मथुरा

मथुरा। मथुरा रिफाइनरी में एक चीते के घुसने की खबर से हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि ग्रामीणों ने अभी इस चीते को नहीं देखा है लेकिन पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। इस घटना के बाद सीआईएसएफ और बीएसएफ पूरे क्षेत्र में काॅम्बिंग कर रही है। लोगों में दहशत बरकरार है। बताया जाता है कि किसी सीसी टीवी कैमरे में यह चित्र कैद हुआ है लेकिन प्रत्यक्ष रूप से यह हिंसक जानवर अभी लोगों के सामने नहीं आया है।  मिली जानकारी के अनुसार सीसी टीवी से जानकारी लगी कि कोई चीता नमा पशु रिफाइनरी के गेट नम्बर 9 के बराबर स्थित ‘बामर लाॅरी कम्पनी जो गेट नम्बर 9 से आगे है और काफी समय से बंद पड़ी है। उसी क्षेत्र में इस हिंसक पशु के होने की जानकारी पैरा फोर्स को लगी है। उसके बाद अभियान चलाकर चीते का तलाशा जा रहा है। उसके पैरों के निशान और अन्य संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए चप्पा चप्पा छाना जा रहा है। इस खबर के बाद वन विभाग भी सक्रिय हुआ है और विभाग के लोग संभावित क्षेत्रों में तलाश कर रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक इसकी मौजूदगी की कोई जानकारी हासिल नहीं हो पायी है। स्थानीय लोगों में चर्चा थी की पास में रेल की पटरी होने और वहां से माल गाडि़यों के गुजरते यह भी संभावना है कि कहीं किसी खुले डिब्बे में तो वह बैठकर आ गया हो। क्षेत्रा में इसको लेकर तरह तरह की चर्चाएं है।

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मथुरा। रोडवेज डिपार्टमेन्ट की कई बसे वर्षो से विभागीय लोगों की मिली भगत के चलते फर्जी टिकट व डग्गेमारी का हिस्सा बनी है। मथुरा से अलीगढ़ रूट पर यात्रियों को सफर तय कराने वाली ये बसें पूरी तरह से विभागीय अधिकारियों की कृपा पात्र है। 9306, 9938, 3745 आदि नम्बरों से संचालित इन बसों में रोजाना सैकड़ों यात्री यात्रा कराते है। ऐसा नहीं कि इन यात्रियों को टिकट उपलब्ध नहीं होती है लेकिन इन टिकिटों का कोई रिकार्ड विभाग के पास नहीं होता। वहीं कई बसें वर्कशाॅप में एण्ट्री दिखाने के बाद रूटचार्ज में दौड़ाई जाती है। इन बसों से मिलने वाली आमदनी अधिकारियों के ऊपरी खर्चो से इस्तेमाल की जाती है। राया रूट पर कभी कभार चैकिंग करते टीएस इन बस संचालकों को चैक करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वहीं यह खेल दूसरे मंडलों में भी संचालित है। वर्षो से ऊपरी आमनंदनी का जरिया बनी इन सरकारी गाडि़यों द्वारा कमाया जाने वाला धन आगरा मंडल से लेकर लखनऊ तक भी भेजा जाता है। इस व्यवस्था के चलते यहां चल रहे इस गोरख धंधे पर कोई जिम्मेदार अधिकारी लगाम कसने की स्थिति में नहीं है। वहीं पूर्व में अखबारों में छपी खबरों के आधार पर इनमें से कुछ बसे गोवर्धन रूप पर भी पकड़ी गई। कार्यवाही के बाद पुनः यही गोरखधंधा पुनः शुरू कर दिया गया। विभाग से जुड़े सूत्र बताते है कि इन बसों को विभागीय एआरएम व डीआरएम का संरक्षण पूरी तरह प्राप्त है। सूत्र ये भी बताते है कि दर्जनभर गाडि़यों को मथुरा में तैनात एआरएम के इशारे पर ही चलवाया जा रहा है। रोजमर्रा में हजारों की आमनदनी का बंदर बांट विभागीय अधिकारियों को भी भेजा जा रहा है। रोडवेज डिपार्टमेंट को घाटे का सौदा साबित हो रहे ये अधिकारी अपनी पहुंच व काली कमाई के चलते मेहमानबाजी कर निजी सम्पत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहे है। जिससे खबर के असर के रूप में कुछ विभागीय कार्यवाही करते हुए गोवर्धन रूट पर फर्जी बस पकड़ी गई थी। बाद में वहीं सिलसिला पुनः पूरी तरह जारी किया जा रहा है। 

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मथुरा। थाना हाईवें क्षेत्र के औरंगाबाद चैराहा से गोवर्धन चैराहा के मध्य नामजद चोरं ने एक महिला के जेबरों से बैग को पार कर दिया। घटना की जानकारी होने पर महिला के पिता ने नामजद चोरं के विरूद्व रिपोर्ट दर्ज कराई हैं।  मिली जानकारी के अनुसार अरविन्द पुत्र कुल्लन सिंह निवासी चैमुहा वृन्दावन हाल निवासी टाउनशिप रिफाइनरी ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि उसकी पत्नी औरंगाबाद चैराहा से टैम्पों में बैठकर गोवर्धन चैराहा तक गई इस दौरान कमला पत्नी सुभाष अंजली निवासी सहीजापुर जमुनापार मथुरा ने उसकी पत्नी के पास रखें बैग जिसमें जेवर आदि समान था को चोरी कर लिया। घटना की जानकारी होने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर कार्यवाही शुरू कर दी हैं।

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मथुरा। थाना जमुनापार क्षेत्र से आबकारी टीम ने मुखबिर की सूचना पर कैंटर में जा रही अवैध शराब को पकड़नें में सफलता प्राप्त की हैं। टीम ने शराब तस्कर कैंटर चालक सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर स्थानीय पुलिस के हवाले किया हैं।  मिली जानकारी के अनुसार आबकारी निरीक्षक आरके वर्मा ने मुखविर की सूचना पर थाना जमुनापार क्षेत्र के मथुरा बल्देव मार्ग माॅ चन्द्रवली देवी मन्दिर के पास से कैंन्टर संख्या यूपी 80 बी टी 6774 को रोक कर उसमें चैकिग के दौरान कैनटर में बनी गुप्त कैबिन से हरियाणा से तस्करी करके लाई जा रही 155 पेटी नाजायज अग्रेंजी शराब बरामद की हैं। आबकारी टीम ने कैंन्टर के चालक हरवीर सिंह पुत्र केशव सिंह बाह सौनपुरा कागारोल आगरा सहित उसके तीन अन्य साथियों को गिरफ्तार कर थाना जमुनापार पुलिस को सौंपा हैं। वहीं 155 पेटी शराब को अपने कब्जें में ले लिया।

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मथुरा। थाना फरह क्षेत्र के ग्राम मुस्तका वाद के पास बाइकों की आमनें सामने की भिड़न्त में वाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर घायल को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जहाॅ उपचार के दौरान घायल ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मृतक के शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।  मिली जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के ग्राम बाद के पास बाइक संख्या यूपी 85 डी जी 1998 के अज्ञात चालक ने तेजी व लापरवाही से चलाते हुए सामने से आ रही बाइक में टक्कर मार दी जिससें बाइक सवार मुकेश गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर घायल मुकेश को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जहाॅ मुकेश ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं। घटना की रिपोर्ट मृतक के भाई रमेश पुत्र मोतीलाल निवासी मुस्तकाबाद फरह ने अज्ञात वाइक चालक के विरूद्व दर्ज कराई हैं।  

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बच्चे देश की संपति हैं। वे भारत के भावी नागरिक हैं। देश के मानव संसाधन विकास के लिए बच्चों में निवेश मददगार है। एक खुशहाल बच्चा अपने घर और देश को खुशहाल बनाएगा। किसी भी देश का भविष्य बच्चे के उचित लालन-पालन पर निर्भर करता है। इसके लिए सौहार्दपूर्ण माहौल तथा बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए उचित अवसरों का होना आवश्यक है।  “विश्व के बच्चों की दशा” शीर्षक से यूनिसेफ की 2013 की रिपोर्ट के अनुसार विश्व की एक तिहाई बच्चों के लिए रहने की पर्याप्त जगह नहीं है, 31 प्रतिशत बच्चों में बुनियादी स्वच्छता का अभाव है और 21 प्रतिशत बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होता। जब बच्चों के लिए सर्वाधिक बुनियादी सुरक्षा नहीं होती तो उनमें बीमारी होती है, कुपोषण होता है और समय से पहले उनकी मृत्यु हो जाती है। बच्चों को मनोरंजन का अधिकार है और उनका लालन-पालन स्वस्थ्य माहौल में होना चाहिए। स्कूल प्रकृति से बच्चों के सरोकार को बढ़ावा देने तथा उन्हें स्कूल एवं घर से बाहर के अनुभवों के लिए स्कूल यात्रा कार्यक्रमों को आयोजित करेंगे। स्कूली बच्चों को विज्ञान और टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक बनाने के लिए उन्हें विज्ञान संग्राहालयों में ले जाया जाएगा। गोवा में बाल अदालतें हैं। विश्व स्तर पर बच्चों के मानव अधिकारों की रक्षा के लिए बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र समझौता, यूनिसेफ आदि की व्यवस्था है। भारत ने बच्चों की सुरक्षा के लिए संवैधानिक अधिकार दिया है और अनेक कानून बनाए हैं। किशोर न्याय ऐसा एक पहलू है। बच्चों पर राष्ट्रीय नीति, एकीकृत बाल सुरक्षा योजना, बाल अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग, बाल श्रम निषेध, बाल फिल्म सोसायटी की स्थापना भारत का अंतर्राष्ट्रीय बाल फिल्म समारोह आयोजन, राष्ट्रीय बाल भावन जैसे कदम बच्चों की भलाई के लिए उठाए गए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य और मनोरंजन को बढ़ावा देने के लिए पार्क, बच्चों की खेलकूद व्यवस्था तथा फिल्में आवश्यक हैं। बच्चों के वास्ते नीतियां बनाने के लिए बच्चों की मनोदशा को समझना आवश्यक है। भारत के राष्ट्रपति बहादुर बच्चों के प्रोत्साहन के लिए बाल पुरस्कार देते हैं। देश में प्रत्येक वर्ष 14 नवम्बर को बाल दिवस मनाया जाता है। बच्चों के मानवाधिकार विशेष सुरक्षा अधिकारों पर खास ध्यान एवं अवयस्कों की देखभाल के साथ सभी मानव अधिकार बच्चों के भी मानव अधिकार हैं। इसमें माता पिता के साथ संबंध, मानवीय सम्मान तथा खाद्य की बुनियादी आवश्यकता, सार्वभौमिक शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, बच्चों की आयु के अनुसार आपराधिक कानून तथा बच्चों के नागरिक अधिकारों और बच्चों के नस्ल, लिंग, यौन निर्धारण, लैंगिक पहचान, राष्ट्रीय मूल, धर्म, अशक्तता, रंग, जाति, और अन्य विशेषताएं शामिल हैं। बच्चों के संवैधानिक अधिकार भारतीय संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि बच्चों सहित सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा संविधान का मौलिक दर्शन है। संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति कानून के समक्ष बराबर है और सभी को समान कानूनी सुरक्षा है। यह अधिकार बच्चों सहित सभी को मिला है। बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र समझौता (सीआरसी 1989) बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र समझौता (सीआरसी 1989) बच्चों को जीवित रहने और विकास, विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा सुरक्षा का अधिकार देता है। समझौते के मुताबिक सीआरसी पर हस्ताक्षर करने वाले सभी देशों का यह कर्तव्य है कि वे बच्चों को निःशुल्क और आवश्यक प्राथमिक शिक्षा प्रदान करे। यूनिसेफ संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) विकासशील देशों में बच्चों और माताओं को मानवीय और विकास सहायता देता है। यूनिसेफ के कार्यक्रम समुदाय स्तर पर सेवाओं को विकसित करके बच्चों के स्वास्थ्य और खुशहाली को बढ़ावा देते हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून भारत की संसद ने देश में बच्चों की सुरक्षा के लिए अनेक कानून बनाए हैं। इनमें बाल यौन अपराध सुरक्षा कानून 2012 का पारित किया जाना भी शामिल हैं। बच्चों की शिक्षा पर जोर देते हुए संसद ने शिक्षा का अधिकार कानून भी बनाया है। भारत में किशोर न्यायालय भारत में किशोर न्याय की परिकल्पना बच्चों से निपटने के लिए वैकल्पिक कानूनी प्रणाली की आवश्यकता समझते हुए की गई थी। अनेक संशोधनों के जरिए किशोर न्याय अधिनियम को बच्चों के अनुकूल बनाया गया है। भारत द्वारा बाल अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र समझौते की पुष्टि भी की गई है। राष्ट्रीय नीति भारत सरकार ने बच्चों के लिए राष्ट्रीय नीति के तहत व्यापक स्वास्थ्य कार्यक्रम माताओं और बच्चों के लिए पूरक पोषाहार और 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चो के लिए आवश्यक शिक्षा जैसी अनेक सिफारिशें की गई हैं। अन्य पहल भारत में बच्चों के लिए देशी और विशेष सिनेमा पर निरंतर ध्यान दिया जाता रहा है। बाल फिल्म सोसायटी भी बनी है, भारत का अंतर्राष्ट्रीय बाल फिल्म समारोह भी आयोजित किया जाता है। देश में बच्चों के संस्थागत समर्थन भी दिया गया है। राष्ट्रीय बाल भवन ऐसा ही संस्थान है। यह संस्थान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चे की सृजन क्षमता को बढ़ावा देता है।

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