मथुरा

मथुरा। चैत्र नवरात्रो के चलतें जनपद के नरी सेमरी देवी मन्दिर पर लगनें वाले नरी सेमरी मेले के दूसरो दिन भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों के भीड़ के दवाव के चलते जहाॅ महिला के साथ छेड़छाड़ व चेन स्नेचिग की घटनाएं घटित हुई वहीं सैकडों श्रद्वालुओं की जेवें साफ हो गई। श्रद्वालुभक्त प्रशासन की व्यवस्थाओं को कोसतें नजर आ रहें थे। वहीं प्रशासन द्वारा मेले को लेकर की गई सभी तैयारियां ध्वस्त हो दिखी जिसकी वजह से लोगों को भारी दिक्कत का सामना करना पडा। छाता क्षेत्र के गाॅव नरी में नरी सेमरी के नाम से देवी माॅ का मन्दिर है इस मन्दिर पर वर्ष के चेत्र मास में नरी सेमरी मेले का आयोजन किया जाता हैं। जिसके लिए जिला प्रशासन द्वारा कई महिनें पहलें से ही मेले की तैयारियां की जाती हैं। मेले चेत्र नवरात्रों के साथ ही प्रारंभ हो गई। लेकिन मेले के दूसरे दिन भक्तों के भीड़ के चलते प्रशासन द्वारा की गई सभी तैयारियां घ्वस्त होती नजर आई, सुरक्षा व्यवस्था की स्थित यह रही की चैन स्नेचिंग गिरोह पूर्ण रूप से सक्रिय रहा जिसकी वजह से सैकडों महिलाओं के गलें से चैन तोड़ ली गई वहीं कई चैन स्नैचिंग करने वाले युवकों को पुलिस के हवाले किया गया लेकिन पुलिस ने पकड़ें गये युवकों के विरूद्व कोई ठोस कार्यवाही नहीं किये जाने से चैन स्नेचिंग व असामाजिक तत्वों के हौसलें बुलन्द रहें। युवकों द्वारा महिलाओं व युवतियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं खुलेआम होती देखी जा रही थी कई युवतियों व महिलाओं के परिजनों को युवकों की मरम्मत करते हुए देखा गया। वहीं नवनियुक्त कोतवाली प्रभारी संजय जायसवाल ने चार्ज संभालतें ही पुरे मेले की कमान सभाल ली हैं। लेकिन उनकी क्षेत्र में हालकी नियुक्त को लेकर असमाजिक तत्वों व चैन स्नेचिंग और जेबकटी करने वालों की पौ वारह रही। बताया जाता कि थाना के स्टाफ द्वारा ही असमाजिक तत्वों से साठगाठ कर समकर धन उगाही की है उसके बाद उन्हें पुरे मेले में चैन स्नेचिंग व जेवकटी करने केे लिए उन्हीं पुरी छूट दी गई हैं। जिसकी जानकारी से नव नियुक्त छाता कोतवाल अनिभिज्ञ बने हुआ हैं।

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बल्देव। ग्राम रावल में सिड आर सेटी चैमुहा मथुरा द्वारा आयोजित 21 दिवसीय निःशुल्क महिला सिलाई एवं डिजाईन प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रशिक्षणाथिर्यो को सबोधित करते हुये मथुरा जनपद के मुख्य विकास अधिकारी आंद्रा वामसी ने तकनीकी शिक्षा को बेरोजगारी से लडनें का विेशेष शस्त्र बताया। उन्हौने युवतियों से कहा किसी भी गाॅव में जब युवतियाॅ जागृत होकर अपनी तकनीकि ज्ञान व कौशल का प्रयोग आत्मनिर्भर बनने के उद्वेश्य करती है। तो निश्चित ही उस गाॅव का आर्थिक सामाजिक विकास सम्भव है। बहू बेटियाॅ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने को स्वरोजगार प्रारम्भ करे। यह निश्चित ही एक अच्छी शुरूबात होगी। इस अवसर पर सिंडीेकेट बैक परिक्षेत्र आगरा के सहायक महाप्रबन्धक के0पी0 शेखरन ने कहा कि बैंक देश के आर्थिक, सामाजिक विकास में सशक्त सहयोगी की भूमिका कार्य करते है। हमारा उद्वेश्य ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्वेश्य से तकनीकि प्रशिक्षण प्रदान कर स्वरोगारी बनाना है। यह प्रशिक्षण तभी पूर्ण होगा जब युवतियाॅ शीध्र ही स्वरोजगार प्रारम्भ करेगी। नाबार्ड मथुरा के जिला विकास प्रबन्धक पंकज कुमार ने कहा कि रावल की आवश्यकता को याद रखकर विशेष तकनीकी प्रशिक्षण चलाये गये है। जिला मुख्य अग्रणी प्रबन्धक मथुरा के0आर0 गणेशन ने कहा कि स्वरोजगार हमें एक नयी पहचान प्रदान करता है। गाॅव रावल में धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से ठाकुर जी की पोशाक व अन्य वस्त्रों की ब्रिकी हेतु प्रयास किये जाये तो निश्यित ही सफलता मिेलेगी। युवतियाॅ समूह बनाकर निर्माण व ब्रिकी का कार्य करे। इस अवसर संस्थान के निदेशक सुरेन्द्र कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। सभी प्रशिक्षणार्थी को प्रमाणपत्रों का विवरण अतिथियों द्वारा किया गया। प्रतिभागियों ने कन्या भूण्र हत्या पर आधारित नाटक की प्रस्तुती कर दर्शको की खूब तालियाॅ लूटी है। अतिथियों ने प्रशिक्षण के दौरान तैयार वस्त्रों, बैग आदि का निरीक्षण किया एवं उसको सराहा। संचालन संस्थान के प्रशिक्षक दीपक गोस्वामी ने किया। इस मौके पर संस्थान के पूर्व निदेशक वेदप्रकाश गर्ग, सिडीकेंट बैंक लोहवन प्रबन्धक गौरव भारद्वाज, प्रधान प्रतिनिधि संजय सारस्वत, सहायक खण्ड विकास अधिकारी बल्देव कढेरू सिंह ने अपने विचार प्रकट किये। वहीं राम खिलाडी शर्मा, अमित चर्तुवेर्दी, दिनेश चन्द्र अग्रवाल, मिथलेश शर्मा, राधाबल्लभ, शिवराम, जवाहर पटेल, कृष्णमुरारी, सुभाष, कु0 रेनू, भावना आदि उपस्थित रहे।

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जयन्ती में आये अतिथियों को सम्मानित करते आयोजकगण मथुरा। गौतम ऋषि जयन्ती को आज अखिल भारतीय गौतम ब्राह्मण महासभा महोली रोड़ द्वारा महर्षि गौतम ऋषि जयन्ती धूमधाम से मनाई गयी। इस अवसर पर महर्षि गौतम के चित्र पर संस्था के अध्यक्ष ओमप्रकाश गौतम एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेखराज गौतम द्वारा माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया तथा उपस्थित गौतम बन्धुओं ने भी पुष्प अर्पित किये। उपस्थित जनों को सम्बोधित करते हुए पन्ना लाल गौतम ने महर्षि गौतम को श्रेष्ठ ऋषि तथा न्याय शास्त्र के रचियेता बताया। जिसके आधार पर भारत का संविधान का निर्माण हुआ है। गौतम ब्राह्मणों का इतिहास शोर्य पराक्रम से भरा है तथा अन्य बक्ताओं ने भी गौतम ऋषि पर विचार प्रकट किये तथा राष्ट्रपति पदक से सम्मानित डा0 बीडी गौतम को भी समाज के लोगों ने सम्मानित किया। सभी आगन्तुक व्यक्तियों का स्वागत देवदत्त गौतम ज्ञानेन्द्र गौतम ने किया। समाज के बुजुर्गों का शाल उढ़ाकर सियाराम गौतम शिचरन लाल गौतम, हरिश्याम, बंगाली प्रसाद, बृजमोहन, बृजगोपाल, लेखराज व डा0 बी.डी. गोतम को सम्मानित किया गया। ओंकार सिंह, ज्ञानेन्द्र वीरेन्द्र पाल, डा0 डी.एन. गौतम, आर.पी.गौतम, सुभाष गौतम, विष्णु कुमार गौतम व कन्हैया लाल गौतम आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। सभा का संचालन तिलकराज गौतम ने किया।

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प्रकृति के गर्भ से निकली बस्‍तर की हस्‍तकला देश और दुनिया के हर मेले की शान हैं। देश का पूरा कला जगत इन्‍हें बेहद सराहता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि बस्‍तर के शिल्‍प कुदरती हैं और अनेक पीढ़ियों से अपने मूल रूप में चले आ रहे हैं।  आदिवासी मसलों का कोई जानकार भी नहीं बता सकता कि इनकी शुरुआत कब हुई? असल में आदिवासी समाज ने इन्‍हें गढ़ना या बनाना सीखा ही नहीं। यह तो उनकी आस्‍था और रहन-सहन में शुमार उनकी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें हैं, जिन्‍हें शहरी लोगों ने परखा और समझा फिर कलाजगत में जगह दिलाई। आज भी बस्‍तर के देहातों में रह रहे आदिवासियों को जरा सा भी अंदाज नहीं है कि उनकी मिट्टी की कच्‍ची झोपड़ी के बाहर लटकने वाला दीपक शहरी इलाकों में कितना सराहा जाता है या उनकी आस्‍था की प्रतीक प्रतिमाओं को लोग मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी या दिल्‍ली की कला दीर्घाओं में कितनी शिद्दत से सराहते हैं। महानगरों का अभिजात वर्ग अपनी बैठकों में उन्‍हें सजाकर कितना गौरवान्वित होता है। शहरी दस्‍तकार मेलों में बस्‍तर आर्ट के नाम पर तीन तरह के शिल्‍प दिखते हैं सबसे पहले ढोकरा आर्ट जिसे बस्‍तर में गढ़वा आर्ट कहते हैं। दूसरी लौह आकृतियां जिसे लोहार जाति के लोग बनाते हैं और तीसरे काष्‍ठ शिल्‍प यानी लकड़ी से बनी कलात्‍मक वस्‍तुएं खासतौर पर लकड़ी पर उकेरा जाने वाला आदिवासी जीवन। काष्‍ठ शिल्‍प यूं तो आदिवासियों की रगों में रचा-बसा था मगर उसे आधुनिकता का पुट इस इलाके में 70 के दशक के आसपास पश्चिम बंगाल से बस्‍तर पहुंचे गुहा नाम के सज्‍जन ने दिया। उन्‍होंने ही इस कला को नए रूप में घर-घर पहुंचाया। उनकी दिलचस्‍पी और लगन की वजह से बस्‍तर का बच्‍चा-बच्‍चा इस कला में पारंगत है। गुहा का देहांत हुए 20 बरस से ऊपर हो गए पर उनकी सिखाई ये कला आज भी फल-फूल रही हैं। कला तो दरअसल आदिवासियों का जीवन हैं, भीमबेटका की गुफा चित्रकारी इसका जीता-जागता सबूत है। आदिवासी प्रकृति प्रेमी हैं और उनकी उपासना का दायरा भी इसी के इर्द-गिर्द है। पेड़, पक्षी और नदी पूजक इन आदिवासियों ने अपनी आस्‍थाओं को कब मूर्ति शिल्‍प में ढालना शुरू किया कोई नहीं जानता पर बस्‍तर के लोग इन्‍हें सदियों से देखते आ रहे हैं। आदिवासी आस्‍था के ये प्रतीक जैसा कि जाहिर गढवा जाति के कलाकार बनाते हैं। बस्‍तर में हजारों देवी-देवता हैं और इन्‍हें तय आकार के हिसाब से कैसे ढाला जाए यह आदिवासी ही समझते हैं। शहरी लोगों के लिए ये महज कलात्‍मक वस्‍तुएं हैं। यहां सबसे ज्‍यादा मूर्ति दंतेश्‍वरी देवी की बनती है। कहते हैं बस्‍तर में सती के दांत गिरे थे, लिहाजा यहां दंतेश्‍वरी का मंदिर बन गया। शहरी लोग देवी दंतेश्‍वरी को मानते हैं। इनकी पीठ आज से माओवादी उपद्रवग्रस्‍त इलाके दंतेवाड़ा शंखिनी नदी के करीब है। अगर छह भुजाओं वाली सिंह पर विराजी कोई मूर्ति दिखे तो इसका मतलब है कि वह दंतेश्‍वरी मां हैं। इनके अलावा दंतेश्‍वरी देवीकी बुआ मावली माता की प्रतिमाएं भी आदिवासी बनाते हैं। आदित्‍य देव, भौरमदेव, हिंगलाजिन देवी जैसे अनेक देवी-देवता हैं जिन्‍हें बिना समझे लोग बस कला के प्रतीक के तौर पर खरीद लेते हैं। इसी तरह बूढ़ी माता, गंगुआ मां, करनकोटी, दूल्‍हादेव की कलात्‍मक लगने वाली आकृतियों को पूरे गोंडवाना के आदिवासी पूजते हैं। इन कलाओं का जरा सा विकास भी हुआ है। पहले ये सिर्फ आस्‍था तक सीमित थीं पर अब इसमें व्‍यावसायिक कोण भी जुड गया है। लिहाजा शहरी प्रभाव में ये दरवाजे की मूंठ, जालियां औश्र बालकनी वगैरह के लिए कलात्‍मक चलजें, दरवाजे भी बनाने लगे हैं। समय के साथ आदिवासियों ने इन कलाओं का ‘फ्यूजन’ करना भी सीख लिया है और वे अनेक उपयोगी कलात्‍मक वस्‍तुएं बनाने लगे हैं, लोहे, लकड़ी और गढ़वा कलाओं के तालमेल से घरेलू उपयोग की अनेक वस्‍तुएं जैसे ट्रे, तरह-तरह के प्‍याले और गुलदस्‍ते वगैरह भी बनाने लगे हैं। इनकी मांग खासतौर पर अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में बहुत बढ़ गई है। इससे आदिवासियों को फायदा तो हुआ है पर बिचौलिए उससे भी ज्‍यादा मुनाफा उठा रहे है। आदिवासी प्रकृति प्रेमी है वह अपने कुदरती खूबसूरती से सराबोर गांवों को छोड़ना नहीं चाहता और इसका फायदा जाहिर है बिचौलिए ले जाएंगे। सरकार ने आदिवासी कलाओं को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं चलाई हैं। हाल में सूरजकुंड मेले की थीम छत्‍तीसगढ़ थी और इसमें बस्‍तर आर्ट छाया हुआ था। पर दिक्‍कत वही है कि आदिवासी शहरी जीवन के आदी नहीं हैं। वह घर वापसी को उतावले हो जाते हैं। उन्‍हें गांव के पहाड़ चाहिए, अपने आंगन में ताजे फलों के पेड़ और बाड़ी की हरी सब्जियां चाहिए, नहाने को झरने, नदी, तालाब चाहिए। खुला माहौल चाहिए और इसी माहौल के हिसाब से उन्‍होंने अपनी जीवन चर्या बना ली है। शहर में उन्‍हें दो दिन बाद दिक्‍कत होने लगती है। आदिवासियां का लौहशिल्‍प खासा लोकप्रिय है। इसकी बाजार में खूब बिक्री होती है, इसकी वजह यह है कि बस्‍तर में इफरात लोहा है। आदिवासियों को यह आसानी से हासिल हो जाता है। उन्‍हें इसे बनाने में भी आसानी होती है। वह लोहे को तपाकर और ठोंक-पीटकर पसंदीदा आकार दे लेते हैं। पीतल की बनिस्‍बत लोहा किफायती भी है। पर गढ़वा आर्ट के लिए कच्‍चा माल मिलना आसान नहीं है। पीतल महंगा हो गया है और बाहर से आता है। इसी तरह लकड़ी के लिए भी जंगल और वन विभाग पर निर्भरता है। वैसे कुदरत इतनी मेहरबान न होती तो शायद घर की कड़छी और दीपक बनाने से हुई अनगढ़ शुरुआत सुघड़ कला तक न पहुंचती। यह शिल्‍प पेरिस और अमेरिका में भी बिक रहा है मगर यह गिने-चुने आदिवासी ही जानते होंगे। असल में आदिवासियों के पूरे जीवन में खास तरह की कलात्‍मक छाप है। उनका हाथ से कता लुगड़ा यानी कपड़ा, बुनी हुई टोकरियां सभी की खूबसूरती देखने वाली है। आदिवासियों के सबसे बड़े और अंतर्राष्‍ट्रीय मान्‍यता प्राप्‍त कलाकार जयदेव बघेल अपने साथियों के लिए तरक्‍की का सपना देखते-देखते पिछले साल दुनिया से चले गए। उन्‍होंने अनेक देशी-विदेशी कलाकारों को आदिवासी गढ़वा कला सिखाई थीं। कोंडागांव में इसका स्‍कूल भी शुरू किया था पर अपने आखिरी दिनों में वह इसके अकादमिक और व्यावसायिक पहलू पर बड़े चिंतित थे। उनकी राय में आदिवासियों में इन कलाओं के प्रति जागरूकता के लिए कोई ऐसा फार्मूला जरूरी है कि वह इनकी अहमियत समझे और उन्‍हें पूरा मुनाफा भी मिले।  (लेखिका वरिष्‍ठ पत्रकार हैं)

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श्री राधा कृष्ण के स्वरूपों के साथ रंगीली फूलों की होली खेलते हुए डीएम राजेश कुमार, एडीएम धीरेन्द्र सचान, सपा जिलाध्यक्ष गुरूदेव शर्मा, पत्रकार सन्तोष चतुर्वेदी एवं अन्य वहीं होली के दौरान अनोखी झांकी में कलाकार     दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ करते अतिथिगण एवं संयोजक  बालकृष्ण के स्वरूप गोविन्द तिवारी अतिथियों के साथ फूलों की होली खेलते हुए     लठामार रंगीली फूलों की होली में मस्त हो नाचे नेता, अधिकारी और पत्रकार बन्धु जिलाधिकारी राजेश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया कार्यक्रम का शुभारम्भ मथुरा। बसन्ती छटाओं के साथ ब्रज में आरम्भ हुआ होली का हुड़दंग जहां सम्वतसर को समाप्त हो गया। वहीं ब्रज की इस अनूठी होली के अन्तिम दौर में विगत गुरूवार को मथुरा के एक होटल में उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के पत्रकारों ने भी शासन प्रशासन के आलाफसरों और राजनैतिक व सामाजिक हस्तियों के साथ भगवान श्री राधा कृष्ण के स्वरूपों के साथ रंगीली फूलों की होली का आनन्द उठाया। कार्यक्रम के संयोजक संगठन के मण्डल अध्यक्ष सन्तोष चतुर्वेदी की अध्यक्षता एवं जिलाधिकारी राजेश कुमार के मुख्यातिथिता में आयोजित चकाचक मस्ती का ये दौर देर रात तक चला। उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन मथुरा के तत्वाधान में आयोजित होली मिलन समारोह और रंगारंग भजन संध्या की पावन बेला का शुभारम्भ मुख्यातिथि जिलाधिकारी राजेश कुमार एवं विशेष अतिथिगण अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व धीरेन्द्र सिंह सचान, अपर पुलिस अधीक्षक सुरक्षा हृदयेश कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक यातायात आशुतोष द्विवेदी, उप जिलाधिकारी सतेन्द्र सिंह, क्षेत्राधिकारी नगर चक्रपाणि त्रिपाठी, नगर पालिकाध्यक्षा मनीषा गुप्ता, कांग्रेस जिलाध्यक्ष आबिद हुसैन, कांग्रेस महामंत्री पूरन कौशिक, सपा जिलाध्यक्ष गुरूदेव शर्मा, सपा नेता ठा0 मुकेश सिकरवार, सपा नेता सौरभ चैधरी, सपा नेता दौलतराम चतुर्वेदी, ग्रुप कैप्टन विजय कृष्ण दत्ता एवं संयोजक सन्तोष चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में गिरिराज धाम के श्री गिरिराज सांस्कृतिक कला केन्द्र के कलाकारों ने मुरारी लाल तिवारी के निर्देशन में भगवान श्री राधा कृष्ण के स्वरूपों में अनूठे और अलौकिक नृत्य और भजन की प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। कृष्ण स्वरूप में बाल कलाकार गोविन्द तिवारी ने अपने साथियों के साथ भगवान कृष्ण की महारास लीला का जीवन्त प्रदर्शन कर, मयूर नृत्य की अनोखी मुद्राओं और रंगीली फूलों की लठामार होली के साथ आगन्तुकों को भी झूमने पर मजबूर कर दिया। अतिथियों ने कार्यक्रम और कलाकारों की भूरि भूरि प्रशंसा की और डीएम राजेश कुमार ने कलाकारों के अदभुत प्रदर्शन से प्रभावित होकर निर्देशक मुरारी लाल तिवारी को नकद पुरूष्कार का लिफाफा सौंपा। इस मौके पर डीएम राजेश कुमार को सन्तोष चतुर्वेदी और मदन गोपाल शर्मा द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। वहीं आगन्तुक विशिष्ट अतिथियों को पत्रकार विनोद चैधरी एवं अन्य पत्रकार बन्धुओं ने इस पावन बेला की स्मृति स्वरूप प्रतीक चिन्ह गणेश प्रतिमा प्रदान की। कार्यक्रम का सफल संचालन हिन्दुस्तान एक्सप्रेस के ब्यूरो चीफ श्याम जोशी ने किया। इस मौके पर सपा के नगर अध्यक्ष डा0 अशोक अग्रवाल, मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण के सचिव एस0बी0 सिंह, अमित भारद्वाज, रहीश कुरैशी, मदन सारस्वत, मनोज चैधरी, राम कुमार रौतेला, प्रवेश चतुर्वेदी, दिनेश आचार्य,  केके गर्ग, कपिल शर्मा, दिनेश पंकज, रिजवान, धर्मेन्द चतुर्वेदी, गिरिधारी लाल श्रोतिय, महेश चैधरी, पंकज शर्मा, प्रभात मिश्रा, मधुसूधन शर्मा, खेम चन्द्र पटेल, बांकेलाल सारस्वत, महेश मीणा, अनूप शर्मा, दिनेश शर्मा, वीरेन्द्र सिंह छौकर, मदन गोपाल शर्मा, अमित भार्गव, मुकेश कुशवाह, मुकुल गौतम, सुरेश सैनी आदि सैंकड़ों पत्रकार बन्धु व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।  

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गोवर्धन। सावधान हो जाइये किसी अज्ञात व्यक्ति के फोन आने पर उसे अपना एकाउंट नंबर भूल कर भी न बतायें। जी हां हम आपको इस लिए सचेत कर रहे है कि सर्वर क्राइम के जरिये ठगो ने एक रिटायर फौजी को अपना निशाना बना कर एकाउंट से पचास हजार रुपये निकाल कर हाथ साफ किये है। ये मामला है गोवर्धन  कस्बा स्थित स्टेट बैंक की शाखा पर लगी एटीएम मशीन का जहाँ ठगों ने साइबर का सहारा लेकर दिया है रिटायर फौजी को धोखा। ठगी का शिकार ये आदमी राम बाबू है। जो कि थाना मगोर्रा के गांव नगला शेरा सवला का रहने वाला है और कुछ माह पूर्व ही बीएसएफ से हैड कास्टेबिल के पद से रिटायर होकर गांव आया था। लेकिन भोले भाले रामबाबू को क्या पता कि अपनी मेहनत की जमा पूंजी से वो हाथ धोने वाला है। इस ठगी के शिकार रामबाबू के अनुसार बढ़ती साइबर क्राइम से लोगो में दहशद का माहौल है आखिर ये साइबर क्रमिनल पुलिस की पहुंच से दूर क्यों है। साइबर क्रमिनल आये दिन लोगो को अपना शिकार बना कर लोगो की मेहनत की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर जाते है। अब देखना होगा कि रामबाबू के साथ सर्वर द्वारा ठगी करने वाले ठग पुलिस की गिरफ्त में आते है कि नहीं या और मामलों की तरह ये मामला भी ठन्डे बस्ते में चला जायेगा।

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