कृषि / व्यापार / बचत

भारत का इतिहास स्थिरता, समृद्धि और वैश्विक प्रभाव के लिए वाणिज्य की शक्ति का एक जीता-जागता सबूत है। प्राचीन व्यापार मार्गों से लेकर आधुनिक आर्थिक सुधारों तक, देश की उद्यमशीलता की भावना ने लगातार आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है और सभी महाद्वीपों में उच्च-जोखिम वाले रिश्ते बनाए हैं...

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भारत समेत कई देशों में ट्रेड यूनियनों की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। श्रम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में वर्तमान में 16,000 से अधिक पंजीकृत ट्रेड यूनियनें हैं, जिनमें से केवल 12 राष्ट्रीय स्तर की यूनियनें हैं। यह संख्या पिछले एक दशक में 20 फीसदी कम हुई है, जबकि देश का कार्यबल 50 करोड़ से अधिक हो चुका है।  

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कुछ महीनों में एक सहकारी टैक्सी सेवा शुरू की जाएगी, जिसमें दोपहिया वाहन, टैक्सी, रिक्शा और चौपहिया वाहनों का पंजीकरण संभव होगा और लाभ सीधे चालक को मिलेगा...

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भारत ने आज़ादी के बाद अपने इतिहास में कई महत्वपूर्ण अवसरों को गंवाकर आर्थिक मोर्चे पर भारी कीमत चुकाई है। इसका बड़ा कारण रहा कांग्रेस पार्टी की गांधीवादी विचारधारा के प्रति एक दिखावटी प्रतिबद्धता, जिसने बार-बार लघु, सूक्ष्म और कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता दी, इस उम्मीद में कि इससे गांवों की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ...

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ओला, जोमैटो, स्विगी के बाद, ब्लिंकिट, इंस्टमार्ट जैसी होम डिलीवरी सर्विस से सेक्स टॉयज, कंडोम और सैनिटरी नैपकिंस अब घर बैठे और बिना झिझक के वाजिब दामों पर मिल रहे हैं। अब बस लोगों को इंतज़ार है कि सिगरेट, पान और दारू सप्लाई अब कब शुरू होगी!

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भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 2025 के लिए एक अत्यंत उत्साहवर्धक और राहत प्रदान करने वाली भविष्यवाणी जारी की है। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।

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