मथुरा

मथुरा। यमुनाजल शुद्धिकरण हेतु तीर्थ पुरोहित महासंघ द्वारा श्रृंगार घाट पर दुर्गा महायज्ञ सम्पन्न हुआ। जिसमें ब्रज मंडल के प्रमुख संत के अलावा यमुना प्रदूषण आंदोलन में जुड़ हुए विभिन्न संगठनों के साथ ही भारी संख्या में गोपाल पीठ से जुड़े चतुर्वेदी समाज के युवा एवं यमुना भक्त ने भाग लिया चारों वेदों के 11 विद्वानों ने श्रीदुर्गा मां के 1008 नामावली नामों के अलावा सूत्र तथा गोपाल बालं शरण प्रपद्ये मंत्रों के उच्चारण के बीच महायज्ञ का आयोजन किया गया। इस महायज्ञ में यज्ञ की विभिन्न पांच सामिग्रियों के साथ घी की तथा दुर्गा मां की प्रिय प्रसाद हलुआ चना की भी अहूतियां दी गई। इस महायज्ञ के द्वारा मां दुर्गा के चरणों में कामना की गई कि यमुना मां अपनी स्वच्छ धारा के साथ ब्रज मंडल को पवित्र करें। इस अवसर पर तीर्थ पुरोहित महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री प्रयागनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि यमुना भक्त वर्तमान केंद्र सरकार का बहुत लम्बे समय तक इंतजार नहीं करेंगे यमुना प्रदूषण मुक्ति एवं स्वच्छ जल यमुना मां में प्रवाहित हो यही देशभर के तीर्थ पुरोहितों का लक्ष्य है साल 2014 तीर्थ पुरोहितों ने यज्ञों के द्वारा अपनी भावनाओं को इस आंदोलन में जोड़ा है यज्ञों के बाद देश भर के तीर्थ पुरोहित इस मामले में निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे। आगामी 21 नवम्बर को सम्पूर्ण ब्रज मंडल के संत और यमुनाभक्तों को इसी स्थान पर एकत्र किया जायेगा और लड़ाई को आगे बढ़ाया जायेगा। 

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डीएस मलिक भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2014-15 में वरिष्‍ठ पेंशन बीमा योजना (वीपीबीवाई) के दोबारा शुरू करने को घोषणा की थी।  केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा था कि वरिष्‍ठ पेंशन बीमा योजना से सीमित साधनों वाले समाज के कमजोर तबके को लाभ मिलेगा क्‍योंकि इससे देश के वरिष्‍ठ नागरिकों को 500 से 5000 रुपये प्रतिमाह तक मासिक पेंशन उपलब्‍ध होगी।  वीपीबीआई योजना से लाभार्थी को अपनी जमा राशियों पर 9.38 प्रतिशत प्रतिवर्ष की समग्र दर पर आय प्राप्‍त होती है जिसका मासिक आधार पर भुगतान किया जा रहा है। वरिष्‍ठ नागरिक विशेष रूप से देश में बढ़ती दीर्घायु की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण हैं। दीर्घायु में महत्‍वपूर्ण वृद्धि हुई है। इस योजना के लिए अंशदान से 10000 करोड़ रुपये से अधिक की संचित निधि जुटने की संभावना है जो देश के विकास के लिए संसाधन जुटाने का महत्‍वपूर्ण साधन भी होगी। दोबारा शुरू की गई इस वरिष्‍ठ पेंशन बीमा योजना (वीपीबीवाई) योजना के तहत वरिष्‍ठ नागरिक को मासिक या वार्षिक आधार पर एक निश्चित पेंशन मिलेगी जिससे उन्‍हें सामाजिक सुरक्षा उपलब्‍ध होगी। केवल एलआईसी को इस योजना के क्रियान्‍वयन का विशेषाधिकार दिया गया है। पेंशन भोगी के जीवनकाल में उसके द्वारा चुने गए पेंशन लेने के तरीके के आधार पर तत्‍काल वार्षिकवृत्ति के रूप में पेंशन का भुगतान किया जाएगा। किसी पेंशन भोगी की मृत्‍यु होने पर क्रय मूल्‍य का भुगतान किया जाएगा। योजना में न्‍यूनतम प्रवेश आयु – 60 वर्ष (पूरे) है और अधिकतम प्रवेश आयु की कोई सीमा नहीं है। न्‍यूनतम पेंशन 500 रुपये प्रति माह होगी और अधिकतम 5000 रुपये प्रति माह रहेगी। पेंशन की अधिकतम सीमा एक पूरे परिवार के लिए है अर्थात इस योजना के तहत सभी पॉलिसियों के तहत इस परिवार को जारी कुल रकम अधिकतम पेंशन सीमा से बाहर नहीं होगी। इस प्रयोजन के लिए परिवार में पेंशनभोगी, उसकी पत्‍नी/ उसका पति, आश्रित शामिल हैं। इस योजना को एकमुश्‍त खरीद मूल्य का भुगतान कर खरीदा जा सकता है। पेंशन भोगी के पास को यह विकल्प रहेगा कि वह या तो पेंशन की राशि या खरीद मूल्य का चयन करे। पेंशन का भुगतान मासिक, तिमाही, अर्द्ध-वार्षिक तथा वार्षिक तौर पर किया जाएगा। पेंशन का भुगतान ईसीएस/एनईएफटी द्वारा ही किया जाएगा। पेंशन की पहली किश्त को खरीद की तारीख से एक माह, तीन माह, छः माह, एक वर्ष के पश्चात पेंशन भुगतान के तरीके के आधार पर क्रमशः वार्षिक, अर्द्ध-वार्षिक, तिमाही, या मासिक तौर पर दी जाएगी। पंद्रह वर्ष पूरे हो जाने के बाद पॉलिसी का अभ्‍यर्पण किया जा सकता है। अदा किए जाने वाला अभ्‍यर्पण़ मूल्य खरीद मुल्य का रिफण्ड होगा। हालांकि अपवाद की स्थितियों में, पेंशन भोगी को खुद की या उसके पति/पत्नी की किसी गंभीर/टर्मिनल बीमारी के इलाज के लिए पॉलिसी को 15 वर्ष पूर्ण करने से पहले अभ्‍यर्पित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में अदा किए जाने वाला अभ्‍यर्पण मूल्य खरीद मूल्य का 98 प्रतिशत होगा। तीन पॉलिसी वर्ष पूरा करने के पश्चात ऋण सुविधा मुहैया की जाएगी। इसके तहत अधिकतम ऋण, खरीद मूल्य का 75 प्रतिशत दिया जाएगा। ऋण राशि के लिए वसूल की जाने वाली ब्याज की दर समय-समय पर निगम द्वारा निर्धारित की जाएगी। पॉलिसी के अंतर्गत देय पेंशन की राशि में से ऋण का ब्याज वसूल किया जाएगा। पॉलिसी के तहत पेंशन भुगतान की निरंतरता के अनुसार ऋण पर ब्याज लगेगा तथा यह पेंशन की देय तारीख पर देय होगा। हालांकि, बकाया ऋण एग्ज़िट के समय दावे की राशि से वसूल किया जाएगा। सर्विस कर समेत यदि कोई कर हों तो वह कर कानून के अनुसार देय होंगे तथा कर की दर समय-समय पर लागू किए गए दर के अनुसार होंगी। पॉलिसी धारक द्वारा खरीद मूल्य पर विद्यमान दरों के अनुसार कर अदा किया जाएगा। चुकाए गए कर की राशि को योजना के तहत देय हितों की गणना के लिए विचार नहीं किया जाएगा। पॉलिसी धारक पॉलिसी की शर्तों के प्रति संतुष्ट न होने पर पॉलिसी प्राप्त करने की तारीख से 15 दिन के भीतर इसका कारण बताते हुए निगम को पॉलिसी वापस कर सकते हैं। निःशुल्क दर्शन अवधि के भीतर रिफण्ड की राशि पॉलिसी धारक द्वारा जमा किए गए खरीद मूल्य में से स्टॉप ड्यूटी के प्रभार को काटते हुए दी जाएगी। योजना की प्रमुख विशेषताएं •         60 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों के लिए •         पेंशन मासिक, तिमाही, अर्द्ध-वार्षिक या वार्षिक तौर पर तत्काल वार्षिक वृत्ति के आधार पर होगी। जो क्रमशः रु.500 से 5000 के बीच (मासिक), रु.1500 से 15000 (तिमाही), रु.3000 से 30000 (अर्द्ध-वार्षिक) तथा रु.6000 से 60000 (वार्षिक) ये अंशदान की गई राशि तथा चुने गए विकल्प के आधार पर होंगी। •         मासिक अदायगी आधार पर नौ प्रतिशत का रिटर्न देने का आश्वासन दिया गया है। जो 9.38 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न बनता है। •         पॉलिसी की शुरुआत की तारीख से तीन वर्ष के बाद इस पर ऋण (अंशदान की गई राशि का 75 प्रतिशत तक) लिया जा सकता है। •         मृत्यु होने पर नामिति को पूरा खरीद मूल्य रिफण्ड किया जाएगा। •         15 वर्ष बीत जाने के बाद अभ्‍यर्पण/एग्ज़िट की अनुमति दी जाएगी। खुद की या उसके पति/पत्नी की गंभीर/टर्मिनल बीमारी की विशेष परिस्थितियों में इससे पहले भी अनुमति दी जा सकती है। •         इसका भुगतान ईसीएस या एनईएफटी के माध्यम से होगा। (लेखक पीआईबी नई दिल्ली में अपर महानिदेशक हैं)

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नई दिल्ली : सत्रहवें एशियाई खेलों के छठे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने एक कांस्य पदक जीता। यह पदक दुशियांत दुष्यंत ने नौकायन में लाइटवेट पुरुष सिंगल स्क्ल्स प्रतिस्पर्धा के तहत जीता।  एशियाई खेलों का छठा दिन समाप्‍त होने तक भारतीय खिलाड़ी 12 पदक जीत चुके हैं। इनमें एक स्वर्ण, एक रजत और 10 कांस्य पदक शामिल हैं।

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत की। राजधानी के विज्ञान भवन में मौजूद शीर्ष ग्लोबल सीईओ सहित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “एफडीआई’’ को ‘‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश’’ के साथ ‘‘फर्स्ट डेवलप इंडिया’’ के रूप में समझा जाना चाहिए। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत को सिर्फ बाजार के रूप में न देखें बल्कि इसे एक अवसर समझें। प्रधानमंत्री ने कहा कि आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़नी चाहिए क्योंकि इससे मांग बढ़गी और निवेशकों को फायदा मिलने के साथ-साथ विकास को बढ़ावा मिलेगा। लोगों को जितनी तेजी से गरीबी से बाहर निकालकर मध्यम वर्ग में लाया जाएगा, वैश्विक व्यवसाय के लिए उतने ही अधिक अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा, इसलिए विदेशों से निवेशकों को नौकरियां सृजित करनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सस्ते निर्माण और उदार खरीददार- जिसके पास क्रय शक्ति हो- दोनों की ही जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधिक रोजगार का अर्थ है अधिक क्रय शक्ति का होना। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां लोकतंत्र, जनसंख्या और मांग का अनोखा मिश्रण है। उन्होंने कहा कि नई सरकार कौशल विकास के लिए पहल कर रही है ताकि निर्माण के लिए कुशल जनशक्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने डिजीटल इंडिया मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि इससे सुनिश्चित होगा कि सरकारी प्रक्रिया कार्पोरेट की प्रक्रिया के अनुकूल रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से वे महसूस कर रहे थे कि नीतिगत मुद्दों पर स्पष्टता का अभाव होने के कारण भारत के व्यावसायिक समुदाय के बीच निराशा है। उन्होंने कहा कि उन्हें यहां तक सुनने को मिला कि भारतीय व्यवसायी भारत छोड़ कर चले जाएंगे तथा कहीं और जाकर व्यवसाय स्थापित कर लेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे उन्हें दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि किसी भी भारतीय व्यवसाय को किसी भी परिस्थिति में देश छोड़ने की बाध्यता जैसी भावना नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों के अनुभव के आधार पर वे कह सकते हैं कि अब ये निराशा समाप्त हो गई है। प्रधानमंत्री ने दस्तावेजों का स्व-प्रमाणीकरण करने की सरकार की नई पहल का उदाहरण दिया और कहा कि यह इस बात को स्पष्ट करता है कि नई सरकार को अपने नागरिकों पर कितना विश्वास है। आइये विश्वास के साथ शुरूआत करें; यदि कोई परेशानी है तो सरकार हस्तक्षेप कर सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्वास भी बदलाव की ताकत बन सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में व्यवसाय करना कठिन माना जाता था। उन्होंने इस संबंध में सरकारी अधिकारियों को संवेदनशील बनाया। उन्होंने ‘प्रभावकारी’ शासन की जरूरत पर बल दिया। “लुक ईस्ट’’ अभिव्यक्ति के साथ प्रधानमंत्री ने ‘‘लिंक वेस्ट’’ को जोड़ा उन्होंने कहा कि एक वैश्विक दूरदर्शिता आवश्यक है। उन्होंने कहा स्वच्छ भारत और ‘‘कचरे से सम्पन्नता’’ मिशन अच्छी आमदनी और बिजनस का जरिया बन सकते हैं। उन्होंने सार्वजनिक निजी भागीदारी के जारिए भारत के 500 शहरों में बेकार पानी के प्रबंधन और ठोस कचरा प्रबंधंन के बारे में अपने विजन का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने राजमार्गों के अलावा आई-वेज सहित भविष्य के बुनियादी ढांचे की चर्चा की और बंदरगाह प्रमुख विकास, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, गैस ग्रिड और जल ग्रिडों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया का प्रतीक चिह्न जारी किया और वेबसाइट Makeinindia.com की शुरुआत की।

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राया। कस्बा राया के निवासी कुछ लोगों ने थाना मे तैनात एक दरोगा व कांस्टेबल पर मारपीट का आरोप लगाया है। मिली जानकारी के अनुसार विशाल पुत्र राम मगन, संजय पुत्र महावीर व अमित चांट पकौड़ी की ढकेल लगाकर अपना जीवन यापन करते हैं इन लोगों ने बताया कि वह अपने पत्नी बच्चों के साथ रामलीला देखने गए थे तभी वाहन खड़े दरोगा व कांस्टेबल ने इन्हें मरना पीटना शुरू कर दिया। जिससे ये बुरी तरह घायल हो गए। इन लोगों ने इसकी शिकायत भाजपा मण्डल अध्यक्ष राकेश बंसल व एक लोकदल के नेता से की। जिस पर ये लोग घायल युवकों को लेकर थाने पहुँचे और उक्त दरोगा व सिपाही की शिकायत थाना प्रभारी राजा सिंह से की। इस पर थाना प्रभारी ने जाँच का आश्वासन देकर कार्यवाही की बात कही ऐसे ही कई मामले सामने आये हैं। जिन पर लोगो ने ने दरोगा पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। इस घटना को लेकर क्षेत्रीय लोगों मे भरी आक्रोश व्याप्त है। दरोगा व सिपाही की गुण्डई सिर चढ़कर बोल रही है। लोगों ने इसकी शिकायत कप्तान से करने की बात कह कार्यवाही की माँग की है।

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कोसीकलाँ। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि किसानों के रिहायशी मकान, गौत नौहरे आदि की जमीन को कृषि भूमि मानकर अर्जन करना चाहते है। उददेश्य यह है कि वह अनाज मण्डी बनाने को दर्शाया गया है लेकिन यहाँ पर टेलीफोन एक्सचेंज, गोदाम व सुपर बाजार बनाकर किसानो की जमीन को ऊँचे दामो में बेचना चाहते हैं। भूमि नगर पालिक क्षेत्र में थी, जबकि मुआवजा देहाती क्षेत्र को निर्धारित किया गया था। मुआवजा कम होने से असंतुष्ठ किसानो द्वारा मुआवजा न लेने पर भी उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उच्च न्यालय के आदेशानुसार 12 वर्ष तक अर्जित भूमि का प्रयोग न होने पर अर्जन अवैध व अप्रभावी होता है लेकिन 40 बर्ष बाद भी जमीन का प्रयोग न होने पर अनाज मण्डी द्वारा उस पर अधिकार दिखाना चाहते हैं। भूमि अर्जन से प्रभावित किसानो को मण्डी की ओर से किसान परिवारो को नौकरी, आढत, व दुकान न देकर लाभ से वंचित रखना चाहते हैं एवं मण्डी की दुकानो की नीलामी को अभिलम्ब रोकने का निर्देश है ताकि कोई विस्फोटक स्थिति पैदा न हो। अन्यथा शासन प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा। यह बात भगवान सिहं सागवान, तैहन्दर, किशन सिहं, ओेमवीर, वदन सिह, बृज किशोर शर्मा, अजय सिहं सांगवान, प्रहलाद शर्मा, महेन्द्र सिहं, विजय सिहं सांगवान, खेमा चैधरी, तेजपाल सिहं, गोविन्द शरण, तेजवीर, कृपाल सिहं, उत्तम चैधरी एवं वेदप्रकाश शर्मा ने कही।

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