साहित्य / मीडिया

स्वतंत्रता आंदोलन के दौराम वंदेमातरम् गीत ने जनमानस में राष्ट्रीयता की अलख जगाई थी। आज भी राष्ट्रीय गीत सुनकर, प्रत्येक भारतीय गर्वित अनुभव करता है। अपने गीत से उन्होंने शस्यश्यामला भारत भूमि की अर्चना की। बंकिमचंद्र चटर्जी को प्रख्यात उपन्यासकार, कवि, गद्यकार और पत्रकार के रूप में जाना जाता है। वह बांग्ला के अतिरिक्त, दूसरी भाषाओं पर भी समान अधिकार रखते थे। उन्हें लोग बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के नाम से भी जानते हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें" महज एक रुपये में...

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शब्दों की कुशल चितेरी और भावों को भाषा की सहेली बनाने वाली एक मात्र सर्वश्रेष्ठ सूत्रधार महादेवी वर्मा साहित्य की वह उपलब्धि हैं, जो युगों-युगों में केवल एक ही होती हैं। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें महज एक रुपये में अगले 24 घंटों के लिए...

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हिंदी साहित्य में छायावाद के आधार स्तम्भों में से एक, प्रयोगवादी और प्रगतिशील चेतना के कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने हिंदी काव्य जगत में नई कविता का सूत्रपात किया।

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‘मुक्त छंद’ छंद मुक्त कविता नहीं है। जब हम मुक्त छंद कहते हैं तो हम छंद की परिधि में होते हैं। 'परिमल' की भूमिका में निराला ने एक मार्मिक बात कही कि मुक्त छंद से काव्य में एक स्वाधीन चेतना आती है।

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हिन्दी के मूर्धन्य कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को साहित्य जगत का सिरमौर बनाने में अकेले कलकत्ता के सेठ महादेव प्रसाद मतवाला का जो योग है, उसे भुलाया नहीं जा सकता है।

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बंकिमचंद के दोस्त दीनबंधु मित्र बड़े विनोदी स्वभाव के थे और कभी-कभी उनसे भी विनोद करने से न चूकते थे।

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