कृषि / व्यापार / बचत

पिछले एक दशक में भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के लिए सुलभ, सरल और सुरक्षित भुगतान प्रणाली का निर्माण करना है।

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कैमरा घूमता है। पर्दे पर एक भव्य हवेली दिखाई देती है। मोटे-से सेठजी अपनी गद्दी पर बैठे हैं। आसपास बही-खाते, तिजोरियां और रुपयों के बक्से रखे हैं। पास में पुराने हिन्दी सिनेमा के परिचित मुनीमजी खड़े हैं, एक्टर कन्हैया लाल, चेहरे पर चालाक मुस्कान और हाथ में मोटा हिसाब-किताब...

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भारतीय रिज़र्व बैंक की नियामक निगरानी में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा 25 अगस्त, 2016 को आरंभ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस, यानी यूपीआई, के दस साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान, यूपीआई भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र की रीढ़ और वित्तीय समावेशन का अहम चालक बनकर उभरा है...

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भारत के खेतों ने कृषि विकास को निरंतर जारी रखा है, लेकिन दीर्घकालिक उत्पादकता स्वस्थ मृदा और सुदृढ़ इकोसिस्टम पर निर्भर करती है। ‘पुनर्योजी कृषि’ मृदा की जीवन-शक्ति को बहाल करने, जैव-विविधता को बेहतर बनाने और जलवायु संबंधी दबावों से निपटने की क्षमता को मजबूत करने का एक रास्ता प्रदान करती है।

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भारत का नारियल क्षेत्र ग्रामीण आजीविका, कृषि विकास और सांस्कृतिक परंपराओं को संबल प्रदान करता है। लगभग 10 मिलियन किसानों सहित करीब 30 मिलियन लोग इस क्षेत्र पर निर्भर हैं...

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लैंडमार्क कार्स एक ऐसी कंपनी है जो भारत के ऑटो रिटेल सेक्टर में धीरे-धीरे अपनी मज़बूत पहचान बना रही है। यह सिर्फ़ कार बेचने का कारोबार नहीं, बल्कि एक पूरे इकोसिस्टम को गढ़ने की दिशा में काम कर रही है...

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ईटर्नल का शेयर 600 से ऊपर के पी/ई अनुपात पर ट्रेड करता है, एक वैल्यूएशन जो बेदाग़ निष्पादन की मांग करता है। निवेशक सिर्फ़ कंपनी में नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल उपभोक्ता भविष्य के विज़न में निवेश कर रहे हैं।

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ज़ाइडस वेलनेस इस समय बाज़ार में एक ऐसी कहानी लगती है, जहां तेज़ी और सावधानी दोनों साथ‑साथ चल रहे हैं। शेयर लगभग ₹580 तक पहुंच चुका है, 52‑सप्ताह की ऊंचाई को छूते हुए, और यह विस्तार योजनाओं तथा निवेशकों के भरोसे की लहर पर सवार है...

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पूर्वोत्तर राज्य असम के कोयला क्षेत्र से बरामद जीवाश्म पत्तियों से पता चला है कि अपनी सुगंध के लिए प्रसिद्ध केवड़े का पौधा, जिसका उपयोग मिठाइयों, पारंपरिक चिकित्सा और मंदिरों में भी किया जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप में कम से कम 24 मिलियन वर्षों से अस्तित्‍व में है और भारत के प्राचीन उष्णकटिबंधीय जंगलों अब भी मौजूद है...

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फारस की खाड़ी का आसमान अब नीला नहीं रहा है। धुएं से सना, बैंगनी और बोझिल दिखता है। चालीस दिन तक चली जंग ने ज़मीन ही नहीं, फिज़ा को भी ज़ख़्मी कर दिया है।

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