मथुरा

मथुरा। नौहझील ब्लाॅक के ग्राम पंचायत आरक्षण की सूची जारी कर दी गयी है। ग्राम पंचायत के आरक्षण की सूची में ब्लाॅक की कुल 67 ग्राम पंचायतों में से 33 पंचायतों को महिलाओं के लिए सुरक्षित किया गया है जिनमें से मकदुमपुर बांगर, भूरेका, रामगढी बांगर, नवीपुर, मुबारिकपुर, बादौठ एससी महिला तथा अवाखेडा, कानेका, मानागढी, पारसौली, लालपुर मांट, मडुआका बीसी महिला व नौहझील, लौहई, भालई, बेरा, बरौठ, हसनुपर, ईखू, अहमदपुर, खायरा, ओहावा पंचायतों को केवल महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। पंचायत आरक्षण में देदना बांगर, सींगोनी, बदनपुर, पचहरा, कौलाना, भिदौनी, सुरीर बिजउ, सुरीर कलां, शंकरगढी, भैरई को एससी के लिए तथा चांदपुर खुर्द, सददीकपुर, नौशेरपुर, मिटठोली, मनीगढी बांगर, पालखेडा, कोलाहर, गढी कोलाहर, दौलतपुर, सुहागपुर, तिलकागढी, मुसमुना बांगर को बीसी के लिए तथा ग्राम पंचायत शल्ल, सकतपुर, बाघई, बिरजूगढी, सामौली बांगर, अमानुल्लापुर, भरतियाका, शेउपटटी, दिलूपटटी, छिनपारई बांगर, बाघर्रा, ओहावा, लमतौरी, रायपुर पंचायतों को सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।

Read More

चैमुंहा। चित्त में चिंता लग रही है। मैं दिन भर यही सोच करूं, मेरे पास नहीं पैसा बेटी, तेरे कैसे पीले हाथ करूं? ब्रह्मा जी के मेला के उपलक्ष्य में पथवारी मंदिर पर रसिया दंगल के  दौरान दहेज पर गया रसिया लोगों के दिल को चीर गया। इसके अलावा अनेक रसिया प्रस्तत किए गए।  रसिया दंगल का शुभारम्भ निहाली सिंह, कारे सिंह, पूर्व सभासद लाखन सिंह सिसौदिया एवं ईश्वर लाल भगत ने संयुक्त रूप से किया। दंगल कमेटी ने सभी अतिथियों का पटुका ओढ़ाकर स्वागत किया। कलाकारों ने महाभारत, भागवत, गीता, रामायण, हनुमान कथा के वास्तविक बिंदुओं का स्पर्श कर एक दूसरे पर सवाल-जवाब किए। रात भर श्रोताओं ने थिरकते हुए रसियों का आनन्द लिया। आचार संहिता के चलते गायक राजनीति बिंदुओं से कन्नी काट गए। रामायण के चरित्र में जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चन्द पर आरोप लगाते हुए एक धोबी ने अपनी पत्नी को घर से यह कर लौटा दिया कि वह कोई राम चन्द्र नहीं है। सीता जी की अग्नि परीक्षा के प्रसंग को सुन कर श्रोता भाव विभोर हो गए। एक के एक बाद एक अच्छे रसिया श्रोताओं को तालियां बजाने को विवश कर रहे थे। कई बार तो पुलिसकर्मियों को भीड़ को काबू में करना पड़ा। पवन गोपाल अखाड़ा मुरसान एवं बंसत अखाड़ा हाथरस के बीच बेहद रोमांचक रसिया दंगल हुआ। यंू तो दोनों पार्टी बराबर रहीं, मगर श्रोताओं ने पवन गोपाल आखाड़ा को श्रेष्ठ माना।  किसकी मजाल यहां जो भारत मां पर आंख उठाए, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, लहर लहर लहराए।  भगवान कृष्ण पर बैजंती माला कहां से आई, आजादी की शान  तिरंगा, सर का ताज बना रखा है। देश के हर रखवालों ने यह अपने हाथ उठा रखा है। हम सभी  हिन्दुस्तानी याद कर रहे हैं तेरी कहानी। भूल नहीं पाए ये शहीदों की कुर्बानी, सीमा पर अड़े देश की खातिर अपना खून बहा रखा है। कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों में पूर्व सभासद ठा. लाखन सिंह सिसौदिया थे। अध्यक्षता निहाली सिंह ने की। संचालक भूपाल सिंह ने किया। इस मौके पर व्यवस्थापक कारे बाबा, पूर्व चेयरमैन प्रतिनिधि ओंकार सिंह, कपूरा सेठ, सुरेश मेंम्बर, ईश्वर लाल भगत, लीला सिंह, सुघनो नेता, रौतान सिंह, सुखराम डायरेक्टर, लीला सुपरवाइजर, प्रहलाद सिंह, ओमप्रकाश, संजय सिंह सिसौदिया, बीके सिसौदिया, एनआर राजपूत, सतपाल सिंह, विक्रम सैनी, डब्बू सिसौदिया  आदि मौजूद थेे।

Read More

यमुना मिशन यमुना की शुद्धता, हरियाली, और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा के लिये कटिबद्ध है। इसका उदाहरण विगत कई माह से कृष्ण गंगा घाट, गउघाट, चक्रतीर्थ घाट, सरस्वती कुण्ड, के साथ साथ 30 फुटा रोड, गोवर्धन के कुण्डो तथा गोकुल में निरन्तर यमुना मिशन के नेतृत्व चल रहा कार्य है। जहाॅ यमुना मिशन द्वारा कराये गये कार्यो से स्थिति बदलती जा रही है। अब वह कुण्ड, सरोवर, घाट सुन्दर दिखने लगे है। दिनांक 29 सितम्बर मंगलवार को यमुना मिशन के कार्यकर्ताओं ने कृष्णगंगा घाट घाट के पास मथुरा परिक्रमा मार्ग पर सफाई की।  यमुना मिशन के सूर्यभान गोयल जी ने कहा कि अपने घर को साफ स्वच्छ रखना जैसे हमारी जिम्मेदारी है ऐसे ही अपने मौहल्ले अपने जिले और देश को स्वच्छ बनाने का जिम्मा भी हमारा है और इसकी शुरूआत हमें अपने ओर पास के वातावरण को स्वच्छ रखकर करनी होगी।  यमुना मिशन के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि हमारा मिशन ब्रज के साथ साथ पूरे देश में हरियाली लाना, यमूुना को स्वच्छ करना और अपनी सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करना है और इसके लिये हम कटिबद्ध है।  इस दौरान यमुना मिशन के संयोजक पं. अनिल शर्मा, लपुटी पंडित, मुकेश ठाकुर, मीरा गोस्वामी, रिचा शर्मा, राजेश तिवारी, बलराम, गोविन्दा ठाकुर, गोपाल, पंकज कौशिक आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। ़  

Read More

कालिन्दी का कालुष्य दूर हो उसकी कल कल निनाद ध्वनि उसका निर्मल मधुर जल कर्णो व कण्ठ को रसाभोर कर दे यह चाह हर वैष्णव भक्त के मन में प्रबल वेग से है और इसी प्रबल इच्छाशक्ति का परिणाम है कि सोलह कलाओं के स्वामी भगवान श्री कृष्ण के ब्रजधाम से अनेको जनान्दोलन समय समय पर उठते रहे है। विगत कुछ माह पूर्व मार्च में भी एक ऐसा ही जन सैलाब उमड़ कर दिल्ली में जा केन्द्र की राजनीति की नींव को हिलाने लगा था। जीवन और आस्था से जुड़ा यह अति महत्वपूर्ण विषय उस आन्दोलन के बाद राजनेताओं के संज्ञान में आने लगा और इसी के चलते उस वक्त केन्द्र सरकार ने आन्दोलन कारियों की दोनो मांगे मानकर उन्हे शान्त किया। परन्तु आन्दोलन के समय प्रदत्त समय सीमा पूर्ण होने पर भी यमुना का कार्य न होने पर यमुना मुक्तिकरण अभियान के पदाधिकारियों ने गम्भीरता से गहन चर्चा की। यमुना जल्द अविरल निर्मल बहे इसके लिये यमुना मुक्तिकरण अभियान कटिबद्ध है। इसी को लेकर गीतामनीषी सन्त ज्ञानानन्द जी महाराज के आश्रम कृष्णकृपा धाम में यमुना मुक्तिकरण अभियान के मुख्य पदाधिकारियों की बैठक आहूत की गई। जिसकी अध्यक्षता पूज्य ज्ञानानन्द जी महाराज द्वारा की गई।  बैठक की अध्यक्षता करते हुये पूज्य श्री ज्ञानानन्द जी महाराज ने बताया कि आन्दोलन के पश्चात् से ही यमुना के लिये हर सम्भव प्रयास उनके द्वारा किये जा रहे है। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह व जलसंसाधन मंत्री उमाभारती से उनकी और अभियान के पदाधिकारियों की कई बैठके होती रही है जिसमें केन्द्रसरकार ने अपनी वचनबद्धता दोहराई है। उमाभारती जी ने कहा कि एन. जी टी के आदेश के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर अन्य प्रदेशों मुख्यमंत्रियों के सम्पर्क में है और पर्याप्त जल प्रवाह बनाये रखने पर निति तैयार की जा रही है। उन्होने बताया कि अक्टूबर माह में उमा भारती जी को वृन्दावन आश्रम में बुलाकर सारी वर्तमान स्थिति से अवगत कराया जायेगा। उन्होने बताया कि यमुना की शु़द्धता को लेकर केन्द्र सरकार सकारात्मक है यदि एक प्रतिशत भी ऐसा लगता है कि तो संत और यमुना भक्त मिलकर पुनः दिल्ली को घेर लेंगे।  यमुना मुक्तिकरण अभियान के संयोजक राधाकान्त शास्त्री ने कहा कि यदि सरकार द्वारा अन्यथा वाली स्थिति लायी जाती है तो हमारे मृदुलकान्त शास्त्री जी सभी मूर्धन्य सन्तो एवं व्यासाचार्यो से संपर्क साधे हुये है। अभियान के पदाधिकारी निरन्तर यमुना भक्तों के संपर्क में है दिल्ली को पुनः घेरने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। बैठक में यमुना के लिये गहन चर्चा हुयी सभी उपस्थित पदाधिकारियों ने अपने विचार प्रस्तुत किये।  पूज्य ज्ञानानन्द जी महाराज ने अभियान के जिलाध्यक्ष पंकज चतुर्वेदी द्वारा मसानी नाले को बन्द कराने को लेकर चल रहे प्रयासों की सराहना करते हुये कहा कि यमुना का आना तो निश्चित ह ैअब तो हमें उनके पथ की साफ करना है।  अभियान के प्रदेश अध्यक्ष श्याम चतुर्वेदी एवं पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि दिल्ली में केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की मदद से यमुना की किनारें की सफाई की जायेगी इसी कदम की ब्रज को भी आवश्यकता है ब्रज में भी वृन्दावन मथुरा और गोकुल मे गिरते नाले बन्द होने चाहियें। और इसकी शुरूआत हम मसानी नाले से करना चाहते है। उन्होने बताया कि यमुना में सीधे बिना ट्रीट किया गन्दा पानी जा रहा है जो अब नहीं होने दिया जायेगा। यमुना मुक्तिकरण अभियान की जिला ईकाई एवं भारतीय किसान यूनियन भानू के कार्यकर्ता इसको लेकर आन्दोलन करेगे। इस अवसर पर मसानी नाले को लेकर होने वाले आन्दोलन की कमान बैठक में अभियान के प्रदेश संयोजक श्याम चतुर्वेदी, जिला संयोजक पंकज चतुर्वेदी एवं मनोज पाठक जी को सौंपी गई।  इस दौरान व्यासाचार्य मृदुलकान्त शास्त्री, कैप्टन हरिहर शर्मा, डाॅ यमुना देवी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।   

Read More

मथुरा : बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन में मथुरा-वृन्दावन विधानसभा क्षेत्र से योगेश द्विवेदी को पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है। 

Read More

प्रोफेसर बालकृष्णा  की पुस्तक 'दी रोल ऑफ़ दी प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया' का विमोचन मुंबई प्रेस क्लब में श्री बी के शर्मा के द्वारा किया गया  मुम्बई। श्री बृज किशोर शर्मा(राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन के अध्यक्ष, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा प्रोफेसर बालकृष्णा (भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद  के  प्रेस अताशे)द्वारा लिखित पुस्तक 'दी रोल ऑफ़ दी प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया' का विमोचन प्रेस क्लब, सीएसटी, मुंबई में 26 सितंबर, 2015 को किया गया।पुस्तक का प्रकाशन 'फ्रंटियर इंडिया टेक्नोलॉजी' द्वारा श्री जोसेफ पी चाको द्वारा किया गया है।     सन् 1990 में लिखा, पुस्तक में उनकी भूमिका और शक्तियों के बारे में भारत के पहले राष्ट्रपति को सौंपी गई एक रिपोर्ट पर आधारित है। संविधान 26 जनवरी, 1950 को अस्तित्व में आया है, जब राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा दिया गया प्रावधानों के आधार पर उनकी भूमिका की व्याख्या करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने भारत तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और अटार्नी जनरल एम.सी. सीतलवाड़ से भी प्रेसिडेंट के पावर के बारे पूछा लेकिन कोई भी जवाब उन्हे सही नहीं लगा।बाद में वे इस मामले आगे की जांच की जरूरत महसूस किया।स्वर्गीय प्रोफेसर बालकृष्णा को डॉ राजेंद्र प्रसाद के एक निमंत्रण मिलने के बाद वे भारत की संविधान सभा के सचिवालय में शामिल हो गए। उन्हे हिन्दी में संविधान तैयार करने का काम सौंपा गया था। बाद में वे प्रेस अताशे के रूप में राष्ट्रपति के निजी स्टाफ में शामिल हो गए, और बाद में उसकी उप सचिव के रूप में कार्य किया। उसके बाद गोपनीय आधार पर प्रो बालकृष्णा को प्रेसिडेंट के पावर के बारे जांच का काम सौंपा गया।   इस अवसर पर श्री बृज किशोर शर्मा ने पुस्तक 'दी रोल ऑफ़ दी प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया' के बारे में लोगों को बताया और अपनी राय लोगों को बताया। भारत के प्रख्यात संवैधानिक वकील से श्री फाली एस नरीमन, जो किसी कारणवश यहा आ नहीं सके। उनके द्वारा भेजा सन्देश और पुस्तक के बारे में प्रतिक्रिया पढ़ कर लोगों को सुनाया गया। स्वर्गीय प्रोफेसर बालकृष्णा   के बेटे श्री धर्मेन्द्र कुमार, कमोडोर श्री अरुण कुमार, श्री हेमंत कुमार, बेटी प्रभा राव भी आये थे और उनके सहयोग की वज़ह से इस बुक का प्रकाशन हुआ। इस अवसर पर पुस्तक का प्रकाशन 'फ्रंटियर इंडिया टेक्नोलॉजी' द्वारा श्री जोसेफ पी चाको और उनकी पत्नी, सुमित मेहता इत्यादि लोगों ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर को सफल बनाया।       

Read More



Mediabharti