मथुरा

भोपाल : कुछ अच्छा और रचनात्मक  सीखने के लिए सही माहौल की जरुरत होती हैㅣअच्छे माहौल और अच्छे शिक्षको के मार्गदर्शन में हम जल्दी और अच्छा सीख सकते है ㅣकक्षाओं  का  माहौल भी सीखने में मदद करता है ㅣ आजकल कई स्कूल रचनात्मक तरीके से अध्यापन पर जोर दे रहे है असनानी स्कूल इनमें से एक है ㅣ क्लास रूम में सृजनात्मक तरीके से पढाई के लिए कई तकनीकी और रचनात्मक संसाधनों की जरुरत होती है ㅣ इस दिशा में पीयर्सन स्कूल ने बच्चो की हित में कई प्रयोग किये हैं ㅣपीयर्सन स्कूल ने टीचिंग में आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है ㅣ   इसके लियें  स्कूल ने डीजीक्लास की शुरुआत की है इसमे  पढाई के पारम्परिक  तरीकों की बजाय अत्याधुनिक क्लास रूम शुरू किए है कुछ अच्छा और रचनात्मक  सीखने के लिए सही माहौल की जरुरत होती हैㅣअच्छे माहौल और अच्छे शिक्षको के मार्गदर्शन में हम जल्दी और अच्छा सीख सकते है ㅣअब टीचर्स भी बच्चों से ब्लैक बोर्ड और चाक की बजाय टच स्क्रीन और विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए पढाई करेंगेकुछ अच्छा और रचनात्मक  सीखने के लिए सही माहौल की जरुरत होती हैㅣअच्छे माहौल और अच्छे शिक्षको के मार्गदर्शन में हम जल्दी और अच्छा सीख सकते है ㅣ कक्षाओं के माहौल भी सीखने में मदद करता है ㅣ आजकल कई स्कूल रचनात्मक तरीके से अध्यापन पर जोर दे रहे है ㅣइसमे एक्टिवटीच जैसे कॉन्सेप्ट पर टेक्स्ट बुक के कंटेंट को बातचीत वाले माध्यम और विभिन्न ऑडियो और वीडियो में परिवर्तित किया है ㅣइसके अलावा कई दुसरे शैक्षणिक टूल जैसे  एमएक्स टच और डिजिटल कंटेंट से छात्रों को जल्दी सीखने और शिक्षकों को भी पढने में मदद मिलेगी ㅣ भोपाल के असनानी स्कूल ने रचनात्मक तरीके से पढाई  के लिए शिक्षकों और बच्चो के बीच रचनात्मक माहौल बनाया है ㅣबच्चो में  विषयो की समझ बढ़ाने और अपने काम में क्रिएटिविटी लाने के लिए स्कूल डू इट योर सेल्फ किट जैसे टूल उपलब्ध करा  रहा है ㅣ असनानी स्कूल की प्रिंसिपल डॉ भावना गुप्ता  ने बताया की बच्चे क्लास रूम की चार दिवारी से निकलकर बाहरी दुनियॉ को समझें और जानें इसके लिए स्कूल ने कई एजुकेशनल ट्रिप भी करवाई हैं ㅣइस तरह के अभ्यासों के कारण छात्र जल्दी सीखते हैं और खुद का आंकलन भी कर सकते हैं ㅣ असनानी पियर्सन स्कूल के  चेयरमैन जयसूरज नम्बिआर ने बताया की  छात्रों में भारतीय संस्कृति और सभ्यता की समझ विकसित करने के लिए स्पिक मैके जैसी संस्थाओं से अनुबंध किया है ㅣइसके अलावा छात्रों की खेल में रूचि बढ़ाने के लिए स्कूल ने स्पोर्ट्स क्लीनिक और एडु स्पोर्ट्स जैसी पहल की है ㅣ बच्चो के चहुंमुखी विकास और सृजनात्मक सोच विकसित करने  के लिए पियर्सन स्कूल समय समय पर नई गतिविधियां आयोजित करता रहता है ㅣ

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मुंबई। नागपुर जिले के एक महिला संगठन द्वारा राजुरा पंचायत समिति ग्राउंड,चंद्रपुर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जहाँ पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों मार्शल आर्ट गुरू यज्ञेश शेट्टी को अवार्ड दिया गया और सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस के अलावा वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार, संजय धोते इत्यादि लोग उपस्थित थे। मार्शल आर्ट गुरू चीता यज्ञेश शेट्टी पिछले चार पीढ़ी से बॉलीवुड के लोगों को मार्शल आर्ट शिखा रहे है। तथा स्कूली बच्चों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों सभी को मार्शल आर्ट सिखाते आ रहे हैं। और उन्होने महिलाओं को आत्मरक्षा और किसी भी हमले के वक़्त किस तरह और क्या - क्या वे कर सकती है? सभी के बारे में पूरे देश में लाखों महिलाओं को मार्शल आर्ट की और अन्य प्रकार का प्रशिक्षण दिया है।   

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ब्रजवासी ग्वाल की पौराणिक वेशभूषा में चलते ग्वाल बाल, आगे गऊ माता की अगुवाई और उसके पीछे बैलगाड़ी, और उसके पीछे घोडे की टाप के स्वर यह नाजारा होता इन एच 2 हाइवे के दिल्ली की ओर जाने वाली लेन को जो भोर होते ही हजारों ब्रजवासियों से हाइवे अट जाता है। 19 मार्च को पदयात्रा अपने पड़ाव पृथला से आगे बढी और हजारों ब्रजवासी अपने संकल्प पूर्ति के लिये दिल्ली की ओर बढने लगे। यमुना भक्तों की इस कदम चाल से अब दिल्ली में बैठी केन्द्र सरकार हिलने लगी है। पदयात्रा में चल रहे साधु सन्तों का कहना है कि दिल्ली में बैठी सरकार को दिल्ली से सैकड़ो किलोमीटरों दूर बह रही गंगा का ध्यान तो पर उसके साथ में उनकी नाक के नीचे बह रही यमुना की दशा उन्हे दिखाई नहीं दे रही है। ब्रज धाम में बह रही यमुना नदी में दिल्ली और आगे पड़ने वालो  शहरों के गन्दे नालों के गन्दा जल ही बह कर आ रहा है।  इस बार यमुना भक्त हठ कर बढ रहे कि लौटेगे तो यमुना जल लेके नही ंतो लौटेगे ही नहीं।  यमुना को लाने के लिये चल रही यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा  अपने आप में अनूठी है यात्रा में सबसे आगे गऊमाता, उसके बाद बैलगाडी, फिर घोड़े उसके बाद गुरूकुल के बच्चे और पदयात्री चल रहे है। यात्रा में ठाकुर जी के रथ और कई रंग शालाये चल रही है। यात्रा को अभूत पूर्व बनाने के लिये हजारों ब्रजवासी रोजाना ब्रज से आकर पदयात्रा में सम्मिलित होते है। इस तरह दिन में भीड़ 70 से 80 हजार के आस पास पहुॅच जाती है।  यात्रा में 9 ब्रह्म रत्नों की रक्षा का सन्देश लेके यात्रा में चल रहा ब्रह्मरत्न जनचेतना रथ ब्रह्मरत्न जन चेतना जाग्रति अभियान रथ के संचालक अत्रिमुनि ने कहा कि सनातन धर्म के मूल, गीता, गंगा, गाय, यमुना, साधू, भूमि, कन्या, तुलसी और वृक्षों की प्राचीन काल की भांति सेवा, पूजा, रक्षा अब सुनिश्चित अवश्य होनी चाहिये।   

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जल ही जीवन है। जी हां, अगर जल नहीं है तो जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। जल या पानी एक आम रासायनिक पदार्थ है जिसका अणु दो हाइड्रोजन परमाणु और एक ऑक्सीजन परमाणु से बना है - H2O यह सारे प्राणियों के जीवन का आधार है। आमतौर पर जल शब्द का प्रयोग द्रव अवस्था के लिए उपयोग में लाया जाता है पर यह ठोस अवस्था (बर्फ) और गैसीय अवस्था (भाप या जल वाष्प) में भी पाया जाता है। पानी जल-आत्मीय सतहों पर तरल-क्रिस्टल के रूप में भी पाया जाता है। पृथ्वी का लगभग 71% सतह जल से आच्छदित है जो अधिकतर महासागरों और अन्य बड़े जल निकायों का हिस्सा होता है। खारे जल के महासागरों में पृथ्वी का कुल 97%, हिमनदों और ध्रुवीय बर्फ चोटिओं मे 2.4% और अन्य स्रोतों जैसे नदियों, झीलों और तालाबों मे 0.6%जल पाया जाता है। पृथ्वी पर बर्फीली चोटियों, हिमनद, झीलों का जल कई बार धरती पर जीवन के लिए साफ जल उपलब्ध कराता है। शुद्ध पानी H2O स्वाद में फीका होता है जबकि सोते (झरने) के पानी या लवणित जल (मिनरल वाटर) का स्वाद इनमें मिले खनिज लवणों के कारण होता है। सोते (झरने) के पानी या लवणित जल की गुणवत्ता से अभिप्राय इनमें विषैले तत्वों, प्रदूषकों और रोगाणुओं की अनुपस्थिति से होता है। भारत में विश्व का 18% से अधिक आबादी है जबकि विश्व का केवल 4% नवीकरणीय जल संसाधन और विश्व के भूक्षेत्र का 2.4% भूक्षेत्र है। देश में एक वर्ष में वर्षा से प्राप्त कुल जल की मात्रा लगभग 4,000 घन कि-मी होती है। धरातलीय जल और पुन: पूर्तियोग भौम जल की उपलब्‍ध मात्रा 1,869 घन कि-मी- है। इसमें से केवल 60 प्रतिशत जल का लाभदायक उपयोग किया जा सकता है। इस प्रकार देश में कुल उपयोगी जल संसाधन लगभग 1,122 घन कि-मी- होता है। भारत में जल के उपयोग की मात्रा बहुत सीमित है। इसके अलावा, देश के किसी न किसी हिस्से में प्राय: बाढ़ और सूखे की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। भारत में वर्षा में अत्यधिक स्थानिक विभिन्नता पाई जाती है और वर्षा मुख्य रूप से मानसूनी मौसम संकेद्रित है। भारत में कुछ नदियाँ, जैसे– गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु के जल ग्रहण क्षेत्र बहुत बड़े हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा अपेक्षाकॄत अधिक होती है। ये नदियाँ देश के कुल क्षेत्र के लगभग एक-तिहाई भाग में पाई जाती हैं जिनमें कुल धरातलीय जल संसाधनों का 60 प्रतिशत जल पाया जाता है। दक्षिणी भारतीय नदियों, जैसे– गोदावरी, कॄष्णा और कावेरी में वार्षिक जल प्रवाह का अधिकतर भाग काम में लाया जाता है लेकिन ऐसा ब्रह्मपुत्र और गंगा बेसिनों में अभी भी संभव नहीं हो सका है। जल संसाधन का लगभग 46 प्रतिशत गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिनों में पाया जाता है। उत्तर-पश्चिमी प्रदेश और दक्षिणी भारत के कुछ भागों के नदी बेसिनों में भौम जल का उपयोग अपेक्षाकॄत अधिक है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और तमिलनाडु राज्यों में भौम जल का उपयोग बहुत अधिक है। परंतु कुछ राज्य जैसे छत्तीसगढ़, उड़ीसा, केरल आदि अपने भौम जल क्षमता का बहुत कम उपयोग करते हैं। गुजरात, उत्तर प्रदेश,बिहार, त्रिपुरा और महाराष्ट्र अपने भौम जल संसाधनों का मध्यम दर से उपयोग कर रहे हैं। यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रहती है तो जल के माँग की आपूर्ति करने में कठिनाई होगी। ऐसी स्थिति विकास के लिए हानिकारक होगी और सामाजिक उथल-पुथल और विघटन का कारण हो सकती है। कॄषि में, जल का उपयोग मुख्य रूप से सिंचाई के लिए होता है। देश में वर्षा के स्थानिक-सामयिक परिवर्तिता के कारण सिंचाई की आवश्यकता होती है। देश के अधिकांश भाग वर्षाविहीन और सूखाग्रस्त हैं। उत्तर-पश्चिमी भारत और दक्कन का पठार इसके अंतर्गत आते हैं। देश के अधिकांश भागों में शीत और ग्रीष्म ऋतुओं में न्यूनाधिक शुष्कता पाई जाती है इसलिए शुष्क ऋतुओं में बिना सिंचाई के खेती करना कठिन होता है। पर्याप्त मात्रा में वर्षा वाले क्षेत्र जैसे पश्चिम बंगाल और बिहार में भी मानसून के मौसम में अवर्षा सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न कर देती है जो कॄषि के लिए हानिकारक होती है। कुछ फसलों के लिए जल की कमी सिंचाई को आवश्यक बनाती है। सिंचाई की व्यवस्था बहुफसलीकरण को संभव बनाती है। ऐसा पाया गया है कि सिंचित भूमि की कॄषि उत्पादकता असिंचित भूमि की अपेक्षा ज्यादा होती है। दूसरे, फसलों की अधिक उपज देने वाली किस्मों के लिए आर्द्रता आपूर्ति नियमित रूप से आवश्यक है जो केवल विकसित सिंचाई तंत्र से ही संभव होती है। वास्तव में ऐसा इसलिए है कि देश में कॄषि विकास की हरित क्रांति की रणनीति पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिक सफल हुई है। गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मप्र, प.बंगाल, उप्र आदि राज्यों में कुओं और नलकूपों से सिंचित क्षेत्र का भाग बहुत अधिक है। इन राज्यों में भौम जल संसाधन के अत्यधिक उपयोग से भौम जल स्तर नीचा हो गया है। वास्तव में, कुछ राज्यों, जैसे– राजस्थान और महाराष्ट्र में अधिक जल निकालने के कारण भूमिगत जल में फ्लोराइड का संकेंद्रण बढ़ गया है और इस वजह से पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ भागों में संखिया के संकेंद्रण की वृद्धि हुई है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गहन सिंचाई से मृदा में लवणता बढ़ रही है और भौम जल सिंचाई में कमी आ रही है। संभावित जल समस्या जल की प्रति व्यक्ति उपलब्‍धता, जनसंख्या बढ़ने से दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है। उपलब्ध जल संसाधन औद्योगिक, कॄषि और घरेलू निस्सरणों से प्रदूषित होता जा रहा है और इस कारण उपयोगी जल संसाधनों की उपलब्‍धता और सीमित होती जा रही है। जल के गुणों का ह्रास जल गुणवत्ता से तात्पर्य जल की शुद्धता अथवा अनावश्यक बाहरी पदार्थों से रहित जल से है। जल बाईँ पदार्थों, जैसे– सूक्ष्म जीवों, रासायनिक पदार्थों, औद्योगिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों से प्रदूषित होता है। इस प्रकार के पदार्थ जल के गुणों में कमी लाते हैं और इसे मानव उपयोग के योग्य नहीं रहने देते हैं। जब विषैले पदार्थ झीलों, सरिताओं, नदियों, समुद्रों और अन्य जलाशयों में प्रवेश करते हैं तब वे जल में घुल जाते हैं अथवा जल में निलंबित हो जाते हैं। इससे जल प्रदूषण बढ़ता है और जल के गुणों में कमी आने से जलीय तंत्र (aquatic system)  प्रभावित होते हैं। कभी-कभी प्रदूषक नीचे तक पहुँच जाते हैं और भौम जल को प्रदूषित करते हैं। देश में गंगा और यमुना, दो अत्यधिक प्रदूषित नदियाँ हैं। जल प्रदूषण का निवारण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलकर 507 स्टेशनों की राष्ट्रीय जल संसाधन की गुणवत्ता की निगरानी कर रहे हैं। इन स्टेशनों से प्राप्त किए गए आँकड़ें दर्शाते हैं कि जैव और जीवाणविक संदूषण, नदियों में प्रदूषण का मुख्य स्रोत है। दिल्ली और इटावा के बीच यमुना नदी देश में सबसे अधिक प्रदूषित नदी है। दूसरी प्रदूषित नदियाँ में अहमदाबाद में साबरमती, लखनऊ में गोमती, मदुरई में काली, हैदराबाद में मूसी तथा कानपुर और वाराणसी में गंगा शामिल है। भौम जल प्रदूषण देश के विभिन्न भागों में भारी/विषैली धातुओं, फ़्लोराइड और नाइट्रेट्‌स के संकेंद्रण के कारण होता है। वैधानिक व्यवस्थाएँ, जैसे– जल अधनियम 1974 ;प्रदूषण का निवारण और नियंत्रण और पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1986, प्रभावपूर्ण ढंग से कार्यान्वित नहीं हुए हैं। जल उपकर अधिनियम 1977, जिसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना है, उसके भी सीमित प्रभाव हुए। जल के महत्व और जल प्रदूषण के अधिप्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। जन जागरूकता और  भागीदारी से, कॄषिगत कार्यों तथा घरेलू और औद्योगिक विसर्जन से प्राप्त प्रदूषकों में बहुत प्रभावशाली ढंग से कमी लाई जा सकती है। जल का पुन: चक्र और पुन: उपयोग में लाना पुन: चक्र और पुन: उपयोग अन्य दूसरे रास्ते हैं जिनके द्वारा अलवणीय जल की उपलब्‍धता को सुधारा जा सकता है। कम गुणवत्ता के जल का उपयोग, जैसे शोधित अपशिष्ट जल, उद्योगों के लिए एक आकर्षक विकल्प हैं। इसी तरह नगरीय क्षेत्रों में स्नान और बर्तन धोने में प्रयुक्त जल को बागवानी के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। वाहनों को धोने के लिए प्रयुक्त जल का उपयोग भी बागवानी में किया जा सकता है। इससे अच्छी गुणवत्ता वाले जल का पीने के उद्देश्य के लिए संरक्षण होगा। वर्तमान में, पानी का पुन: चक्रण एक सीमित मात्रा में किया जा रहा है। फिर भी,पुन: चक्रण द्वारा पुन: पूर्तियोग्य जल की उपादेयता व्यापक है। जल संभर प्रबंधन जल संभर प्रबंधन से तात्पर्य, मुख्य रूप से, धरातलीय और भौम जल संसाधनों के दक्ष प्रबंधन से है। इसके अंतर्गत बहते जल को रोकना और विभिन्न विधयों, जैसे– अंत: स्रवण तालाब, पुनर्भरण, कुओं आदि के द्वारा भौम जल का संचयन और पुनर्भरण शामिल हैं। जल संभर प्रबंधन के अंतर्गत सभी संसाधनों जैसे– भूमि, जल, पौधे और प्राणियों और जल संभर सहित मानवीय संसाधनों के संरक्षण, पुनरुत्पादन और विवेकपूर्ण उपयोग को सम्मिलित किया जाता है। केंद्र और राज्य सरकारों ने देश में बहुत से जल- संभर विकास और प्रबंधन कार्यक्रम चलाए हैं। इनमें से कुछ गैर सरकारी संगठनों द्वारा भी चलाए जा रहे हैं। ‘हरियाली’ केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल-संभर विकास परियोजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण जनसंख्या को पीने, सिंचाई, मत्स्य पालन और वन रोपण के लिए जल संरक्षण के लिए योग्य बनाना है। परियोजना लोगों के सहयोग से ग्राम पंचायतों द्वारा निष्पादित की जा रही है। वर्षा जल संग्रह वर्षा जल संग्रहण विभिन्न उपयोगों के लिए वर्षा के जल को रोकने और एकत्र करने की विधि है। इसका उपयोग भूमिगत जलभृतों के पुनर्भरण के लिए भी किया जाता है। यह एक कम मूल्य और पारिस्थितिकी अनुकूल विध है जिसके द्वारा पानी की प्रत्येक बूँद संरक्षित करने के लिए वर्षा जल को नलकूपों, गड्‌ढों और कुओं में एकत्र किया जाता है। वर्षा जल संग्रहण पानी की उपलब्धता को बढ़ाता है, भूमिगत जल स्तर को नीचे जाने से रोकता है, फ़्लोराइड और नाइट्रेट्‌स जैसे संदूषकों को कम करके अवमिश्रण भूमिगत जल की गुणवत्ता बढ़ाता है, मृदा अपरदन और बाढ़ को रोकता है। जल प्रबंधन और जल संरक्षण अलवणीय जल की घटती हुई उपलब्धिता और बढ़ती माँग से, सतत पोषणीय विकास के लिए इस महत्वपूर्ण जीवनदायी संसाधन के संरक्षण और प्रबंधन की आवश्यकता बढ़ गई है। विलवणीकरण द्वारा सागर / महासागर से प्राप्त जल उपलब्‍धता, उसकी अधिक लागत के कारण, नगण्य हो गई है। भारत को जल-संरक्षण के लिए तुरंत कदम उठाने हैं और प्रभावशाली नीतियाँ और कानून बनाने हैं और जल संरक्षण हेतु प्रभावशाली उपाय अपनाने हैं। जल बचत तकनीकी और विधयों के विकास के अतिरिक्त प्रदूषण से बचाव के प्रयास भी करने चाहिए। जल-संभर विकास, वर्षा जल संग्रहण, जल के पुन: चक्रण और पुन: उपयोग और लंबे समय तक जल की आपूर्ति के लिए जल के संयुक्त उपयोग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। (लेखक थर्ड आई वर्ल्‍ड न्‍यूज के प्रधान संपादक हैं)  

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अब की बार स्वच्छ यमुना धार का नारा लगाते हुये यमुना भक्त दो दिन पूर्व ही दिल्ली में प्रवेश कर गये। लाखों यमुना भक्तों की सुनामी को दिल्ली पुलिस भी नहीं रोक पायी। 20 मार्च को यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा अपने पड़ाव स्थल बदरपुर बार्डर से सुबह 11 बजे प्रारम्भ हुयी जो दिल्ली में लाखों यमुना भक्तों के साथ प्रवेश कर गये। यात्रा के प्रारम्भ में चल रही गौ माता उसके बाद बैल गाड़ी और फिर गुरूकुल के पीत वस्त्रधारी बालका-बालिकाओं की टोली उसके बाद यात्रा का मुख्य मंच के बाद चलता लाखों यमुना भक्तों की सुनामी कुछ अलौकिक दृश्य को प्रस्तुत करती है। लाखों की संख्या में ब्रज से दिल्ली तक पहुॅचे यमुना भक्त उसी उत्साह और उमंग से परिपूर्ण नजर आये जैसा कि वह यात्रा के प्रथम दिवस पर थे। यमुना भक्तों को रोकने के लिये पुलिस प्रशासन द्वारा नीतियाँ तो तैयार की गई थी परन्तु वह सारी फ्लाप साबित हुयी जिसका कारण अत्याशित संख्या में यमुना भक्तों का होना था। ब्रजवासियों की इस संख्या को देख प्रशासन माथे से पसीना पोंछता नजर आया और दिल्ली के अब तक दिल्ली के यातायात नियमों का हवाला दे टैक्टरों पर रोक लगाने वाले पुलिस प्रशासन द्वारा यात्रा में सम्मिलित लाखों पदयात्रियों और हजारों की संख्या में सम्मिलित चार पहिया वाहन, टेक्टरो और ट्रकों के लिये रास्ता खाली करवाया गया।  यमुना मुक्तिकरण अभियान के संयोजक राधाकान्त शास्त्री एवं राष्ट्रीय महासचिव हरेश ठेनुआ ने कहा कि ब्रज से लाखों साधु-सन्त, भागवताचार्य, ब्रजवासी और किसान यहाँ जीवन की मूल भूत आश्वकताओं में सबसे प्रमुख स्वच्छ पानी मांगने आये है कोई आरक्षण या नौकरी मांगने नहीं आये। आज ब्रजवासी और प्रत्येक सनातन धर्म में आस्था रखने वाले व्यक्ति की आराध्या यमुना जो उसके किनारे बसने वालों के पेय और सिंचाई जल की आवश्यकता पूर्ति का भी साधन है और उसके पूज्यनिया भी हैं। पवित्र धार्मिक नदी में यदि जहरीला जल दिया जाय और उस जहरीले जल की बजह से किसी के घर में गन्दा पानी पीके युवा पीढी कैंसर आदि रोगो से मर रही हो तो क्या वह स्वच्छ अविरल और निर्मल जल की भी मांग भी नहीं कर सकता । अगर कर सकता है तो आज लाखो यमुना भक्त और ब्रजवासी केन्द्र सरकार से आस्था, धर्म और जीवन की रक्षा के लिये उसी अविरल और यमुना की मांग कर रहे है।  पूर्व कृषि मंत्री चै. लक्ष्मीनारायण ने कहा कि यदि सरकार यमुना भक्त ब्रजवासियों की मांग नहीं मानती है तो 21 मार्च से वह अपने समर्थकों के साथ अनशन प्रारम्भ कर देगे। एम एल सी लेखराज सिंह ने कहा कि सरकार को यमुना समस्या को हल करने के लिये यमुना भक्तों की मांग मान लेनी चाहियें।  आचार्य बद्रीश जी, मृदुलकान्त शास्त्री एवं पंकज शास्त्री ने कहा कि जिस सरकार से सभी को इतनी आशा थी कि वह पहले दिन ही यमुना भक्तों की मांग मान लेगी उस सरकार का ऐसा व्यवहार अकल्पनिय था। जो साधु सन्तों की सरकार है जिसकी जल संसाधन मंत्री स्वयं साध्वी है वह सन्तों की मांग न माने यह विश्वसनिय नहीं है। फिर भी यमुना भक्त अपनी संकल्प पर अडिग है और अडिग रहेगेे। भारतीय किसान यूनियन भानू के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह एवं राष्ट्रीय मुख्य महासचिव राजेन्द्र प्रसाद शास्त्री ने कहा कि किसान बिना यमुना लिये पीछे नहीं हटने वाले है। अगर सरकार मांग नहीं मानती है तो हजारों हजार किसान दिल्ली पहुॅचायेगा और यही डेरा डालकर रहेगा हमारी मांगे नहीं मान ली जाती है। यमुना मुक्तिकरण अंिभयान के प्रदेश संयोजक श्याम चतुर्वेदी, भाकियू भानू के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष केशव देव सिंह एवं भाकियू भानू के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ये न समझे कि यमुना भक्त थक गये है। यमुना भक्तों की संख्या कम नहीं होगी बल्कि दिनों दिन वह बढती ही जायेगी। लाखों ब्रजवासी अभी ब्रज में दिल्ली आने के लिये आतुर बैठा हुआ है। इसलिये सरकार जल्द भक्तों की बात मान लें। इस अवसर पर पूज्य देवकी नन्दन जी महाराज, पुष्टिमार्गिय आचार्य श्री शरद बाबा माण्डवी वाले, श्री भूषण बाबा, आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।      सरकार से यमुना भक्तों की हुयी अनौपचारिक वार्ता  लगातार अपने ध्येय की ओर अनवरत बढ रहे यमुना भक्तों को लेकर केन्द्र सरकार में चिन्ता की लकीरे और अधिक स्पष्ट दिखाई देने लग गया है। यमुना भक्तों को मनाने में जुटी सरकार द्वारा यमुना भक्तों वार्ता के बुलाया गया। अभियान के संरक्षक पंकज गोस्वामी जी महाराज ने बताया कि सरकार से वार्ता हो रही है पर सरकार अपनी परिस्थतियों का हवाला देकर यमुना भक्तों की मांग को पूरा करने में कुछ महीनों का समय मांग रही है। उन्होने बताया कि सरकार द्वारा यमुना समस्या को हल करने के लिये सरकार द्वारा कोई प्रगति नहीं की गयी है। सरकार के इस रवैये पर यमुना भक्तों ने अपना रूख साफ दो टूक कह दिया कि जब तक यमुना भक्तों की मांग नहीं मानी जाती यमुना भक्त मानने वाले नहीं है। बिना यमुना के लिये यमुना भक्त लौटेगे नहीं।    हजारों की संख्या में पुलिस बल रहा मौजूद  यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा में चल रहे लाखों साधु-सन्तों, किसानो और ब्रजवासियों को देख पुलिस प्रशासन द्वारा हजारों की संख्या में पुलिस बल तैनात किया जो संभव परिस्थिती के लिये पूर्ण रूप से तैयार थे। तैनात किये पुलिस बल में अर्ध सैनिक बल ( आर.ए.एफ ) की भी कई टुकडि़या मौजूद थी जिनमें हजारों की संख्या में पुलिस बल पदयात्रा के चारों ओर उपस्थित रहा।  दिल्ली का यातायत रहा हाँफता रहा यमुना मुक्तिकरण अभियान के लाखों यमुना भक्तों के दिल्ली में घूसते ही दिल्ली की यातायात व्यवस्था चर मरा गयी। लाखों यमुना भक्तों पदयात्रा के चलते दिल्ली ट्रेफिक पुलिस को कई जगह का रूट डायवर्ट करना पड़ा। इसके बावजूद भी दिल्ली का ट्रेफिक 20 मार्च को हाँफता रहा।  आश्रमचैक पर की सभा और हजरत निमाजु़दीन पुलिस स्टेशन के सामने चैराहे को किया जाम बदरपुर बार्डर से जंतर-मंतर के लिये चले यमुना भक्तों के लाखों के काफिले ने दिल्ली के मुख्य आश्रम चैक पर बैठ तकरीबन 45 मिनट तक विश्रााम कर सभा की जहाँ सन्तों और अभियान के पदाधिकारियों द्वारा यमुना भक्तों सम्बोधित कर निर्देश भी दिये गये। इसके बाद यमुना भक्त जब जंतर मंतर के लिये बडे तो पुलिस ने हजरत निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन के सामने चैराहे पर पुलिस ने बैरिगेटिंग लगा यमुना भक्तों का रास्ता मोड़ने की कोशिश की गई जिस पर भाकियू के आक्रोशित किसानों ने दोनो रोडो को रोक जाम लगा दिया। और तकरीबन 1 घंटे तक जाम लगाये रखा उसके बाद अभियान के कार्यकर्ताओं द्वारा आगे जाने का रास्ता देखा गया और यमुना भक्तों द्वारा चयनित रास्ते पर यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा आगे बढी।   

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दो ट्रक काला तेल व स्कार्पियों बरामद, नौ गिरफ्तार मथुरा। जनपद में काले तेल का कारोवार बड़ें पैमाने पर अपने पैर पसारता जा रहा है जहाॅ जनपद पुलिस इसके ठिकानों को पर आये दिन छापेमार कार्यवाही को काला तेल का कारोवार करने वालों के विरूद्व कार्यवाही कर अपनी इतिश्री कर लेती हैं। वहीं काले तेल के कारोवार करने वाले लोग ठिकाने बदल बदल कर अपने व्यापार को दिन दूना और रात चैगुना करने में जुटें हुए हैं। इसी श्रंखला में जनपद की क्राइम ब्रांच व थाना शेरगढ पुलिस ने संयुक्त कार्यवाही करते हुए मुखबिर की सूचना पर थाना शेरगढ़ क्षेत्र के गाॅव खुरशी में चल रहें अवैध काले तेल के गोदाम पर छापे मार कार्यवाही की। पुलिस की छापेमार कार्यवाही से जहाॅ तेल कारोवारियों में हड़कम्प मच गया। वहीं पुलिस ने मौके से लाखों रूपयें कीमत का दो ट्रक काला तेल व उक्त तेल को बनाने के उपकरण व एक स्कार्पियों गाड़ी को मौक से कब्जें में लेते हुए नौ काला तेल कारोवारियों को हिरासत में लिया हैं।  मिली जानकारी के अनुसार जनपद पुलिस के आला अधिकारियों को कई दिन से थाना शेरगढ़ क्षेत्र में काले तेल का कारोबार होने की सूचना मिल रही थी। इन्हीं सूचनाओं पर पुलिस ने क्षेत्र में मुखविरों का जाल बिछा दिया। इसी के चलते जनपद की क्राइम ब्रांच को मुखबिर से सूचना मिली की थाना शेरगढ़ के गाॅव खुरशी के पास जंगल में एक टीन शैड में काले तेल का कारोवार बड़ें पैमाने पर चल रहा हैं। क्राइम ब्रांच टीम ने थाना शेरगढ़ पुलिस कें सहयोग से गाॅव में मुखविर द्वारा बताये स्थान पर छापामार कार्यवाही की तो पुलिस को देख गौदाम में कार्य कर रहें लोग भागने लगें। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर गौदाम में कार्य कर रहें नौ लोगों को हिरासत में लेते हुए मौके से दो ट्रकों में भरा काला तेल व गौदाम में रखें कच्चा काला तेल जिसकी कीमत लाखों में बताई जाती हैं। इनके के अलावा पुलिस ने मौके से एक स्कार्पियों गाड़ी के अलावा काला तेल तैयार करने में उपयोग होने वाले उपकरण भी बरामद किये हैं। पुलिस पकड़ें गये लोगों से गोदाम मालिक के बारे में विस्तुत जानकारी करने में जुटी हैं।

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मथुरा। शहर की एक युवती को एक टीवी सीरियल में काम दिलाये जाने के नाम पर उसके साथ दुराचार करने का प्रयास किये जाने का मामला प्रकाश में आया हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी हैं।  मिली जानकारी के अनुसार शहर के एक प्राचीन होटल के डायरेक्टर महेन्द्र देव ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर शहर के चन्दनवन कालौनी में एक युवती को टीवी सीरियल सावधान इडिया में काम दिलाये जाने के नाम पर उसें झासें में लेकर उसके साथ होटल के कमरे में दुराचार करने का प्रयास किया युवती द्वारा विरोध करने पर आरोपियों द्वारा जान से मारने की धमकी दी। डरी सहमी युवती ने जैसे तैसे होटल के कमरे से बाहर निकल कर अपने को बचाया और घर लोट कर घटना से अपने परिजनों को अवगत कराया। परिजनों ने घटना की विस्तुत जानकारी प्राप्त कर पूरे घटना क्रम को पुलिस के संज्ञान में लाया तो पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की। जिस पर पीडि़त अपने परिजनों के साथ पुलिस के आला अधिकारियों से मिली। जिस पर अधिकारियों ने घटना को गंभीरता से लेते हुए घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाकर आरोपियों की गिरफ्तारी करने के आदेश थाना हाईवें पुलिस को दिये हैं। पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी हुई हैं।

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15 तोला सोना 1 किलो चाॅदी व लाईसेंसी रायफल चोरी गोवर्धन। थाना क्षेत्र के गाॅव जतीपुरा में बेखौफ अज्ञात बदमाशों ने बन्द मकान में जमकर उत्पात मचाकर मकान में रखे सोने के आभूषण नगदी व लाईसेंसी रायफल पर हाथ साफ कर आसानी से फरार हो गये। वही सुवह जानकारी होने पर घटना की सूचना मकान स्वामी द्वारा थाना पुलिस को दी गई। बीती रात्रि थाने के तीन किलो मीटर की दूरी पर गिर्राज परिक्रमा मार्ग स्थित गाॅव जतीपुरा में प्रमोद पुत्र श्याम सुन्दर के मकान पर अज्ञात बदमाशों ने धावा बोल दिया। जहाॅ बदमाशों ने मकान में रखे करीव 15 तोला सोने के आभूषण चूडी पैंडल झुमकी अंगूठी हार झाले 65 हजार रूपये केस एक लाईसेंसी रायफल व कुछ चाॅदी के आभूषणों पर हाथ साफ कर गये।  प्राप्त जानकारी के अनुसार मकान स्वामी प्रमोद कुमार मय परिवार के अपने बडे भाई अशोक कौशिक के घर हो रहे जागरण में गया हुआ था जिसका फायदा उठाकर अज्ञात बदमाश रात्रि को दूसरी मंजिल के मेन गेट तोडकर मकान में प्रवेश कर गये और जमकर घर में रखे लाखों रूपये के आभूषण एवं लाईसंेसी रायफल 65हजार रूपये की नगदी पर हाथ साफ कर दिया। सुवह होने पर जव मकान स्वामी प्रमोद अपने घर पहुॅचा तो घर में बिखरे पडे सामान को देख सकते में रह गया जिस घटना की सूचना मकान स्वामी द्वारा थाना पुलिस को दी गई तो सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सूर्यभान सिंह मय फोर्स के मौके पर पहुॅच गये और घटना की वारीकी से जानकारी कर अज्ञात बदमाशों की तलाश में जुट गये।

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मथुरा। थाना हाईवें में न्यायालय के आदेश से एक महिला के विरूद्व धोखाधडी कर जमीन का बैनामा करा लेने की रिपोर्ट पीडि़त ने पुलिस में दर्ज कराई हैं।  मिली जानकारी के अनुसार विद्याराम पुत्र हरीसिंह निवासी आर्मी गार्डन कृष्णा नगर मथुरा ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि श्रीमती निहाल देवी पत्नी ग्यासीराम निवासी मेघपुर थाना फरह ने अपने पाॅच अन्य साथियों के सहयोग से उसकी जमीन का षड़यंत्र कर फर्जी कागजात तैयार करा लिये और बैनामा करा लिया। जिस पर पीडि़त ने न्यायालय के आदेश प्राप्त कर आरोपी महिला सहित पाॅच लोगों के विरूद्व रिपोर्ट दर्ज कराई हैं।

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ऐसे जनहितकारी कार्यों की मथुरा को ही नहीं पूरे देश को जरूरत- हेमा मालिनी मथुरा। लाभ अर्जित न कर विशुद्व सेवा भाव से लागत मूल्य पर विश्वसनीय औषधि उपलब्ध कराने के लिए एसवीसी फाउन्डेशन द्वारा मथुरा के मध्य केन्द्र स्थल तिलक द्वार में अत्याधुनिक मैडीकल शाॅप का उद्घाटन सांसद श्रीमती हेमा मालिनी द्वारा किया गया। फाउन्डेशन द्वारा यहाँ सभी रोगों की चार हजार से अधिक प्रकार औषधियाँ स्टाॅक में रखी गई थीं। औपचारिक उद्घाटन के पश्चात् अप्सरा सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हेमा मालिनी, मथुरा के विधायक एवं कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता प्रदीप माथुर, पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री तथा माँट क्षेत्र के विधायक श्याम सुन्दर शर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष मनीषा गुप्ता और ईश्वर के रूप में रोगियों की निःस्वार्थ सेवा में समर्पित वीके सुरेका ने आचार्य देवो पंडित द्वारा मंगलाचरण के मध्य दीप प्रज्वलन किया। कार्यक्रम में विश्वनाथ पाठक ने सांसद हेमा मालिनी, अम्बुज चतुर्वेदी ने विधायक प्रदीप माथुर, रमेश गर्ग ने श्याम सुन्दर शर्मा, श्रीमती देविका चतुर्वेदी ने मनीषा गुप्ता, डा0 रमा चतुर्वेदी ने श्रीमती अलका चतुर्वेदी तथा अम्बुज चतुर्वेदी ने वी0के0 सुरेका का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। ममता चतुर्वेदी एवं प्रभा चतुर्वेदी ने भी सासंद हेमा मालिनी का अभिनन्दन किया। इसी क्रम में सेवा प्रकल्प में महत्वपूर्ण योगदान करने हेतु सांसद हेमा मालिनी ने वी0 के0 सुरेका, विधायक प्रदीप माथुर ने अरविन्दम चतुर्वेदी, श्याम सुन्दर शर्मा ने सुखदेव चतुर्वेदी तथा श्रीमती मनीषा गुप्ता ने समर्थ चतुर्वेदी का शाॅल उढ़ाकर और अभिनन्दन पत्र भेंट कर सम्मान किया। रमेश गर्ग ने सेवा प्रकल्प की सराहना में काव-पाठ कर तालियाँ बटोरीं। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि हेमा मालिनी ने कहा कि उन्होंने रावल गाँव को गोद लिया है और गाँव में शिक्षा, चिकित्सा और सफाई की दयनीय स्थिति को देखा है। सुरेश चतुर्वेदी ने जिस सेवा कार्य का संकल्प लिया है वह रावल गाँव या मथुरा ही नहीं पूरे देश की आज महती आवश्यकता है। आज मथुरा में जो कार्य प्रारंभ हुआ है वह पूरे देश को प्रेरणा प्रदान करेगा। कार्यक्रम का संचालन करते हुए मोहन स्वरूप भाटिया ने प्रारंभिक उद्बोधन में कहा कि आज अधिकाश व्यक्ति प्रदूषित वातावरण, प्रदूषित जल, सिन्थेटिक दूध, मिलावटी खाद्य पदार्थ आदि के कारण अस्वस्थ हैं। डाॅक्टर्स का अभाव है, औषधियाँ बहुत महँगी हैं। इन समस्याओं ने सुरेश चतुर्वेदी को विचलित किया और उन्होंने पीडि़त मानवता की सेवा का ऐतिहासिक कार्य किया है। औषधि सेवा के साथ उन्होंने 500 चतुर्वेदी परिवारों के निःशुल्क बीमा करने का अभूतपूर्व कार्य किया है। अफ्रीकी देश इशोपिया में इन्डिया आई केयर की स्थापना की जहाँ हजारों नेत्र रोगियों को लाभ मिला है। यहाँ इस देश के राष्ट्रपति ने भी अपना आपरेशन कराया था। इससे इस संस्थान की महत्वा समझी जा सकती है। कार्यक्रम के अन्त में श्रीमती अलका चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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