मथुरा

नई दिल्ली रू  देशभर में धूमधाम से रंगों के त्योहार होली का जश्‍न मनाया जा रहा है। हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है। हर बार की ही तरह सुबह.सवेरे से ही लोगों पर होली का खुमार चढ़ने लगा है। बच्चेए युवा रंगों में रंगे नजर आ रहे हैं। लोग एक.दूसरे पर रंग.गुलाल डाल रहे हैं। देशवासियों के साथ.साथ विदेशी सैलानी भी इस त्‍योहार को मना रहे हैं।   बीजेपी के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने होली की बधाई देने के साथ ही लोगों से देश का भाग्य बदलने की अपील भी की। वहीं रविवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री ने लोगों को होली की शुभकामनाएं भी दीं। दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने लोगों को रंगो के त्योहार पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली के तमाम रंग भारत की विविधता में एकता को दर्शाते हैं और यही हमारी मजबूती है।

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सविता पांडे नंदगांव के हुरिहारे बरसाना की गोपिकाओं के साथ होली खेलने के लिए सजने लगे हैं। अपनी ढालों को सजाने लगे हैं। गोपिकाओं की लाठियों के प्रहार को सहने के लिए चिलम पीते हैंए भांग पीते हैं और हुक्के गुड़गुड़ाते हैं। ढोल.मंजीरों की ताल पर होली रसिया गाते बरसाना पहुंचते हैं।  गोपियां लहंगा. परिया पहने हुई हैं। आभूषण उनकी शोभा बढ़ा रहे हैं। उनकी आंखों में काजलए हाथों में मेहंदी और पैरों में महावर सज रहे हैं। रंग. अबीर.गुलाल बरस रहे हैं। इनसे सराबोर हुरिहारों और गोपिकाओं के बीच हंसी.मजाक चलता है। यह ठिठोली होली है।  इस ठिठोली और होली के बाद लंबे.लंबे घूंघटों की आड़ से गोपिकाएं नंदगांव के हुरिहारों पर लाठियों से प्रहार करती हैं। यह लठमार होली है। इसमें लाठियों से भी रस रंग बरसता है। बरसारना में होली ऐसे ही रस बरसाती है। बरसाना की होली हमारी प्राचीन सभ्यता.संस्कृति और परंपरा का अप्रतिम उदहारण है। होली शास्न्निय है। कहीं रघुबिरा अवध में होली खेलते हैए तो कहीं कृष्ण गोपियों संग बरजोरी करते दिखते हैं।  होली हमारी अदिम पहचान है। होली रंग है। होली रस है। होली ठिठोली है। होली रंग जाने और रंग देने का भाव है। होली जीवन  का अथाह उल्लास है। नाचना.गाना हुड़दंग करना है। होली सबका त्योहार है। सभी के लिए रम जाने का उत्सव। होली का खुमार बसंत.पंचमी के खत्म होते ही छाने लगता है। ढोल.मजीरे.घंटे.घड़ियालों के साथ होली.फाग.कबिरा.जोगीड़ा गाना आरंभ हो जाता है। इस तरह होली की मस्ती कई दिन पहले ही चढ़ जाती है और कई दिन बाद तक जारी रहती है। गुलाल की झोली और रंग की पिचकारी होली बनकर मन को हराकर जाते हैं। होली हमारा नववर्ष भी है। होलिका दहन के साथ ही पुराना वर्ष भस्मीभूत हो जाता है। नए वर्ष के साथ ही हम भी नए हो उठते हैंण्ण्ण् नई हवाए नई फसलए नई बारिशए नए.नए फूल.पौधों के साथ ही हमारा मन भी नया होने लगता है। रंगीन हो उठता है। आम की तरह बौरा जाता है। भौंरों की तरह गुनगुनाने लगता है। एक अद्भुत रस.रंग में डूब जाना चाहता है। यही रंगीनीए यही बौराहट होली है। होली के भाव को निराला की इस कविता से समझा जा सकता हैरू श्नयनों के डोरे लाल गुलाल भरेए खेलि होली जागी रात सेज प्रिय पति संग रति सनेह रंग होली बीती रात सुखद बातों में प्राप्त पवन प्रिय डोली उठी सभाल बालए मुख लट पट दीप बुझा हंस बोली रही यह एक ठिठोली।श् इस तरह होली स्त्री.पुरुष के मनोभावों में समाकर बिना रंग और गुलाल की रति सनेह रंग की होली बन जाती है। फागुन मास की पूर्णिमा तक मदन जवान रहता है और मन में हुलास बनकर घुमड़ता रहता है। यह मदन रस होली है। त्योहारों में त्योहार है होली। शीत ऋतु के बाद बसंती हवा आलस्यता और ठहराव के साथ बहती है कि होली आ जाती है। सतरंगी रंग.अबीर.गुलाल हमारे रोम.रोम में समा मस्ती का गीत गाने लगते हैं। मनुष्य.मनुष्य की ओर मुखातिब होता है और सारे बाहरी आवरणों को दूर फेंक ऊंच.नीचए जाति.पातिए अमीर.गरीबए समाज.धर्म सबको भूलकर कहता है . श्आओ हम रंग जाएं। एक.दूजे को रंग डालें। यह प्रेम रंग कभी न छूटे। हमें निर्मल कर जाए।श् और एक आदिम गंध होली के रंगों में घुलमिल जाती है। आदमी आदमी. हो जाता है। चहरे पर पुते रंग उसकी व्यक्तिगत पहचान भूला देते हैं। रंगों में सराबोर इंसान असामाजिक हो जाता है। सारी औपचारिकताओं को पार कर जाता हैण्ण्ण् ष्होलीष् हो जाता है। देशभर में अपने विभिन्न रूपों में होने के बावजूद होली एक है। होली का भाव एक है। टेसूए केसरए गेंदाए गुलाब एक है। लेकिन आज की तेज रफ्तार जिंदगी ने हमसे जाने क्या चुरा लिया है कि होली का सारा उत्साह कम होता जा रहा है। मठरीए गलियोंए दही.बड़ोंए पुओं का स्वाद जाने कहां बिलाता जा रहा है। फागए जोगीड़ाए कबिरा रागिनी के बोल किसे याद होंगे आजघ् उनकी जगह शोर मचाते कैसेटों के फूहड़ संगीत ने ली है। यह आज की डिमांड है। आज होली ष्होली मिलनष् हो गई है। होली के रंग इतने पक्के हो गए हैं कि त्वचा छिल जाए आपका साथ नहीं छोड़ते। हम इतने छुई.मुई हो गए हैं कि रंगों से खुद को बचाने के लिए हाय. तौबा मचा देते हैं। हमारे कपड़े इतने कीमती और धुले हैं कि रंगों की बौछार सह ही नहीं पाते हैं। यह कामरस तो जाने कब अश्लील बन गया। नंगा और बाजारू हो गया। अब होली वसन्तोत्सव या मदनोत्सव नहीं रह गई है। हमारे मन में उमंग जगाने वाला मदन रस अब नहीं बरसता। होली औपचारिकता हैण्ण्ण् छुट्टी का एक दिन। पार्टी का दिन। डीजे की धुनों पर नाचने और नचाने का दिन। पीने.पिलाने का रिद्मिक डे। राम के हाथ की कनक पिचकारी प्लास्टिक के खिलौनों में तब्दील हो गई है। लक्ष्मण के हाथ का अबीरा रासायनिक और घातक पदार्थों का चूरा बन गया है। कृष्ण गोपियों संग प्रेम भरी बरजोरी नहीं करते। सीधे चीर.हरण पर उतारू हो जाते हैं। होली को लेकर पद्माकर के सवैये मुंह चिढ़ाते नजर आते हैं। एक सवैये में होली के उल्लास का चित्रण करते हुए पद्माकर कहते हैरू श्फाग की भीर अभीरन ते गहि गोविदै लै गई भीतर गोरी भाई करी पद्माकर ऊपर नाई अबीर की झोरी छीनि पीताम्बर कम्बर तें सुविदा दई मीड़ि कपोलनि रोरी। नैन नचाय कह्यो मुसकाई लला फिर आइयो खेलन होरी।श् भाव की गहनता से रंग जाने का यह दुर्लभ चित्रण मानवीय संदर्भ से भरा हुआ है और आज के समय में अप्रांसगिक जान पड़ता है। फिर भी होली होली है। अभिव्यति और मौज.मस्ती के तमाम साधनों के बदलने के बीच भी स्वाभाविकता की तरह कहीं न कहीं दिख ही जाती है। संगीत है। गीत है। नृत्य हैण्ण्ण् और होली है। होली का दिन है। रंगों में सराबोर लिपे.पुते चेहरों वाले बच्चे कैसेटों की धुन पर नाच रहे हैं। उनके कुर्ते और मैले.कुचैले कपड़े तार.तार हो गए हैं। टिनों.डब्बों को पीटते गली.गली घूम रहे हैं। ये बच्चे होली की तरह मस्त और बिंदास हैं। पवित्र और निर्मल हैं।  उम्मीद हैए ये बच्चे इसी तरह होली की मस्ती और उल्लास बचा लेंगे। थोड़ी.थोड़ी होली अपने मनों मे समेट लेंगे। अबीर गुलाल की झोलियों और फटी जेबों में भर लेंगे होली। होली इसी तरह उनके गंदले बालों में रंग और नंगे पैरों में जोश भरती रहेगी। होली को बचाकर रखने वाले इन बच्चों की मुस्कुराहट में थोड़ी होली जरूर बची रहेगी। उम्मीदभरे ये बच्चे होली की हुड़दंग को अपनी मुट्ठियों और बंद पलकों में समेट लाएंगे। कैलेंडरों मे टांग देंगे। अगले बरस जब सोए होंगे होली चुपके.चुपके इनके कानों मे कूकेगी। ये बच्चे उठेंगे और होली बिखेर देंगे। मन हर्षित सा रंग में डूबा हुल्लड़ मचाते इन बच्चों पर मोहित हो रहा है कि नन्ही बच्ची अपनी छोटी सी पिचकारी में भरा रंग डाल जाती है और तोतली आवाज में कहती है . श्बुरा न मानो होली हैश् यह होली बचाने का उसका नन्हा प्रयास है। हम दोनों हंस रहे हैं। उसकी हंसीए पिचकारी से झरता रंग और मेरी आंखों से झरती नमी होली है। ;ैंउपोीं ठींतजप छमूे ैमतअपबमद्ध

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मथुरा : भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी विशाल चौहान के मार्ग निर्देशन में केआर गर्ल्र्स पीजी कॉलेज के सभागार में मतदाता जागरूकता अभियान (स्वीप) के अंतर्गत विभिन्न महाविद्यालयों, विद्यालयों, स्कूली छात्र छात्राओं एवं आम जनता में मतदान को प्रेरित कर जागरूकता लाने के उद्देश्य से मतदाता जागरूकता संबंधी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।   मुख्य विकास अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल के नेतृत्व में चलाए जा रहे इन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाता सूची में छूटे हुए पात्र व्यक्तियों को अपना नाम शामिल कराने तथा मतदान के समय अपने मत का प्रयोग आवश्यक रूप से करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि समाचार पत्रों, टीवी चैनलो, विद्यालयों में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं, स्लोगनों, पोस्टर, बैनरो, सांस्कृतिक कार्यक्रमो, छविगृहो में स्लाइडो के माध्यम से, नुक्कड नाटकों आदि के द्वारा गांव, ब्लाक, तहसीलो, विद्यालयो में जा जाकर मतदाता को जागरूक किया जा रहा है जिसे मतदान का प्रतिशत बढ सके।   नगर मजिस्ट्रेट तथा कार्यक्रम के प्रभारी राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि स्वीप कार्यक्रमों के अंतर्गत यह जागरूकता अभियान कार्यक्रम लगातार कई महीनो से चलाए जा रहे है तथा आगे भी निश्चित समय तक चलाए जाते रहेंगे ताकि पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम अंकित करा सके और मतदान के समय मतदान में अपनी पूर्ण जिम्मेदारी समझते हुए मत का प्रयोग करें। उन्होंने यह भी बताया कि इस स्वीप कार्यक्रम के अंतर्गत 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले युवा मतदाताओ को इस कार्यक्रम से विद्यालयो के माध्यम से जोड़ा गया तथा उनके फार्म 6 भरवाकर उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज कराए गए इसी का यह परिणाम है कि हम अपने लक्ष्य को पाने में पूर्णरूपेण सफल रहे है।   इस अवसर पर एमवीडीए के सचिव श्याम बहादुर सिंह, स्वीप समन्वयक डॉ. प्रतिभा गुप्ता, कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आशा नूतन कुलश्रेष्ठ, महाविद्यालय के समस्त प्रवक्तागण और छात्राओ ने अधिक संख्या में अपनी प्रतिभागिता की। कार्यक्रम में कैंपस एम्बेसडरो द्वारा युवा मतदाताओ को प्रेरित करते हुए अपने संदेश भी दिए।

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मथुरा रू जिला सेवा.योजना अधिकारी ने अवगत कराया है कि जिला सेवा.योजना कार्यालय मथुरा में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गो के लिए संचालित शिक्षण एवं मार्गदर्शन केन्द्र के एक वर्षीय कार्यालय प्रबंध प्रशिक्षण का नया सत्र एक अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है।   कार्यालय प्रबंध प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में समूह श्गश् परीक्षाओं की सघन तैयारी हेतु टाइपिंग के अतिरिक्त कम्प्यूटर सामान्य हिन्दीए गणित सामान्य अंग्रेजीए सचिवीय पद्धति और तर्कशक्ति योग्यता ;रीजिनिंगद्ध संबंधी सघन प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रवेश हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इण्टर मीडिएट है उ़़च्च शैक्षिक योग्यता वाले अभ्यर्थियों को वरीयता प्रदान की जाएगी। आयु सीमा दिनांक एक अप्रैल 2014 को 18 से 35 वर्ष होनी आवश्यक है।   प्रवेश के लिए इच्छुक अभ्यर्थी 24 मार्च तक अपना आवेदन पत्र निर्धारित प्रारूप पर जमा करा सकते है। आवेदन पत्र जिला सेवा.योजना कार्यालयए आईटीआई परिसर वृन्दावन रोड मथुरा में कक्ष सात में उपलब्ध है। प्रवेश के लिए साक्षात्कार अनुसूचित जातिए अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों का 25 मार्च और  पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों का 26 मार्च को जिला सेवायोजना कार्यालय आईटीआई परिसर वृन्दावन रोड मथुरा में संपन्न होगा।

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आज गउघाट स्थित गिर्राज जी की बगीची में यमुना रक्षक दल के तत्वाधान में होली मिलन महोत्सव का धूमधाम से आयोजन किया गया। होली मिलन महोत्सव की अध्यक्षता संत जयकृष्ण दास ने की इस महोत्सव में गउघाट निवासियों व यमुना भक्तों भाग ले होली के गीत व गुलाल की फुहार उडायी। सभी ने एक दसरे के गले लग गुलाल लगा एकता व भाईचारे की भावना को बढावा दिया। गिर्राज जी की बगीची में सांय 4 बजे से होली मिलन महोत्सव का शुभारम्भ हुआ। उत्सव का प्रारम्भ गणेश वन्दना के साथ किया गया उसके बाद भक्तों द्वारा होली के गीत गाये गये व फूलों एंव  गुलाल की होली खेली गयी। कार्यक्रम के अन्त में भक्तों द्वारा प्रसाद रूप् में ठण्डाई ग्रहण कर तन मन दोनों को ठण्डक पहुॅचायी गयी।यमुना रक्षक दल के राष्टिय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने कहा कि होली हिन्दुओं का मुख्य पवित्र त्यौहार है और इसकी त्यौहार की पवित्रता बरकरार रखते हुये आपसी वैमनुषता को भुलाते हुये नशा मुक्त होली का त्यौहार का आनन्द लेना है। सभी ब्रजवासियों को होली के त्यौहार की यमुना रक्षक दल की ओर से  हार्दिक शुभकामनायें।  इस अवसर पर विशनचन्द अग्रवाल, कल्याण दास अग्रवाल, यमुना रक्षक दल के प्रदेश उपाध्यक्ष  रूपकिशोर यादव, नगर प्रभारी त्रिलोकी व्यास, शिवदीप अग्रवाल, गजेन्द्र यादव, विजय अग्रवाल, रवि यादव, नितिन अग्रवाल, नितान्शु अग्रवाल, मदन व्यास, एडवोकेट गंगे गुरू, पंकज पंडित, गोलू शर्मा, शरद वर्मा, विवेक शर्मा, मदन व्यास, राजू पेन्टर, बब्बू पंडित, अनिल चतुर्वेदी, नरेन्द्र सांवरिया पवन चैधरी  आदि उपस्थित थे।   

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नई दिल्ली : लोक सभा चुनाव नजदीक आ रहा है। वही बीजेपी में सीटों को लेकर खीचातानी मची हूई हैं। बीजेपी की चुनाव समिति की बैठक के दौरान आज चौंथी लिस्ट के साथ पार्टी दिल्ली और यूपी की सीटों का ऐलान कर सकती है। सूत्रो के अनुसार बैठक में पार्टी वाराणसी सीट के उम्मीदवार का ऐलान कर सकती है। इसी कारण सभी की निगाहें चुनाव समिति की बैठक पर टिकी हुई हैं। अगर वाराणसी से मोदी के नाम का ऐलान होता है। तो मुरली मनोहर जोशी को कानपुर की सीट दी जाएगी। इसी तरह लखनऊ सीट पर भी सबकी नजर होगी, क्योंकि वहां से बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन मौजूदा सांसद लाल जी टंडन ने कहा था कि ये सीट सिर्फ वो मोदी के लिए छोड़ेंगे। इसके साथ ही खबरें ये भी हैं कि विनोद खन्ना गुरूदास पुर, शत्रुघ्न सिंहा दिल्ली तो अमृतसर से जेटली को टिकट मिल सकता है।

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नई दिल्ली रू लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हेंगऑउट के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बात की। हैंगऑउट के जरिए कार्यकर्तायों से बातचीत में राहुल ने कहा कि हमें लोकसभा चुनावों के लिए आक्रामक प्रचार करने की जरूरत है।   उन्होंने कहा कि हमें आरटीआईए मनरेगाए राईट टू फूड जैसी योजनाओं के बारे में लोगों को बताना होगा। राहुल ने कहा कि पार्टी से जुड़े सभी विधायकए कार्यकर्ता पार्टी में अपनी बात रखेंए ऐसा करने से पार्टी में बदलाव आएगा और पार्टी को मजबूती मिलेगी। राहुल ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि पिछले चुनाव में विपक्ष आरटीआई से हार गया था और इस बार विपक्ष राईट टू फूड से डरा हुआ है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि यदि हम कांग्रेस की योजनाओं की जानकारी सही से लोगों तक पहुंचाने में सफल हुए तो हम 200 सीटों जीत सकते हैं।

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ब्रज कला केन्द्र दिल्ली द्वारा आयोजित होली मिलन महोत्सव में यमुना रक्षक दल के राष्टिय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास जी को ब्रज कला केन्द्र द्वारा कुनाल गर्ग की स्मृति में ब्रज विभूति सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उनके द्वारा किये जा रहे अतुलनीय समाजिक कार्यों के लिये दिया गया। उनके द्वारा प्राचीन पहाडियों के खनन कार्य को बन्द कराने में सहयोग, ब्रज को हरितमा युक्त करने के उद्देश्य से वृक्षारोपण यात्रा तथा यमुना की मुक्ति एवं शुद्धि के लिये अखण्ड हरिनाम संकीर्तन, रथयात्रा, नौका यात्रा एवं मार्च 2013 की लाखों यमुना भक्तों की ऐतिहासिक यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा व वर्तमान में घाटों की रक्षा के लिये चल रहे सफाई अभियान आदि आन्दोलन का सफल संचालन हेतु संत को दिल्ली में ब्रज कला केन्द्र के द्वारा ब्रज विभूति सम्मान 2014 से सम्मानित किया गया। ब्रज कला केन्द्र के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि ब्रज की धरोहरों की रक्षा हेतु जो महानुभाव सतत प्रयासरत है उन सभी का ब्रज कला केन्द्र सम्मान करता है। ब्रज की संस्कृति की रक्षा कर हम सबकों उसका वर्चस्व विश्व में स्थापित करना है। ब्रज की धरोहरों में मुख्य यमुना मां आज भंयकर दुर्दशा से जूझ रही है उनके सम्मान व स्वरूप की रक्षा हेतु यमुना के स्वच्छ अविरल रूप को ब्रज में लाने हेतु यमुना रक्षक दल के राष्टिय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास सतत् प्रयासरत है उनके द्वारा समाज के लिये किये गये कार्य अतुलनिय है  आज उनको इस सम्मान से सम्मानित कर हम गर्व की अनुभूति कर रहे है। यमुना रक्षक दल के राष्टिय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने कहा कि ब्रज के विरक्त संत पूज्य रमेश बाबा महाराज की कृपा से उन्हे ये सम्मान प्राप्त हुआ है। वे इस ब्रज विभूति सम्मान के योग्य नहीं है क्योंकि अभी ब्रज की शान यमुुना हथिनीकुण्ड पर बंधक है हमारे द्वारा किया जा रहा कार्य अभी पुर्ण नहीं हुआ है। ब्रजवासियों को यमुना के प्रति जाग्रत किया जा रहा है आगे पूर्व से बडा आन्दोलन यमुना की मुक्ति के लिये किया जायेगा। ब्रज में यमुना जल आने तक यमुना की लडाई चलती रहेगी।इस सम्मान से आज सम्पूर्ण यमुना रक्षक दल व वे सभी यमुना भक्त नवाजे गये जिन्होने यमुना आन्दोलन में सहयोग किया है और कर रहे है। यमुना रक्षक दल सभी से अपील करता है कि आप सब भी यमुना आन्दोलन में उसकी शुद्धि एवं मुक्ति के लिये सहयोग प्रदान करें। ठस अवसर पर ब्रज कला केन्द्र के विशिष्ट संरक्षक वासुदेव गर्ग, श्री मती मीरा गोयल, श्री नगेन्द्र प्रकाश भार्गव, विष्णु प्रकाश गोयल, राजेन्द्र भगत जी, मुरारी लाल गर्ग, महेशचन्द्र अग्रवाल, हरिदेव चतुर्वेदी।  

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हिन्दी और ब्रजभाषा के महान् साहित्यकारए हास्य रसावतारए पùमी गोपाल प्रसाद व्यास के जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में हिन्दी भवन दिल्ली में महारासए मनोहारी मयूर नृत्य और फूलों की होली देखकर राजधानी के शीर्षस्थ कविए साहित्यकारए पत्रकार और रंगकर्मी रस विभोर हो उठे।   स्वास्त्तिक रंगमंछल मथुरा के कलाकारों द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार श्रीमती वन्दना सिंह के नेतृत्व मंे प्रस्तुत कार्यक्रम के सन्दर्भ में संयोजक एवं उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि महारास भगवान् श्रीकृष्ण की काम जयी तथा ब्रज गोपिकाओं के मान भंग की वह लीला हे जिसमें श्रीकृष्ण के प्रति ब्रज गोपिकाओं की निश्छल प्रीतिए श्रीकृष्ण के वियोग में विरह दृ व्यथा और महारास में प्रत्येक गोपी की श्रीकृष्ण के साथ महारास में नृत्य करने की अनुभूति का चित्रण किया गया है।   उन्होंने यह भी कहा कि महारास की यह प्रस्तुति श्री गोपाल प्रसाद व्यास की काव्य दृ कृति ष्रास रसामृतष् से उत्प्रेरित है। कार्यक्रम की निर्देशक श्रीमती वन्दना सिंह ने बताया कि यह प्रस्तुति मात्र महारास न होकर ब्रजराज रासेश्वर कृष्ण और रासेश्वरी श्री राधा के प्रति सभी कलाकारों की भावांजलि है। हिन्दी भवन के महामंत्री तथा सुप्रसिद्ध हास्य दृ व्यंग कवि गोविन्द व्यास ने व्यास ने मोहन स्वरूप भाटिया तथा श्रीमती वन्दना सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें उत्तरीय उढ़ाकर तथा प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।     महारास की प्रभावी के पश्चात् बरसाना के निकट स्थित मोर कुटी में मोरों का नृत्य देखने गईं राधा जी मोर न मिलने पर जब उदास हो उठीं तो ष्कान्हा मोर बनि आयौष् के साथ श्रीकृष्ण ने स्वयं मोर बनकर राधाजी को प्रसन्न किया। और कलाकारों ने इस भाव को मनोहारी मयूर नृत्य के रूप में मंचित कर खचाखच भरे सभागार में उपस्थित दर्शकों को आनान्दित कर दिया। कार्यक्रम श्रंखला में कलाकारों ने सतरंगी फूलों साथ इन्द्रधनुषी होली की प्रस्तुति की जिसके प्रथम चरण में लठामार होलीए ष्रसिया कूँ नारि बनावो रीष् में कृष्ण को चूनरी पहना कर नारी बना दिया और द्वितीय चरण में गोपियों ने फूलों से होली खेलते हुए इतने फूल बरसाये कि राधा दृ कृष्ण नख से शिख तक फूलों से ढक गये और जब उन्होंने उन फूलों को उछाला तो मंच ही नहीं पूरा सभागार फूलों से महक उठा। सभागार में उपस्थित महिलाएँ तो स्वतः प्रेरणा से मंच पर आ गईं और राधा दृ कृष्ण के स्वरूपों पर फूल बरसाने लगीं तो हिन्दी भवन का यह मंच राधा दृ कृष्ण की लीला स्थली बन गया। कार्यक्रम के समापन पर दर्शक इतने भाव दृ विभोर थे कि उनके मन में राधा दृ कृष्ण की लीलाओं के दर्शक की अतृप्त प्यास बनी रही।   कार्यक्रम के समापन पर अनेक दर्शकों ने मंच पर आकर भावुक स्वरों में कहा कि उन्हें हर क्षण यह अनुभव हुआ कि वे द्वापर युग में राधा दृ कृष्ण की लीलाओं का दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं। अन्त में सभी कलाकारों को प्रशस्ति दृ पत्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान किये गये और विहारी जी के प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। समारोह में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित विद्वान डा0 रवीन्द्र नागरए राजधानी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार वीरेन्द्र प्रभाकरए शीला झुनझुनवालाए शेरजंग गर्गए कमला सिंघवीए प्रदीप पन्तए प्रेम जन्मेजयए अंजलि भारद्वाजएए रत्ना कौशिकए हरी शंकर बर्मनए निर्मला जैनए चन्द्र मोहनए मधुकान्त वत्सए रामनिवास जाजू रमा पांडेय आदि ने एक स्वर से श्रीमती वन्दना सिंह की मुक्त कंठ से सराहना की।  

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नई दिल्ली : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत पेट्रोलियम नियोजन और विश्लेषण प्रकोष्ठ द्वारा संकलित प्रकाशित सूचना के अनुसार कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत  12 मार्च को घटकर 105.05 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि पिछले कारोबारी दिवस 11 मार्च को 105.50 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल थी। रुपये के संदर्भ में कच्चे तेल की कीमत में 11 मार्च को 6403.85 रुपये प्रति बैरल की तुलना में 12 मार्च को 6417.50 रुपये प्रति बैरल हो गई। ऐसा डॉलर के संदर्भ में रुपये के मूल्य में कमी के कारण हुआ। रुपया 12 मार्च को 61.09 रुपये प्रति अमरीकी डॉलर था। पिछले कारोबारी दिवस 11 मार्च को रुपये की कीमत 60.70 रुपये प्रति अमरीकी डॉलर था। समीक्षा भारती न्यूज सर्विस  

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