मथुरा

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव 2014 के नौ और अंतिम दौर का मतदान खत्म होते ही एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ गए।   वहीं, आज तक सिसेरो के एग्जिट पोल में भी एनडीए की सरकार बनने के संकेत दिख रहे हैं। एग्जिट पोल के मुताबकि एनडीए को 261-283, यूपीए को 110-120 और अन्य 150-162 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है।   इंडिया टीवी के एग्जिट पोल के मुताबिक एनडीए को भारी बहुमत के साथ 289, यूपीए को 101 और अन्य को 163 सीटें मिल रही हैं। एबीपी और नीलसन के मुताबिक एनडीए को 283, कांग्रेस को 110, और अन्य को 150 सीटें मिलने की संभावना हैं।   दूसरी ओर, टाइम्स नाउ के मुताबिक एनडीए को 249 सीटें ही मिलने की उम्मीद है जबकी न्यूज 24 के अनुसार एनडीए को 340 सीटें मिलने की उम्मीद है।

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नई दिल्ली : मसहुर फिल्म अभिनेता सुधिर कुमार का निधन हो गया। उन्होंने सत्तर से अस्सी के दशक में बहुत सारी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों में वह (नेगेटिव) विलन का किरादार निभाया करते थे।   सूत्रों के अनूसार, दिल की बीमारी होने के कारण भगवान दास मूलचंद लुथरिया उर्फ सुधीर की मौत हुई है। बताया जा रहा है की कि उनके फेफड़े में इंफेक्शन हो गया था। सुधीर फिल्ममेकर मिलन लुथरिया के पिता के छोटे भाई हैं।   सुधिर कुमार नें अपने जीवन काल में देव आनंद के साथ 'हरे राम हरे कृष्णा', अमिताभ के साथ 'सत्ते पे सत्ता' और शाहरुख  के साथ 'बादशाह' जैसी सुपर हीट फिल्मों में तथा कई मशहूर बॉलीवुड के हस्तियों के साथ काम किया था।   सूत्रों के अनूसार, बताया जा रहा है की सुधिर जीवन के अंतिम पड़ाव में भी अकेले थे। उन्होंने कभी शादी नहीं की।   साल 2012 में उन्हें भारत रत्न डॉक्टर अम्बेडकर अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका था।

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  पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से चांद पर पहुंचने के बाद पूछा था कि.. वहां(चांद) से अपना देश कैसा लग रहा है?... तो राकेश ने कहा था 'सारे जहा से अच्छा हिंदुस्तान हमारा', उसी तर्ज पर हमने वाराणसी की जनता से पूछा कि.... 2014 का लोकसभा चुनाव कैसा लग रहा है?.....तो वाराणसी की जनता ने कहा कि 'देश का पीएम होगा वैसा काशी चाहेगी जैसा'। वाराणसी के चुनावी रण को देखने के बाद देश का हर नागरिक यही पूछ रहा है कि आखिरकार राजनीति के सभी दिग्गज बाबा भोले की शरण लेने के लिए आतुर क्यों हो गए है। अड़भंगो की नगरी काशी पुरी तरह से चुनावी रंग में रंग चुकी है, चाहे वो किसी भी जाति या समुदाय का व्यक्ति हो सबके जुबान पर बस यही है "हर हर काशी घर घर काशी"। भले ही राजनीतिक पार्टियां कोई भी नारा दें, कितना भी ताकत झोंक दें फिर भी वो काशी की तह तक नहीं पहुंच सकती।   बीजेपी, कांग्रेस, आप, सपा, बसपा और निर्दलीय उम्मीदवार भले ही एक दूसरे से आगे रहने की होड़ में हो...लेकिन उन दिग्गज नेताओं को ये जानकारी नहीं है कि काशी की जनता मस्तमौला होने के साथ-साथ बहुत ही विश्वसनीयता के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी। नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल, अजय राय, कैलाश चौरसिया को शायद काशी के बासिंदे को समझने और तह तक पहुंचने के लिए काशी की जमीन से जुड़ना होगा।     84 घाट, अवघड़, साधु, सात नदी, शिक्षा की राजधानी, हस्तशिल्प, मंदिरों और बाबा भोले की नगरी है काशी। यहां की हर गली और चौराहा अपने आप में किसी खास नाम से जाना जाता है। पूरे देश में सबसे ज्यादा पर्यटकों के लिए लोकप्रिय नगरी है वाराणसी। रामनगर का किला और चुनार का किला यहां की इतिहास को दर्शाता ही नहीं बल्कि काशी को जीवंत करता है। घाटों की बात की जाए तो अस्सी घाट से लेकर रामकृष्ण फाउंडेशन तक के घाट मानो मां गंगा के पांव को पखेरता रहता हो। यहां के एक-एक घाट का इतिहास अपने आप में एक मिशाल है। शाम के समय दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती के समय मंदिरों में घंटो की टन टनाहट एक अलग ही मनोरम दृश्य को दर्शाता है, जो मन को भावविभोर कर देता है। दुर-दुर से आए श्रद्धालुओं को ऐसा दृश्य शायद ही और कहीं देखने को मिलता हो।   खाने पीने की बात की जाए तो ये शहर बनारसी पान, भांग-ठंडई, कचौड़ी-जलेबी, लस्सी, रबड़ी-मलाई, मलईयो, लवंगलाता-दूध के लिए विश्व प्रसिद्ध है काशी। यहां की सुबह के साथ ही हर एक व्यक्ति इन सभी व्यंजनों का मज़ा लेने से चूकना नहीं चाहता। पान के लिए लंका चौराहा, रामनगर की लस्सी, पहलवान का लवंगलाता, कचौड़ी गली की कचौड़ी, गोदौलिया चौराहे का भांग-ठंडई, खोआ गली का रबड़ी-मलाई और मलईयो के लिए विख्यात है।   बनारस ने देश को एक ऐसा प्रधानमंत्री को दिया जो लाल बहादुर शास्त्री नाम से जाने जाते है। जो भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री थे। जवाहरलाल नेहरू के उनके प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान 27 मई, 1964 को देहावसान हो जाने के बाद साफ सुथरी छवि के कारण उन्हे 1964 में देश का प्रधानमंत्री बनाया गया। उन्होंने 9 जून 1964 को भारत के प्रधानमंत्री का पद भार ग्रहण किया। अब देखना ये है कि क्या काशी की जनता इतिहास को दोहराते हुए देश को अगला प्रधानमंत्री देगी।                                                                                        लेखक                                                                                    सुनील कुमार शर्मा

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लुइस एल हे   अपनी मानसिक ऊर्जा को पुराने विचारों को छोड़ने और नए विचारों को अपनाने में लगाना चाहिए। कहें, 'मैं आयोग्य होने की आवश्यकता को छोड़ने के लिए तैयार हूं। मैं जीवन में सर्वोत्तम प्राप्त करने के लिए हकदार हूं, और अब मैं इसे स्वीकार करने के लिए प्यार से अपने आपको अनुमति देता हूं।'   'जब मैं कुछ दिनों तक बार-बार यह शपथ लूंगा तो टाल-मटोल का मेरा बाहरी प्रभाव स्वत: कम होना शुरू हो जाएगा।'   'जब मैं अपने भीतर आत्म-योग्यता का तरीका उत्पन्न कर लूंगा तो मुझे अपने भाग्य को टालने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।'   क्या आप देख रहे हैं कि यह किस प्रकार आपके जीवन के कुछ नकारात्मक विचारों या बाहरी प्रभावों पर लागू हो सकता है? चलिए, अपना समय और ऊर्जा स्वयं को ऐसे कार्यो के लिए कोसने में व्यर्थ करना बंद करें, जिन्हें हम कुछ आंतरिक विचारों के कारण नहीं छोड़ सकते। उन विश्वास को बदलें।   चाहे आप ऐसा किसी भी प्रकार से करें या हम किसी भी विषय में बात कर रहे हों, हम केवल विचारों से जूझ रहे हैं और विचारों को बदला जा सकता है।   जब भी हम किसी स्थिति को बदलना चाहते हैं, हमें ऐसा कहने की आवश्यकता होती है।   'मैं अपने अंदर के उस दृष्टिकोण को छोड़ना चाहता हूं, जो मेरी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है।'   आप जब भी अपनी बीमारी या समस्या के बारे में सोचें तो बार-बार अपने आपसे यह बात कह सकते हैं। आप जिस पल यह कहते हैं, आप पीड़ित वर्ग से निकल जाते हैं। अब आप असहाय नहीं हैं, आप अपनी शक्ति को स्वीकार कर रहे हैं। आप कह रहे हैं, 'मैं यह समझ रहा हूं कि इस स्थिति को मैंने ही उत्पन्न किया है। अब मैं अपनी शक्ति वापस लेता हूं। मैं इस पुराने विचार को छोड़ना और उसे जाने देना चाहता हूं।'   आत्मनिंदा   मेरे पास एक ग्राहक है, जो अपने नकारात्मक विचारों को सहन न कर पाने पर ढेर सारा मक्खन और अपने सामने पड़ने वाली हर चीज खा लेती है। अगले दिन वह शरीर में भारीपन के लिए क्रोधित होती है। जब वह छोटी थी, वह डिनर टेबल पर घूम-घूमकर सबका छोड़ा हुआ भोजन खाती थी और मक्खन का पूरा स्टिक खा जाती थी।   उसके परिजन यह देखकर हंसते थे और उन्हें यह प्यारी लगती थी। उसे अपने परिवार से मिलने वाला यह लगभग इकलौता अनुमोदन था।   जब आप स्वयं को फटकारते हैं, जब आप अपने आपको निम्नस्तरीय देखते हैं, जब आप अपने आप को पीटते हैं तो आप किसके साथ इस प्रकार का व्यवहार कर रहे होते हैं?   हमने अपने लगभग सभी दृष्टिकोण, चाहे वह नकारात्मक हों या सकारात्मक, उस समय ही स्वीकार कर लिए थे, जब हम तीन वर्ष के थे। तब से हमारे अनुभव उसी पर आधारित रहे हैं जो हमने उस समय अपने और जीवन के बारे में स्वीकार और विश्वास किया था। जब हम बहुत छोटे थे तो हमारे साथ जिस प्रकार का व्यवहार था, हम आम तौर पर अपने साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं। आप जिस व्यक्ति को फटकार रहे हैं, वह आपके भीतर का तीन साल का बच्चा है।   यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं, जो डरने और आशंकित होने के लिए अपने आप से क्रोधित हो जाते हैं तो अपने आपको तीन वर्षीय एक बच्चे के रूप में देखें। यदि आपके सामने एक छोटा तीन साल का भयभीत बच्चा होता तो आप क्या करते? क्या आप उस पर क्रोधित होते या आप उसे अपनी बांहों में लेकर दिलासा देते, जब तक कि वह सुरक्षित और सहज नहीं महसूस करने लगता? जब आप छोटे थे तो आपके आसपास मौजूद वयस्कों को यह नहीं मालूम रहा होगा कि उस समय आपको कैसे दिलासा देना है। अब अपने जीवन को आप वयस्क हैं और यदि आप अपने अंदर के बच्चे को दिलासा नहीं दे रहे हैं तो यह वास्तव में बहुत दु:खद है।   अतीत में जो हुआ, वह हो चुका है और अब वह समाप्त हो चुका है। लेकिन यह वर्तमान है और अब आपके पास अपने आपसे ऐसा व्यवहार करने का अवसर है। जैसा व्यवहार आप चाहते थे। एक डरे हुए बच्चे को दिलासा देने की जरूरत होती है, न कि डांटने की। अपने आपको डांटना आपको और भयभीत करेगा और आप किसी की ओर नहीं मुड़ सकते। जब आपके अंदर का बच्चा असुरक्षित महसूस करता है तो बहुत बहुत-सी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। याद कीजिए कि जब आप छोटे थे तो नीचा दिखाए जाने पर आपको कैसा महसूस होता था? आपके अंदर के बच्चे को वैसा ही महसूस होता है।   अपने प्रति दयालु बनें। अपने आपको प्यार करना और स्वीकार करना शुरू करें। उस छोटे बच्चे को अपनी उच्चतम क्षमता में अपने आपको अभिव्यक्त करने के लिए इसी की आवश्यकता होती है।   (प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'यू कैन हील योर लाइफ' से साभार)

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मथुरा : संस्कृति समूह में प्लेसमेन्ट विभाग सदैव छात्रों की नियुक्ति के संबंध में सचेत एवं तत्पर्य रहा है और सफलता से प्रोत्साहित होकर संस्कृति समूह अपने परिषर में 17 एवं 18 को एक ऐसे ही जॉब फेयर का आयोजन कर रहा है।

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मथुरा : जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था व ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में परम् सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के द्वितीय वार्षिक भंडारा सत्संग मेला जय गुरुदेव आश्रम मथुरा में 16 से 21 मई तक वृहत स्तर पर आयोजित किया जा रहा है।

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