मथुरा

नई दिल्ली । नोटबंदी पर विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव मनाने के लिए सोमवार को भारत बंद करने की तैयारी कर रहा है। इस मामले में अब तक संसद से लेकर सडक़ तक मोदी सरकार को घेरने वाली कांग्रेस, ममता बनर्जी और मायावती जैसे नेता एकजुट होकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इस बीच विपक्ष की एकजुटता को पहला झटका बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से लगा है जिनकी पार्टी जेडीयू ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ देने का फैसला किया है। खुद नीतीश नोटबंदी के फैसले की जमकर तारीफ कर रहे है। नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्षी दलों के हंगामे की वजह से पूरे हफ्ते संसद में कार्रवाही नहीं हो सकी। अब सोमवार को विपक्ष आक्रोश दिवस मनाएगा, वहीं राज्यों में धरना प्रदर्शन किया जाएगा। हालांकि इस मामले में सरकार पर सीधा हमला करने वाली ममता बैनर्जी खुद अपने राज्य में इसी मुद्दे पर लेफ्ट पार्टियों की हड़ताल को गलत बता रही हैं। वहीं मायावती ने लगातार तीखे तेवर अपना रखे हैं। मायावती की तरह यूपी के सीएम अखिलेश यादव भी नोटबंदी के फैसले पर सवाल उठाते रहे हैं पर उन्हीं की पार्टी के नेता अमर सिंह अब नोटबंदी साहसी फैसला बताते हुए पीएम मोदी की तारीफ कर रहे हैं। अमर सिंह ने कहा, एक देशवासी के तौर पर उन्हें ऐसे प्रधानमंत्री पर गर्व है, जो भ्रष्टाचार को जड़ से उखाडऩे के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस बीच विपक्ष के विरोध की हवा निकालने की भी तैयारियां चल रही हैं। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भारत बंद के विरोध में एक बड़ी जनसमर्थन यात्रा निकाली गई।   साभार-khaskhabar.com  

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कुशीनगर । भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के कमर कस ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में रैली को संबोधित किया। नोटबंदी के बाद मोदी की पूर्वांचल में दूसरी परिवर्तन रैली है। इससे पहले गाजीपुर में पीएम मोदी रैली कर चुके हैं। इस मौके पर पीएम ने कहा कि यूपी में परिवर्तन का समय अब आ गया है। यूपी के लोग बदलाव की तैयारी करें।   कुशीनगर की सियासत धारा के विपरीत चलती रही है। आजादी के बाद पहले आम चुनाव में ही यहां के लोगों ने कांग्रेस की राह छोडक़र सोशलिस्ट पार्टी का परचम लहराया था। यहीं के रामकोला गन्ना किसान आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में मुलायम सिंह यादव की भी ताकत बढ़ी। बदलाव का तेवर यहां की फितरत में है, 2014 में पूरे प्रदेश की तरह कुशीनगर ने भी कमल खिलाने में कोई कोताही नहीं की। अब मोदी के जरिये भाजपा यहां मिशन 2017 फतह करने में जुटी है।   बाढ़ का प्रकोप और गरीबी झेल रहे कुशीनगर में गन्ने की खेती पहले ही दम तोड़ चुकी है। इंसेफलाइटिस की मार से यहां का बचपन पिछले तीन दशकों से कराह रहा है। पीएम की परिवर्तन रैली के लिए जबर्दस्त तैयारियां की गई है। कुशीनगर जनपद के कसया एअरपोर्ट पर रैली स्थल की साज-सज्जा के साथ लगे डॉ. भीमराव अंबेडकर और सरदार वल्लभभाई पटेल के पोस्टर कुछ राजनीतिक संदेश भी दे रहे हैं।    साभार-khaskhabar.com  

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अबकी बार छाता विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी को जितायेंगी जनताः लक्ष्मीनारायण  भाजपा की परिवर्तन यात्रा का जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत मथुरा। भाजपा की परिवर्तन यात्रा शुक्रवार को मथुरा आयी। जनपद की सीमा फरह के रैपुराजाट पर कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत किया गया। कार्यकताओं ने यात्रा में चल रहे भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा, केन्द्रीय मंत्री संजीव बलियान और विधायक दल के नेता सुरेश खन्ना को फूल मालाओं से लाद दिया। यात्रा का गोवर्धन चैराहा, सतोहा, खामिनी, राधाकुण्ड, छटीकरा एवं राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई जगह स्वागत किया गया। इसके उपरांत छाता में एक विशाल जनसभा आयोजित हुई। सभा में परिर्वतन यात्रा में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता श्रीकान्त शर्मा ने कहा कि मै किसानों की समस्यों का भली भाॅति जानता हूॅ। मै किसान का वेटा हूॅ और ब्रज क्षेत्र से हूॅ। इसलिए ब्रज के साथ साथ उत्तरप्रदेश का विकास चाहता हूॅ। जिस प्रकार से विपक्ष संसद में बैठकर चोरो की तरह शोर मचा रहा है और मोतो पर राजनीति कर रहा है।  नरेन्द्र मोदी ने उरी हमले के बाद पाकिस्तान को  मुॅह तोड जबाब मोदी सरकार ने दिया। और जनता तमाम तकलीफो को सहते हुए भी सत्य के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ डटी हुई है।सपा व बसपा के शांसन काल में कमीशन खोरो को बढावा दिया गया और सपा सरकार में गुन्डा राज, अराजकता, चैथ वसूली चरम है। उत्तरप्रदेश में भाजपा के शांसन काल में बहिन वेटियाॅ सुरक्षित होगी,नौजवानों को रोजगार मिलेगा, किसानों को समय पर खाण, बीज, पानी मिलेगा। इस मौके पर पूर्व कृषि मंत्री चै लक्ष्मीनारायन ने कहा कि सभी किसान भाई पिछले 6 घन्टे से राष्ट्रीय नेताओं को सुनने के लिए धैर्य पूर्वक बैठे है मै उन्हे धन्यवाद देता है और सभी से अपील करता हूॅ कि अबकी बार छाता विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी को वोट दे जिससे क्षेत्र की समस्याओं का समाधान किया जा सके। भाजपा नेता चैधरी लक्ष्मीनारायण ने सपा-कांगे्रस और अन्य दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा मुखिया मुलायम सिंह ने पीएम मोदीजी से समय मांगा था कि 10 दिन आप अपना फैसला रोक दो, जिसमें जनता की समस्या का समाधान हो जाए, लेकिन मोदीजी ने कहा कि इन दस दिनों में तो मुलायम पूरे काले धन को सफेद कर लोगे। इसी प्रकार से कांग्रेस पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेसीजन भाजपा की बढ़त को देखकर बौखला उठे है, जिसके कारण आए दिन वह प्रदर्शन करते रहते है। इतना बड़ा परिवर्तन हो रहा है, जिससे पूरे विश्व में सिर्फ मोदीजी की प्रशंसा की जा रही है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष चैधरी तेजबीर सिंह, सयोजक तरूण सेठ, पूर्व जिलाध्यक्ष डीपी गोयल, पूर्व एमएलसी लेखराज सिंह, भगवत प्रसाद रूहेला, चैधरी जगपालसिंह, युवा नेता दिगम्बर सिंह आदि ने अपने अपने विचार व्यक्त कियें। स्वागत करने वालों में जिलाध्यक्ष चै.तेजवीर सिंह, जिला प्रभारी रघुराज सिंह, नरदेव चैधरी, मनोज फौजदार, तनवीर आलम वाइस चेयरमैन, मीडिया प्रभारी प्रदीप गोस्वामी, लक्ष्मीनारायण चैधरी, अनिल चैधरी, चिंताहरण चतुर्वेदी,  विनोद अग्रवाल, भूपेन्द्र चैधरी, राजू यादव, हेमन्त गोयल, ठा.ओमप्रकाश सिंह, परशुराम शर्मा, मेघश्याम सिंह, नगेन्द्र सिकरवार, श्याम सिंह अहेरिया, राजवीर सिंह, संजय शर्मा,  राजेश पिन्टू, अजय कुमार पोइया, केएल अग्रवाल, चेतन मलिक, गम्भीर सिंह गुर्जर, कारिन्दा सिंह, लकी कमल, विजय लक्ष्मी, तरुण सेठ, हेमन्त खन्दोली, रमाकांत गोस्वामी, संजय प्रताप, योगेन्द्र शर्मा, अखिलेश मिश्रा, राजीवराज पाठक, चेतन स्वरूप पाराशर, मोहित, बाल मुकुंद शुक्ला, छोटीलाल, श्रीकांत दुवे, जयप्रकाश, मनोज चैधरी,विकास खन्ना आदि मौजूद थे।  

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मथुरा। इन्द्रा आवास कालोनी में मकान तोड़ कर गाली गलौच करने वालों के खिलाफ  पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। शिकायती पत्र देने के बाद भी पुलिस पीडित को हर बार आने की कह कर टहला देती है। पीडितों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।  मिली जानकारी के अनुसार मीरा देवी पत्नी सुभाष निवासी संग्रामपुर खैर अलीगढ़ अपने पिता की इकलौती संतान है। पिता की मौत के बाद उसने अपने घर पर कमरा बनावाया था तभी वहंा पर ताऊ के लड़के अजय, विजय, ताई रंजनी देवी और अन्य लोगों ने मारपीट कर कमरा तोड़ डाला। मीरा का आरोप है कि वह जमीन को हड़पना चाहते हैं। इस संबंध में पुलिस को शिकायती पत्र दिया लेकिन कसबा इंचार्ज हर बार समय नहीं होने का बहना देकर टहला देता हैं। कार्यवाही नहीं होने पर पीडित पक्ष ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मोहित गुप्ता से शिकायत कर कानूनी कार्रवाई कराए जाने की मांग की है। 

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राष्ट्र के प्रति था असीम प्यार और श्रद्धा महाराज श्री ने कराई अनेक मंदिरों की स्थापना मथुरा। वृक्ष कबहुं नहिं फल चखै, नदी न संचय नीर। परमारथ के कारणै, साधुन धरा शरीर।। महात्मा कबीर दास जी की उक्त पंक्तियां देश के सुविख्यात धर्माचार्य तपोमूर्ति स्वामी गीतानंद जी महाराज पर एकदम सटीक बैठतीं हैं। वृन्दावन की पावन भूमि महानत संतों के कारण सैकडों वर्षों से भटके मानव के आकर्षण का केन्द्र रही है। चैतन्य महाप्रभू से जीव गोस्वामी तक, बाबा नीम करौली से देवराह बाबा तक और स्वामी अखंडानंद महाराज, स्वामी वामदेव, श्रीपाद बाबा एवं आनंदमयी मां तक ने अपने तप से वृन्दावन की पावन भूमि को यदि धन्य किया है तो सद्गुरूचरण स्वामी गीतानंद महाराज ने अपने जीवन का लक्ष्य ही मानव कल्याण रखा था। स्वामी गीतानंद जी का सम्पूर्ण जीवन समाज के लिए समर्पित था। उनके प्रत्येक कार्य में वसुधैव कुटुम्बकम की भावना परिलक्षित होती हैं।  स्वामी जी होने को तो संत भेषधारी थे, किंतु उनकी कृपा से देश के लाखों परिवार नहाल हुए। उन्होंने वृन्दावन की पावन भूमि से गीता के संदेश से ऐसी अमृत रस की वर्षा की कि आज के प्रतियोगितापूर्ण समय में इसका रसास्वादन करने महाराजश्री के पास जो आया, उसके मन को ऐसी शांति मिली कि उसके लिए वृन्दावन का आश्रम ही तीर्थ बन गया। कहा जाता है कि संत भगवत शक्ति का ही रूप होते हैं। जैसे जल का स्वभाव हर एक को शीतलता प्रदान करना है, वैसे ही संतों का सहज स्वभाव दु:खी एवं संतृप्त जीवों पर करूणा करके उन्हें कल्याणकारी मार्ग की ओर अग्रसित करता है। महान संत गीतानंद महाराज जी ऐसी ही विशेषताओं के कारण अपने शिष्यों के लिए आराध्य बन गए। महाराज श्री १९५८ में भिक्षाटन करते हुए कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) पधारे। बताते हैं जब वे प्रवचन करते व भजन गाते थे तो पूरी कुल्लू घाटी का वातावरण आध्यात्मिक हो जाता था। पानीनत हरियाणा में सन् १९६१ में उनके सार्वजनिक जीवन की शुरूआत हुई। वहां उन्होंने परमहंस कुटिया में प्रवचनों की श्रंखला प्रारंभ की। मानवता के इस पुजारी की रसवाणी का प्रभाव १९६२ में भारत और चीन के मध्य हुए युद्ध के दौरान हमें देखने को मिला। महाराजश्री की मार्मिक अपील पर सैकड़ों महिलाओं ने शरीर पर धारण मंगलसूत्र तक उतार कर राष्ट्रीय सहायता कोष में दान कर दिये थे। इसी श्रंखला को दोहराते हुए सन् १९६५ व सन् १९७१ के युद्ध के दौरान भी महाराजश्री ने राष्ट्रीय सहायता कोष में काफी धन एकत्रित कर सरकार को भेजा था। पानीपत के रेलवे स्टेशन पर देश की सुरक्षा में जाने वाले सैनिकों को खाने के पैकेट व फल आदि का वितरण कर उन्होंने हौंसला बढ़ाया। कारगिल युद्ध के दौरान भी राष्ट्रीय सुरक्षा में ११ लाख रूपये का ड्राफ्ट तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रीय कोष के लिए दिया गया। १९९१ में उत्तर काशी में आये भूकंप के दौरान महाराज श्री ने मौन अवस्था में रहते हुए भी अपने भक्तों को तत्काल राहत सामग्री लेकर भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में जाने का आदेश दिया। उनके अनुयायी सामान से भरे दर्जनों ट्रक लेकर पहुंचे। उसके बाद महाराजश्री स्वयं भी भटवाड़ी जामक, लातूर आदि स्थानों पर शिविर लगाकर प्रभावित लोगों को सहायता बांटते गये। कुरूक्षेत्र को राजकीय मान्यता दिलाने में महाराजश्री की अहम भूमिका रही। महाराजश्री ने ही १९७६ में सर्वप्रथम ब्रह्मसरोवर के किनारे गीता जयंती के उत्सव की शुरूआत की, जोकि आज भी अनवरत रूप से जारी है। महाराजश्री के प्रयासों के फलस्वरूप ही कुछ वर्षों पूर्व हरियाणा सरकार ने गीता जयंती पर्व को राष्ट्रीय पर्व की संज्ञा प्रदान करते हुए इसे राज्य स्तर पर मनाने की घोषणा की। तभी से गीता जयंती को कुरूक्षेत्र में राज्य स्तर पर भी मनाया जाता है। सन् १९६६ में उन्होंने गौ रक्षा आन्दोलन में दो बार संतों के जत्थों का नेतृत्व करते हुए जेल यात्रा भी की। तिहाड़ जेल में उनके प्रवचनों से प्रभावित होकर तमाम कैदियों ने आपराधिक जीवन त्याग दिया। गौ रक्षा के संबंध में मुनिश्री हरमिलापी जी को साथ लेकर उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी से उनके आवास पर मंत्रणा की। वह केवल गौ रक्षा का नारा लगाने वाले ही संत नहीं थे, अपितु उन्होंने व्यवहारिक रूप से हरिद्वार, कुरूक्षेत्र, पानीपत, दिल्ली, फतेहाबाद आदि स्थानों पर स्थित आश्रमों में आदर्श गौशालाएं स्थापित कीं। महाराजश्री ने हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश,  पश्चिमी उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड में अनेक स्थानों पर गरीब व असहायों की सेवा के लिए आश्रमों की स्थापना की। १९७०-८० के मध्य हिंद समाचार पत्र के संस्थापक श्री जगत नारायण जी पूज्य महाराजश्री के काफी सम्पर्क में रहे। महाराजश्री के सुझाव पर लालाजी ने हरिद्वार में वृद्धाश्रम बनाने का निश्चय किया। इससे पहले कि इस विषय में कुछ किया जाता लालाजी उग्रवादियों के हाथों शहीद हो गये। उनके सुपुत्र श्री रमेश चन्द्र जी के हाथों से महाराजश्री ने हरिद्वार के वृद्धाश्रम की २ अक्टूबर १९८२ में नींव रखवाई। आज वृद्धाश्रम में वृद्ध अपना शेष जीवन शांतिपूर्वक व्यतीत कर रहे हैं। हरिद्वार के अतिरिक्त दिल्ली, कुरूक्षेत्र, भिवानी, पानीपत में भी वृद्धाश्रम चल रहे हैं। महाराज श्री ने निर्धन असहायों के लिए राशन व्यवस्था भी प्रारंभ की। महाराजश्री ने अपने जीवन में असंख्य मंदिरों की स्थापना की। उनका मानना था कि मंदिर के माध्यम से हद्य मंदिर के पट भगवान के लिए खुल सकते हैं। इस तरह अनेकों अनुकरणीय कार्य करके महाराजश्री ब्रह्मलीन हो गये।   विराट श्रद्धांजलि सभा कल मथुरा। वृन्दावन के गांधी मार्ग स्थित श्री गीता आश्रम में उत्तराखंड की पावन महान विभूति सद्गुरूदेव श्रीस्वामी गीतानंद जी महाराज भिक्षु: संस्थापक गीता आश्रम, वृन्दावन की द्वादश पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में २७ नवम्बर को विराट श्रद्धांजलि सभा एवं भण्डारा का आयोजन किया जायेगा। इस संबंध में डा.स्वामी अवशेषानंद जी महाराज ने बताया कि इस अवसर पर सद्गुरूदेव श्रीस्वामी गीतानंद जी महाराज भिक्षु: की स्मृति में २७ नवम्बर को अपरांह २ बजे से ४:३० तक गीता आश्रम, वृन्दावन में एक विराट श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है, जिसमें सम्पूर्ण भारत के उच्चकोटि के संत महापुरूष, राजनेता, समाजसेवी एवं श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित होकर श्रद्धांजलि एवं भावांजलि अर्पित करेंगे। उन्होंने बताया कि श्रदांजलि सभा के पश्चात सायं ४:३० बजे महन्तों, महामंडलेश्वरों का विशेष भण्डारा होगा।  

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जीएलए विवि का पंचम दीक्षांत समारोह आज 1809 सफल विद्यार्थियों को प्रदान की जाएंगी उपाधियां मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय का पंचम दीक्षांत समारोह 26 नवंबर शनिवार  को आयोजित होगा। इसके लिए शुक्रवार को रिहर्सल कर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने बताया कि समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं सेना के रिटायर्ड जनरल वीके सिंह होंगे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक पदमश्री डॉ. संजय गोविंद धांडे रहेंगे। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल करेंगे। कुलसचिव ने बताया कि कार्यपरिषद की बैठक में मेडल व डिग्री हासिल करने वालों के लिए स्वीकृति की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है। स्वर्ण पदक समेत विशेष पदकों के विजेताओं की सूची को अंतिम रूप से जांचा गया है। समारोह में 11 गोल्ड और 11 सिल्वर मेडलिस्ट मेधावियों को पदक और 1809 उपाधियां प्रदान की जाएंगी, जिसमें 411 पॉलीटेक्निक छात्रों की उपाधियां होंगी। साथ ही उन्होंने बताया कि मंच पर विशिष्ट अतिथि आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक पदमश्री डॉ. संजय गोविंद धांडे को मानद उपाधि से नवाजा जायेगा। ऑडिटोरियम के मंच को फूलों से सजाया गया है। शुक्रवार को मंच पर कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चौहान, प्रतिकुलपति प्रो. आनंद मोहन अग्रवाल, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह सहित अन्य जीएलए विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने अपनी-अपनी भूमिकाओं व स्क्रिप्ट का रिहर्सल भी किया।

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दूसरों को बुराइयों से दूर रहने की सलाह देने वाले आमिर खान खुद एक लत से घिरे हुए हैं। हांलाकि आमिर इस लत से दूर रहने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन यह लत है कि उन्हें छोड़ती ही नहीँ। दरअसल आमिर को फिर से स्मोकिंग करते हुए देखा जा रहा है।   बताया जा रहा है कि आमिर जब भी किसी भी फिल्म को लेकर आते हैं, तो वे काफी नर्वस हो जाते हैं। ऐसे में वे स्मोकिंग का सहारा ले लेते हैं। इस गलत आदत फिलहाल दंगल के रिलीज के पास आने के साथ ही बढ गई है। इससे पहले भी रिलीज हुई फिल्मों के समय भी यही स्थिति देखी गई थी। दंगल के परदे पर आने को लेकर आमिर फिर से परेशानी नजर आ रहे हैँ। आमिर खान की दंगल इस 23 दिसंबर को रिलीज़ होगी।   यहां एक बात और भी है। आमिर की इस आदत से उनका बेटा आजाद भी नाखुश है। उनके करीबी आज़ाद को अपने पापा का स्मोकिंग करना बिलकुल भी पसंद नहीं है और वो जब भी आमिर की ये गलत लत देखता है उन्हें कमरे से बाहर का रास्ता दिखा देता है।       साभार-khaskhabar.com

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मोहाली (पंजाब) । इंग्लैंड ने पंजाब क्रिकेट संघ (पीसीए) स्टेडियम में हो रहे तीसरे टेस्ट मैच में भारत के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। अंतिम समाचार मिलने तक इंग्लैंड ने 45 ओवर में 145/5 रन बना लिए थे। जॉनी बेयरस्टॉ (49) व जोस बटलर (0) क्रीज पर हैं। हसीब हमीद (9), जोए रूट (15), कप्तान एलेस्टर कुक (27), मोईन अली (16) व बेन स्टोक्स (29) पैवेलियन लौट गए। उमेश यादव, जयंत यादव, रविचंद्रन अश्विन, मोहम्मद शमी व रवींद्र जडेजा ने 1-1 विकेट लिया है।   पीसीए का इतिहास भारत के पक्ष में है और इंग्लैंड के खिलाफ। भारत ने यहां कुल 12 टेस्ट मैच खेले हैं और अपराजित रहा है। भारत के यहां छह मैच ड्रा रहे हैं और पांच में उसे जीत मिली है। इंग्लैंड के खिलाफ भारत ने यहां तीन टेस्ट खेले हैं जिसमें दो में वह विजेता रहा है और एक मैच ड्रा रहा है। इस मैदान पर पहला टेस्ट 1994 में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया था जिसमें भारत को हार मिली थी। रिद्धिमान साहा की जगह पार्थिव पटेल का विकेट संभालना तो पूर्व निर्धारित था, लेकिन भारतीय टीम में एक और बदलाव हुआ है। लोकेश राहुल चोटिल हैं और उनकी जगह इस मैच से करुण नायर पदार्पण कर रहे हैं। वहीं इंग्लैंड की टीम में तीन बदलाव किए गए हैं। चोटिल स्टुअर्ट ब्रॉड व जफर अंसारी और बेन डकेट की जगह क्रिस वोक्स, गैरेथ बैटी व जोस बटलर को चुना गया है।   भारत : विराट कोहली (कप्तान), मुरली विजय, पार्थिव पटेल, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे (उप-कप्तान), रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा, मोहम्मद शमी, उमेश यादव, करुण नायर, जयंत यादव।   इंग्लैंड : एलेस्टर कुक (कप्तान), जॉनी बेयरस्टॉ, गैरेथ बैटी, जोस बटलर, हसीब हमीद, मोईन अली, आदिल रशीद, जोए रूट, बेन स्टोक्स, क्रिस वोक्स, जेम्स एंडरसन।       साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली । नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में विपक्षी एकता ने सत्तारूढ भाजपा को परेशानी में ला दिया है। 18 नवंबर को शीतकालीन शुरू होने के दिन से ही इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों का कामकाज हंगामे के भेंट चढ चुका है। कुछ विपक्षी दलों में नोटबंदी के मसले पर अंतर्विरोध के बावजूद सरकार इस एकता में सेंध नहीं लगा सकी है। सरकार खास तौर से राज्यसभा को लेकर परेशान है, जहां उसके पास पर्याप्त बहुमत नहीं है। गौरतलब है कि नोटबंदी के मुद्दे पर सभी विपक्षी दल एकसाथ हैं। पिछले 8 दिनों से संसद में भी विपक्षी दलों ने सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चलने दिया है। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू होती है तो विपक्ष एकजुट होकर हंगामा करना शुरू कर देता है।    लोकसभा में सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल भी है लेकिन इसके बावजूद विपक्ष के एकजुट होने से कार्यवाही चल नहीं पाती। वहीं विपक्ष के एकजुट होने से सरकार अभी नोटबंदी के मसले पर कोई फायदा नहीं ले पाई है। वहीं सरकार का साथ देने वाली पार्टी एआईएडीएमके भी इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों के साथ दिख रही है।    गौरतलब है कि एआईएडीएमके ने कई मौकों पर सरकार का साथ दिया है। लेकिन नोटबंदी के मुद्दे पर अब एआईएडीएमके विपक्ष कांग्रेस के साथ नजर आ रही है। संसद और संसद के बाहर कांग्रेस और एआईएडीएमके एकसाथ हैं।इससे सरकार की मुश्किलें और बढ गई हैं। नोटबंदी के मुद्दे पर 13 विपक्षी पार्टियां और उनके 200 सांसद एकजुट होकर सरकार के खिलाफ खडे हैं। नोटबंदी के मुद्दे पर शिवसेना भी विपक्षी दलों के साथ है।    वहीं बीजेडी पार्टी जो कभी विपक्ष के साथ नजर नहीं आई थीं, वह भी इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ नजर आ रही है। वहीं टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने सरकार को नोटबंदी का फैसला वापस लेना का अल्टीमेटम तक दे दिया है। इन विपक्षी दलों की एकजुटता से सरकार काफी परेशान हो रही है।        साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली । ब्लैक मनी के नाम पर नोटबंदी का घाव दे चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अब अगला निशाना बेनाम संपत्तियां हो सकती हैं। इस ओर वह इशारा भी कर चुके हैं कि उनका अगला निशाना बेनामी संपत्ति पर होगा। बेनामी सौदों को लेकर बने कानून में किया गया संशोधित कानून 1 नवबंर से प्रभाव में आ चुका है। नए कानून में बेनाम सौदों को बेनामी संपत्ति करार दिया गया है। नए सख्त कानून से घबराए लोग प्रॉपर्टी जब्त होने से बचाने के लिए विधि फर्मों से राय-मशविरा करना शुरू कर दिया है। हालांकि किसी तरह की जांच के डर से वे वकीलों से सीधे बात भी नहीं कर ‘बेनामी’ ही बात कर रहे हैं। इकॉनॉमिक टाइम्स को वरिष्ठ वकील परिमल श्रॉफ ने बताया, ‘ब्लैक मनी पर कार्रवाई के बाद लोगों में डर बैठ गया है कि अब अगला निशाना बेनामी संपत्ति पर होगा। लोग पूछ रहे हैं कि नए कानून के तहत सरकार किस हद तक एक्शन ले सकती है। लोग पूछ रहे हैं कि कैसे नए कानून में प्रॉपर्टी जब्त होने से बचाई जा सकती है।’ बेंगलुरु की विधि फर्म के वरिष्ठ सदस्य ने के मुताबिक, ‘मुझे बेनामी कॉल्स आ रही हैं। प्रॉपर्टी जब्त होने के डर से क्लाइंट असली पहचान भी नहीं बता रहा है।’सरकार ने अगस्त 2016 में बेनामी सौदा निषेध कानून को पारित किया था। इसके प्रभाव में आने के बाद मौजूदा बेनामी सौदे (निषेध) कानून 1988 का नाम बदलकर बेनामी संपत्ति कानून 1988 कर दिया गया है। संशोधनों के बाद सरकार को दूसरे के नाम से खरीदी गई प्रॉपर्टी को जब्त कर का अधिकार मिल गया है। लोग वकीलों से इस बारे में पूछताछ कर रहे हैं लेकिन जांच से बचने के लिए वह दोस्तों या अन्य लोगों के नाम का सहारा ले रहे हैं। क्या है बेनामी संपत्ति? यह नाम से साफ है कि बेनामी का अर्थ ऐसी संपत्ति, जो असली खरीददार के नाम पर नहीं है। कर अपवंचना और संपत्ति छुपाने के उद्देश्य से लोग अपने नाम से प्रॉपर्टी नहीं खरीदकर किसी ऐसे अन्य नाम से खरीद लेते हैं, जिनका उससे कोई संबंध तक नहीं होता। जिस व्यक्ति के नाम से यह खरीदी जाती है उसे बेनामदार कहते हैं और संपत्ति बेनामी कहलाती है। बेनामी संपत्ति चल या अचल दोनों हो सकती है। अधिकतर ऐसे लोग बेनामी संपत्ति खरीदते हैं जिनकी आमदनी का स्रोत संपत्ति से ज्यादा होता है।यह है सजा का प्रावधान ऐसे मामले पाए जाने पर अधिकतम सात साल की सजा और संपत्ति के बाजार कीमत के 25 फीसदी तक जुर्माना हो सकता है। जानबूझकर गलत जानकारी देने पर कम से कम छह महीने की सजा का प्रावधान है। अधिकतम पांच साल की सजा और संपत्ति के बाजार मूल्य का 10 फीसदी तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।         साभार-khaskhabar.com

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