मथुरा

जम्मू-काश्मीर : बीजेपी पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने जम्मू के हीरानगर में 'भारत विजय रैली' का शंकनाद किया। रैली में मोदी ने केजरीवाल पर और कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब 'जय जवान जय किसान' की जगह कांग्रेस का नारा मर जवान, मर किसान है। मोदी ने बताया कि वंशवाद के नाम पर कांग्रेस की चार पीढि़यां मौज कर रही हैं। कांग्रेस के शहजादे पर हमला बोलते हुए मोदी ने कहा कि राहुल बोलते हैं कि कांग्रेस एक सोच है जबकि कांग्रेस सोच में पड़ गई है कि ये चायवाला कहां से आ गया। साथ ही मोदी ने बताया कि अगर इस बार एनडीए की सरकार आती है तो वो 60 साल की बर्बादी को 60 महीनों में सुधार देंगे। देश को शासक की नहीं बल्कि एक सेवक की जरुर है। कांग्रेस के साथ-साथ मोदी ने पहली बार केजरीवाल पर भी जमकर निशाना साधा। समीक्षा भारती न्यूज सर्विस

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सैय्यद आदिल शमीम अंद्राबी जब मैं स्कूल में पढ़ता था तो उस समय मेरी विज्ञान की पुस्तक में ष्जलष् नामक एक अध्याय थाए जिसकी आरंभिक पंक्ति थी. पानी.पानी हर तरफए लेकिन पीने को बूंद नहीं। हमारा जीवन बहुत बदल चुका है और हम जीवन के हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का विकास देख रहे हैं। हमारे इर्द.गिर्द इलेक्ट्रानिक उपकरण मौजूद हैंए जिन्हें बिजली की जरूरत होती है। जब बिजली नहीं होतीए तो वे बेकार हो जाते हैं लेकिन तब भी हम उनके बगैर जिंदा रह सकते हैं। अगर एक दिन भी पानी न मिले तो हम जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते। इस समय पृथ्वी ग्रह पर जीवन को बचाए रखने के लिए सबसे बड़ी जरूरत पानी को बचाने की है। संयुक्त राष्ट्र ने स्वच्छ पेय जलए पेय जल की उपलब्धता को बनाए रखनेए पानी को बचानेए ताजे पानी के स्रोतों को बचाने और इसके संबंध में विभिन्न देशों में चलाई जाने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की थी। आज लोगों को यह याद दिलाने की कोशिश की जाती है कि ताजे पानी का महत्व क्या है और कैसे उसके स्रोतों को बचाया जा सकता है। पूरी दुनिया के संगठन साफ पानी और जल स्रोंतों को बचाने के लिए जागरूकता और प्रोत्साहन का कार्य करते हैं। इस अवसर पर वर्तमान समय में पानी संबंधी महत्वपूर्ण मुद्दों पर लोगों का ध्यान भी आकर्षित किया जाता है। भारत की बात की जाए तो यहां प्रचुर मात्रा में बारिश होती है लेकिन आबादी बढ़ने के कारण देश में पानी की कमी महसूस की जा रही है। आबादी बढ़ने के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अधिक इस्तेमाल होता है। जल स्रोतए स्थानीय तालाबए ताल.तलैयाए नदियां और जलाशय प्रदूषित हो रहे हैं और उनका पानी कम हो रहा है। इस समय देश की बढ़ी आबादी को स्वच्छ पेय जल उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा भारत में खेती भी बारिश के भरोसे ही होती है। भारत में खेती की सफलता पानी की उपलब्धता पर ही निर्भर हैए जिसमें बारिश के पानी की अहम भूमिका होती है। अच्छी वर्षा का मतलब अच्छी फसल होता है। वर्षा जल को बचाने की बहुत जरूरत है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसमें कोई तेजाबी तत्व न मिलने पाये क्योंकि इससे पानी और उसके स्रोत प्रदूषित हो जाएंगे। उपर बताई गई बातों के आधार पर आमतौर पर यह कहा जा सकता है कि देश में जल संरक्षण एक बड़ी आवश्यकता है। इससे संबंधित प्रमुख मुद्दों को निम्नलिखित बिन्दुओं में बांटा जा सकता है. शहरी और ग्रामीण घरों में सुरक्षित पेयजल को सुनिश्चित किया जाना सुरक्षित पेयजल सुविधाओं को बनाये रखना शहरों और गांवों में स्वच्छ जल स्रोतों को सुरक्षित और पुनर्स्थापित करना जल संरक्षण जल और ऊर्जा एक दूसरे से संबंधित हैंए इसलिए हमारे ग्रह के जीवन के लिए दोनों आवश्यक हैं। बिजली पैदा करने के लिएए खासतौर से पानी बिजली और ताप बिजली के लिए जल संसाधनों की जरूरत होती है। पानी और ऊर्जा के संबंध को बनाए रखने के लिए जल संरक्षण को बढ़ाने और प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि यह भावी ऊर्जा उत्पादन के लिए भी बहुत जरूरी हैं। बिजली उत्पादन के संबंध में भी जल की कार्य क्षमता बढ़ाने की भी जरूरत है। बिजली उत्पादन के लिए पानी की जरूरत होती है और पानी उपलब्ध करने के लिए बिजली की जरूरत होती है। पानी और बिजली के इस आपसी संबंध के कारण अगर दोनों में से किसी एक की भी कमी हो गई तो दूसरे के लिए समस्या पैदा हो जाती है। अगर बिजली उत्पादन से संबंधित जल स्रोतों की कमी हो जाए तो बिजली उत्पादन में निश्चित तौर पर कमी आ जाएगी। इस समय बिजली बचाने वाले उपकरणों की बेहद आवश्यकता है। यदि उपकरण बिजली बचाएंगे तो इसका मतलब यह हुआ कि पानी भी बचेगा। हममें से ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि पानी बचाने के लिए एक अकेला आदमी क्या कर सकता है। इस तरह के विचार से हम लोग रोज पानी नष्ट कर देते हैं। आज की दुनिया में सभी लोग इस दौड़ में लगे हैं कि हम अपने घरों में बड़े.बड़े गुसलखाने बनवाएए लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि पानी के बिना वह सब बेकार हैं। हम अपनी जरूरत से ज्यादा पानी का इस्तेमाल करते रहते हैं। कम से कम हममें से हर व्यक्ति अपने घरों और कार्यस्थलों में पानी का उचित इस्तेमाल तो कर ही सकता है। कई बार ऐसा देखा जाता है कि सड़क किनारे लगे हुए नलों से पानी बह रहा है और बेकार जा रहा हैए लेकिन हम वहां से गुजर जाते हैं और नल को बंद करने की चिंता नहीं करते। हमें इन विषयों पर सोचना चाहिए और अपने रोज के जीवन में जहां तक संभव हो पानी बचाने की कोशिश करनी चाहिए। बिजली का इस्तेमाल भी जरूरत के हिसाब से करना चाहिए न कि इच्छा के अनुसार। बिजली के उपकरणों को भी जब जरूरत हो तभी इस्तेमाल करना चाहिए। एक बल्ब से ही हमें पर्याप्त रोशनी मिल जाती हैए तो इस बात की क्या जरूरत है कि हम कई लाइटें जलाएं। हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि जब जरूरी न हो तब लाइट और बिजली के अन्य उपकरणों को कम से कम इस्तेमाल किया जाए। ऐसा करके हम न सिर्फ बिजली बचाएंगेए बल्कि पानी भी बचाएंगे। 

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ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा, काष्णर््िा गुरू शरणानन्द जी महाराज व संत विज्ञानाचार्य जी  के सानिध्य में यमुना रक्षक दल यमुना मुक्ति एवं शुद्धि का हर संभव प्रयास कर रहा है। घाटो पर चल रहा सफाई अभियान निरन्तर रूप से जारी है। यमुना भक्तों द्वारा सफाई कार्य में पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है। मंगलवार को सफाई कार्य का जिम्मा उठाते हुये राकेश गुप्ता जी ने जेसीबी व टेक्टर चलवाये।  मंगलवार को गउघाट गिर्राज जी की बगीची पर यमुना रक्षक दल की बैठक आयोजित की गयी जिसमें सैकड़ो यमुना प्रेमियों ने भाग लिया। ’’जो यमुना को साफ करेगा वही देश पर राज करेगा’’ व ’’जो यमुना को लायेगा वही लोकसभा में जायेगा’’ इन नारों के साथ यमुना रक्षक दल की बैठक का प्रारम्भ हुआ। इस बैठक में यमुना मुक्ति के लिये कार्य करने वाले दल को चुनने के मत पर जोर दिया गया। यमुना रक्षक दल के राष्टिय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने कहा कि उपरोक्त नारों के साथ यमुना रक्षक दल के कार्यकर्ता गांव- गांव जनजागरण करेगे। यमुना रक्षक के कार्यकर्ताओं को समूहों में विभाजित कर एक समूह को गांव- गांव यमुना की स्थिति एवं उसके गन्दे रासायनिक जल के कुप्रभावों के परिणामों से अवगत करा लोगों में जनजाग्रति फैलायी जायेगी और दुसरे समुह द्वारा चुनाव आयोग से अनुमति ले  हथिनी कुण्ड से इटावा तक रथयात्रा के माध्यम से जागरूक किया जायेगा। यमुना रक्षक दल एक अराजनैतिक संगठन है और यह किसी भी राजनैतिक दल का न विरोध करती है ना ही समर्थन हमारा दल यमुना और ब्रज विरासत तक ही सीमित है और इस समय हमारा यह कर्तव्य है कि हम यमुना के मुद्दे को उठाये ताकि यमुना फिर कहीं राजनैतिक स्वार्थ की बलि चढकर न रह जाये इसलिये यमुना रक्षक दल द्वारा इस जनकल्याण के मुद्दे को सभी लोगों तक पहुॅचा कर बुलंद कराना होगा और इसके लिये यमुना रक्षक दल के कार्यकर्ताओं द्वारा पर्चे, पम्पलेट , स्टीकर व बैनर के माध्यम से गांव-गांव व शहरों में लोगों को जागरूक किया जायेगा। यमुना रक्षक दल के राष्टिय उपाध्यक्ष राकेश यादव ने कहा कि यमुना सभी की है ब्रज में मां के समान पूज्यानियां है इसबार चुनावों में इसे केवल वोट लेने का साधन मात्र बनकर नहीं रहने दिया जायेगा। अब तो जो यमुना को ब्रज में लायेगा और उसे साफ करेगा वही सरकार में आने का सच्चा अधिकारी है नदियां जीवन दायिनी है जीवन की मूलभूत आवश्यकता जल की मुख्य स्त्रोत है और यदि यही नदिया केवल चुनावी रोटी सेकने का जरिया बनकर रह गयी तो यह जीवन के लिये बड़ा खतरा है इस बार जो यमुना के हित में कार्य करेगा वही ब्रज से जन प्रतिनिधि बनने का अधिकारी है।  यमुना रक्षक दल के राष्टिय संगठन मंत्री रमेश सिसौदिया व राष्टिय सचिव अब्दुल जब्बार ने कहा कि ब्रज की विरासत वन, पर्वत, यमुना, कुण्ड, घाट व गाय आज खतरे में है लेकिन हमारे जनप्रतिनिधियों का ध्यान इधर नहीं रहा। यमुना रक्षक दल सभी ब्रज वासियों से अपील करता है कि ब्रजवासियों जनप्रतिनिधियों से ये सवाल पूछे कि यमुना के लिये उन्होने क्या किया है और आगे भविष्य में उनकी यमुना को लेकर क्या योजना है? और इस कसौटी से पर कसने के बाद ही अपने जनप्रतिनिधी का चुनाव करें।  समाजसेवी पं0 बालमुकुन्द शास्त्री ने कहा कि अब तक जन प्रतिनिधियो द्वारा यमुना का मुद्दा न लोकसभा न ही राज्यसभा में जोरदार तरीके से नहीं उठाया गया  तभी आज यमुना की यह दुर्दशा है पर अब के हमें ऐसे जनप्रतिनिधियों को चुनना होगा जो ब्रज विरासतों व यमुना के मुद्दे को जोरदार तरीके से लोकसभा में उठा सके व उनकी रक्षा कर सके।  इस अवसर पर यमुना रक्षक दल के प्रदेश सचिव हाशिम खान, मंडल अध्यक्ष सुभाष सैनी, शहर अध्यक्ष पंकज चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष महेन्द्र राजपूत, नगर प्रभारी त्रिलोकी व्याय, वृन्दावन अध्यक्ष श्रीदास प्रजापति, नगर महामंत्री शरद वर्मा, गंगेश्वर प्रसाद एडवोकेट, के.सी गौड़ , अग्रवाल, महन्त राधाचरण दास, लता चैहान, पंकज पंडित, मदन व्यास, विशन स्वरूप, अनिल चतुर्वेदी, सत्यप्रकाश शर्मा, दुर्गी चाचा, सुनील अग्रवाल, गोलू शर्मा, विवेक शर्मा, राजू पेन्टर , भरत सिंह सिसौदिया, मूलचन्द सिसौदिया रतन सिंह नम्वर दार , भोला पंडित , बब्बू पंडित, आदि उपस्थित थे।     

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वाराणसी : आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल आज वाराणसी पहुचने के बाद रैली को संबोधित करेंगे। सूत्रों कि माना तो बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी उनके निशाने पर होंगे। केजरीवाल की रैली में शामिल होने के लिए यूपी के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी लोग बनारस पहुंच रहे हैं। आप के कार्यकर्ता बनारस में रैली को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। रैली के दौरान केजरीवाल जनता से राय लेंगे कि वो वाराणसी कि सीट से चुनाव लड़ें या नहीं। भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी वाराणसी से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।समीक्षा भारती न्यूज सर्विस

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नई दिल्ली रू आम आदमी पार्टी की शिकायत के बाद एक अप्रैल से गैस की कीमतें बढ़ाने के सरकार के इस फैसले पर चुनाव आयोग ने लगाम लगा दी है। इस फैसले के बाद श्आपश् प्रमुख ने ट्वीट कर चुनाव आयोग को धन्यवाद दिया।   वहीं रिलायंस का कहना है कि गैस की कीमतों को लेकर बहुत सारे भ्रम फैलाए जा रहे हैं। रिलायंस ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि गैस के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ जाएगी ये बात कहने वाले लोग दरअसल लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।समीक्षा भारती न्यूज सर्विस

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नई दिल्ली रू लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अधिक से अधिक मतदाताओं तक पहुंच बनाने और मोदी ब्रांड को और भी आक्रामक रूप से पेश करने के लिए बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी 26 से देश भर में 150 से ज्यादा रैलियों को संबोधित करेंगे।   मोदी काफी लंबे समय से देश भर में घूम कर चुनावी रैलियां कर रहे हैं लेकिनए चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद बीजेपी इस अंतिम चरण में मोदी फॉर पीएम की अपनी मुहिम पूरे दम.खम से बढ़ाना चाहती है। मोदी ब्रांड को और भी आक्रामक रूप से जनता के सामने पेश करने के लिए पार्टी ने रणनीति तैयार की है। सूत्रों के अनुसार मोदी के इस अभियान की शुरुआत जम्मू.कश्मीर के उधमपुर में रैली करने से होगी। इसके बाद मोदी उत्तर प्रदेशए झारखंड से लेकर असम में अलग.अलग जगहों पर रैली  करेंगे।   चुनाव प्रचार के अगले दौर में नरेंद्र मोदी करेंगे 150 रैलियां 

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