मथुरा

सादर प्रकाशनार्थ अलीगढ़ 01 फरवरी। नुमाईश के कृष्णांजलि मंच पर पहली बार लगातार 6 घंटों तक चले गृहलक्ष्मी उत्सव कार्यक्रम में महिलाओं का जज्बा देखने लायक था। जिसमें गृहलक्ष्मी अवाॅर्ड सेरेमनी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच महिलाओं ने डांस, सिंगिंग, कुकिंग, स्पीच, हेयर व नेल आर्ट तथा फैंसी डैªस प्रतियोगिताओं मंे प्रतिभाग कर जमकर धमाल मचाया। महिला उत्साहबर्धन, सशक्तिकरण, सामाजिक सरोकार व उनकी अंतर्निहित प्रतिभाओं को निखारने के लिए आयोजित हुए पांचवे गृहलक्ष्मी उत्सव का दीप प्रज्जवलन कर उद्घाटन एडीएम सिटी की धर्मपत्नी कंचन मिश्रा तथा एडीएम वित्त की धर्मपत्नी पूजा सिंह ने संयुक्त रूप से किया। जबकि समारोह की अध्यक्षता महापौर शकुंतला भारती ने की। कार्यक्रम की संयोजक व इनरव्हील क्लब झलक की अध्यक्ष काजल धीरज ने जहां गृह लक्ष्मी उत्सव व गृहलक्ष्मी अवाॅर्ड 2015 के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। वहीं उनकी टीम ने अतिथियों का स्वागत किया।   इस बार गृहलक्ष्मी उत्सव 2015 में शिक्षा के क्षेत्र में डा. चरनजीत कौर पाबला (पत्नी वीसी, मंगलायतन विवि), चिकित्सा के क्षेत्र मंे डा. शन्नो रानी (वैकल्पिक नेत्र निर्माता), साहित्य के क्षेत्र डा. पुष्पा शर्मा, कला के क्षेत्र में डा. चित्रलेखा सिंह (अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति लब्ध चित्रकार, आगरा), समाजसेवा के क्षेत्र में (मलिन बस्तियों में शिक्षा) मारिया आलम उमर तथा विज्ञान के क्षेत्र में (नेशनल साइंस काॅन्फ्रेंस) प्रेरणा पाण्डेय को गृहलक्ष्मी अवाॅर्ड 2015 प्रदान किये गये। राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाले 75 बच्चों ने जहां अपनी रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। वहीं महिलाओं की आयोजित हुई डांस प्रतियोगिता में विनर बुलबुल वाष्र्णेय तथा रनर सीमा शर्मा व प्रतिभा जोयल रहीं। सिंगिंग प्रतियोगिता में विनर इति वाष्र्णेय व रनर पूजा सिंह रहीं। कुकिंग प्रतियोगिता में विनर वंदना अग्रवाल व रनर खुशबू वाष्र्णेय रहीं। नेल आर्ट प्रतियोगिता में विनर रिया अग्रवाल व रनर सपना गुप्ता रहीं। हेयर स्टायल प्रतियोगिता में विनर शबनम आजम व रनर सत्या चैधरी रहीं। फैंसी डेªस प्रतियोगिता में विनर प्रीति गुप्ता व रनर संगीता चैधरी रहीं। जबकि भाषण प्रतियोगिता में रश्मी तिवारी ने बाजी मारी (आॅल ओवर विनर रहीं)। गृह लक्ष्मी उत्सव में विशेष सहभागिता बीएमबी मसाले की डायरेक्टर मीलेश वाष्र्णेय, रीता गुप्ता, डेन वरूण चैनल की डायरेक्टर शालिनी देवी, माँ पीताम्बरा ज्योतिष संस्थान आदि की रही। प्रतियोगिताओं में निर्णायक मंडल में डांस व सिंगिंग की जज मीनाक्षी नागपाल, आरती मित्तल व डीआईडी सुपर माॅम प्रतिभागी आशा आनंद रहीं। फैंसी ड्रैस की जज पूनम सारस्वत व मनीषा गर्ग रहीं। कुकिंग विद आउट फायर की जज पूनम सरकोंड़ा, मालू अरोरा व रिम्पी आहूजा रहीं। नेल आर्ट व हेयर स्टायल प्रतियोगिता की जज स्वीटी चानना, नीलम खंडेलवाल व नीलू राॅय रहीं तथा भाषण प्रतियोगिता की जज चारू चैहान व रूचि गोटेवाल रहीं। कार्यक्रम का संचालन कु. रेनू शर्मा ने किया। जबकि विशेष सहयोग रश्मि आनंद, सारिका सक्सैना, शारदा गुप्ता, श्रुति गुप्ता, रूचि,रहा। आभार सहित भवदीय श्रीमती काजल धीरज संयोजक गृहलक्ष्मी उत्सव 2015 मो. 9837605388

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रक्षा क्षेत्र में विदेशों पर निर्भरता कम करना और आत्‍मनिर्भरता प्राप्‍त करना सामरिक और आर्थिक दोनों कारणों से आज यह एक विकल्‍प के बजाय एक आवश्‍यकता है।  सरकार ने अतीत में हमारे सशस्‍त्र बलों की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए आयुद्ध निर्माणियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के रूप में उत्‍पादन क्षमताओं का निर्माण किया। हालांकि, विभिन्‍न रक्षा उपक्रमों के उत्‍पादन की क्षमताओं को विकसित करने के लिए भारत में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाने पर जोर देने की आवश्‍यकता है।  हमारे प्रधानमंत्री ने देश में विभिन्‍न वस्‍तुओं के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 'मेक इन इंडिया' जैसी एक महत्‍वपूर्ण पहल की है। अन्‍य वस्‍तुओं की अपेक्षा रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्‍पादन की अधिक जरूरत है, क्‍योंकि इनसे न केवल बहुमूल्‍य विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्‍कि राष्‍ट्रीय सुरक्षा चिन्‍ताओं को भी दूर किया जा सकेगा। रक्षा क्षेत्र में सरकार ही एक मात्र उपभोक्‍ता है। अत: 'मेक इन इंडिया' हमारी खरीद नीति द्वारा संचालित होगी। सरकार की घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की नीति, रक्षा खरीद नीति में अच्‍छी तरह परिलक्षित होती है। जहां 'बाई इंडियन' तथा 'बाई एंड मेक इंडियन' श्रेणियों का बाई ग्‍लोबल से पहले स्‍थान आता है। आने वाले समय में आयात दुर्लभ से दुर्लभतम होता जाएगा और जरूरी व्‍यवस्‍था के निर्माण और विकास के लिए सर्वप्रथम अवसर भारतीय उद्योग को प्राप्‍त होगा। भले ही भारतीय कंपनियों की वर्तमान में प्रौद्योगिकी के मामले में पर्याप्‍त क्षमता न हो, उन्‍हें विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्‍त उद्यम, प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण की व्‍यवस्था और गठबंधन के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है। यदि हम नई सरकार के सत्‍ता में आने के बाद, पिछले कुछ महीनों में, रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) द्वारा स्‍वीकृत जरूरत की स्‍वीकृति (एओएन) की प्रोफाइल पर नजर डालें तो 'बाई इंडियन' तथा 'बाई एंड मेक इंडियन' श्रेणियों के तहत 65 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा के प्रस्‍ताव आए हैं। भविष्‍य में घरेलू उद्योगों से रक्षा खरीद प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। खरीद प्रक्रिया को अधिक कुशल, समयबद्ध और उम्‍मीद के मुताबिक बनाया जाएगा ताकि उद्योग, हमारे सशस्‍त्र बलों की आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए अग्रिम में अनुसंधान एवं विकास तथा निवेश योजना बना सकें। अब तक रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योग के प्रवेश के लिए लाइसेंस और प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश प्रतिबंध आदि को लेकर कई बाधाएं थी। पिछले छह महीनों में सरकार ने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई नीतियों को उदार बनाया है। सबसे महत्‍वपूर्ण रक्षा क्षेत्र में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एफडीआई नीति को उदार बनाया गया है। अब सरकारी माध्‍यम से एफआईपीबी की मंजूरी के साथ 49 प्रतिशत प्रत्‍यक्ष विदेश निवेश को मंजूरी दी गई है। जहां कहीं भी आधुनिक और नवीनतम प्रौद्योगिकी मिलती है वहां सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति की मंजूरी के साथ मामले दर मामले में 49 प्रतिशत प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश को भी मंजूरी दी गई है। रक्षा खरीद नीति में पहले से मौजूद विदेशी संस्‍थागत निवेश और बहुमत हिस्‍सेदारी वाली 'एकल भारतीय शेयर धारक' संबंधी प्रतिबंध भी हटा लिए गए हैं।  हालांकि, आईडीआर कानून के तहत औद्योगिक लाइसेंस प्राप्‍त करने के बाद वर्ष 2001 से निजी क्षेत्र के उद्योग को रक्षा उत्‍पादन के क्षेत्र में अनुमति दी गई थी लेकिन औद्योगिक लाइसेंस प्राप्‍त करना एक बहुत जटिल प्रक्रिया थी जो कि उप-असेंबली, उप-प्रणाली, घटक और हिस्‍से-पुर्जें बनाने वाले व्‍यावसायियों के लिए, खासकर लघु और मध्‍यम उद्योगों के लिए, एक प्रमुख अड़चन थी। सरकार ने लाइसेंस नीति को उदार बनाया है और अब घटकों, हिस्‍से-पुर्जों, कच्‍चा माल, परीक्षण उपकरण, उत्‍पादन मशीनरी, कास्‍टिंग तथा फोर्जिंग आदि को लाइसेंस के दायरे से बाहर रखा गया है। जो कंपनियां इस तरह की वस्‍तुओं का उत्‍पादन करना चाहती है अब उन्‍हें लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी और न ही उनपर 49 प्रतिशत एफडीआई की सीमा का प्रतिबंध होगा। विभिन्‍न श्रेणी के उद्योगों के पालन के लिए एक व्‍यापक सुरक्षा मैन्‍युअल तैयार किया गया है ताकि कंपनियों की इस तक आसान पहुंच हो और तदनुसार इसका पालन किया जा सके। औद्योगिक लाइसेंस की प्रारंभिक वैधता दो से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी गई है। पहली बार, एक रक्षा निर्यात नीति तैयार की गई है, जिसे सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है। इस नीति में रक्षा उत्‍पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जाने वाले विशिष्‍ट उपायों की रूपरेखा दी गई। इस नीति में घरेलू उद्योग को दीर्घकाल में अधिक टिकाऊ बनाने का उद्देश्‍य निहित है क्‍योंकि यह उद्योग विशुद्ध रूप से घरेलू मांग पर निर्भर नहीं रह सकता है। सैन्‍य भंडार के निर्यात के लिए अनापत्‍ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंतिम रूप दिया गया है और इसे भी सार्वजनिक डोमेन में डाल दिया गया है। सरकारी अधिकारियों द्वारा अधिकांश रक्षा उत्‍पादों, विशेष रूप से हिस्‍से-पुर्जों, घटकों, उप-प्रणालियों और उप-एसेंबलियों पर अंतिम उपयोगकर्ता प्रमाण पत्र (ईयूसी) के हस्‍ताक्षर और मुहर लगाने की आवश्‍यकता की बाध्‍यता समाप्‍त कर दी गई है। इससे काफी हद तक घरेलू उद्योग द्वारा निर्यात में आसानी होगी। सैन्‍य भंडार निर्यात के लिए अनापत्‍ति प्रमाण पत्र के आवेदन प्राप्‍त करने हेतु वेब आधारित एक ऑनलाइन व्‍यवस्‍था विकसित की गई है और उसे लागू किया गया है। रक्षा क्षेत्र में घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर उपलब्‍ध है। हमारा देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़े सैन्‍य बल वाला देश है जिसके लिए वार्षिक बजट में करीब 38 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रावधान है, जिसका 40 प्रतिशत पूंजी अधिग्रहण के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है। अगले 7-8 वर्षों में हम, 'मेक इन इंडिया' की वर्तमान नीति के तहत अपने सैन्‍य बलों के आधुनिकीकरण के लिए 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने जा रहे हैं। अब, राष्‍ट्र के साथ-साथ व्‍यवसाय के लाभ, दोनों के लिए इस अवसर का सदुपयोग करने की जिम्‍मेदारी उद्योग पर है। इसके अलावा अगले 7-8 वर्षों में 25 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा का कारोबार होना है। एक तरफ जहां सरकार निर्यात, लाइसेंसिंग, एफडीआई सहित निवेश और खरीद के लिए नीति में जरूरी बदलाव कर रही है वहीं उद्योग को भी जरूरी निवेश और प्रौद्योगिकी के मामले में उन्‍नयन करने की चुनौती को स्‍वीकार करने के लिए सामने आना चाहिए। रक्षा एक ऐसा क्षेत्र है जो नवाचार से संचालित होता है और जिसमें भारी निवेश और प्रौद्योगिकी की आवश्‍यकता है। लिहाजा उद्योग को भी अस्‍थायी लाभ के बजाय लंबी अवधि के लिए सोचने की मानसिकता बनानी होगी। हमें अनुसंधान विकास तथा नवीनतम विनिर्माण क्षमताओं पर ज्‍यादा ध्‍यान देना होगा। सरकार, घरेलू उद्योग हेतु एक ऐसी पारिस्‍थितिकी प्रणाली विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे वह सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में बराबर के स्‍तर पर व्‍यावसायिक उन्‍नति कर सके।

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उत्तरप्रदेश के राज्यपाल से मिला यमुना मुक्तिकरण अभियान का शिष्टमंडल, राज्यपाल ने कहा कि यमुना जी के प्रति मेरी भी आस्था हैं  यमुना मुक्तिकरण अभियान  के पांच सदस्यीय शिष्टमंडल द्वारा उत्तरप्रदेश के राज्यपाल महामहिम श्री राम नायिक जी से मुलाकात की गई । 2 फरवरी दिन सोमवार को मथुरा के वेटनरी काॅलेज में यमुना मुक्तिकरण अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकान्त शास्त्री के नेतृत्व में महामहिम राज्यपाल महोदय से मुलाकात कर यमुना की स्थिति से अवगत कराया। अभियान के संयोजक राधकान्त शास्त्री व सहसंयोजक सुनील सिंह जी द्वारा राज्यपाल महोदय को यमुना की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि जहाॅ यमुना को देवी समझ उसे पूजा जाता है उसके जल से स्नान और आचमन किया जाता है उसी ब्रज में यमुना तल पर केवल दिल्ली और उससे आगे पड़ने वाले गन्दे नालों का जहरीला जल बहकर आ रहा है। यमुनोत्री से निकले शुद्ध जल को मध्य में ही बांध बनाकर रोक लिया गया है और उसकी धारा को बहाॅ से अन्यत्र मोड़ दिया गया है। आज वैष्णवों और और कृष्ण भक्तोे के लिये सर्वाधिक महत्व रखने वाली यमुना महारानी ब्रज मेे नहीं इससे धर्म और आस्था को ही नहीं अपितु यमुना किनारे बसने वाले करोड़ो लोगो और जीवों के जीवन खतरे में  है। उन्होने आगे कहा कि इस बार श्रीमान मन्दिर, श्री पुष्टिमार्ग और भारतीय किसान यूनियन ( भानू ) के संयुक्त तत्वाधान में 15 मार्च को कोसी से दिल्ली तक हजारों लाखों यमुना भक्तों की निर्णायक पदयात्रा निकाली जा रही है जिनका केवल एक ही लक्ष्य होगा केवल यमुना मुक्ति । उत्तरप्रदेश के राज्यपाल महामहिम राज्यपाल महोदय ने यमुना की स्थिति पर दुःख व्यक्त करते हुये कहा कि मेरी भी आस्था यमुना के प्रति है और यमुना की ऐसी स्थ्तिि होना किसी भी स्थिति में ठीक नहीं है। मैं स्वयं प्रधानमंत्री जी को स्वयं की टीप्पणी के साथ पत्र लिखूॅगा और उसकी काॅपी आपके पास भी भेजूॅगा। आप लोगो के लिये जो यमुना नदी की स्वच्छ बनाने के लिये प्रयास किये जा रहे वह सराहनीय है। मुझसे जो भी बनेगा मैं वह हर संभव प्रयास यमुना के लिये करूॅगा।  इस अवसर पर यमुना मुक्तिकरण अभियान के राष्ट्रीय महासचिव हरेश ठेनुआ एवं प्रदेश संयोजक श्याम चतुर्वेदी ने भी यमुना मुक्ति को लेकर अपने विचार राज्यपाल महोदय के सन्मुख रखे।  राज्यपाल महोदय है अभियान के शिष्टमंडल की सभी बातों को समझ यमुना मुक्ति के लिये हर सम्भव सहयोग का आश्वासन दिया।  अभियान के शिष्टमंडल में अभियान राष्ट्रीय संयोजक राधाकान्त शास्त्री, सहसंयोजक सुनील सिंह, राष्ट्रीय महासचिव हरेश ठेनुआ, प्रदेश संयोजक श्याम चतुर्वेदी, जिलाकार्यकारी अध्यक्ष पंकज चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे।  राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा ने दिया यमुना मुक्तिकरण अभियान को समर्थन  गोवर्धन में गुर्जर धर्मशाला में राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा की राष्ट्रीय बैठक में गुर्जर भाइयों द्वारा अपनी संस्था की ओर से यमुना मुक्तिकरण अभियान को समर्थन देते हुये 15 मार्च की पदयात्रा में हजारों की संख्या में भाग लेने का आश्वासन दिया। गुर्जर धर्मशाला में आयोजित गुर्जर महासभा की बैठक में भारी संख्या में गुर्जर भाइयों ने भाग लिया और यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा में हजारों की संख्या में चलने की बात कही। इस बैठक में भाग लेने यमुना मुक्तिकरण अभियान के राष्ट्रीय संस्कृति मंत्री श्री रमेश कृष्ण शास्त्री जी बैठक में पहुॅचे। उन्होने यमुना के महात्म से सभी गुर्जर भाइयों को अवगत कराते हुये यमुना की वर्तमान स्थिति भी बताई और यमुना को अविरल निर्मल बनाने के लिये इस अभियान में 15 मार्च को कोसी से दिल्ली तक की पदयात्रा में भाग लेने का आवह्न किया। राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायण सिंह पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष मुक्खी सिह गुर्जर, राष्ट्रीय महासचिव सत्यवीर सिंह गुर्जर ने कहा कि पूज्य संत रमेश बाबा महाराज के निर्देशन में यमुना मुक्ति के लिये चलाये जा रहे यमुना मुक्तिकरण अभियान में हम सभी गुर्जर भाइयों का पूर्ण समर्थन है। कोसी से दिल्ली तक के हाइवे के निकट पड़ने वाले सभी गुर्जर बाहुल्य गांवो के हजारों गुर्जर भाई यमुना बचाने के लिये बाबा महाराज के आदेशानुसार पदयात्रा में भाग लेगें इसके अलावा देश के विभिन्न इलाकों के भी हजारों गुर्जर भाई पदयात्रा में भाग लेने 14 मार्च को ही कोसी पहुॅच जायेगंे।  राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामवीर सिंह गुर्जर,  जिलाअध्यक्ष मान सिंह  ने कहा कि यमुना के लिये हमारी अगाध आस्था है और आज उसकी यह स्थिति हमसे नहीं देखी जाती है। यमुना की वर्तमान स्थिति के कारण आस्था के साथ किसानों की कृषि , और स्वास्थ दोनो को बहुत हानि पहुॅच रही है । इसलिये हम यमुना मुक्तिकरण के साथ हजारों की संख्या में पदयात्रा में सम्मिलित होगें।  इस अवसर पर राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा के मध्यप्रदेश अध्यक्ष रणवीर सिंह, हरचरन सिंह, भगवान सिह, पोपिन गुर्जर, कुलदीप गुर्जर, हरेन्द्र गुर्जर, आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।    भारतीय किसान यूनियन (भानू) के 2 फरवरी के भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन की प्रेस रिलीज भूमिअधिग्रहण बिल को लेकर भाकियू ( भानू )  के सैकड़ो किसानों ने किया कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन  केन्द्र सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण बिल में किये संसोधन का देश भर के किसानों द्वारा विरोध किया जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन ( भानू ) भूमि अधिग्रहण बिल में किये संसोधन के विरोध में व यमुना मुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी द्वारा  उत्तरप्रदेश के सभी 76 जिलों में 2 फरवरी को भाकियू भानू के सभी जिलाध्यक्षों द्वारा एक साथ राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस क्रम में मथुरा जिले में भारतीय किसान यूनियन भानू द्वारा भारतीय किसान यूनियन भानू के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रतन सिंह पहलवान के नेतृत्व में भूमि अधिग्रहण बिल में विरोध में राष्ट्रपति  और यमुना मुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। 2 फरवरी सोमवार को दोपहर 12 बजे भाकियू भानू के सैकड़ो कार्यकर्ता एस.एस.पी आवास के सामने इकठ्ठे हुये हुये और प्रदर्शन किया। उपस्थित सभी किसानों को सम्बोधित करते हुये भाकियू भानू के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रतन सिंह पहलवान व राष्ट्रीय महासचिव सुनील सिंह ने कहा कि सरकार किसानों के अधिकारों का हनन कर रही है। जमीन किसान की माॅ है जिसकी वह जिन्दगी भर सेवा करता है और उसी माॅ स्वरूप जमीन को उसकी बिना मर्जी के छीन लिया जाये यह अन्याय देश का किसान कभी नहीं सह सकता है। अगर इसे वापस नहीं लिया गया तो सरकार को किसानों के देश व्यापी आन्दोलन का सामना करना पड़ेगा।  भाकियू भानू के प्रदेश मुख्य महासचिव हरेश ठेनुआ, मण्डल महासचिव रमेश सिकरवार, मण्डल महासचिव  हरपाल सिंह ने कहा कि हम किसानों के अधिकारों का हनन नहीं होने देगें। सरकार द्वारा इस संसोधन का वापस लेना चाहिये। यदि ऐसा नहीं हुआ तो किसान आन्दोलन के लिये मजबूर हो जायेगा। इसके साथ ही किसान नेताओं ने यमुना मुक्ति की आवाज को भी बुलन्द करते हुये कहा कि हमें ब्रज में निर्मल यमुना जल चाहिये इसके लिये सरकार को ब्रजवासियों और यमुना भक्तों की भावनाओं का खयाल रखते हुये यमुना को मुक्त कर उसकी अविरलता बनानी चाहिये।  जिला प्रभारी रोहतान सिंह जिलाध्यक्ष रीतराम सिंह, जिलामहासचिव बलवीर सिंह हवलदार मथुरा नगर अध्यक्ष महेन्द्र राजपूत ने कहा कि नया भूमि अधिग्रहण बिल किसानों के खिलाफ है इसमें किसानों का हित नहीं है। यदि किसान की जमीन उसकी बिना मर्जी के छीन ली जायेगी और वह कुछ नहीं कर सकेगा यह देश के किसान को और वेवश बनायेगा। वैसे भी देश के किसानों की हालत दयनिय है यह कानून देश के किसानों को और मजबूर बनायेगा। इसके साथ ही सभी भाकियू भानू कार्यकर्ताओं द्वारा यमुना को मुक्त कर अविरल  प्रवाह के लिये संघर्ष करने की कटिवद्धता को दोहराते हुये कहा कि सरकार को यमुना को मुक्त करनी चाहियें।  इस अवसपर  जिलासचिव इन्द्रजीत सिंह, जिलाउपाघ्यख रामगोपाल सिकरवार, सुरेन्द्र प्रधान ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल के वापस न होने तक भाकियू भानू चुप नहीं बैठेगी। इसके बाद भाकियू भानू के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन करते हुये पैदल मार्च करते हुये दोपहर दो बजे अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।   विरेन्द्र सिह सोलंकी, चै हरवंश, सत्यप्रकाश गर्ग, नबाब सिंह, नत्थो गोला, ठा. रूप सिंह, ओमप्रकाश चैधरी, रूपसिंह बघेल, आनन्द बल्लभ, नवल वघेल, मोहन बघेल, राधेश्याम, रामबाबू, जीतू, हरिओम, बच्चू, ओमवीर, राम, महेश ठाकुर पोदीना आदि उपस्थित रहे।   

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हिन्दुस्तान काॅलेज में परिचर्चा संगोष्ठी हिन्दुस्तान काॅलेज आॅफ साइंस एन्ड टैक्नोलोजी में आयोजित ’बिगड़ता सांस्कृतिक परिदृश्यः दोषी कौन ?’ विषयक परिचर्चा संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष और ब्रज लोक संस्कृति मर्मज्ञ मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि यह निर्विवाद रूप से सत्य है कि लोक संस्कृति की उपेक्षा से सांस्कृतिक परिदृश्य बिगड़ चुका है और बिगड़ता जा रहा है किन्तु अभी भी इसे बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक परिदृश्य हमारी संस्कृति से जुड़ा हुआ है और संस्कृति संस्कारों पर आधारित होती है। यह चिन्ता और चिन्तन का विशय है कि पाश्चात्य एवं फिल्म संस्कृति के प्रहारों से प्रभावित हो रही हमारी प्राचीन संस्कृति को किस प्रकार संरक्षित किया जाय। उन्होंने आगे कहा कि संस्कृति के मूल स्थल ग्रामीण अंचलों में ब्रजभाषा के स्थान पर अंग्रेजी मिश्रित हिन्दी, लहँगा-फरिया - ओढ़नी के स्थान पर सलवार सूट, मांगलिक संस्कारों के अवसर पर गायें जाने वाले लोकगीतों के स्थान पर फिल्मी गीत और लोकनृत्यों के स्थान पर भौंड़े नृत्यों का प्रचलन बढ़ रहा है। चैपाल पर रात-रात भर रामायण - महाभारत की कथाएँ सुनाते जिकड़ी-सम्वादी भजन, चिकाड़े पर लहराता नल-दमयन्ती का ढोला और लोकवाद्य अलगोजा की टीप अब सुनने को नहीं मिलती। गाँव के पनघट सूने हो गये हैं। लोकवाद्य बम्म और ढोलक फट जाय तो अब मढ़ नहीं पाती हैं। मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि केबड़े की महक के समान महकते संयुक्त परिवार बिखरते जा रहे हैं। हरियल बाग और अमराइयाँ नष्ट हो जाने के कारण झूलों पर मल्हारें नहीं गूँज रही हैं। करवा चैथ और अहोई का दीवालों पर महिलाएँ चित्रांकन नहीं करती हैं, उनके चित्र टँग जाते हैं। लोककला का उत्कृष्ट उदाहरण साँझी नई पीढ़ी से दूर है। बगीची - अखाड़े अतीत का अध्याय बन गये हैं। उन्होंने कहा कि बदलते सांस्कृतिक परिदृश्य के बिगड़ते स्वरूप के लिए वे दोषी हैं जिन्हांेने शिक्षा को संस्कारों से दूर कर दिया है और शासन की वे नीतियाँ दोषी हैं जो फिल्म तथा टीवी चैनल्स के अश्लील दृश्यों के प्रसारण में नियंत्रण नहीं लगा पा रही हैं। केन्द्र स्तर पर बदलाव के आसार हुए हैं परन्तु आवश्यकता है कि राजनैतिक सुधारों के साथ सांस्कृतिक उन्नयन के लिए भी प्रबुद्ध विचारक जागृत हों। संगोष्ठी में सुप्रसिद्ध कवि सोम ठाकुर ने कहा कि हम संस्कृति को बदल नहीं सकते हैं जब कि सभ्यता वेशभूषा की तरह है जिसे जब चाहे बदला जा सकता है। इस अवसर पर ब्रजभाषा के ख्याति प्राप्त कवि श्याम सुन्दर शर्मा ’अंकिचन’ ने माधुर्यमयी कविताओं द्वारा रसवृश्टि के साथ वर्तमान सामाजिक - सांस्कृतिक परिदृश्य को - ’कोई दिल से नहीं मिलता, किसी से दिल नहीं मिलता’ कविता से साकार किया। संगोष्ठी का संचालन एव ंविशय प्रर्वतन करते हुए प्रो0 सुबोध कुमार दुबे ने चार सांस्कृतिक क्रान्तियों की व्याख्या की और कहा कि इन्जीनियरिंग काॅलेज के छात्र - छात्राओं के लिए तकनीकी शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति का ज्ञानवर्धन भी आवष्यक है। संस्थान के निदेशक डा0 राजीव कुमार उपाध्याय ने संगोश्ठी में कहा कि सांस्कृतिक परिदृश्य को विकृतियों से बचाये जाने की अनिवार्य आवश्यकता है। अन्त में अधिशासी निदेशक प्रो0 वी0 के0 शर्मा, प्रो0 सुबोध कुमार दुबे तथा डा0 राजीव कुमार उपाध्याय ने मोहन स्वरूप भाटिया , सोम ठाकुर तथा श्याम सुन्दर शर्मा ’अंकिचन’ को उत्तरीय उढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया और डीन स्टुडैन्ट वेलफेयर संदीप अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर डा0 आर0 के0 तिवारी, डा0 वी0 के0 गुप्ता, डा0 पुनीत, डा0 चन्द्रनाथ त्रिपाठी सहित छात्र- छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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मथुरा। थाना वृन्दावन क्षेत्र के गाॅव राल में नामजदों ने गाॅव के ही एक युवक के साथ लाठी डन्डों से हमला कर घायल कर दिया तथा घायल होने पर जान से मारने की नीयत से हाईवें पर फैंक कर भाग गये। घटना की रिपोर्ट घायल के भाई ने नामजदों के विरूद्व रिपोर्ट दर्ज कराई हैं।  मिली जानकारी के अनुसार देवदत्त पुत्र शिवचरण निवासी राल थाना वृन्दावन ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि तुषार चैधरी पुत्र बिजेन्द्र चैधरी निवासी राधिका बिहार सौंख रोड मथुरा न उसके पुत्र चन्द्रकान्त के साथ लाठी डन्डों से मिला कर घायल कर दिया तथा मारपीट में बेहोश हो जाने पर जान से मारने की नियत से चन्द्रकान्ता को हाईवें पर फैंक कर भाग गये। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने गंभीर हालत में चन्द्रकान्त को ईलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया तथा घटना से परिजनों को अवगत कराया। सूचना पर पहुंचें परिजनों ने घटना की हमलावर युवक के विरूद्व नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई हैं।  

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मथुरा। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व धीरेन्द्र सिंह सचान की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री, शासन, राजस्व परिषद, तहसील दिवस, रिट याचिका, जनहित गारन्टी से सम्बन्धित प्रकरणों की समीक्षा बैठक कलक्ट्रेट सभाकक्ष में सम्पन्न हुई।  उन्होंने बैठक में मुख्य सचिव द्वारा दिये गये निर्देशों में बताया कि कार्यालय समय में 10 से 5 बजे तक सभी अधिकारी व कर्मचारी अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहकर शासन की प्राथमिकताओं में शामिल कार्यों तथा जन समस्याओं से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करें ताकि आमजन इधर उधर न भटके। अपर जिलाधिकारी ने तहसील दिवसों में प्राप्त आवेदनों व लंबित आवेदनों की समीक्षा के दौरान अनुपस्थित रहने वाले विभागीय अधिकारियों के प्रति कड़ा रूख अपनाते हुए जिला पूर्ति अधिकारी से अनुपस्थित रहने पर तीन दिन के अन्दर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। समीक्षा बैठक में प्राप्त लम्बित आवेदनों पर कड़ा रूख अपनाते हुए उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों तथा विभागीय अधिकारियों से कहा कि समय सीमा के अन्दर सही कार्यवाही करते हुए उनका निस्तारण करके अवगत करायें अन्यथा की स्थिति में उनके विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों से कहा कि आपसी तालमेल रखकर कार्य करें जिसमें अधिक सफलता मिलेगी। उनहोंने यह भी कहा कि शीतकालीन भ्रमण करके ब्लाॅक, थाने तथा सभी सम्बन्धित पटलों का निरीक्षण करें। अवैध शराब तथा भूमि विवाद के मामलों पर सतर्क निगाह रखें तथा शीघ्र कार्यवाही करें। समाजवादी पेंशन तथा अन्य सभी प्रकार की पेंशनों का भी शीघ्र वितरण करायें एवं मा0 न्यायालयों के प्रकरणों में समय से प्रति शपथ पत्र दाखिल करें ताकि अनावश्यक विलंब या परेशानी से बचा जा सके। इस अवसर पर सभी विभागीय अधिकारी आदि उपस्थित थे।

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