मथुरा : जनपद स्थित यमुना नदी खादर में चल रही अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम को उस वक्त और बल मिला जब कई सामाजिक संगठन और पर्यावरण कार्यकर्ता खुलकर इसके विरोध में सामने आए। ध्यान रहे, वृंदावन के अंतर्गत पानी गांव से छटीकरा तक अवैध कालोनी काटने का धंधा चरम पर है। महंगी कारें जैसे बड़े तोहफे देकर एजेंटों के जरिए ग्राहकों को ‘लूटने’ का क्रम जारी है। शहर के कई बड़े होटलों में ऐसी कंपनियों के दफ्तर खोले गए हैं। क्षेत्र में कम से कम 50 ऐसी कंपनियां इन गतिविधियों में लिप्त हैं। अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित किया जा रहा है। ‘रुपये 2.40 लाख का प्लॉट खरीदो और रुपये 2.56 लाख का बोनस वापस पाओ’ जैसे लुभावने नारों के चलते ग्राहक आसानी से इनके मकड़जाल में फंस जाते हैं। विज्ञापनों में कहीं भी यह नहीं लिखा जाता है कि इस प्लॉट का आकार क्या होगा और यह कहां होगा। नियम और शर्तों का कहीं भी उल्लेख नहीं किया जा रहा है। विज्ञापनों में यह जानकारी भी नहीं दी गई है कि ये फ्लैट और प्लॉट विकास प्राधिकरण से ‘अप्रूव’ कराए गए हैं या नहीं...। कहां बन रहे हैं और कितने मंजिल के बन रहे हैं, इसकी भी कोई जानकारी विज्ञापनों में नहीं दी गई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण पहले ही 14 सरकारी विभागों को यमुना नदी की खादरों में चल रहे अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस भेज चुका है। अधिकरण ने 26 मई तक नोटिस का जवाब मांगा है। 'ब्रज बचाओ समिति' के संयोजक मनोज चौधरी ने कहा कि खादरों पर कालोनी काटना अवैध है। वृन्दावन और मथुरा में इन कालोनाइजर का बड़ा खेल है। भोले-भाले लोग इनके जाल में फंस जाते हैं। इनके निशाने पर वृन्दावन से बाहर के लोग होते हैं जो इस कृष्णनगरी में अपना आशियाना बसाना चाहते हैं। ऐसे लोगों को यहां जमीन दिखाकर उनको ठगा जाता है और उनसे मोटी कमाई करके ये कंपनियां रफूचक्कर हो जाती हैं। सामाजिक कार्यकर्ता पंकज दीक्षित ने बताया कि पट्टे के नाम पर ये लोग सरकार से खेत ले लेते हैं और फिर उसी में कुछ दिन खेती करके उसे मोटी रकम लेकर बेच देते हैं। अगर प्रशासनिक अधिकारी नजर रखें तो उसमे अवैध कालोनी का निर्माण न हो सकेगा और आम लोगों को इनका शिकार होने से बचाया जा सकता है। कालोनाइजर विजय कांत शर्मा ने बताया कि खादरों की जमीनों को न तो बेच सकते हैं और ना ही कालोनी बनाई जा सकती हैं। यदि ऐसा कोई करता है यह तो अवैध गतिविधि है। सरकार ये जमीन किसान को खेती करने के लिए देती है न कि उसे बेचने के लिए। यहां के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से ये कंपनियां फर्जी कालोनी काट देती हैं और दिल्ली, फरीदाबाद और गुड़गांव आदि के लोगों को बेच देते हैं। बाद में इन कंपनियों के कर्ता-धर्ता बोरिया बिस्तर बांधकर यहां से गायब हो जाते हैं। ये बाहर से आए कुछ कालोनाइजर हैं जो इस इलाके में सक्रिय हैं। इधर, हमारे सहयोगी प्रकाशन समाचारएक्सप्रेस.कॉम से बात करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि खादरों में किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे वहां से हटाया जाएगा।
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