मथुरा

मथुरा। थाना बल्देव क्षेत्र के रजवाह में विगत दिवस मिलें युवक की शिनाख्त आज बबलू पुत्र किशनवीर निवासी रतना पुर इंग्लास हाल निवासी रीठा कालौनी बलदेव के रूप में हुई हेै। सूचना पर पहुंचे मृतक बबलू के परिजनों ने बताया जाता है कि बबलू सोमवार को घर से हिसाव किताब करने की कहकर निकाला था। लेकिन मंगलवार को बबलू का शव रजवाह में मिला हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि किसी ने बबलू के साथ लूटकर उसकी हत्या कर शव को रजवाह में वहा दिया हैं। फिलहाल पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर मामलें की जाॅच शुरू कर दी हैं।

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ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा, गुरू शरणानन्द जी महाराज व संत विज्ञानाचार्य जी के सानिध्य में विगत तीन माह से यमुना सफाई अभियान अनवरत रूप से चल रहा है। यमुना रक्षक दल द्वारा यमुना प्राकृट्य महोत्सव की तैयारीयों के लिये गउघाट पर मंगलवार सांय काल में यमुना भक्तों की बैठक का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों यमुना भक्तों ने भाग लिया। 15 मई गुरूवार को गउघाट पर होने वाले यमुना प्राकृट्य महोत्सव में रमणरेती के परम श्रद्धेय काष्र्णि गुरू शरणानन्द जी महाराज सभी भक्तों को आशीर्वाद देने गउघाट पर सांय 5 बजे पहुॅचेंगे। यमुना रक्षक दल द्वारा महोत्सव की तैयारियों के अन्तर्गत नगर में होर्डिंग बैनर लगा दिये गये है व प्रभातफेरी व सांय काल में समीपवर्ती इलाके में संकीर्तन फेरी लगा लोगो को महोत्सव के विषय में सूचित किया जा रहा है। यमुना प्राकृट्य महोत्सव में भाग लेने जिले गांव- गांव से ब्रजवासी पधारेंगे। इस महोत्सव में यमुना का पूजन व उनकी मुक्ति के लिये भक्त संकल्पित होगें। गुरू शरणानन्द जी महाराज द्वारा अखंड संकीर्तन के गउघाट पर बने संकीर्तन हाॅल का शुभारम्भ करवा उसमें संकीर्तन को प्रारम्भ किया जायेगा। मंगलवार को बैठक में पहुॅचे यमुना भक्तों ने घाटों पर पानी व झाडू लगा घाटों को चमकाने हेतु 1 घंटे श्रमदान भी किया। यमुना रक्षक दल के राष्टिय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने कहा कि गुरू शरणानन्द जी महाराज द्वारा यमुना सफाई अभियान में दिये गये मशीनी बेडा सफाई कार्य को रफ्तार प्रदान कर रहा है अब उनकी उपस्थिति व आर्शीवाद इस कार्य को व यमुना भक्तों के मनोबल में वृद्धि कारक होगा। दल यमुना को ब्रज में अपने अविरल स्वरूप में लाके रहेगा और इसकी लड़ाई बहुत लम्बी है। इसमें वही विजय होगा जो सतत् कार्य करता रहेगा यमुना के स्वरूप की रक्षा, उसकी शुद्धि एवं मुक्ति के कार्य करता रहेगा। संतो के आशीर्वाद से यमुना रक्षक दल सरकारी तौर पर यमुना मुक्ति व जमीनी तौर पर एक राॅल माॅडल प्रस्तुत करने हेतु गउघाट पर सफाई अभियान में जुटा सतत् लगा हुआ है। इस अवसर पर नगर महामंत्री शरद वर्मा, राजेन्द्र भगत जी, विनोद शर्मा, त्रिलोकी व्यास, राजू पेण्टर , विवेक शर्मा, फौजी बाबा, गोपाल पाण्डे, मोहन जी, अब्दुल हबीज, रतन सिंह , भोला पंडित आदि उपस्थित थे।  

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भारत संस्कृति प्रधान देश है। भारतीय संस्कृति मे व्रत और त्यौहारों का विशेष महत्व है। व्रत और त्यौहार नई प्रेरणा एवं स्फूर्ति का संवहन करते है। इससे मानवीय मूल्यों की गतिशीलता बनी रहती है और साथ ही संस्कृति का पोषण तथा संरक्षण भी होता रहता है।   सनातन वैदिक परंम्परा मे प्रायः सभी देवताओं की जयंती मनाई जाती है। लेकिन, वैष्णवों मे मुख्य चार विष्णु जयंतीया रामनवमी, नृसिंहचर्तुदशी, कृष्णजन्माष्टमी एवं वामनद्वादयशी व्रत पर्व तथा उत्सव तीनों के रुप मे संयुक्त मनानें की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। वैष्णवमत मे उत्सव का मुख्य आधार विष्णु है और नृसिंह अवतार उनका राज्याधिकार से वंचित प्रहलाद की शीलसंपंता की लोकहित मे वृद्धि के कारण ज्ञातव्य है।   नरहरि नृसिंह जयंती वैशाख मास की शुक्ल चर्तुदशी को मनाए जाने वाला पर्व है। वैशाख सर्वश्रेष्ठ मास है और शेषशाइया भगवान् विष्णु को सदा प्रिय है। नृसिंह चर्तुदशी भगवान का भक्त को सुख देने के लिए किए गए परिश्रम का अवतार है, इसी कारण यह तिथि और मास पुण्य का कारक है। नृसिंह प्रहलाद की भक्ति को सिद्धि करने के लिए प्रकट हुए थे जब हिरण्यकशिपु नामक दैत्य ने ब्रहमा के वरदान के मद मे समस्त प्रकृति को अपने आधीन कर लिया तब उसके मान मर्दन और प्रहलाद की रक्षा के लिए सर्वव्यापी नारायण ने नृसिंह का नरहरि रुप ले हिरण्यकशिपु का संहार किया और प्रहलाद को शीलव्रत की अनुकंम्पा करी।   नृसिंह चतुर्दशी एक उत्सव न होकर धर्म के आधार पर अर्थात् एक शासक को मात्र जन के लिए ही नीति बनाने और उसके पालन करने की मर्यादा के साथ जुडा़ हुआ है। समस्त मानव जीवन धर्म संस्कृति नीति के आधार पर ही एक सुत्र मे बंधा हुआ है। शासन की नीति ही सभ्यता, रीतिरिवाज, वेश- भूषा, रहन- सहन, खानपान, व्रतपर्व तथा त्यौहारों को जीवंत रखने मे सहायता करती है वरन उसका उन्नयन भी करती है। इसी को आधार मान कर विष्णु ने नरहरि नृसिंह का रुप हिरण्यकशपु के द्वारा प्रताड़ित प्रकृति की रक्षा के लिए यह अवतार लिया। हिरण्यकशपु ने आकाश, पृथ्वी, जल, वायु, वनस्पति, रितुओं के चक्र यहां तक मानव की शिक्षा स्मृति और सामान्य लोकधर्म भी अपनी इच्छानुसार संपादित कर दिए जिससे समस्त प्रकृति का च्रक असंतुलित होकर मात्र सत्ता के आधीन होकर रह गया। तब नृसिंह ने शरीर संसार से संबंध विच्छेद करके अर्थात मै मेरा और मेरे लिए की धारणा का संहार करते हुए कर्मयोग ज्ञानयोग तथा भक्तियोग की पुनः पृथ्वी पर स्थापना की।   हिरण्यकशपु ने ब्रहा से जो वर मांगे अर्थात दिन रात्री मे मृत्यु न हो, बहार भीतर, अस्त्र शस्त्र, मानव दानव पशु किसी भी प्रकार से प्रकृति के नियमानुसार मृत्यु न हो इसी मिथक के अवकाश के लिए हरि ने संध्या के समय नरहरि का अवतार लिया  इसीलिए नृसिंह चतुर्दशी के पर्व को संध्या के समय न दिन हो न रात हो के समय मनाया जाता है। ब्रजमंडल के प्रायः सभी मंदिरों व वैष्णव घरों मे नृसिंह चर्तुदर्शी को सायं शालिगा्रम शिला का पंचामृत अभिषेक, विष्णुसहस्त्रनामावली के मंत्र उच्चारण के साथ रात्री जागरण करके संपंन होता है। ब्रज मे जगह जगह गणेश वाराह नृसिंह के मुखौटे लगा कर गली गली नृत्यगान होता है जो पूर्णिमा तक चलता है। मृदंग की थाप पर समाज गायन यथा राग केदार, सारंग, तोडी़ तथा नायकी कानडा़ के स्वरों के साथ नृसिंह जयंती का उत्सव संपूर्ण भारतवर्ष मे मनाया जाता है। पुष्टिमार्ग व निंम्बार्क सम्प्रदाय के मंदिरों मे आज से ही सुगन्धित पुष्पों से सजे फूल बंगलों की शुरुआत होती है जो पूरे गीष्म मे शीतलता का अनुभव कराती है।   व्रत यों तो धार्मिक होते है पर व्रत शब्द से तात्पर्य है आत्मशोधन के लिए किए गए विधिसम्मत उपायों को अपनी परंपरानुसार अपनाए रहना। नृसिंह चर्तुदशी व्रत उत्सव का प्रायोजन दुगुणों का निष्कासन एवं संस्कारों का उदयन है। संस्कार संस्कृति के मार्ग पर व्रत सहायक होते है क्योकि व्रतोत्सवों से संकल्पशक्ति का विकास होता है। जब भक्त प्रभू के सुख के लिये अपने मन की कामनाओं, अभिलाषाओं, उमंगों का विशेष उत्साह और हर्ष के साथ विनियोग करता है तो वह मनोरथ होता है जैसे भक्त प्रहलाद ने नरहरि नृसिंह के लिए किया था कि वह भक्त के लिए पाषाण खंभ से प्रकट हो गए। वास्तम मे भक्त को रसस्वरुप प्रभु प्रतिक्षण अपने अलौकिक सौन्दर्यका, दिव्यातिदिव्य भावों और अर्थो का नया नया बोध करवाते रहते है।   अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करे  मधुकर चतुर्वेदी M.  9917106816

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नई दिल्ली : सूचना और प्रसारण मंत्रालय 14 से 25 मई तक होने वाले 67वें वार्षिक कान फिल्‍म समारोह में भाग लेगा। भारतीय मंडप भाषायी, सांस्‍कृतिक और क्षेत्रीय विविधता के रूप में भारतीय सिनेमा को प्रस्‍तुत करेगा।   सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव बिमल जुल्‍का, फ्रांस में भारतीय राजदूत अरूण के सिंह तथा कान फिल्‍म जगत के निदेशक जेरोम पेलार्ड की उपस्थि‍ति में भारतीय मंडप का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर निर्माता उदय चोपड़ा के उपस्थित रहने की भी संभावना है। वे कान समारोह में दिखाई जाने वाली पहली फिल्‍म ‘ग्रेस ऑफ मोनेको’ के निर्माताओं में से एक हैं। समारोह में भारत की आधिकारिक फिल्‍म ‘तितली’ पर चर्चा होगी। इस चर्चा में फिल्‍म के पात्र और निदेशक कानू बहल भी शामिल होंगे।   इस समारोह में सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए फिल्‍म संबंधी संसाधन मार्ग-निर्देशों का जारी किया जाना एक मुख्‍य भाग होगा। कान समारोह में जारी किए जाने वाले मार्ग-निर्देशों का उद्देश्‍य भारत को फिल्‍म निर्माण के सुयोग्‍य स्‍थल के रूप में प्रस्‍तुत करना है। इन संसाधन मार्ग-निर्देशों में फिल्‍म संबंधी नीतियों, बिक्री और वितरण के लिए फिल्‍मों के बारे में सूचना को सूचीबद्ध किया गया है।   सूचना और प्रसारण मंत्रालय भारतीय मंडप में भारतीय और अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म उद्योग के हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के कई सत्र आयोजित करेगा। भारतीय मंडप में प्रमुख वक्‍ताओं में न्‍यूजीलैंड फिल्‍म आयोग के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)  दाव गिबसन, चीन के लाइट हाउस प्रोडक्‍शन के सीईओ सिंडी शियू, स्‍पेशल ट्रीट्स प्रोडक्‍शन के सीईओ कोलिन ब्रो और ग्रेस ऑफ मोनेको के कलाकारों के भाग लेने की भी आशा है। इस मंडप में हाल में प्रदर्शित भारतीय फिल्‍मों के ट्रेलर और भारतीय फिल्‍म कंपनियों के विवरणिकाएं तथा अन्‍य साहित्‍य भी प्रस्‍तुत किया जाएगा।

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गोवर्धन : तेज धूप और बढ़ती गर्मी में लोगों को घर से निकलना मुसकिल हो रहा है वहीं गिरिराज धाम में परिक्रमार्थी अपनी प्यास बुझाने के लिए बोतल के पानी का सहारा ले परिक्रमा लगा रहे है।

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नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव के लिए मतदान खत्म होते ही तेल कंपनियों ने डीजल के दाम को 1.09 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया।     डीजल के दाम में वृद्धि हर राज्यों में अलग-अलग की गई। जहां दिल्ली में डीजल के दाम वैट सहित 1.22 रुपये बढ़कर 56.71 रुपये प्रति लीटर होगी तो वहीं मुंबई में इसकी कीमत प्रति लीटर 65.21 रुपये हो जाएंगे। हालांकि, पेट्रोल के दामों में कोई वृद्धि नहीं की गई है।

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