ने निरंजन धनगर को 15 दिन की साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु मोहलत दी है सूत्रों का कहना है कि बीते 2 दिनों से निरंजन धनगर प्रशासन के आला अधिकारियों पर दबाव बना रहा था कि वह उसके साक्ष्य प्रस्तुत करने की तिथि को आगे बढ़ा दें जिसमें वहसोमवार को काफी हद तक सफल भी हो गया बताया जाता है कि चुनाव आयोग द्वारा प्रदेश में इसी सप्ताह चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी जिसका चलते  इसी सप्ताह प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा  की जानी है निरंजन बघेल यह चाहता है कि यदि चुनाव घोषित हो गए तो वह अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा हालाकी धनगर समाज के अलावा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लोग उसके खिलाफ लगे हुए हैं और उनकी मंशा है कि इसका यह प्रमाण पत्र निरस्त हो जाए सूत्रों का दावा है कि निरंजन धनगर के द्वारा 1990 में जमीनों के बैनामे में बघेल जाति दर्ज करा रखी है और इसकी धर्मपत्नी पिछड़ी जाति से जिला पंचायत चुनाव लड़ चुकी है वही निरंजन धनगर के शेक्षिक प्रमाणपत्र की जाती कॉलम में बघेला ठाकुर लिखा हुआ है जबकि धनगर जाति के अन्य लोग जिनके अभिलेखों में 1918 में धनगर जाति अंकित है उनके प्रमाण पत्र अभी तक प्रशासन के द्वारा नहीं बनाए गए हैं इससे कहीं ना कहीं प्रशासन की मंशा पर भी खोट नजर आता है वही जिला अधिकारी के द्वारा दी गई 15 दिन की मोहलत भी जहां निरंजन धनगर के लिए अमृतबाण साबित होगी वही धनगर समाज के सैकड़ों लोग इसके बाद मायूस हो गए थे धनगर समाज के लोगों का कहना है कि वह अपने अधिकार और हक के लिए अपने संघर्ष को जारी रखेंगे और अंत में सत्य की ही जीत होगी अब यह  आने वाला वक्त बताएगा कि ऊंट किस करवट बदलता है फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ हैं और लोंगों की प्रशासन पर ऊँगली उठ रही हैं

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मथुरा । साल के पहले दिन शहर के डैम्पियर नगर स्थित महारानी अहिल्याबाई होल्कर पार्क में धनगर समाज की एक विशाल बैठक आयोजित की गई थी जिसमें उपस्थित लोगों ने एक स्वर से निरंजन  धनगर के खिलाफ आवाज उठाते हुए उन्हें सर्व सम्मति से  समाज से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया । बैठक में धनगर समाज के वक्ताओं का कहना था कि निरंजन बघेल स्वयं धनगर बने हुए हैं और उन्होंने  गलत तरीके से धनगर  प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है जबकि धनगर समाज के लोगों के प्रमाण पत्र बनने में व अवरोध पैदा कर रहे हैं जिसको लेकर धनगर समाज में गहरा रोष व्याप्त है इस बीच सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने एक स्वर से हाथ उठाकर निरंजन बघेल का सामाजिक बहिष्कार कर दिया वहीं दूसरी ओर जिला अधिकारी को हरीश धनगर के द्वारा भेजी गई एक शिकायत के आधार पर सोमवार को एक जाँच करनी थी जिसको लेकर  जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में दोनों पक्षों की एक बैठक बुलाई थी जिसमें अपरजिलाधिकारी प्रशासन जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा तहसीलदार महावन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे थे इस मौके पर जहां हरीश धनगर ने अपने तमाम साक्ष्य प्रस्तुत किए और निरंजन धनगर पर फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र हासिल करने का आरोप लगाया था वहीं दूसरी ओर निरंजन धनगर ने अपने अधिवक्ता के साथ पहुंचकर जिला अधिकारी को एक प्रार्थना पत्र दिया जिसमें साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था जिस पर जिलाधिकारी ने निरंजन धनगर को 15 दिन की साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु मोहलत दी है सूत्रों का कहना है कि बीते 2 दिनों से निरंजन धनगर प्रशासन के आला अधिकारियों पर दबाव बना रहा था कि वह उसके साक्ष्य प्रस्तुत करने की तिथि को आगे बढ़ा दें जिसमें वहसोमवार को काफी हद तक सफल भी हो गया बताया जाता है कि चुनाव आयोग द्वारा प्रदेश में इसी सप्ताह चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी जिसका चलते  इसी सप्ताह प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा  की जानी है निरंजन बघेल यह चाहता है कि यदि चुनाव घोषित हो गए तो वह अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा हालाकी धनगर समाज के अलावा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लोग उसके खिलाफ लगे हुए हैं और उनकी मंशा है कि इसका यह प्रमाण पत्र निरस्त हो जाए सूत्रों का दावा है कि निरंजन धनगर के द्वारा 1990 में जमीनों के बैनामे में बघेल जाति दर्ज करा रखी है और इसकी धर्मपत्नी पिछड़ी जाति से जिला पंचायत चुनाव लड़ चुकी है वही निरंजन धनगर के शेक्षिक प्रमाणपत्र की जाती कॉलम में बघेला ठाकुर लिखा हुआ है जबकि धनगर जाति के अन्य लोग जिनके अभिलेखों में 1918 में धनगर जाति अंकित है उनके प्रमाण पत्र अभी तक प्रशासन के द्वारा नहीं बनाए गए हैं इससे कहीं ना कहीं प्रशासन की मंशा पर भी खोट नजर आता है वही जिला अधिकारी के द्वारा दी गई 15 दिन की मोहलत भी जहां निरंजन धनगर के लिए अमृतबाण साबित होगी वही धनगर समाज के सैकड़ों लोग इसके बाद मायूस हो गए थे धनगर समाज के लोगों का कहना है कि वह अपने अधिकार और हक के लिए अपने संघर्ष को जारी रखेंगे और अंत में सत्य की ही जीत होगी अब यह  आने वाला वक्त बताएगा कि ऊंट किस करवट बदलता है फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ हैं और लोंगों की प्रशासन पर ऊँगली उठ रही हैं

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मथुरा । सपा की घोषित सूची में मथुरा के तीनों प्रत्याशी आज अखिलेश यादव के खेमे में नजर आये। मथुरा-वृन्दावन से घोषित प्रत्याशी डा.अशोक अग्रवाल, छाता से लोकमणिकांत जादौन एवं मांट से जगदीश नौहवार ने अखिलेश को अपना नेता एवं अगला मुख्यमंत्री बनाने की दिशा में चुनाव में दमदारी से उतरने का दावा किया।  लखनऊ से फोन से वार्ता करते हुए छाता विधानसभा से सपा प्रत्याशी लोकमणि कांत जादौन का कहना था कि उनके नेता अखिलेश यादव हैं। सपा का मतलब सिर्फ अखिलेश यादव है, वहा जहां है वह वहां हैं और छाता क्षेत्र से वह ही सपा के प्रत्याशी हैं। अगर गठबंधन भी होता है तो भी वह चुनाव लडेंगे क्योंकि अखिलेश भईया ने यह सीट गठबंधन में भी अपने पास रखकर चुनाव लडाने को कहा है।  मथुरा-वृन्दावन से सपा प्रत्याशी डा.अशोक अग्रवाल ने अखिलेश यादव को अपना नेता बताते हुए आगामी चुनाव लडने का दावा किया है। इधर मांट से घोषित प्रत्याशी कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन जगदीश नौहवार ने कहा कि वह सपा की घोषित दोनों सूचियों में मांट से प्रत्याशी हैं। मुख्यमंत्री जी ने जो २३५ की सूची और शिवपाल यादव जी की ३२५ की सूची जारी की थी, उन दोनों में उनका मांट क्षेत्र से प्रत्याशी के रूप में नाम था। अब वह मांट से सपा प्रत्याशी हैं और अखिलेश यादव जी को नेता मानते हैं। अगला मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही होंगे। उनसे जब पूछा गया कि वह किस राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ हैं  तो उनका कहना था कि ये परिवार पूरा एक है, इस बारे में हम कोई बयान नहीं देंगे। खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कह चुके हैं कि नेताजी उनके पिता हैं और रहेंगे। जो भी बात है परिवार के लोग आपस में सुलझा लेंगे। प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री भाई अखिलेश यादव ही होंगे और उनको मुख्यमंत्री बनाते हेतु वह मांट से सपा प्रत्याशी के रूप में दमदारी से चुनाव लडेंगे। मथुरा जिले में पांच विधानसभा सीटों पर केवल तीन ही प्रत्याशी अब तक घोषित किये हैं। इन तीनों में अखिलेश यादव को अपना नेता माना है। जिले की दो अन्य सीट गोवर्धन व बल्देव विधानसभा से अभी तक कोई प्रत्याशी घोषित हुआ है। देखाना है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इन सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारते हैं अथवा गठबंधन के लिए सीटें छोडते हैं। 

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मथुरा । सपा, कांग्रेस, रालोद पार्टियों में प्रदेश में चुनावी गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं को अगर बल मिला और तीनों दल मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव लडे तो सपा के घोषित प्रत्याशीयों को हटाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि मथुरा-वृन्दावन क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक प्रदीप माथुर हैं, जो कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता भी हैं और सिटिंग विधायक भी हैं। इसलिए इस सीट पर घोषित सपा उम्मीदवार डा.अशोक अग्रवाल जो मामूली वोटों से गत चुनाव हार गये थे उनकी उम्मीदवारी वापस हो सकती है। इसी दिशा में छाता विधानसभा से वर्तमान विधायक ठाकुर तेजपाल सिंह हैं जो रालोद से विधायक हैं पर वह वर्तमान में रालोद में नहीं हैं। अगर सपा से रालोद का बठबंधन हुआ तो रालोद अपना दावा कर सकता है। क्योंकि यह सीट उसके ही सिटिंग विधायक की सीट है और फिर सपा से घोषित उम्मीदवार लोकमणि कांत जादौन जोकि गत चुनाव भी सपा प्रत्याशी के रूप में लडे थे और अब भी सपा से घोषित उम्मीदवार हैं, उनके नाम को सपा वापस ले सकती है। किंतु इस दिशा में श्री जादौन का दावा है कि वह गठबंधन होने पर भी प्रत्याशी होंगे यह सीट रालोद को नहीं जायेगी। क्योंकि उसके दल का वर्तमान विधायक उस दल में नहीं है और रालोद से ज्यादा आज की तारीख में सपा का वजूद है। इस क्षेत्र में हम ही थे और गठबंधन में भी रहेंगे। यही हाल मांट विधानसभा सीट का बताया गया। जानकारों का मानना है कि अगर प्रदेश में सपा, कांग्रेस, रालोद का गठबंधन हुआ तो मथुरा की पांचों विधानसभा सीटें सपा अपने सहयोगी दलों को दे देगी। जिसमें कांग्रेस मथुरा-वृन्दावन पर तथा बाकी पर रालोद अपना दावा करेगा। गत चुनाव में मिले वोटों और अपने दल के प्रत्याशियों को मिले वोटों को देखते हुए मानना पडेगा। अगर गत लोकसभा चुनाव की तुलना की जाये तो भी रालोद का सपा से ज्यादा मथुरा की सीटों पर दावा बनता है। इसे सपा को मानने पर विवश होना पडेगा। अब प्रश्र यह कि अगर अखिलेश वाली सपा से गठबंधन हुआ और मुलायम सिंह की सपा ने अपने प्रत्याशी उतार दिये तो जिले में इस गठबंधन पर असर पडना लाजमी है।

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राधाकुण्ड । अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही अपने चाचा शिवपाल यादव को अध्यक्ष पद से हटकर नरेश उत्तम की प्रदेश अध्यक्ष पद पर ताज पोशी कर दी। वहीं अखिलेश समर्थक सपा वरिष्ट नेता प्रदीप चैधरी व सैकड़ों समर्थकों ने पार्टी  दफ्तर खोल कर अपने कब्जे में किया। गुल्दस्ता भेंट कर भव्य स्वागत किया। प्रदी चैधरी ने कहा कि नरेश उत्तम पटेल पिछड़ा वर्ग समुदाय से आते है। कुर्मी वोटों के साथ प्रदेश संगठन में उनकी बहुत अच्छी पकड़ है। शिवपाल की जगह पाकर सभी समर्थकों का दिल जीता है।  उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने से पार्टी में मजबूती आई है।निशचित ही 2017 में अखिलेश सीएम और 2019 में प्रधानमंत्री बनेंगे। हर जिले में जमबूती रखने वाले प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे जाएंगे।  समाजवादी पार्टी भारी वहुमत से सीट हांसिल कर सरकार बनाऐंगी और प्रदेश का चहुमुखी विकास करेंगी। नये प्रदेश अध्यक्ष को गुल्दस्ता भेंट कर नव वर्ष की बधाई दी साथ ही उज्जवल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर युवा नेता कृष्ण मुरारी,दारा चैधरी, अमर खान,गिरधारी ठेकेदार, अनिल वर्मा, गौरव गोस्वामी, अजय सैंन, राजेश सक्सैना, मुरारी लाल शर्मा आदि सैकड़ों समर्थकों ने स्वागत किया।  

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मथुरा । गोवर्धन कस्बे में ठण्ड का फायदा उठाते चोरों ने दो मोबाइल की दुकानों को अपना निशाना बनाया। एक से तो चोर चोरी कर ले गये लेकिन दूसरी दुकान में उन्हें सफलता नहीं मिली। जानकारी के अनुसार बरसाना रोड पथवारी चैराहे पर विष्णु पुत्र मोहनश्याम निवासी सकरवा की कान्हा मोबाइल नाम से दुकान है। प्रतिदिन की तरह वह दुकान को बंद कर गांव चला गया। आज सुबह नौ बजे वह जब दुकान खोलने आया तो उसे शटर के नीचे गडढा मिला। चोर 90 हजार रूपये मूल्य के मोबाइल व गल्ले में रखे तीन हजार रूपये चुरा ले गये। बताते हैं कि करीब सौ मोबाइल दुकान से चोरों ने पार कर दिये। बरसाना रोड पर हुयी इस घटना से लोगों में नाराजगी है। बताते हैं कि शटर के नीचे गडढा कर घटना को अंजाम दिया गया है। पहले भी एक वर्ष पूर्व शटर काटकर मोहनश्याम की दुकान का माल चोरी किया गया था। पास में भोला पुत्र महावीर निवासी जैन गली गोवर्धन की भी गौरव मोबाइल के नाम से दुकान है, जो पचास कदम दूरी पर है। उस जगह पर भी शटर के नीचे गडढा करने का प्रयास किया गया लेकिन वह बच गया।

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