मथुरा

मथुरा। शहर के जनरलगंज पानी की टंकी परिसर में बनी प्याऊ में बन्दर के डूब कर मरने के कारण समूचें क्षेत्र में सक्रामंक रोग फैलनें की आशंका बनी हुई हैं। बताया जाता है कि उक्त सार्वजनिक प्याऊ में कई दिन पूर्व एक बन्दर गिर गया। मगर किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। मगर जब मृत बन्दर का शव फूल कर बदबू देने लगा ब स्थानीय लोगों एवं दुकानदारों ने देखा तो उक्त बन्दर को निकलवाकर शीघ्र नहीं फिंकवाया तो क्षेत्र में संक्रामक रोक फैल सकता हैं। स्थानीय लोगों ने नगर पालिका परिषद की अध्यक्षा एवं अधिशासी अध्किारी से माॅग की है कि इस ओर शीघ्र ध्यान दें।

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मथुरा। नगर के प्रख्यात चिकित्सक एवं फिजीशियन एवं विगत एक वर्ष पूर्व सरकारी सेवा में सुपरिटेन्डेट के पद से सेवा निवृत डा0 पीपी पाठक की धर्मपत्नी एवं किशोरी रमण महिला महाविद्यालय के अग्रेंजी विभाग की अध्यक्षा डा. शोभा पाठक ने विगत दिवस महाविद्यालय की प्राचार्य के रूप में पदभार ग्रहण किया हैं। उपरोक्त महाविद्यालय में सन् 1976 से बतौर प्रवक्ता के पद पर अपने कैरियर की शुरूआत कर इस मुकाम तक पहुंची श्रीमती पाठक सुप्रसिद्व स्वतंत्रता सग्रंाम सेनानी एवं देश के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू जी के मित्र रहे प्रों0 पीएल मिश्रा की सुपुत्री है। उनके उक्त पद पर नियुक्त होने पर जनपद के शिक्षा जगत में हर्ष की लहर हैं।

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यमुना शुद्धि संकल्प मिशन 2015 ने कृष्ण गंगा घाट पर आयोजित की बैठक मथुरा। पतित पावनी यमुना मैया की अविरल धार ब्रज के मनोरम घाटों पर पुनः हिलोरे मारे इसके लिये सम्मूर्ण ब्रज और ब्रजवासी प्रयत्न कर रहे है। यमुना शुद्वि संकल्प मिशन 2015 द्वारा यमुना को शुद्ध करने और यमुना के प्राचीन पौराणिक घाटों को पुनः सुन्दर बनाने का कार्य किया जा रहा है। मिशन द्वारा 6 अप्रैल को किशन गंगा घाट पर शहर के सभासदों, समाजसेवी व सभ्रंात नागरिकों की एक बैठक आहूत की गई जिसमें सभासदों के अलावा यमुना भक्त सैकड़ो की संख्या में सम्मिलित हुय और यमुना शुद्व बनाने के लिये चर्चा की। इस बैठक में वक्ताओं ने यमुना के प्रदूषित होने के सभी पहलुओं पर विचार करते हुये यमुना को शुद्व बनाने के लिये यमुना शुद्वि मिशन की रूपरेखा तैयार की। यमुना शुद्वि संकल्प मिशन 2015 के संयोजक प0ं अनिल शर्मा ने कहा कि वर्तमान में यमुना महारानी की दशा किसी भी यमुना भक्त से देखी नहीं जा सकती है। यमुना को शुद्ध बनाने के लिये सभी को जाग्रत होना पडेगा और यही जाग्रति हमें पूरे समाज में लानी होगी। उन्होंने कहा कि यमुना का हम सभी के लिये भौतिक व आध्यात्मिक महत्व है यदि यमुना प्रदूषित रही तो इससे हमारा जीवन और आस्था दोनो ही खतरे मे पड जाएंगी इसके लिए यमुना के महत्व व उसके प्रति लोगों की जिम्मेदारी से हमें सभी को परिचित कराना होगा। उन्होने इस बात पर जोर देते हुये कहा कि जितनी जिम्मेदारी सरकार, जिला प्रशासन, नगर पालिकाओं की बनती है उतनी ही जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की भी है कि वह इस बात का ध्यान रखे की यमुना को हमें स्वच्छ और निर्मल बनाये रखना है। वार्ड नं0 7 के सभासद निजामुद्दीन ने अपनी राय रखते हुये कहा कि वे स्वयं इस कार्य में सहयोग करने के अलावा नगर पालिका की अध्यक्षा को अवगत करायेगें। उन्हांेने बताया कि वे यमुना शुद्धि के लिये इस कार्य में सहयोग करने के लिये अपने वार्ड में सदस्यता अभियान चलवाकर लोगो को इस मुहिम से जोड़गें। उनका कहना था कि यमुना किसी जाति विशेष की नहीं है यमुना का जल सभी के लिये उपयोगी है। मीरा गोस्वामी ने कहा कि यमुना शुद्वि के इस पुनीत कार्य में महिलाओं को आगे आकर सहयोग करने की आवश्यकता है और वह इस कार्य के लिये महिलाओं को प्रेरित कर यमुना शुद्वि संकल्प से जोडेगी। उन्होने वहाँ उपस्थित लोगोें को यमुना को प्रदूषण मुक्त कराने के लिये संकल्प दिलवाया कि वे न तो यमुना में गन्दगी डालेगी न डालने देगी। महन्त बालमुकुन्द शास्त्री ने कहा कि यमुना हमारी इष्ट है और वह श्री कृष्ण की चतुर्थ पटरानी कही जाती है यमुना के बिना हमारा लौकिक और पारलौकिक जीवन नष्ट हो जायेगा। मनुष्यों के अलावा पशु पंछी, जलचरों का जीवन यमुना पर आधारित है। इसलिये यमुना को बचाना हमारा परम कर्तव्य है। इस अवसर पर वार्ड नं. 13 के सभासद बिक्की वाल्मिकी, वार्ड नं 33 के सभासद गगन निषाद, केशव देव, गीरीश शर्मा, चन्द्र प्रकाश शर्मा, चन्द्र दास, पवन शर्मा सरदार, दिनेश सरदार, देवेन्द्र शर्मा, मुकेश कुलश्रेष्ठ, जगदीश शर्मा , पंकज पंडित, मीडिया प्रभारी ऋषि भारद्वाज, नीरज शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस दौरान राजेश मुदगल, डाॅ0 सन्तोष सारस्वत, पन्नालाल जैन, दीपक गौड, लक्ष्मी नारायण, प्रेम चैधरी, मुकेश ठाकुर, मंगल सिंह पुष्पेन्द्र सिंह, सुमित शर्मा, आशीष शर्मा हनुमान जी वाले, राहुल गोस्वामी, मनोज ठाकुर, लपूटी पंडित, केशव चतुर्वेदी, ललित देशमां, त्रिलोकी पडित, राजेश तिवारी, ऋचा शर्मा, सावित्री देवी, राजीव शर्मा आदि उपस्थित रहे।  

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14 अप्रैल 2015 को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती मनाई जाएगी। वैसे तो डॉ. अंबेडकर का कद और छवि समय के साथ और बढ़ी है लेकिन दलित सशक्तिकरण के लिए देश के सर्वोत्तम अधिवक्ता के रूप में उनकी प्रसिद्धि के पीछे कई बार उनके बहु-आयामी व्यक्तित्व के कई विशिष्ट पहलू छिप जाते हैं। (Read in English: Dr. BR Ambedkar: Man Behind The Idea Of Modern India) डॉ. अंबेडकर उत्कृष्ट अर्थशास्त्री थे और इस क्षेत्र में उनके योगदान से देश के केन्‍द्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक की आधारशिला रखी गई। उन्‍होंने बिजली पैदा करने और सिंचाई की सुविधा के लिए देश की सबसे पहली नदी घाटी परियोजना तैयार की थी। भारतीय संविधान की ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्‍यक्ष के रूप में वह संविधान निर्माता थे। उन्‍होंने महिलाओं को बड़ी संख्‍या में स्‍वाधीन बनाने के लिए हिन्‍दू संहिता विधेयक भी तैयार किया था और संसद द्वारा जब इस विधेयक को पास नहीं किया गया तब अंतत: उन्‍होंने केन्‍द्रीय कैबिनेट से इस्‍तीफा दे दिया था। हालांकि डॉ. अंबेडकर ने भारत के लोगों की भिन्‍नता, संस्‍कृति और उनकी अलग-अलग अपेक्षाओं को शामिल कर राष्‍ट्र-राज्‍य की परिकल्‍पना को बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान दिया था लेकिन इसे कम लोग जानते हैं। उनके लिए राष्‍ट्र एक दार्शनिक तत्‍व है जिसका केन्‍द्रीय विषय साझा सपने है। देशभर और विश्‍व के शिक्षाविद और विद्वान आधुनिक भारत राष्‍ट्र के निर्माता के रूप में डॉ. अंबेडकर की भूमिका को तेजी से मान्‍यता दे रहे हैं। डॉ. अंबेडकर ने राष्‍ट्र की उनकी परिकल्‍पना के बारे में अर्थपूर्ण ढंग से लिखा है और उनके कार्यों को उजागर करने वाली केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रायोजित 'अंबेडकर फाउंडेशन' ने डॉ. बीआर अंबेडकर के लेखों और भाषणों को प्रकाशित किया है। महाराष्‍ट्र सरकार के शिक्षा विभाग ने भी उनके लेखों और भाषणों को प्रकाशित किया है। डॉ. अंबेडकर की राष्‍ट्र के बारे में परिकल्‍पना केवल राजनैतिक या भौगोलिक नहीं है जिसमें मानचित्र और झंडे हों। वह राष्‍ट्र की प्रसिद्ध परिभाषा 'एक क्षेत्र में बड़ी संख्‍या में रहने वाले लोगों की अपनी सरकार, भाषा, परंपरा आदि हो (कैम्‍बरिज शब्‍दकोश)' को नहीं मानते थे। उनकी परिकल्‍पना में राष्‍ट्र के दार्शनिक और धार्मिक लक्ष्‍य होने चाहिए जिसमें कल्‍याण, समानता और भाईचारा केन्‍द्रीय विषय हों। अपनी इस परिकल्‍पना को समझाते समय उन्‍होंने फ्रांसीसी दार्शनिक अर्नेस्‍ट रैनन की बात को उद्धृत करते हुए कहा था कि ''एक राष्‍ट्र जीवित आत्‍मा और धार्मिक सिद्धांत है। दोनों बातें वास्‍तव में एक ही है, धार्मिक सिद्धांत से आत्‍मा का निर्माण होता है। एक अतीत है और दूसरा वर्तमान है। एक यादों की समृद्ध विरासत है और दूसरा वास्‍तव में एक साथ रहने की इच्‍छा के लिए सम्‍मति है, विरासत में जो आपको मिला है उस अखंडित धरोहर के संरक्षण की अभिलाषा है। राष्‍ट्र एक व्‍यक्‍ति के समान होता है जो अतीत के लंबे प्रयासों, त्‍याग और समर्पण से बनता है... विरोचित अतीत, महान पुरुष, प्रतिष्‍ठा सामाजिक राजधानी बनाती है जिसपर आधारित राष्‍ट्रीयता की परिकल्‍पना की जा सकती है।'' बाबा साहेब ने अपने पूरे जीवन में राष्‍ट्रीयता के इस लक्ष्‍य को हासिल करने का प्रयास किया। उस समय भारत का एक राष्‍ट्र के रूप में निर्माण का समय था। उन्‍होंने इस मुद्दे पर उस समय की महान हस्‍ती मोहनदास करमचंद गांधी के सामने भी अपने तर्क दिए। वह महान विचार-विमर्श अब हमारी राष्‍ट्रीय चेतना का हिस्‍सा है। डॉ. अंबेडकर के योगदान का आकलन करते समय उपमहाद्वीप के लिए उनकी दार्शनिक और धार्मिक मानसिकता को ध्‍यान में रखना चाहिए। 'जाति का लोप' के नाम से प्रसिद्ध अपने मौलिक लेकिन कहीं भी नहीं दिए गए भाषण में उन्‍होंने कहा था कि एक मजबूत राष्‍ट्र के लिए अवर्ण समाज पहली आवश्‍यकता है। इसको ध्‍यान में रखते हुए उन्‍होंने सार्वजनिक तालाब से पानी पीने के समान अधिकार के लिए 'महद सत्‍याग्रह', मंदिर में प्रवेश अधिकार आंदोलन और मनुस्‍मृति को जलाने के आंदोलन जैसे कई सामाजिक आंदोलनों का नेतृत्‍व किया था। उन्‍होंने आगाह किया था कि सामाजिक और आर्थिक समानता के बिना हमारा राष्‍ट्र अस्‍तित्‍ववाद संबंधी समस्‍या का सामना कर सकता है। ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्‍यक्ष के तौर पर संविधान सभा में वाद-विवाद को समाप्‍त करते हुए बाबासाहेब ने कहा था कि ''26 जनवरी, 1950 को हम अंतर्विरोधों के जीवन में प्रवेश करेंगे। राजनीति में समानता होगी तथा सामाजिक और आर्थिक जीवन में असमानता होगी। राजनीति में हम 'एक व्‍यक्‍ति एक मत' और 'एक मत एक आदर्श' के सिद्धांत को मान्‍यता देंगे। हमारी सामाजिक और आर्थिक संरचना के कारण हम हमारे सामाजिक और आर्थिक जीवन में एक व्‍यक्‍ति एक आदर्श के सिद्धांत को नकारेंगे। कब तक हम इन अंतर्विरोधों का जीवन जिएंगे? कब तक हम हमारे सामाजिक और आर्थिक जीवन में समानता को नकारते रहेंगे? अगर लंबे समय तक ऐसा किया गया तो हम अपने राजनैतिक लोकतंत्र को खतरे में डाल देंगे। हमें जल्‍द से जल्‍द इस अंतर्विरोध को समाप्‍त करना चाहिए वरना असमानता से पीड़ित लोग उस राजनैतिक लोकतंत्र की संरचना को ध्‍वस्‍त कर देंगे जिसे सभा ने बड़ी कठिनाई से तैयार किया है।'' इन अंतर्विरोधों को समाप्‍त करने के लिए डॉ. अंबेडकर ने समाज के वंचित वर्गों और महिलाओं के लिए सकारात्‍मक कार्यों की परिकल्‍पना को बढ़ावा देने के लिए कड़े प्रयास किए। उनका दृढ़ विश्‍वास था कि बिना समानता और भाईचारे के अक्षुण स्‍वाधीनता नहीं हो सकती। उन्‍होंने कहा ''कैसे कई हजारों जातियों में विभाजित लोगों का एक राष्‍ट्र हो सकता है।'' भारतीय संविधान के संस्‍थापक भी बाबा साहेब के दलित वर्गों के लिए आरक्षण की आवश्‍यकता के विचार से सहमत थे। अगर हम संविधान सभा की बहस को जांचे तो पाएंगे कि उसमें समान अधिकारों और सकारात्‍मक गतिविधियों के मुद्दे पर कोई अंतर्विरोध नहीं था। बाबा साहेब द्वारा तैयार किए गए हिन्‍दू संहिता विधेयक के मामले में परिवार में महिलाओं के लिए समान अधिकार पर उनके विचार को बाद में संसद में भी समर्थन दिया गया। हालांकि शुरुआती चरण में इस विधेयक का विरोध किया गया था और इसे भांपते हुए बाबा साहेब ने कानून मंत्री के पद से इस्‍तीफा दे दिया था। इस बारे में बाबा साहेब ने कहा था ''मैं समुदाय की प्रगति महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति की स्‍थिति से आंकता हूं।'' जैसा कि अर्नेस्‍ट रैनन ने बिल्‍कुल सही कहा था कि एक राष्‍ट्र को अतीत की बुरी यादों को भूल जाना चाहिए और भविष्‍य के सहभागी सपनों को साकार करना चाहिए और भारत की संविधान सभा ने सामाजिक समानता और भाईचारे की इस परीक्षा में बड़ी कुशलता से सफलता हासिल की है। भारत के महान पुत्र बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को हम हमारी विरासत के रूप में याद करते है। (लेखक पत्रकार हैं)

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भोपाल, 10 अप्रैल 2015 : यदि आप हेल्थ कॉन्शियस है तो तैयार हो जाइए एक नए लाइफ स्टाइल  स्पोर्ट्स क्लब से जुड़ने के लिए丨बेहतरीन स्टाइल और लक्झरी के साथ आपको एक ऐसा मोहोल मिलेगा जिसमे एक ही जगह पर होगा म्यूजिक, डांस फ्लोर और डीजे भी 丨इस क्लब का इंटीरियर अर्टिस्टीक्ली डिज़ाइन किया गया है丨अब हमें मेट्रोज़ की नाईट लाइफ कैसी होती है यह जानने के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है丨इसके लिए अब जाना होगा फ्रोलिक- द स्पोर्ट्स क्लब में जहाँ आप अपनी सेहत का खासा ध्यान रखने के साथ साथ मनोरंजन भी कर सकते है丨  यह क्लब 10 नंबर स्टॉप अरेरा कॉलोनी में स्तिथ है丨हाल ही शुरू हुए इस क्लब में आई पी एल की लाइव स्क्रीनिंग भी की जायगी丨वैसे तो यह स्पोर्ट्स क्लब खास विशाल फिटनेस प्लानेट के मेम्बर्स के लिए तैयार किया गया है丨आई पी एल वीकेंड्स की स्क्रीनिंग के मौके पर बाकि लोग भी इसमें शामिल हो सकते है丨जिसमे होगा अनलिमिटेड स्नैक्स और विशाल फिटनेस प्लानेट के मेम्बर्स के लिए डिनर丨  इस मौके पर विशाल वर्मा (प्रमोटर) ने कहा " इस क्लब की शुरुआत से भोपाल के लोग जरूर अपनी फिटनेस पर ध्यान देंगे丨फ्रोलिक की शुरुआत  एक स्पोर्ट्स क्लब की शुरुआत  नहीं बल्कि एक बदलाव है 丨इस क्लब का आईडिया विशाल फिटनेस  के कुछ मेंबर्स ने सुझाया जो रेगुलर क्लब्स से अलग है丨हेल्थी क्लबिंग अपने आप में अनूठा कांसेप्ट है जो हेल्थ कॉन्शियस क्लबिंग को प्रमोट करेगा जिससे मेंबर्स हेल्थी फील करेंगे और अपनी सेहत के साथ कोम्प्रोमाईज़ नहीं कर सकेंगे丨मेंबर्स को एक हेल्थी लाइफ स्पोर्टी और उत्साह भरा जीवन देना है 丨 राजेंद्र पाटिल (प्रमोटर) ने इस क्लब  लॉन्चिंग पर कहा "फ्रोलिक एक रिवोल्यूशनरी कंसेप्ट है जो अनहैल्थी लाइफस्टाइल और बोरिंग नाईट  लाइफ को एक नया आयाम देगा丨हेल्थी क्लबिंग ने नया कांसेप्ट है जिसे भोपाल की जनता बेहद पसन करेगी हेल्थी क्लबिंग "丨 प्रमोटरों के बारे में : विशाल वर्मा : एक जाना पहचाना नाम जिन्हे हम एक सक्सेसफुल एंट्रेप्रेनुएर के रूप में भी जानते है|फिटनेस को इन्होने एक अलग ही आयाम दिया है फिटनेस के प्रति अपना पैशन दिखा कर|भोपाल के बेहद चर्चित विशाल फिटनेस प्लानेट के फाउंडर भी है|उनके मोटिवेशनल थॉट्स और टफ सेशन्स  उनके क्लब के कई मेंबर्स की लाइफ बना चुके है|   राजेंद्र पाटिल:यदि इनके हार्डवर्क और अचीवमेंट्स को देखा जय तो जानेंगे के प्रोफेशन से तो इंजीनियर है|कंट्रक्शन में 25 साल के अनुभवी और इंफ्रास्टक्चर डोमेन में जाना मन नाम| अपने आप को फिट रखते है क्योंकि हेल्थ कॉन्शियस है स्पोर्ट्स लविंग है |इसीलिए स्पोर्ट्स कल्ब की और रुझान हुआ और तय कर लिया अपनी सर्विसेस से हाई क्वालिटी कस्टमर सैटिस्फैक्शन देंगे |  अधिक जानकारी के लिए आप इस http://clubfrolic.in/ पर लॉग इन कर सकतें है丨

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मुम्बई।ममतामई श्री राधे गुरु माँ चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा 'माता की चौकी ' का आयोजन शनिवार ११ अप्रैल २०१५ को राधे माँ भवन, सोडावाला लेन, बोरीवली (वेस्ट),मुम्बई में रात 8 बजे किया गया है। जहां पर माता भगवती पर आधारित भजन कीर्तन होगा। और बाद में ममतामई श्री राधे गुरु माँ के दिव्या दर्शन लोगों को प्राप्त होंगे।इस कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क है।ममतामई श्री राधे गुरु माँ चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री संजीव गुप्ता ने लोगों से आग्रह किया है कि इस अवसर का लाभ उठाएं।   S.B.Sharma

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