विविधा

साल 1870 के दशक के मध्य में तकरीबन 30 वर्ष की आयु के आसपास एक सुगठित डील-डौल वाले गौर वर्ण के व्यक्ति को पुणे की गलियों में एक थाली और चम्मच हाथों में लेकर दौड़ते हुए देखा जा सकता था। चम्मच से थाली को बजाते हुए वह अपने अगले भाषण के बारे में घोषणा करता रहता था। वह अनुरोध करता था, "सभी को शाम को शनिवार-वाड़ा मैदान में आना है। हमारे देश को आज़ाद होना ही चाहिए। अंग्रेज़ों को भगाया जाना चाहिए। मैं अपने भाषण में बताऊंगा कि यह कैसे किया जाना है।"

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सम्पूर्ण भारत वर्ष की तरह राजस्थान में भी दासता से मुक्ति के प्रयास 19वीं शताब्दी से ही प्रारम्भ हो गए थे। यहां की जनता पर अंग्रेजों की हुकूमत की बेड़ियां तो थी ही, साथ ही उन्हें यहां के शासकों एवं जागीरदारों के दमनकारी कृत्यों से भी जूझना पड़ता था। इस दोहरी मार के परिणामस्वरूप ऐसे अनेक आंदोलन हुए जिनका प्रभाव स्वतंत्रता की अंतिम लड़ाई पर भी स्पष्ट दिखाई दिया।

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भारत रत्न डॉ. बीआर अम्बेडकर ने अपने जीवन के 65 वर्षों में देश को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, औद्योगिक, संवैधानिक इत्यादि विभिन्न क्षेत्रों में अनगिनत कार्य करके राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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मथुरा : जिस मिट्टी में वो जन्मे, वो भी पराई हो गई, जिस जमीन पर पले-बढ़े, उसी मातृभूमि ने साथ छोड़ दिया। नीले आसमान तले जिस खुली हवा में उन्होंने सांस ली वो हवा भी अब बदल गई... और तो अपने ही देश के लोगों ने उन्हें बेगाना बनाकर रख दिया… 

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आधुनिक परिवेश में भी ब्रज की होली ने अपने वास्तविक स्वरूप को बनाए रखा है। होली माधुर्य का पर्व है... प्रेम, रस, रंग और उमंग का प्रतीक पर्व होली का वास्तविक आनन्द केवल ब्रज में ही मिल सकता है। इस आनन्द की अनुभूति के लिए सारे देश के लोग यहां बरबस ही खिंचे चले आते हैं। यही नहीं, यहां की होली विदेशी पर्यटकों को भी यहां आने और इस आनन्द में डूब जाने को मजबूर कर देती है। ब्रज में होली पूरे एक महीने से अधिक दिनों तक खूब मस्ती के साथ मनाई जाती है। होली का वास्तविक आनन्द यहां के देवालयों में मिलता है। मंदिरों में होली एक माह पूर्व ही शुरू हो जाती है। त्योहार की शुरुआत मंदिरों में समाज गायन से होती है। बसन्त पंचमी के दिन से मंदिरों में ठाकुर जी को इत्र और रंग लगाकर होली शुरू की जाती है। वृन्दावन में प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर तथा मथुरा में द्वारकाधीश मंदिर में होली की शुरुआत समाज गायन से की जाती है। पंडा समाज के लोग बड़े-बड़े नगाड़ों और ढोल मंजीरे की धुन पर नाचते गाते हैं।

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जीवन प्रमाण (Jeevanpramaan.gov.in) से पेंशन धारकों को बहुत राहत मिली है। अब पेंशन धारक अपनी पेंशन जारी रखने के लिए डिजिटली से अधिकारियों को वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र उपलब्ध करा सकते हैं। अब उन्हें हर साल निर्दिष्ट अधिकारियों द्वारा जारी जीवन प्रमाण पत्र के माध्यम से या शारीरिक रूप से प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है।

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