अकबर इलाहाबादी के समकालीनों का कहना है कि उनमें जिंदादिली इस कदर समाई हुई थी कि विकट परिस्थितियों में भी हास-परिहास का वातावरण पैदा कर देते थे और अपने रंगों से सबको सराबोर कर देते थे।
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अकबर इलाहाबादी के समकालीनों का कहना है कि उनमें जिंदादिली इस कदर समाई हुई थी कि विकट परिस्थितियों में भी हास-परिहास का वातावरण पैदा कर देते थे और अपने रंगों से सबको सराबोर कर देते थे।
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शायर इकबाल अपनी जिन्दगी में एक बहुत ही खुशमिजाज और जिंदादिल इनसान थे। हर महफिल में उनकी वाकपटुता और शायरी रंग ला देती थी।
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बहुत से लेखकों के बारे में मशहूर है कि वे किसी खास कागज पर लिखते हैं या फलां मूड में लिखते हैं या फिर किसी विशेष किस्म की कलम से लिखते हैं। मगर, उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद इस दिखावटी ताम-झाम से सर्वथा दूर थे।
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उर्दू के मशहूर शायर गालिब अपने दोस्तों के बीच महफिल जमाए बैठे हुए थे। शेरो-शायरी के दौर चल रही थीं। तारीफें और आलोचनाएं भी हो रही थीं। उसी दौरान किसी बात पर गालिब ने शायर मीर तकी के एक कलाम की तारीफ कर दी।
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नागरिकता संशोधन कानून विवाद की लपट पाकिस्तान के मरहूम शायर फैज अहमद फैज तक पहुंच गई है। अब सीसीए की बजाय बहस इस बात पर हो रही है कि फैज की नज्म 'हम देखेंगे..’ हिन्दू विरोधी है या नहीं।
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दुष्यंत कुमार अपनी बेहद सरल हिंदी और बेहद आसानी से समझ आने वाली उर्दू में कविताएं लिखकर लोगों के दिलों-दिमाग पर एकदम से छा गए थे...
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