जयगुरूदेव के वार्षिक सत्संग मेले में दहेज रहित विवाह के दौरान नवदम्पत्ति को आशीर्वाद देते बुजुर्ग मथुरा। जयगुरुदेव आश्रम में चल रहे पांच दिवसीय वार्षिक भण्डारा सत्संग मेला में संस्थाध्यक्ष पंकज बाबा ने कहा कि महापुरुषों ने कहा है बड़ा बैरी ये मन घट में, इसी को जीतना कठिना। जिन्होंने मार मन डाला, उन्हीं को सूरमा कहना। सच्चा सुख केवल उसी को मिलता है जिसने अपने मन को गुरु की भक्ति में लगाकर जीवात्मा को निजघर पहुंचा दिया। यहां के सामान से कभी पूरा सुख नहीं मिलेगा। जिस प्रकार एक जेल खाने में बहुत से कैदी बन्द हों और एक परोपकारी मीठा शर्बत पिलाये, अच्छा अच्छा भोजन कराये, अच्छा कपड़ा पहनने के लिये दे, लेकिन वे सब कैदी ही कहलायेंगे। कोई ऐसा परोपकारी आ जाये जो जेल के ताले को खोलकर सभी कैदियों को आजाद कर दे, तो वे हमेशा के लिये आजाद हो जायेंगे। इसी प्रकार महापुरुष इस मनुष्य रूपी मकान में बंधी जीवात्माओं को उस परोपकारी की भांति जन्म मरण के बन्धन से मुक्त कराने के लिये आते हैं। उन्होंने कहा कि बादल के स्वच्छ पानी के बूंद की तरह जीवात्मायें अपने सच्चे देश को छोड़कर इस काल माया के देश में आकर फंस गयी हैं। पहले जब ये निर्मल थीं तो मन इसका साथी था। लेकिन धीर धीरे पाप पुण्य रूपी गन्दगी जीवात्मा के ऊपर पहाड़ों की तरह जमा हो गई और मन इन्द्रियों के भोगों में लिप्त हो गया। दुनियाँ के जीव अपनी गन्दगी को धोने के लिये नदियों के पवित्र जल में जाकर स्नान करते हैं। लेकिन इस जल से केवल शरीर को शुद्ध किया जा सकता है, मन और जीवात्मा को नहीं। उन्हांेने आगे कहा कि रूहानियत को प्राप्त करने के लिये पांच साल का छोटा बच्चा बनना पड़ता और पढ़ना लिखना सब भूलना पड़ता है। पढ़े लिखे को यदि कोई रास्ता बताया जाता है तो पहले वह नक्शे को देखकर उसकी पुष्टि करेगा, रास्ते में लोगों से पूछेगा। जब उसकी बुद्धि को तसल्ली हो जायेगी तो सीधा चल देगा, तभी काम बनता है। जब एक बार विश्वास हो जाता है तो उसी भरोसे विश्वास से अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। भक्ति में सतगुरु पर विश्वास और भरोसे की जरूरत पड़ती है। मेले में इक्कीस जोड़े दहेज रहित विवाह सम्पन्न हुये। कार्यक्रम निर्विघ्न रूप से सम्पन्न हो गया। संस्थाध्यक्ष ने अधिकारियों, कर्मचारियों को सहयोग के लिये धन्यवाद दिया और मथुरा व जिले की जनता तथा अपनी सद्भावनायें व सहयोग देने वाले समस्त लोगों का आभार व्यक्त किया। श्रद्धालु अपने घरों को वापस लौटने लगे हैं।
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