मथुरा

युवक कांग्रेस करेगी जगह-जगह धरने प्रदर्शन  मथुरा। यमुना के घाटों पर स्थायी गोताखोर तैनात न होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। घाट किनारे क्षेत्र में भारी गंदगी और अंधकार होने से यहां असामाजिक तत्व सक्रिय हो रहे हैं वहीं गंदगी से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही है। लेकिन नगर पालिका चैयरमैन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है इससे जनमानस में भारी आक्रोश है। आज इसको लेकर युवक कांग्रेस के अध्यक्ष यतेन्द्र मुकद्म ने नगर मजिस्टेªट को ज्ञापन देकर कहा कि नगर पालिका अगर इस ओर ध्यान नहीं देगी तो जगह-जगह अक्षम चेयरमैन मनीषा गुप्ता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इस अवसर पर बिहारीलाल, दीपक वर्मा, संतोष, करनवीर सिंह, विवेक चतुर्वेदी, अजय शर्मा, कौशल तौमर, आशीष चतुर्वेदी, गोलू पंडित, अनिल अग्रवाल, शिवम चैधरी, मोहित चतुर्वेदी, आदि मौजूद थे। 

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आचार्य प्रवर स्वामी ए.एस. विज्ञानाचार्य जी महाराज के पावन सान्निध्य में तथा यमुना रक्षक दल व चेतना बोध मिशन के संयुक्त तत्वाधान में 5 अगस्त से 31 अगस्त 2015 तक गोविन्द मठ वृन्दावन में 27 दिवसीय ब्रज महोत्सव के समापन के अवसर पर आज पाँच गाँव तरौली, वाटी, सैनवा, नरी, डिरावली गाँव के लोगों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। यमुना रक्षक दल  के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण ने अपने विचारों में कहा कि गाय तभी बचेगी जब गौ भक्त गाय के अमृत तुल्य दूध की कीमत 50रु. लीटर तथा घी की कीमत 2000रु. किलो गौ-पालकों को दें तभी ब्रजवासी के घर-घर में गायों की अधिकता होगी और तभी हम गाय बचाने का कार्य सही अर्थोे में करेंगे। गाय के लिए दान नहीं चाहिए गाय बचाने के लिए गाय का दूध-दही, घी और छाछ ब्रजवासियों का ही खरीदने पर ब्रज में गाय में बचेगी। आज ब्रज में 98 प्रतिशत भैंस और 2 प्रतिशत गाय रह गयी हैं। ब्रज महोत्सव के समापन के उपरान्त यह महोत्सव गाँव-गाँव में करके लोगों को स्वच्छता तथा कुण्ड सरोवर की सफाई एवं उनकी संरक्षण गाँव में हरिनाम-संकीर्तन की प्रभात फैरियां एवं घर-घर गाय पालन आदि के रचनात्मक कार्योें को व्यावहारिक धरातल पर लाया जायेगा एवं गाँव में आपसी प्रेम व भाईचारे का माहौल तैयार किया जायेगा और गाँवों को भ्रष्टाचार से मुक्त कराया जायेगा तथा यह कार्य पहले उपरोक्त गाँवों से शुरू होगा। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राकेश यादव ने कहा कि हमने यमुना रक्षक दल के पाँचों उद्देश्य रखे थे, यमुना जल का निर्मल व अविरल बहना, कुण्ड-सरोवरों का संरक्षण, सघन्न वृक्षारोपण, खेती में रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक दवाई को रोकना तथा गौ-माता का संरक्षण एवं संबर्धन करना। जिसमें में हम लोग रात-दिन लगे हुये हैं। चेतना बोध मिशन के राष्ट्रीय प्रभारी स्वामी रामानन्द ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति प्रकृति से संतुलन व समन्वय रखने की थी, परन्तु हमने संस्कृति को छोड़कर प्रकृति में असन्तुलन पैदा करके उसको विकृत करके प्रदूषित किया जिससे मानव जीवन संकट में पड़ गया। अतः जब तक मानव अपने सोच को भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं बनायेगा। तब तक एक ओर सरकारें जल, हवा, पृथ्वी और आकाश को प्रदूषण मुक्त करने के लिए धन खर्च करके कार्य करते रहेंगे और मानव उसे प्रदूषित करते रहे तो समस्या का समाधान कभी नहीं होगा। इसलिए जागृत मानव का निमार्ण करने से ही सभी समस्यायों का निदान संभव है। ब्रज महोत्सव के समापन के अवसर पर आचार्य प्रवर स्वामी ए.एस. विज्ञानाचार्य जी महाराज का आशीर्वचन पढ़कर सुनाया गया। कार्यक्रम मंच का संचालन राष्ट्रीय महासचिव रमेश सिसौदिया द्वारा किया गया। यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय महासचिव रमेश सिसौदिया, राष्ट्रीय सलाहकार सोहनलाल आचार्य, पं. उदयन शर्मा, भागवत प्रवक्ता आचार्य राजीव कृष्ण किंकर, आचार्य राधाकान्त शर्मा, सीताशरण यादव एडवोकेट, स्वामी महेशानन्द, जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह, जिला प्रभारी डाॅ0 राजवीर सिंह, समाज सेवक कन्हैयालाल शर्मा, मुकेश शर्मा, मूलचन्द्र सिसौदिया, भरत सिंह सिसौदिया, वीरेन्द्र सिंह सुदामा आदि सभी ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये।   यमुना रक्षक दल

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मथुरा : धर्म और मजहब की दीवारें तोड़ते हुए गंगा-जमुनी तहजीब आज भी ब्रज में जिंदा है। हिन्दू-मुस्लिम एकता और भाईचारे का ही परिणाम है कि जिस मथुरा को विश्व भगवान कृष्ण की जन्मस्थली के तौर पर जानता है उनके परिधान और श्रृंगार सामग्री के निर्माण का काम एकदूसरे के बिना पूरा नहीं होता है। 

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मथुरा : धर्म और मजहब की दीवारें तोड़ते हुए गंगा-जमुनी तहजीब आज भी ब्रज में जिंदा है। हिन्दू-मुस्लिम एकता और भाईचारे का ही परिणाम है कि जिस मथुरा को विश्व भगवान कृष्ण की जन्मस्थली के तौर पर जानता है उनके परिधान और श्रृंगार सामग्री के निर्माण का काम एकदूसरे के बिना पूरा नहीं होता है।  वर्षों से इस काम में जुटे हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के आपसी सामंजस्य का ही नतीजा है कि यहां तैयार होने वाली ठाकुरजी की पोशाकें और श्रृंगार की वस्तुओं की मांग देश के विभिन्न प्रान्तों के अलावा विदेशों में भी बढ़ती जा रही है। इन कारीगरों द्वारा तैयार किए गए डिजाइन और नई-नई डिजायनों की पोशाकों को विदेशों में भी खूब सराहा जा रहा है।  भगवान श्रीकृष्ण की जन्म एवं क्रीड़ास्थली के रूप में विख्यात मथुरा-वृंदावन अब राधा-कृष्ण के पोशाक एवं श्रृंगार सामग्री के निर्माण का एक महत्वपूर्ण केन्द्र बन चुका है। जैसे-जैसे जन्माष्टमी का पर्व नजदीक आ रहा है, देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी विभिन्न डिजायन और वैरायटी की पोशाकों के लिए बड़ी संख्या में आर्डर स्थानीय दुकानदारों को मिल रहे हैं। दुकानदार अब इन आर्डरों को पूरा करने के लिए माल तैयार कराने के लिए पोशाक-श्रृंगार के काम में महारत हासिल स्थानीय कारीगरों की मदद ले रहे हैं। कारीगर दिन-रात एक कर काम पूरा करने में जुटे हैं।   ठाकुरजी की पोशाकें एवं मुकुट पर किए जाने वाले जरदोजी (हैंड एम्ब्रोडिंग) के काम में मुस्लिम कारीगर महारत हासिल किए हुए हैं। सितारे व रत्नजड़ित पोशाकें बनने के लिए वृंदावन के बजाय मथुरा में भेजी जाती हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में सैकड़ों कारखाने घरों में ही संचालित हैं। जहां कारीगर इन पोशाकों को आकर्षक ‘लुक’ देते है। कपड़े पर एम्ब्रोडिंग करने के बाद सिलाई के लिए भेजा जाता है।  एक तरफ जहां यह कारोबार दिनोंदिन बढ़ रहा है वहीं इसमें जुटे कारीगरों की हालत में कोई ज्यादा सुधार नहीं आया है। इस सम्बन्ध में मुकुट जरदोजी का काम करने वाले मुस्लिम कारीगर पप्पू भाई, जो पिछले करीब 30 वर्ष से अधिक समय से इसी कारोबार को करते हैं, ने बताया कि जरदोजी के काम से जुड़े कारीगरों को कुछ वर्ष पूर्व सरकार द्वारा हस्त शिल्पी के परिचय पत्र जारी कराए गए थे लेकिन कारीगरों की माली हालत सुधारने और उनकी सेहत के लिए कोई पहल नहीं की गई। जरदोजी का काम बारीक होने के कारण कारीगरों को नजर कमजोर होने की शिकायत हो जाती है। चश्मे लगने के बाद भी सुई में धागा डालना भी मुश्किल होता है। इस काम से जुड़े दूसरे कारीगरों फाजिल, इरशाद, चाँद, बबलू, इकरार, अवरार, शकील, इरफान, अफजाल व रियाज ने बताया कि करीब आठ घंटे काम करने के बाद 400 रुपये की दिहाड़ी मिलती है जबकि ओवर टाइम करने पर प्रतिघंटे 50-100 रुपये की मजदूरी मिलती है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग इस काम से जुड़े हैं। मथुरा शहर में ये काम 100 से ज्यादा जगहों पर चल रहा है।  इलाके में कई छोटे-बड़े हजारों कारखाने संचालित है जहां पोशाक सिलाई का काम होता है। बड़ी संख्या में हिन्दू परिवार भी इस व्यवसाय से जुड़े हैं। घरों में महिलाएं भी अपने बचे समय में पोशाक सिलाई कर अतिरिक्त आमदनी कर रही हैं। वृंदावन स्थित गौरा नगर कालोनी एवं निकट के कई गांवों में घर-घर में पोशाक उद्योग लोगों की रोजी-रोटी का जरिया बना है। एक कारखाने पर सिलाई का काम करने वाले बिहारी, शंकर, राजेश, श्याम सिंह, रामकिशन, राजू एवं धर्मेन्द्र ने बताया कि उन्हें आठ घंटे के काम की मजदूरी 300 रुपये से लेकर 500 रुपये तक मिलती है जबकि ओवरटाइम का अलग से चार्ज होता है। वृंदावन के प्रमुख बाजारों और मंदिरों के निकट स्थित दुकानों पर ठाकुरजी के श्री विग्रह एवं पोशाक व मुकुट के अलावा अन्य श्रृंगार वस्तुएं बेचने वाले व्यवसाई पोशाक और मुकुट की कीमत उसकी चमक-दमक के अनुसार तय करते हैं जबकि कारीगर को एक निश्चित रकम ही बतौर मजदूरी दी जाती है जिसके चलते ये बिचौलिए मोटी कमाई कर फल-फूल रहे हैं और मजदूर रोटियों के लिए मोहताज बना रहता है। बाजार में शोहरत पा चुके एवं इस व्यवसाय में पकड़ बना चुके ये बिचौलिए अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, रूस व मेक्सिको सहित तमाम देशों से आर्डर लेने के साथ ही बड़ी मात्रा में यहां पोशाक व श्रृंगार के सामान की आपूर्ति करते हैं। यहां दर्शनों को आने वाले श्रद्धालु भी अपने घरों में नित्य पूजे जाने वाले ठाकुरजी के लिए पोशाक व मुकुट एवं श्रृंगार प्रसाधन खरीदने के लिए इन्ही प्रतिष्ठित शोरुम का रुख करते हैं और पसंद आने पर दुकानदार को मुंहमांगी कीमत भी अदा करते हैं। जानकारों की मानें तो पोशाक, मुकुट और श्रृंगार के सामान पर ट्रेड टैक्स ना के बराबर है जबकि देश के विभिन्न प्रान्तों और विदेशों में लगातार बढ़ती डिमांड से इस कारोबार का टर्नओवर प्रतिमाह करोड़ों रुपये तक पहुंच गया है। पोशाक उद्योग से जुड़े श्रीदास प्रजापति ने बताया कि वृंदावन में इस्कान के भक्तों के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु यहां आते हैं और विभिन्न मंदिरों में दर्शनों के दौरान ठाकुरजी के आकर्षक परिधान और श्रृंगार को देख अपने यहां भी ऐसा ही ठाकुरजी के श्रृंगार के लिए पोशाक एवं मुकुट आदि तैयार करने का आर्डर देते हैं। ठाकुरजी के श्रृंगार में विदेशी भक्त किसी तरह की कंजूसी नहीं बरतते और नई-नई डिजाइन और वैरायटी की पोशाक खरीदने में रुचि दिखाते हैं।  वहीं, पोशाक विक्रेता मदन मोहन शर्मा ने बताया कि विदेशों में भी अब वृंदावन में तैयार होने वाली पोशाक और मुकुट के अलावा श्रृंगार सामिग्री की डिमांड बढ़ी है। जन्माष्टमी के चलते बड़ी संख्या में आर्डर मिल चुके हैं। दिन-रात कारीगरों से काम लिया जा रहा है। अभी भी जन्माष्टमी के लिए आर्डर आने का सिलसिला जारी है। ये सभी काम हर हाल में जन्माष्टमी से कम से कम दो दिन पूर्व पूरा कर उन्हें सौंपने हैं। यह व्यवसाय इससे जुड़े कारीगरों व व्यवसाइयों के अलावा कोरियर कंपनियों के लिए भी वरदान साबित हो रहा है। जिसके चलते कई कोरियर कंपनियां सिर्फ पार्सल ही बुक करती हैं। आर्डर पर यहां तैयार होने वाले माल को देश के अलग-अलग प्रान्तों के विभिन्न शहरों में तथा विदेशों तक पहुंचाने के लिए व्यापारी कोरियर कंपनियों का सहारा लेते हैं। इन निजी कंपनियों से माल सही हाथों में पहुंचने एवं निर्धारित समयावधि में पहुंचाने की भी जिम्मेदारी होती है। इसके एवज में विभिन्न कोरियर कंपनियों के अलग-अलग शुल्क तय हैं। इससे कोरियर कंपनियों की रोजाना अच्छी-खासी कमाई हो रही है।

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मथुरा। बीतीरात थाना सुरीर क्षेत्र स्थित यमुना एक्सप्रेस-वे पर एक बीएमडब्ल्यू कार के पलट जाने से उसमें सवार तीन युवकों की मौत हो गई। जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन नोएडा से पहुंचे परिजन उन्हें उपचार के लिए अन्यत्र ले गए।  प्राप्त जानकारी के अनुसार नोएडा निवासी पांच युवक बीतीरात बीएमडब्ल्यू कार सं. डीएल 6 सीएम 0761 से नोएडा से आगरा की तरफ जा रहे थे। रात ढाई बजे जैसे ही यह कार थाना सुरीर क्षेत्र स्थित यमुना एक्सप्रेस-वे के 89 किलोमीटर पर पहुंचे अज्ञात वाहन से टकराकर पलट गई। जिससे इसमें सवार पांचों लोग बुरी तरह से घायल हो, फंस गए। मौके पर पहुंचे एक्सप्रेस-वे अर्थोरिटी के सुरक्षा गार्डों एवं थाना सुरीर पुलिस ने किसी तरह इन्हें बाहर निकाला। तब तक इनमें से तीन युवकों की मौत हो चुकी थी। जबकि दो गंभीर अवस्था में थे। जिन्हें पुलिस ने उपचार के लिए जिला चिकित्सालय भेज दिया। थाना सुरीर पुलिस के अनुसार मृतक नोएडा निवासी मयंक, आशू एवं पवन हैं, जबकि घायलों के नाम पता नहीं चल सका। जिला अस्पताल पहुंचे परिजन दोनों घायलों को अंयत्र उपचार के लिए रैफर करा ले गए हैं। 

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आचार्य प्रवर स्वामी ए.एस. विज्ञानाचार्य जी महाराज के पावन सान्निध्य में तथा यमुना रक्षक दल व चेतना बोध मिशन के संयुक्त तत्वाधान में 5 अगस्त से 31 अगस्त 2015 तक गोविन्द मठ वृन्दावन में 27 दिवसीय ब्रज महोत्सव के अन्तर्गत आज दिनांक 30 अगस्त को फरीदाबाद के भोजपुरी समाज ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ अखण्ड हवन से किया गया। इसके उपरान्त ब्रज महोत्सव कार्यक्रम की शुरूआत हुई। फरीदाबाद से आये भोजपुरी अवधि समाज के रमाकान्त तिवारी, शिक्षाविद् डाॅ0 आर.एन. सिंह ने अपने विचार व्यक्त किये। उन्होने कहा कि यमुना को निर्मल व अविरल करने हेतु आन्दोलन में फरीदाबाद सहित एनसीआर के लोग तन-मन-धन से सहयोग करने के लिए तैयार हैं। साथ ही पर्यावरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने फरीदाबाद सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आये गणमान्य लोगों का आभार व्यक्त किया तथा यमुना को स्वच्छ व अविरल बनाने हेतु विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्हाने कहा कि वायु, जल, धरती सहित सब कुछ प्रदूषित हो चुका है। ऐसे में हमें जागरूक होना पड़ेगा व सार्थक कदम उठाने होंगे। फरीदाबाद के भोजपुरी अवधि समाज से रघुवर दयाल, प्रदीप गुप्ता, कामेश्वर सिंह, राधेश्याम पाण्डेय सहित दर्जनों गणमान्य लोग उपस्थित रहे। भोजपुरी, ब्रज तथा हिन्दी के लोक-गायकों ने अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों से महोत्सव में चार चाँद लगा दिये। ब्रज महोत्सव के उपरान्त वृक्षारोपण कार्यक्रम किया गया। आचार्य प्रवर स्वामी ए.एस. विज्ञानाचार्य जी महाराज ने अपने लिखित सम्बोधन में उपस्थित लोगों कोे आर्शीवाद प्रदान किया। मंच का संचालन यमुना रक्षक दल वृन्दावन नगर अध्यक्ष श्रीदास प्रजापति ने किया। कार्यक्रम में कुँवर सिंह निषाद, चेतना बोध मिशन प्रभारी रामानन्द जी, लाल बाबा, कल्याण दास बाबा,  मुनेन्द्र कुमार, घनश्याम सिंह, कौशलेश द्विवेदी, पवन कुमार, अंजनी कुमार पाण्डेय, जयराम सिंह, भूपेन्द्र कुमार सिंह, बी.के. सिंह, आभा द्विवेदी, पुष्पलता पाण्डेय, रविन्द्र शाह विकास कुमार तिवारी, कृष्णदास जी महाराज, राधेश्याम पंडित आदि उपस्थित थे।   यमुना रक्षक दल 

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