मथुरा

मथुरा। मथुरा-राया मार्ग पर आज प्रातः अनियंत्रित ट्रक ने एक युवक को कुचल दिया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। चालक ट्रक को छोड़ मौके से भाग निकला। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में ले उसमें लदी भैंस व्यापारी को सुपुर्द कर दी तथा ट्रक को थाने ले गईं। घटना की रिपोर्ट मृतक के परिजनों ने उक्त ट्रक के आरोपी चालक के खिलाफ दर्ज कराई है।  प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना जमुनापार के गांव लोहवन निवासी 22 वर्षीय बलराम उर्फ बलिया पुत्र स्व. जगदीश प्रसाद अपने खेत पर जा रहा था, जैसे ही वह मथुरा-राया मार्ग स्थित ब्रज गौरव ढाबा के निकट पहुंचा, वाहनों की रफ्तार थमने व सड़क पार करने को वह सड़क किनारे खड़े हो, इंतजार कर रहा था, इसी दौरान तेजगति से आए अनियंत्रित ट्रक सं. आरजे17 जीए 2090 ने उसे कुचल दिया। जिससे बलराम की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद चालक ट्रक को मौके पर छोड़ भाग निकला। घटना की जानकारी मिलने पर मृतक के परिजन व अन्य ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए तथा सूचना पाकर थाना जमुनापार पुलिस भी घटनास्थल पर आ गई। पुलिस ने ट्रक में लदी भैंसे साथ चल रहे व्यापारी को दे दी। जबकि ट्रक को थाने ले जाकर खड़ा कर दिया। मामले की रिपोर्ट मृतक के परिजनों ने दर्ज कराई है। 

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मथुरा। शहर कोतवाली पुलिस ने एटीएम कार्ड चोरी कर व कोड नं. हैक कर एटीएम से रुपए उड़ाने वाले दो जालसाझों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से डेढ़ दर्जन एटीएम कार्ड एवं तीन हजार रुपए की नगदी बरामद की है।  ज्ञात रहे शहर में एटीएम द्वारा लोगों के खाते से रुपए पार करने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही थी, एसएसपी डा. राकेश सिंह ने कोतवाली पुलिस को शहर में हो रही एटीएम से धोखाधड़ी की वारदातों पर अंकुश लगाने व जालसाझों को दबोचने की जिम्मेदारी सौंपी थी, इसी के चलते बीतीरात शहर के नए बस स्टैण्ड से कोतवाली प्रभारी चन्द्रभान सिंह ने मुखबिर की सूचना पर पुलिसबल की मदद से दो युवकों को दबोच लिया। जिनके पास से तलाशी मेें 18 एटीएम कार्ड जो विभिन्न बैंकों के थे, एवं तीन हजार रुपए की नगदी बरामद हुई। पकड़े गए युवकों की शिनाख्त कृष्णकांत पुत्र जमनलाल शर्मा निवासी पाण्डे मौहल्ला कस्बा व थाना डीग जिला भरतपुर राजस्थान एवं मनोज पुत्र बलराम सिंह निवासी मलसराय थाना गोवर्धन मथुरा के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों ही अपराधियों से की गई पूछताछ में खुलासा किया है कि उन्होंने कोतवाली क्षेत्र में की गई एटीएम से धोखाधड़ी की तीन घटनाओं का इकबाल किया है। इन तीनों के मुकद्में पीडि़तों द्वारा कोतवाली में दर्ज कराए गए थे।  

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एक अन्य घटना में नवादा में विद्युतकर्मी के घर चोरों का धावा मथुरा। हाईवे क्षेत्र की लाजपत नगर कालोनी में रिफाइनरी के डिप्टी मैनेजर के घर लाखों की चोरी की घटना को चोरों ने अंजाम दिया। बदमाशों ने देर रात वारदात को अंजाम दिया।  सुबह घर के लोगों के जागने पर घटना का पता चल सका। बीती रात दो अलग अलग स्थानों पर बदमाशांे ने चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया। थाना हाईवे की काॅलोनी लाजपत नगर में रिफाइनरी के डिप्टी मैनेजर प्रोडेक्शन सुरेश चन्द्र अग्रवाल की कोठी में कमरे का जंगला तोड़कर लाखों की नगदी व जेवरात पर चोरों ने हाथ साफ कर दिया। गृहस्वामी को घटना की जानकारी सुबह उस वक्त हुयी जब कमरे में अलमारी टूटी पड़ी थी। वहीं सामान भी अस्त व्यस्त पड़ा हुआ था। गृह मालिक ने बताया कि रात्रि में चोर न जाने कब घर में घुस आये। उन्हें पता नहीं चल सकां अलमारी में रखी ज्वैलरी व नगदी भी गायब मिली। इस घटना में सोने के तीन हार, दस चूड़ियां, सोने की दो चैन, सोने की पांच अंगूठी, एक हाथ का कढ़ा, मंगलसूत्र आदि करीब पांच सौ ग्राम सोने के आभूषणों के साथ ढाई-तीन लाख रूपये की नगदी चुराकर ले गये। इसी तरह की दूसरी घटना हाईवे क्षेत्र की सिटी कालोनी नवादा में हुयी। यहां विद्युत कर्मचारी हेमंत के घर से सोने-चांदी के आभूषणों के साथ 28 हजार की नगदी पार कर दी गयी। 

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वृन्दावन : कोतवाली वृन्दावन क्षेत्र के कालीदह के निकट एक आश्रम को बीती रात बदमाशों ने अपना निशाना बना दिया। लाठी, डण्डों व सरिया से बदमाशों ने आश्रम में श्र(ालुओं के साथ जमकर मारपीट की। बदमाशों द्वारा की गयी मारपीट में हरदोई निवासी सुधीर के सिर में चोट आयी हैं। लूट के इरादे से घुसे बदमाश जगार होने पर अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाये। बताते हैं कि आश्रम में लोगों के जाग जाने पर बदमाश भागने लगे तभी आश्रम के लोगों ने वन नामक युवक को दबोच लिया लेकिन वह भी चकमा देकर फरार हो गयां बताते हैं कि पकड़े गये पवन ने कल्लू और एक अन्य अज्ञात युवक को अपने साथ होना कबूला था। उसने यह भी बताया कि सभी रतनछतरी के निवासी हैं और पवन पूर्व में कई अपराधिक गतिविधियों में जेल भी जा चुका ह। इस संबंध में श्र(ालु राम मोहन ने कोतवाली वृन्दावन में तहरीर दी है।

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मेलासमिति ने बैठक कर तैयार की मेले की रूपरेखा  बैठक में उपस्थित मेला समिति के पदाधिकारी व सदस्य फरह। पं0 दीन दयाल धाम फरह में दीन दयाल उपाध्याय जी के जन्म दिवस पर हर वर्ष आयोजित होने विशाल मेले की तैयारियों को लेकर कस्बा फरह में एक बैठक आयोजित की गयी। इस बैठक मंे मेला समिति के सभी पदाधिकारी और सदस्यगण उपस्थित रहे और मेले को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किये। बैठक में मेले में होने वाले कार्यक्रमो की रुपरेखा तैयार की गयी। बैठक में इस दौरान मेला समिति के अध्यक्ष जगन प्रसाद गर्ग, दीनदयाल धाम के निदेशक पदम् सिंह, स्मारक समिति के उपाध्यक्ष बांके बिहारी माहेश्वरी, रोशनलाल, अशोक टेंटीवाल, महेश, ठाकुर कारिंदा सिंह, विजय गौड़, रामशंकर पचोरी, मुरारी लाल शर्मा, कमल कौशिक, भुवनेश आर्य, देवी सिंह, महिपाल, ज्ञानेंद्र शर्मा, बृजमोहन गौड़, राजदर्शन पचोरी, सुरेश वकील, श्रवण शर्मा, प्रदीप गोस्वामी, विनोद अग्रवाल, देवी प्रसाद शुक्ला, लाल सिंह अशोक तरकर, घनश्याम आदि मौजूद रहे।

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छावनी आॅडीटोरियम मंे प्रस्तुति देती आवा की सदस्याऐं मथुरा। आर्मी वाईव्स वेलफेयर ऐसोसिएशन का स्थापना दिवस मथुरा छावनी में धमधाम से मनाया गया। इस समारोह की अध्यक्षता श्रीमती सुधा शिवाने ने की। इस अवसर पर 500 से भी अधिक संख्या में महिलाएॅं व बच्चे उपस्थित थे। इस समारोह में श्रीमती शिवाने ने आवा के उन सभी सदस्यों को पुरस्कृत किया जिन्होंने सैनिकों के परिवारों के कल्याण कार्यो में उत्कृष्ट योगदान दिया है। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य उन वीर नारियों का अभिनंदन करना था जिनके पति 1962 का भारत चीन युद्ध, 1965 एवं 1971 के भारत पाक युद्ध, श्रीलंका व कारगिल युद्ध जैसे विभिन्न रणक्षेत्रों में वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस अवसर पर मथुरा, अलीगढ् व हाथरस जिलों कीे वीर नारियाॅं उपस्थित थी। आवा का उद्देश्य सैन्य परिवारों का संपूर्ण विकास और वीर नारियों व विशेष रूप से सक्षम बच्चों को पूर्ण रूप से आत्म निर्भर बनाना है।आवा के इस अभियान के अंतर्गत इन सैन्य व असैन्य परिवारों के विशेष रूप से सक्षम बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए देश में विभिन्न छावनियों में ‘आशा‘ स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। आवा दिवस का उद्देश्य आवा के समस्त सदस्यों को आवा के आदर्श ‘आशा विश्वास आस्था‘ में पुनः समर्पित करना है। आवा के 48वंे स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में मथुरा छावनी में सैन्य परिवारों के लिए दंत चिकित्सा शिविर व चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया और नारी शक्तिकरण अभियान के प्रति जागरूकता बढ्ाने के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्ट्राईक 1 की सभी फाॅंरमेशन्स द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए गए।

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मथुरा। कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता एवं विधायक प्रदीप माथुर ने मथुरा ब्लाॅक के डेढ़ दर्जन से अधिक ग्रामों में पानी की समस्या को लेकर विधान सभा में मामला उठाते हुए समस्या के निराकरण की मांग की है। श्री माथुर का कहना है कि मथुरा ब्लाॅक के महोली, धनगांव, पालीखेड़ा, गणेसरा, मुडैसी, छरौरा, नवादा, नरहौली, अडूकी मोहनपुर, बिर्जापुर, गिरध्रपुर, नौगांव, बाकलपुर, तंतूरा, राजपुर बांगर एवं बाबूगढ़ में पानी की समस्या से ग्रामीण व्यथित हैं। श्री माथुर ने कहा कि इन ग्रामों में खारे पानी तथा आर्सेनिक युक्त पानी की बहुलता के कारण शासन द्वारा पानी की टंकी स्थापित कराकर जलापूर्ति किये जाने की योजना बनाई गई है। इन ग्राम सभाओं में जिन स्थानों पर जल निगम द्वारा 26 लाख रूपये की लागत से पानी की टंकी बनाई गई हैं उनमें से महौली और पालीखेड़ा में अभी तक मीठे पानी के स्थान पर बोरिंग नहीं हुई है। कई गांव में टंकियों को जोडने के लिए डाली जा रही पाइप लाइन मानक अनुरूप नहीं है, कई गांव में पाईप लइन फट रहीं हैं, जिन्हें रोकने के लिए मानक अनुरूप पाइप की फिटिंग किया जाना आवश्यक है। श्री माथुर ने कहा कि कई गांव में बोरिंग फेल हो गई है, जिसका मीठे पानी वाले स्थान पर शीघ्र रीबोरिंग कराते हुए पानी सप्लाई कराई जानी चाहिए।

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विद्यार्थियों ने लघु नाटिका द्वारा जीवन्त किया तुलसीदासजी का चरित्र मथुरा। जनपद की प्रमुख शिक्षण संस्था अमरनाथ विद्या आश्रम में महाकवि तुलसी दास जी की जयन्ती धूमधाम के साथ मनाई गई। तुलसीदास जी की जयन्ती के अवसर पर विद्यार्थियों ने तुलसीदास जी से सम्बन्धित भजन, वार्ता, दोहे तथा जीवन चरित्र पर आधारित लघु नाटिका भी प्रस्तुत की। विद्यालय के प्रधानाचार्य डा0 आदित्य कुमार वाजपेयी ने अपने संदेश में सभी विद्यार्थियों को महाकवि तुलसी दास जी की जयन्ती की शुभकामनायें दीं। उनका मानना था कि तुलसी दास जी का जीवनकाल ही भारत वर्ष का स्वर्णिम भक्तिकाल है, तुलसी दास जी के द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस आज भी सभी के लिये प्रेरणा का स्त्रोत बना हुआ है। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को साधुवाद दिया। विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी डा0 अरूण कुमार ने कहा कि हमें तुलसी दास जी जैसे महापुरूषों से प्रेरणा लेनी चाहिए। पूर्व में उन्होंने महाकवि तुलसीदास जी के छायाचित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में शैक्षणिक प्रभारी डा0 अनुराग वाजपेयी ने भी सभी बच्चों को संत तुलसीदास जयन्ती की बधाई देते हुये बच्चों की प्रस्तुतिकरण की प्रशंसा की। संत तुलसी जयन्ती कार्यक्रम का शुभारम्भ हनुमान चालीसा के सस्वर पाठ के साथ हुआ। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में छात्र विनय उपाध्याय ने तुलसी दास जी के जीवन का काव्यमय परिचय प्रस्तुत किया तथा बच्चों ने तुलसीदास की चैपाइंयों को क्रमबद्व प्रस्तुत किया तो कुछ विद्यार्थियों ने गौस्वामी जी के जीवन से सम्बन्ध्ति प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत किये तथा मानस पद भी प्रस्तुत किये। कक्षा 8 के विद्यार्थियों ने नाटिका ‘तुलसी के प्रिय राम’ प्रस्तुत कर राम नाम की महिमा तुलसीदास जी की भक्ति का वर्णन कर सभी के मन को मोह लिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पद, दोहे, चैपाइयां, गीत, भजन प्रस्तुत किये। सान्या सक्सेना, सोनल चैधरी, निकुंज अग्रवाल, रति चैधरी, शिखा गौतम, किम सोनी, मानसी, स्मृति, पूजा, पलक, तनु, दीक्षिता, काव्या सहित सभी विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के द्वारा वातावरण को राममय बना दिया। तुलसी जयन्ती कार्यक्रम का निर्देशन पुनीत वाजपेयी ने तथा संचालन केशवदेव शर्मा ने किया। तुलसी जयन्ती समारोह के आयोजन में मृदुला चड्डा, सुनीता खन्ना, अनुराधा सोलंकी, जयलक्ष्मी सारस्वत, सहित हिन्दी विभाग के समस्त शिक्षकों का सहयोग सराहनीय रहा।  

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मथुरा। जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डाॅ0 राकेश सिंह द्वारा आज सभी थाना प्रभारियों को अपने अपने थाना क्षेत्र में बैंक और बैंक के पास संदिग्ध व्यक्तियों की चैकिंग, बस स्टैण्ड व उनके पास संदिग्ध व्यक्तियों की चैकिंग, एवं अन्य कई भीड भाड वाले स्थानों पर चैकिंग, तीन सवारी, बिना हेल्मेट व संदिग्ध व्यक्तियों की चैकिंग के सम्बन्ध में निर्देश दिये गये। उक्त चैकिंग अभियान के दौरान जिले में 670 संदिग्ध व्यक्ति, 452 वाहन, 5 वाहन सीज, 87 चालान किये तथा 12350 रू0 शमन शुल्क वसूल किया गया तथा थाना कोसीकलाॅ में उक्त अभियान के दौरान दो संदिग्ध व्यक्तियों को 02 नाजायज चाकू सहित गिरफ्तार किया गया। जनता व जन प्रतिनिधियों द्वारा थाना प्रभारियों को सीयूजी नम्बर पर काॅल करने पर फोन नहीं उठाये जाने के कारण मिली शिकायतों में के सम्बन्ध में सभी थाना प्रभारियों को काठोर व दण्डात्मक कार्यवाही के चेतावनी दी तथा साथ ही चेतावनी दी कि भविष्य में कभी भी एसएसपी मथुरा द्वारा सीयूजी पर काॅल करके चैक किया जा सकता है। तथा फोन रिसीव न होने पर सम्बन्धित थाना प्रभारी के खिलाफ कठोर व दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।

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क्या आप किसी वैसे शहर की कल्पना कर सकते हैं जिसकी सड़कों पर स्थित हर खम्भे पर कैमरे लगे हों, रात में पैदल यात्री के उपस्थित होने पर बल्व स्वत: जल जाए अन्यथा डिम हो जाए, सूर्य की रोशनी के अनुरूप घरों की लाइट घटाई-बढ़ाई जा सकें और शिक्षक की गैर-हाजिरी पर किसी दूसरे स्कूल का शिक्षक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पढ़ा सके। जी हां, मोदी सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना इसी कल्पना को साकार करने में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने शहरी भारत को रहन-सहन, परिवहन और अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के इरादे से तीन महत्वाकांक्षी योजनाओं- स्मार्ट सिटीज, अटल मिशन फॉर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) और सभी को आवास योजना - का हाल ही में शुभारम्भ किया है। इन परियोजनाओं से देशवासियों की उम्मीदों को नयी उड़ानें मिलती नजर आ रही है और सपनों को संजीवनी। शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने, स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराने, परिवहन व्यवस्था को सुधारने, शहरों की छवि खराब करती झुग्गी झोपड़ियों को हटाने तथा उनमें रहने वाले लोगों को वैकल्पिक सुविधा मुहैया कराने के लिए शहरी संसाधनों, स्रोतों और बुनियादी संरचनाओं का सक्षम ढंग से विकास करना स्मार्ट सिटी परियोजना का प्रमुख मकसद है। इन परियोजनाओं के तहत 2022 तक सभी को आवास उपलबध कराने का लक्ष्य भी है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की वर्तमान जनसंख्या का लगभग 31 फीसदी आबादी शहरों में बसती है और इनका सकल घरेलू उत्पाद में 63 फीसदी का योगदान हैं। ऐसी उम्मीद है कि वर्ष 2030 तक भारत की आबादी का 40 फीसदी हिस्सा शहरों में रहेगा और सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 75 प्रतिशत का होगा। इसके लिए भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के व्यापक विकास की आवश्यकता है। ये सभी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने एवं लोगों और निवेश को आकर्षित करने, विकास एवं प्रगति के एक बेहतर चक्र की स्थापना करने में महत्वपूर्ण हैं। स्मार्ट सिटी का विकास इसी दिशा में एक कदम है। इस मिशन में 100 शहरों को शामिल किया जाएगा और इसकी अवधि पांच साल (2015-16 से 2019-20) की होगी। उसके बाद शहरी विकास मंत्रालय द्वारा मूल्यांकन किए जाने एवं प्राप्त अनुभवों को शामिल किए जाने के साथ मिशन को जारी रखा जा सकता है। एक सौ स्मार्ट शहरों की कुल संख्या एक समान मापदंड के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच वितरित किया गया है। इस वितरण फार्मूला का इस्तेमाल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अमृत के तहत धनराशि के आवंटन के लिए भी किया गया है। शहरी विकास मंत्रालय ने यह तय कर दिया है कि देश के किस राज्य से कितने शहर स्मार्ट सिटीज प्रोजेक्ट के लिए चुने जाएंगे। जिसमें से सबसे ज्यादा 13 स्मार्ट सिटीज उत्तर प्रदेश में होंगी। तमिलनाडु के 12 और महाराष्ट्र के 10 शहरों को स्मार्ट सिटीज के तौर पर विकसित किया जाएगा। मध्य प्रदेश के सात और गुजरात और कर्नाटक के छह-छह शहर स्मार्ट सिटी बनेंगे। कुल मिलाकर देश भर में 100 स्मार्ट सिटीज विकसित करने की योजना है, लेकिन प्राथमिकता किसे मिलेगी, ये इंटर-सिटी कंपिटिशन में शहरों के स्मार्ट सिटी प्लान पर निर्भर करेगा। इस साल के आखिर तक 20 शहरों को स्मार्ट सिटीज के लिए चुना जाएगा, जबकि बाकी 80 शहरों के चयन का काम 2017-18 तक पूरा कर लिया जाएगा। रैंकिंग में सबसे ऊपर आए 20 स्मार्ट सिटीज के बाद बाकी 80 शहरों को खुद के प्लान में सुधार का मौका दिया जाएगा। 100 स्मार्ट सिटीज के अलावा देशभर से अब तक 476 शहरों की पहचान अमृत योजना के लिए की गई है। ये सारे शहर कम से कम एक लाख की आबादी वाले होंगे। इन शहरों को बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से मदद मिलेगी। स्मार्ट सिटी के वितरण की समीक्षा मिशन के कार्यान्वयन के दो साल बाद की जाएगी। चुनौती में राज्यों / शहरी स्थानीय निकायों के प्रदर्शन के आकलन के आधार पर राज्यों के बीच शेष संभावित स्मार्ट शहरों में से कुछ का पुनःआवंटन शहरी विकास मंत्रालय द्वारा किया जा सकेगा। स्मार्ट सिटी मिशन एक केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में संचालित किया जाएगा और केंद्र सरकार द्वारा मिशन को पांच साल में 48,000 करोड़ रुपये, करीब प्रति वर्ष प्रति शहर 100 करोड़ रुपये औसत वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि व्यापक विकास भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को एकीकृत करके ही होता है। सरकार की कई क्षेत्रीय योजनाएँ इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए शामिल होती हैं, भले ही उनके रास्ते अलग हैं। शहरी योजनाओं के स्वरूप में बदलाव करके उन्हें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस शहर में तब्दील करने में अमृत और स्मार्ट सिटी मिशन एक-दूसरे के पूरक साबित होने वाले हैँ। हर कोई चाहता है कि वे स्मार्ट सिटी के निवासी कहलाएं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक शहर आखिर स्मार्ट कब कहलाता है? इस सवाल का जवाब कुछ शब्दों में बांधा नहीं जा सकता, क्योंकि सरकार से लेकर इन योजनाओं पर काम करने वाली बहुराष्ट्रीय कम्पनियां और आम लोग सबका जवाब अलग-अलग होगा। हर शहर की अपनी संस्कृति और अपना चरित्र होता है। हर शहर की अपनी कुछ विशेषताएं होती हैं। कई शहर बसावट में ही काफी जटिल और दुर्गम होते हैं और कुछ शहर काफी सहज होते हैं। स्मार्ट सिटी शब्द सुनते ही सबसे पहले जो तस्वीर उभरती है वह कुछ ऐसी होती है—एक शहर जहां की जलवायु शुद्ध हो, लोग खुली हवा में सांस ले सकें। बिजली-पानी की सप्लाई 24 घंटे सुचारू हो, दिनभर लोगों को ट्रैफिक में न जूझना पड़े, सार्वजनिक यातायात उपलब्ध हो जो विश्व स्तरीय हो, बुनियादी सुविधाएं व्यापक हों। सड़कें, इमारतें, शापिंग माल, सिनेप्लैक्स सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से बने हों। अनाधिकृत कालोनियों की सड़ांध मारती गलियां न हों। झुग्गी-बस्तियां न हों। कुछ ऐसा शहर दिखे जहां लोगों के रहन-सहन में समानता दिखे। भारत जैसे शहरों जिनकी सही मैपिंग तक उपलब्ध नहीं, जिनमें अवैध कब्जों की भरमार हो, शहरों का बेतरतीब निर्माण हो चुका हो, ऐसे शहरों को स्मार्ट बनाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं। भविष्य के शहर में बिजली के ग्रिड से लेकर सीवर पाइप, सड़कें, कारें और इमारतें हर चीज़ एक एक नेटवर्क से जुड़ी होगी। इमारत अपने आप बिजली बंद करेगी, स्वचालित कारें खुद अपने लिए पार्किंग ढूंढेंगी और यहां तक कि कूड़ादान भी स्मार्ट होगा, लेकिन सवाल यह है कि हम इस स्मार्ट भविष्य में कैसे पहुंच सकते हैं? शहर में हर इमारत, बिजली के खंभे और पाइप पर लगे सेंसरों पर कौन निगरानी रखेगा और कौन उन्हें नियंत्रित करेगा। इसमें कोई संदेह नहीं है कि शहरों को स्मार्ट बनने की ज़रूरत है। एक अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक दुनिया की 75 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करेगी, जिससे यातायात व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर ज़बर्दस्त दबाव होगा। सच्चाई यह है कि दुनियाभर में इस समय जो स्मार्ट शहर बन रहे हैं वे बहुत छोटे हैं। इन शहरों के बारे में काफी चर्चा हो रही है लेकिन उनके पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिससे वास्तव में लोगों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है। हालांकि अगले पांच सालों में चीजें स्मार्ट हो जाएंगी, तब उन शहर का डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रेनों और सड़कों की तरह अहम हो जाएगा। ऐसा नहीं कि भारत स्मार्ट सिटी की ओर अग्रसर होने वाला पहला देश है, इससे पहले से कई देशों में स्मार्ट सिटी परियोजनाएं बेहतरीन तरीके से क्रियान्वित की जा चुकी हैं। भारत में भी यदि इसे संजीदगी से अमल किया जाए तो इसे मोदी सरकार की बेहतरीन पहल कही जा सकती है, बशर्ते सरकार सामंजस्य बिठाने के लिए गांवों को भी स्मार्ट बनाने का प्रयास करे। (लेखक पत्रकार हैं)

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